यूपीएससी सिविल सेवा GS2 (राजव्यवस्था · शासन · अंतर्राष्ट्रीय संबंध) के सामाजिक न्याय भाग से जुड़ी हर ख़बर, परीक्षा के नज़रिए से: चर्चा में क्यों, पृष्ठभूमि, प्रीलिम्स के तथ्य, अभ्यास प्रश्न और मेन्स प्रश्न। अब तक 1,356 नोट्स, रोज़ अपडेट।
पाठ्यक्रम के विषय: शिक्षा नीति (451) · स्वास्थ्य नीति एवं जन स्वास्थ्य (449) · कमजोर वर्ग (SC/ST, अल्पसंख्यक, दिव्यांग, बुजुर्ग, बच्चे) (418) · गरीबी, भूख एवं पोषण (35) · मानव संसाधन एवं कौशल विकास (3)
चर्चा में क्यों: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने PMAY-G योजना के तहत मणिपुर में आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों (IDPs) के लिए 5,000 घरों के निर्माण को मंजूरी दी है।
केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री ने 23 फरवरी, 2026 को मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के साथ हुई बैठक के बाद मणिपुर में आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों (IDPs) के लिए 5,000 घरों को मंजूरी दी। इस पहल का लक्ष्य मई 2023 से मेइतेई और कुकी-जो समूहों के बीच हुई जातीय हिंसा से प्रभावित लोगों को सहायता प्रदान करना है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
योजनाPMAY-G: प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण ग्रामीण आवास के लिए केंद्र की योजना है।
तथ्यमणिपुर में आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों (IDPs) के लिए 5,000 घरों को मंजूरी दी गई।
पदशिवराज सिंह चौहान: केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री।
पदयूमनाम खेमचंद सिंह: मणिपुर के मुख्यमंत्री।
मेन्स के लिए
प्रश्न: आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों (IDPs) के पुनर्वास में आवास योजनाओं की भूमिका और भारत में जातीय नेतृत्व वाले आंतरिक विस्थापन के प्रबंधन की चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
पुनर्वास में बाधा: IDPs के लिए स्थायी आवास बुनियादी ढांचे में देरी से कैंपों में लंबे समय तक रहने की समस्या
सुरक्षा-विकास नेक्सस: हाई-कॉन्फ्लिक्ट ज़ोन में तेज़ी से इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण और स्थानीय सुरक्षा प्रोटोकॉल के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्ति · जातीय हिंसा · पुनर्वास · PMAY-G · ग्रामीण विकास
चर्चा में क्यों: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने 'मेरी रसोई योजना' की घोषणा की है, जिसके तहत अप्रैल से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम के जरिए 40 लाख परिवारों को हर तीन महीने में मुफ्त फूड किट प्रदान की जाएगी।
'मेरी रसोई योजना' पंजाब सरकार की एक पहल है, जिसका प्रबंधन Markfed द्वारा किया जाता है। इसका उद्देश्य 40 लाख परिवारों के लिए पोषण सुरक्षा को बेहतर बनाने हेतु राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (National Food Security Act) के तहत गेहूं के वितरण को पूरक बनाना है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
योजनामेरी रसोई योजना: पंजाब सरकार की एक पहल जिसके तहत हर तीन महीने में मुफ्त फूड किट (food kits) प्रदान की जाती हैं।
संस्थाMarkfed: पंजाब में फूड किट वितरण के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार संस्था।
तथ्यलक्ष्य लाभार्थी: पंजाब में 40 लाख परिवार।
मेन्स के लिए
प्रश्न: ग्रामीण और शहरी परिवारों में पुराने कुपोषण की समस्या के समाधान में राज्य-आधारित पोषण संबंधी हस्तक्षेप किस प्रकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के पूरक के रूप में कार्य कर सकते हैं, चर्चा कीजिए।
पोषण की कमी: गेहूं वितरण से मिलने वाली बुनियादी कैलोरी से आगे जाकर सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को दूर करना
संस्थागत तालमेल: मौजूदा नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट ढांचे के साथ राज्य स्तर पर फूड किट वितरण का समन्वय
लॉजिस्टिक स्केलेबिलिटी: अलग-अलग जनसांख्यिकी में तिमाही फूड किट वितरण के लिए सप्लाई चेन की अखंडता बनाए रखने में चुनौतियां
मुख्य शब्द: खाद्य सुरक्षा · पोषण संबंधी हस्तक्षेप · सार्वजनिक वितरण प्रणाली · सब्सिडी वाली पोषण सामग्री · समाज कल्याण
चर्चा में क्यों: एक रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि केरल के बेहतरीन स्वास्थ्य संकेतक, जैसे कि कम शिशु मृत्यु दर और उच्च जीवन प्रत्याशा, अब बढ़ती उम्र की आबादी और गैर-संचारी रोगों (Non-Communicable Diseases - NCDs) के कारण चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
केरल की स्वास्थ्य संबंधी सफलता का श्रेय सार्वभौमिक साक्षरता, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को दिया जाता है। राज्य ने लगभग सार्वभौमिक टीकाकरण कवरेज और संक्रामक रोगों पर प्रभावी नियंत्रण हासिल किया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यकेरल को कम शिशु मृत्यु दर (infant mortality rate) और उच्च जीवन प्रत्याशा (life expectancy) के लिए पहचाना जाता है।
तथ्यकेरल ने लगभग सार्वभौमिक टीकाकरण कवरेज (universal immunization coverage) हासिल कर ली है।
तथ्यस्वास्थ्य सेवा के लिए उच्च आउट-ऑफ-पॉकेट (out-of-pocket) खर्च राज्य में एक प्रमुख चुनौती है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: केरल में जनसांख्यिकीय संक्रमण और इसके परिणामस्वरूप राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे पर संक्रामक रोगों से गैर-संक्रामक रोगों के बोझ की ओर आए बदलाव पर चर्चा कीजिए।
राजकोषीय दबाव: मज़बूत सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे के बावजूद भारी आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च
डेमोग्राफिक शिफ्ट: मातृ और शिशु स्वास्थ्य से हटकर अब जेरिएट्रिक केयर और NCD मैनेजमेंट पर ध्यान
संसाधन आवंटन: बढ़ती आबादी में पुरानी बीमारियों से निपटने के लिए फंडिंग बढ़ाने की ज़रूरत
मुख्य शब्द: डेमोग्राफिक ट्रांजिशन · गैर-संचारी रोग · अपनी जेब से किया गया खर्च · सार्वजनिक स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर · जीवन प्रत्याशा
चर्चा में क्यों: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि अंतरधार्मिक जोड़ों (interfaith couples) पर उत्तर प्रदेश निषेध कानून (Prohibition of Unlawful Conversion of Religion Act, 2021) लागू नहीं होता है, क्योंकि यह कानून केवल जबरन धर्म परिवर्तन पर लागू होता है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यह माना कि शांतिपूर्वक साथ रहने का चुनाव करने वाले वयस्कों के जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार सर्वोपरि हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 2021 का उत्तर प्रदेश का धर्मांतरण विरोधी कानून विशेष रूप से विवाह या संबंधों के उद्देश्य से किए गए जबरन धर्मांतरण पर लागू होता है, न कि पहले से मौजूद अंतरधार्मिक विवाहों पर।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
अधिनियम / विधेयकउत्तर प्रदेश Prohibition of Unlawful Conversion of Religion Act: इसे 2021 में लागू किया गया।
स्थानइलाहाबाद हाई कोर्ट: उत्तर प्रदेश की एक न्यायिक संस्था।
तथ्यकोर्ट ने फैसला दिया कि यह कानून उन जोड़ों पर लागू नहीं होता जिन्होंने कन्वर्जन प्रोसेस (conversion process) से नहीं गुजरा है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में राज्य-संचालित धर्मांतरण विरोधी कानूनों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता एवं चुनाव की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के बीच उत्पन्न होने वाले अंतर्विरोधों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
संवैधानिक टकराव: जीवनसाथी चुनने का अधिकार बनाम धार्मिक धर्मांतरण को नियंत्रित करने की राज्य की शक्ति
न्यायिक व्याख्या: पर्सनल लॉ के संदर्भ में 'जबरन धर्मांतरण' बनाम स्वैच्छिक अंतरधार्मिक विवाह की परिभाषा
मुख्य शब्द: व्यक्तिगत स्वतंत्रता · चुनाव की आज़ादी · विविधता में एकता · न्यायिक समीक्षा · धर्मनिरपेक्षता
चर्चा में क्यों: मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने सार्वजनिक क्षेत्र में कैंसर उपचार को बेहतर बनाने के लिए केरल के रीजनल कैंसर सेंटर (RCC) में एक नई बहुमंजिला इमारत का उद्घाटन किया।
रीजनल कैंसर सेंटर (RCC) में नई बहुमंजिला इमारत की लागत ₹242 करोड़ है, जिसमें अतिरिक्त मरीज बेड और पार्किंग की सुविधा शामिल है। इसमें रोबोटिक सर्जरी, HIPEC ट्रीटमेंट और पीडियाट्रिक ऑटोलॉगस स्टेम सेल ट्रांसप्लांट जैसी उन्नत तकनीकें उपलब्ध हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यRCC की नई मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग की लागत ₹242 करोड़ है।
विज्ञान-तकनीकRCC में अब रोबोटिक सर्जरी और HIPEC ट्रीटमेंट जैसी एडवांस टेक्नोलॉजी शामिल है।
विज्ञान-तकनीकRCC सुविधाओं में कैथ लैब्स (cath labs), गैलियम स्कैन (Gallium Scan) और PET-CT स्कैन शामिल हैं।
विज्ञान-तकनीकRCC एक पीडियाट्रिक ऑटोलॉगस स्टेम सेल ट्रांसप्लांट (paediatric autologous stem cell transplant) सेवा प्रदान करता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में विशेष स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुँच सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में उन्नत चिकित्सा बुनियादी ढांचे के विस्तार के महत्व पर चर्चा कीजिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: रोबोटिक सर्जरी और PET-CT स्कैन की भारी लागत ग्रामीण इलाकों में पहुंच को सीमित कर रही है
पब्लिक-प्राइवेट समानता: ऑन्कोलॉजी में राज्य द्वारा वित्तपोषित सुविधाओं को प्राइवेट सेक्टर की तकनीकी प्रगति के बराबर लाना
मुख्य शब्द: सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचा · समान स्वास्थ्य सेवा · ऑन्कोलॉजी · मेडिकल टेक्नोलॉजी · राज्य द्वारा संचालित स्वास्थ्य सेवा
चर्चा में क्यों: UNICEF के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने गरीबी को और अधिक गंभीर होने से रोकने के लिए बच्चों में गैर-संचारी रोगों (NCDs) से लड़ने हेतु एक बहु-क्षेत्रीय और अधिकार-आधारित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया है।
UNICEF विशेषज्ञों राउल बर्मेजो और विवेक वीरेंद्र सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि बचपन में होने वाली गैर-संचारी बीमारियाँ (NCDs) गरीबी को और अधिक गंभीर बनाने वाली स्थितियाँ हैं। उन्होंने प्रारंभिक हस्तक्षेप के लिए अधिकार-आधारित ढांचा (rights-based framework) अपनाने के लिए केरल राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सराहना की।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
संस्थाकेरल स्टेट कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (Kerala State Commission for Protection of Child Rights): बाल अधिकारों पर केंद्रित एक राज्य-स्तरीय निकाय।
तथ्यNCDs: नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज (Non-communicable diseases) को ऐसी स्थितियों के रूप में पहचाना गया है जो यदि विकास के शुरुआती वर्षों (formative years) के दौरान संबोधित नहीं किए जाते हैं, तो गरीबी को और बढ़ा सकते हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में बच्चों के बीच गरीबी और गैर-संचारी रोगों के चक्र को कम करने में अधिकार-आधारित दृष्टिकोण और बहु-क्षेत्रीय हस्तक्षेप किस प्रकार प्रभावी हो सकते हैं, चर्चा कीजिए।
इंटर-सेक्टोरल कोऑर्डिनेशन: NCD रिस्क फैक्टर्स से निपटने के लिए एकीकृत स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक कल्याण नीतियों की ज़रूरत
सामाजिक-आर्थिक फीडबैक लूप: बचपन की पुरानी बीमारी और पीढ़ीगत गरीबी के बढ़ने के बीच के संबंध को संबोधित करना
अधिकार-आधारित ढांचा: दान-आधारित स्वास्थ्य सेवा से हटकर स्वास्थ्य और पोषण के लिए बच्चों के अधिकारों को सुनिश्चित करना
मुख्य शब्द: अधिकार-आधारित दृष्टिकोण · गैर-संचारी रोग · मल्टी-सेक्टोरल इंटरवेंशन · गरीबी बढ़ाने वाला · जल्दी हस्तक्षेप
चर्चा में क्यों: मद्रास हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि निजी अस्पताल डॉक्टरों के साथ फैक्ट्री श्रमिकों जैसा व्यवहार नहीं कर सकते और न ही उनके साथ हुए समझौतों में 'नॉन-कंपीट' क्लॉज (non-compete clauses) लागू कर सकते हैं, क्योंकि डॉक्टर स्वतंत्र पेशेवर होते हैं।
न्यायमूर्ति एन. आनंद वेंकटेश ने MIOT हॉस्पिटल्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर एक याचिकाखारिज कर दी है। कोर्ट ने यह फैसला दिया कि भारतीय अनुबंध अधिनियम (Indian Contract Act), 1872 के तहत 'नॉन-कंपीट क्लॉज' (non-compete clauses) लागू नहीं किए जा सकते।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
अधिनियम / विधेयकइंडियन कॉन्ट्रैक्ट एक्ट (Indian Contract Act), 1872: वह कानून जिसके तहत कोर्ट ने डॉक्टरों के लिए नॉन-कंपीट क्लॉज (non-compete clauses) को लागू करने योग्य नहीं पाया।
स्थानमद्रास हाई कोर्ट: वह न्यायिक संस्था जिसने अस्पताल की प्रतिबंधात्मक प्रथाओं के खिलाफ फैसला सुनाया।
तथ्यMIOT हॉस्पिटल्स प्राइवेट लिमिटेड: वह याचिकाकर्ता जिसके डॉक्टर कंट्रोल के दावे को खारिज कर दिया गया था।
मेन्स के लिए
प्रश्न: निजी स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में अभ्यास के अधिकार और रोगी की पसंद के संदर्भ में प्रतिबंधात्मक 'गैर-प्रतिस्पर्धा खंडों' (non-compete clauses) के कानूनी और नैतिक निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
प्रोफेशनल ऑटोनॉमी: अस्पताल मैनेजमेंट के कंट्रोल और डॉक्टर के प्रैक्टिस लोकेशन चुनने के अधिकार के बीच टकराव
पेशेंट्स के अधिकार: हॉस्पिटल द्वारा लगाए गए कॉन्ट्रैक्टुअल बैरियर्स की वजह से मरीजों के पसंदीदा स्पेशलिस्ट तक पहुँचने में संभावित रुकावट
कॉन्ट्रैक्चुअल वैलिडिटी: स्वतंत्र प्रोफेशनल्स के लिए इंडियन कॉन्ट्रैक्ट एक्ट के तहत नॉन-कंपीट क्लॉज की कानूनी सीमाएं
मुख्य शब्द: प्रोफेशनल ऑटोनॉमी · अभ्यास का अधिकार · कॉन्ट्रैक्ट की कानूनी वैधता · मरीज की पसंद · न्यायिक निगरानी
चर्चा में क्यों: मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने 5 लाख से अधिक घरों को पूरा करने और वायनाड में एक पुनर्वास टाउनशिप (Rehabilitation Township) का उद्घाटन करके सामाजिक न्याय में LIFE मिशन की भूमिका पर जोर दिया।
LIFE मिशन के तहत अब तक 5 लाख से अधिक घरों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। वायनाड में 2024 की भूस्खलन आपदा के बाद पुनर्वास टाउनशिप बनाई जा रही है, जिसके तहत प्रत्येक लाभार्थी को ₹4 लाख (अनुसूचित जनजाति के परिवारों के लिए ₹6 लाख) की सहायता दी जा रही है। इसके साथ ही सड़कों और स्वास्थ्य केंद्रों की सुविधा भी प्रदान की जा रही है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
योजनाLIFE मिशन: एक हाउसिंग स्कीम जो प्रत्येक लाभार्थी को ₹4 लाख की वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
तथ्यLIFE मिशन विशेष रूप से अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe) परिवारों के लिए ₹6 लाख की वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
स्थानवायनाड: 2024 के लैंडस्लाइड (landslides) के बाद एक मॉडल रिहैबिलिटेशन टाउनशिप (rehabilitation township) का स्थल।
तथ्यLIFE मिशन के तहत 5 लाख से अधिक घर पूरे किए गए हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: आपदा-प्रवण क्षेत्रों में हाशिए पर रहने वाले समुदायों के लिए सामाजिक न्याय और मानवीय गरिमा प्राप्त करने में 'लाइफ मिशन' (LIFE Mission) जैसी लक्षित आवास योजनाओं का किस प्रकार योगदान देती हैं, इसका विश्लेषण कीजिए।
समावेशी विकास: सामाजिक-आर्थिक अंतर को कम करने के लिए अनुसूचित जनजाति परिवारों के लिए वित्तीय सहायता को प्राथमिकता देना
रेज़िलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर: आपदा प्रभावित पुनर्वास टाउनशिप में हेल्थ सेंटर और कम्युनिटी सुविधाओं को जोड़ना
मुख्य शब्द: सामाजिक न्याय · मानवीय गरिमा · समावेशी विकास · आपदा पुनर्वास · लक्षित सब्सिडी
चर्चा में क्यों: कर्नाटक राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने राज्य सरकार से कॉफी एस्टेट्स में काम करने वाले प्रवासी श्रमिकों के बच्चों को शिक्षा प्रदान करने का आग्रह किया है, जो कटाई के सीजन के दौरान स्कूल नहीं जा पाते हैं।
कर्नाटक राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने मिर्च की कटाई के दौरान बच्चों के स्कूल से गायब होने की रिपोर्ट के बाद स्वतः संज्ञान (suo motu) लेते हुए एक मामला दर्ज किया है। अध्यक्ष शशिधर एस. कोसंबे ने स्कूल शिक्षा विभाग को अस्थायी या मोबाइल स्कूल (mobile schools) की संभावनाओं पर विचार करने का प्रस्ताव दिया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाकर्नाटक स्टेट कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स: बाल कल्याण के लिए राज्य-स्तरीय निकाय।
तथ्यमोबाइल स्कूल: कॉफी एस्टेट्स में प्रवासी श्रमिकों के बच्चों के लिए प्रस्तावित समाधान।
पदशशिधर एस. कोसंबे: कर्नाटक स्टेट कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स के चेयरपर्सन।
मेन्स के लिए
प्रश्न: प्रवासी श्रमिकों के बच्चों के लिए शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए और इस शैक्षिक अंतराल को पाटने के लिए आवश्यक संस्थागत उपायों का सुझाव दीजिए। चर्चा कीजिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: मौसमी प्रवासी आबादी के लिए फ्लेक्सिबल स्कूलिंग मॉडल की कमी
पॉलिसी में दिक्कत: गैर-स्थायी आवासीय सेटिंग्स में बच्चों को ट्रैक करने और नामांकित करने में मुश्किल
प्रशासनिक बाधा: श्रम प्रवास पैटर्न और स्कूल एकेडमिक कैलेंडर के बीच तालमेल
मुख्य शब्द: शिक्षा का अधिकार · प्रवासी श्रमिक · शिक्षा में समानता · मोबाइल स्कूल · सुओ मोटो कार्रवाई
चर्चा में क्यों: ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने घोषणा की है कि Sresan Pharmaceutical के दूषित उत्पादों से जुड़े मौतों के वैश्विक संकट के बाद, नियामक ने खांसी की दवा (cough syrup) बनाने वाली 90% कंपनियों का निरीक्षण किया है।
ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया, राजीव रघुवंशी ने बताया कि निरीक्षण के दौरान कफ सिरप निर्माण में अनुपालन संबंधी कमियां पाई गई हैं। रेगुलेटर की योजना कर्मचारियों की कमी को दूर करने, मंजूरी की प्रक्रिया में तेजी लाने और गुणवत्ता नियंत्रण के लिए AI तकनीक को लागू करने की है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
पदड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (Drugs Controller General of India): राजीव रघुवंशी।
तथ्यरेगुलेटर ने भारत के लगभग 90% कफ सिरप निर्माताओं का निरीक्षण किया।
विज्ञान-तकनीकड्रग मैन्युफैक्चरिंग में क्वालिटी कंट्रोल को बेहतर बनाने के लिए AI टेक्नोलॉजी को लागू करने की योजना है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: वैश्विक सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने के लिए भारत के औषधीय नियामक ढांचे को सुदृढ़ करने हेतु आवश्यक संस्थागत और तकनीकी उपायों का विश्लेषण कीजिए।
रेगुलेटरी बॉटलनेक: स्टाफ की कमी और धीमी अप्रूवल प्रोसेस से प्रोएक्टिव ओवरसाइट में बाधा
तकनीकी एकीकरण: मैन्युफैक्चरिंग कंप्लायंस की रियल-टाइम मॉनिटरिंग में AI की क्षमता
ग्लोबल जवाबदेही: ग्लोबल फार्मेसी के रूप में भारत की भूमिका और सख्त सुरक्षा नियमों के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: रेगुलेटरी कंप्लायंस · फार्मास्युटिकल सेफ्टी · क्वालिटी कंट्रोल · सार्वजनिक स्वास्थ्य गवर्नेंस · हेल्थकेयर में AI
चर्चा में क्यों: तेलंगाना सरकार ने अनुसूचित जातियों और जनजातीय समुदायों को लक्षित करने के लिए समावेशी आजीविका कार्यक्रम (Inclusive Livelihood Programme - TGILP) के विस्तार की घोषणा की है, जिसके तहत इसे सात अतिरिक्त मंडलों में लागू किया जाएगा।
TGILP कार्यक्रम को 'सोसाइटी फॉर एलिमिनेशन ऑफ रूरल पॉवर्टी' (SERP) द्वारा 'अगा खान फाउंडेशन' और 'BRAC इंटरनेशनल' के सहयोग से लागू किया जाता है। यह कार्यक्रम सामाजिक सुरक्षा, वित्तीय समावेशन, आजीविका और बाजार लिंकेज को एकीकृत करने वाली एक क्रमिक रणनीति का उपयोग करता है। इस कार्यक्रम के प्रभाव का मूल्यांकन 'अब्दुल लतीफ जमील पॉवर्टी एक्शन लैब' (J-PAL) द्वारा किया जाता है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
योजनाTGILP: तेलंगाना सरकार द्वारा शुरू किया गया एक समावेशी आजीविका कार्यक्रम (Inclusive Livelihood Programme)।
संस्थाSERP: Society for Elimination of Rural Poverty, TGILP के लिए लागू करने वाली संस्था (implementing body) है।
तथ्यTGILP का लक्ष्य अनुसूचित जातियाँ, जनजातीय समुदाय और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (Particularly Vulnerable Tribal Groups - PVTGs) हैं।
संस्थाJ-PAL: अब्दुल लतीफ जमील पॉवर्टी एक्शन लैब (Abdul Latif Jameel Poverty Action Lab) इस प्रोग्राम का इम्पैक्ट इवैल्यूएशन (impact evaluation) कर रही है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) के बीच गरीबी उन्मूलन के लिए एक बहुआयामी और क्रमिक दृष्टिकोण के महत्व पर चर्चा कीजिए।
इंटर-एजेंसी सिनर्जी: साक्ष्य-आधारित नीति के लिए NGO विशेषज्ञता (BRAC, आगा खान) और अकादमिक रिसर्च (J-PAL) का लाभ उठाना
समग्र एकीकरण: प्रत्यक्ष सब्सिडी से आगे बढ़कर सामाजिक सुरक्षा को मार्केट एक्सेस और फाइनेंशियल इन्क्लूजन से जोड़ना
मुख्य शब्द: सामाजिक सुरक्षा · वित्तीय समावेशन · मार्केट लिंकेज · सबूतों पर आधारित नीति · PVTGs
चर्चा में क्यों: दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि एक गृहिणी का श्रम परिवार के लिए आवश्यक है और अलग हुए पत्नी के लिए मेंटेनेंस (Maintenance) तय करते समय इसे मान्यता दी जानी चाहिए।
दिल्ली हाई कोर्ट ने इस धारणा को खारिज कर दिया कि एक गैर-रोजगार वाली पत्नी 'निष्क्रिय' है या जानबूझकर आश्रित है। कोर्ट ने यह माना कि अवैतनिक घरेलू श्रम परिवार की इकाई को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है और वित्तीय सुरक्षा के लिए इसे ध्यान में रखा जाना चाहिए।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
पददिल्ली हाई कोर्ट: वह न्यायिक संस्था जिसने होममेकर लेबर (homemaker labor) पर फैसला सुनाया।
तथ्यकोर्ट ने फैसला दिया कि एक गृहिणी (homemaker) का श्रम एक घर के कामकाज के लिए आवश्यक है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में महिलाओं के लिए भरण-पोषण और सामाजिक सुरक्षा के कानूनी ढांचे में अवैतनिक घरेलू श्रम को मान्यता देने के महत्व पर चर्चा कीजिए।
आर्थिक अदृश्यता: नेशनल अकाउंट्स में घरेलू श्रम के लिए औपचारिक मान्यता और कानूनी स्थिति की कमी
जेंडर आधारित निर्भरता: भरण-पोषण के अधिकार और महिला कार्यबल भागीदारी को बढ़ावा देने के राज्य के लक्ष्य के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: बिना वेतन वाला घरेलू श्रम · रखरखाव के अधिकार · लैंगिक न्याय · आर्थिक अदृश्यता · जुडिशियल एक्टिविज्म
चर्चा में क्यों: केरल सरकार ने निवासियों को राज्य की सेवाओं और सामाजिक आवश्यकताओं तक पहुँच प्रदान करने के लिए एक कानूनी पहचान पत्र के रूप में 'नेटिविटी कार्ड' बिल पेश किया है।
इस विधेयक को दिसंबर 2025 में केरल राज्य कैबिनेट द्वारा अनुमोदित किया गया था और 23 फरवरी, 2026 को इसे विधानसभा की रेवेन्यू एंड देवास्वोम कमेटी (Revenue and Devaswom Committee) के पास भेजा गया। इसका उद्देश्य केरल में जन्मे व्यक्तियों या केरल में जन्मे पूर्वजों वाले उन लोगों के लिए मौजूदा नेटिविटी सर्टिफिकेट (nativity certificates) को बदलना है, जिन्होंने विदेशी नागरिकता स्वीकार नहीं की है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यनेटिविटी कार्ड (Nativity Card) का उद्देश्य केरल में मौजूदा नेटिविटी सर्टिफिकेट्स (nativity certificates) को बदलना है।
तथ्यपात्रता: केरल में जन्मे व्यक्ति या केरल में जन्मे पूर्वजों वाले व्यक्ति जिन्होंने विदेशी नागरिकता स्वीकार नहीं की है।
तथ्यइस बिल को केरल असेंबली की रेवेन्यू एंड देवासवॉम कमेटी (Revenue and Devaswom Committee) को भेजा गया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: संघीय ढांचे के संदर्भ में, राज्य-स्तरीय पहचान दस्तावेजों के निवासियों के अधिकारों पर पड़ने वाले प्रभावों और सामाजिक बहिष्कार की संभावनाओं का विश्लेषण कीजिए।
प्रशासनिक बाधाएं: प्रवासी और गैर-स्थानीय निवासियों के लिए राज्य की ज़रूरी कल्याणकारी सेवाओं तक पहुंच में संभावित मुश्किलें
संवैधानिक संघर्ष: राज्य-विशिष्ट निवास लाभ और समानता व आवाजाही की स्वतंत्रता के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: पहचान दस्तावेज़ · राज्य कल्याण · संघवाद · सामाजिक समावेश · प्रशासनिक कानून
चर्चा में क्यों: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया सोशल मीडिया के प्रभाव और नशीली दवाओं के सेवन से जुड़े संभावित खतरों को रोकने के लिए 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के मोबाइल फोन उपयोग पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहे हैं।
कर्नाटक सरकार नाबालिगों के लिए मोबाइल फोन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के संबंध में सार्वजनिक विश्वविद्यालयों के कुलपति से राय ले रही है। इस पहल का उद्देश्य अत्यधिक स्क्रीन टाइम से जुड़ी चिंताओं को दूर करना है। इसके साथ ही, सरकार द्वारा पढ़ने को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई एक पहल को भी इसके साथ जोड़ा जा रहा है।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
तथ्यमोबाइल फोन पर प्रतिबंध के लिए प्रस्तावित आयु सीमा 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चे है।
तथ्यसरकार मोबाइल के उपयोग पर प्रतिबंध के साथ-साथ पढ़ने को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष पहल शुरू कर रही है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: नाबालिगों के लिए डिजिटल उपकरणों के उपयोग पर राज्य द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के उन निहितार्थों पर चर्चा कीजिए, जो व्यक्तिगत स्वतंत्रता और बाल कल्याण सुनिश्चित करने के राज्य के कर्तव्य के बीच संतुलन स्थापित करने से संबंधित हैं। चर्चा कीजिए।
विकास पर प्रभाव: किशोरों के मस्तिष्क के विकास पर अत्यधिक स्क्रीन टाइम के संभावित संज्ञानात्मक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव
रेगुलेटरी फ्रिक्शन: राज्य द्वारा तय डिजिटल पाबंदियों के बीच माता-पिता के अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन
पॉलिसी सिनर्जी: अनियंत्रित सोशल मीडिया के इस्तेमाल के खिलाफ डिजिटल साक्षरता और पढ़ने को बढ़ावा देने को एक उपाय के रूप में जोड़ना
मुख्य शब्द: बाल कल्याण · डिजिटल साक्षरता · राज्य हस्तक्षेप · संज्ञानात्मक विकास · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क
चर्चा में क्यों: श्रीनरयणा गुरु ओपन यूनिवर्सिटी (SGOU) भारत में सहयोग बढ़ाने और दूरस्थ शिक्षा (Distance Education) को मजबूत करने के लिए तीन दिवसीय वाइस-चांसलर्स राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस आयोजित कर रही है।
इस सम्मेलन का आयोजन इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ पब्लिक ओपन यूनिवर्सिटीज (IAPOU) और कॉमनवेल्थ ऑफ लर्निंग द्वारा किया जा रहा है। इसका उद्देश्य एक क्रेडिट ट्रांसफर फ्रेमवर्क विकसित करना और डिस्टेंस लर्निंग में AI को बढ़ावा देना है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाIAPOU: इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ पब्लिक ओपन यूनिवर्सिटीज।
संस्थाकॉमनवेल्थ ऑफ लर्निंग (Commonwealth of Learning): डिस्टेंस एजुकेशन (distance education) के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संगठन।
तथ्यकॉन्फ्रेंस की तारीखें: 23 से 25 फरवरी, 2026।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में उच्च शिक्षा के लोकतंत्रीकरण में मुक्त विश्वविद्यालयों की भूमिका और दूरस्थ शिक्षा शिक्षण पद्धति को उन्नत करने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की क्षमता का विश्लेषण कीजिए।
पेडागोजिकल शिफ्ट: पैसिव कंटेंट डिलीवरी से AI-ड्रिवन पर्सनलाइज्ड लर्निंग पाथ की ओर बदलाव
इंस्टीट्यूशनल इंटरऑपरेबिलिटी: ओपन यूनिवर्सिटीज में छात्रों की आवाजाही आसान बनाने के लिए क्रेडिट ट्रांसफर फ्रेमवर्क को स्टैंडर्डाइज करना
डिजिटल डिवाइड: ग्रामीण और पिछड़े शिक्षार्थियों के लिए हाई-टेक डिस्टेंस लर्निंग टूल्स तक समान पहुंच सुनिश्चित करना
मुख्य शब्द: डिस्टेंस एजुकेशन · शिक्षण पद्धति · क्रेडिट ट्रांसफर · डिजिटल इन्क्लूजन · ओपन यूनिवर्सिटीज़
चर्चा में क्यों: तेलंगाना स्टेट काउंसिल ऑफ हायर एजुकेशन के चेयरमैन वी. बालकिस्ता रेड्डी ने शिक्षा और रोजगार के बीच के अंतर को कम करने के लिए शैक्षणिक शिक्षा को उद्योग से संबंधित कौशल और डिजिटल साक्षरता के साथ जोड़ने की वकालत की।
IndiaSkills Competition 2025–26 – South Regional Competition का आयोजन National Skill Development Corporation (NSDC) द्वारा किया गया। यह प्रतियोगिता सेक्टर स्किल काउंसिल और उद्योग भागीदारों (industry partners) के सहयोग से समर्थित भारत के सबसे बड़े राष्ट्रीय कौशल प्रतियोगिता ढांचे का हिस्सा है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थानेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NSDC): यह IndiaSkills Competition फ्रेमवर्क को आयोजित करता है।
संस्थासेक्टर स्किल काउंसिल (Sector Skill Councils): उद्योग-आधारित निकाय जो राष्ट्रीय कौशल प्रतियोगिता ढांचे (national skills competition framework) का समर्थन करते हैं।
पदवी. बालकिस्ता रेड्डी: तेलंगाना स्टेट काउंसिल ऑफ हायर एजुकेशन (TGCHE) के चेयरमैन।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में शिक्षा और रोजगार के बीच बढ़ते अंतराल को दूर करनेके लिए औपचारिक शैक्षणिक पाठ्यक्रम में उद्योग-प्रासंगिक कौशल और डिजिटल साक्षरता को एकीकृत करने की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।
स्किल-करिकुलम गैप: पारंपरिक एकेडमिक डिग्री और डिजिटल लिटरेसी के लिए बदलती इंडस्ट्री की जरूरतों के बीच अंतर
संस्थागत तालमेल: उच्च शिक्षा निकायों, NSDC और सेक्टर स्किल काउंसिल के बीच सहयोगात्मक फ्रेमवर्क की ज़रूरत
मुख्य शब्द: शिक्षा-रोज़गार का अंतर · कौशल विकास · डिजिटल साक्षरता · व्यावसायिक एकीकरण · मानव पूंजी
चर्चा में क्यों: तेलंगाना स्वास्थ्य विभाग ने आदिवासी और दूरदराज के जिलों में कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए एक वित्तीय प्रोत्साहन योजना शुरू करने की योजना बनाई है, जिसके तहत डॉक्टरों को उनके मूल वेतन (Basic Pay) पर 30% से 50% तक का भत्ता दिया जाएगा।
यह योजना तेलंगाना के नौ विशिष्ट जिलों को लक्षित करती है: आदिलाबाद, कुमारम भीम आसिफाबाद, मनचेलिया, मुलुगु, वारंगल, महबूबबाद, भद्राद्री कोठागुडेम, खम्मम और नागरकुर्नूल। इस भत्ते का उद्देश्य भौगोलिक रूप से दूरस्थ क्षेत्रों में सेवा देने के प्रति चिकित्सा पेशेवरों की अनिच्छा को कम करना है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यडॉक्टरों के लिए इंसेंटिव रेंज (Incentive range): बेसिक पे (Basic pay) का 30% से 50%।
स्थानतेलंगाना के टारगेट जिले: आदिलाबाद, कुमारम भीम आसिफाबाद, मनचिरियल, मुलुगु, वारंगल, महबूबबाद, भद्राद्री कोठागुडेम, खम्मम और नागरकुर्नूल।
संस्थाइस योजना की योजना तेलंगाना हेल्थ डिपार्टमेंट (Health Department) द्वारा बनाई जा रही है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: जनजातीय क्षेत्रों में समान स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने में निहित संरचनात्मक और रसद संबंधी चुनौतियों की चर्चा कीजिए और मानव संसाधन की कमी को दूर करने में वित्तीय प्रोत्साहनों की प्रभावकारिता का मूल्यांकन कीजिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: दूरदराज के आदिवासी इलाकों में एडवांस मेडिकल सुविधाओं और डायग्नोस्टिक लैब्स की कमी
ह्यूमन रिसोर्स मोबिलिटी: मौद्रिक प्रोत्साहन के बावजूद गैर-शहरी क्षेत्रों में विशेषज्ञों को बनाए रखने में कठिनाई
एक्विटी ऑफ एक्सेस: आदिवासी आबादी और शहरी केंद्रों के बीच स्वास्थ्य परिणामों में असमानता
मुख्य शब्द: ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट · समान स्वास्थ्य सेवा · जनजातीय कल्याण · राजकोषीय प्रोत्साहन · ग्रामीण-शहरी अंतर
चर्चा में क्यों: केरल सरकार ने मृत व्यक्तियों से अंग दान (Organ Donation) में शामिल स्वास्थ्य कर्मियों के लिए प्रोफेशनल फीस को मंजूरी दी है। यह कदम इन पेशेवरों को मिलने वाले अपर्याप्त मुआवजे की चुनौती को दूर करने के लिए उठाया गया है।
केरल सरकार मृत व्यक्तियों से अंग दान (deceased organ donation) से जुड़े इंटेंसिविस्ट्स, ट्रांसप्लांट सर्जन्स, ग्रीफ काउंसलर्स और तकनीशियनों की प्रोफेशनल फीस का खर्च वहन करेगी। इसके लिए वित्त पोषण केरल स्टेट ऑर्गन ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (K-SOTTO) के वार्षिक बजट आवंटन के माध्यम से प्रदान किया जाएगा।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाK-SOTTO: केरल स्टेट ऑर्गन ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (Kerala State Organ Transplant Organization)।
तथ्यइसमें शामिल प्रोफेशनल्स में इंटेंसिविस्ट्स (intensivists), ट्रांसप्लांट सर्जन, ग्रीफ काउंसलर्स (grief counsellors) और टेक्नीशियन शामिल हैं।
स्थानकेरल सरकार की पहल।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में अंगदान के क्षेत्र में विद्यमान संस्थागत और रसद संबंधी चुनौतियों की चर्चा कीजिए और अंगदाता बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए राज्य-आधारित वित्तीय प्रोत्साहनों की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
इंसेंटिव स्ट्रक्चर: विशेषज्ञ मेडिकल और साइकोलॉजिकल सपोर्ट स्टाफ के लिए प्रोफेशनल मुआवजे की कमी को दूर करना
लॉजिस्टिक बॉटलनेक: इमरजेंसी स्थितियों में इंटेंसिविस्ट्स, सर्जन्स और ग्रीफ काउंसलर्स के बीच तालमेल को बेहतर बनाना
मुख्य शब्द: अंग प्रत्यारोपण · स्वास्थ्य सेवा इन्फ्रास्ट्रक्चर · प्रोफेशनल कंपनसेशन · सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति · के-सोटो
चर्चा में क्यों: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने कसौली स्थित सेंट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट (CRI) में स्वदेश निर्मित टिटनेस और एडल्ट डिप्थीरिया (Td) वैक्सीन लॉन्च की।
टीका अप्रैल 2026 से यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (UIP) के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। कसौली, हिमाचल प्रदेश स्थित सेंट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट (CRI) गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज (GMP) मानकों के तहत टीके बनाने वाला पहला सरकारी संस्थान है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाCRI (Central Research Institute) हिमाचल प्रदेश के कसौली में स्थित है।
तथ्यTd वैक्सीन की सप्लाई अप्रैल 2026 से यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (Universal Immunization Programme - UIP) के जरिए की जाएगी।
विज्ञान-तकनीकCRI Good Manufacturing Practices (GMP) मानकों के तहत वैक्सीन बनाने वाला पहला सरकारी संस्थान है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे में वैक्सीन निर्माण के स्वदेशीकरण के महत्व और वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा प्राप्त करने में इसकी भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
सप्लाई चेन रेजिलिएंस: आयातित वैक्सीन कंपोनेंट्स और कच्चे माल पर निर्भरता कम करना
सार्वजनिक स्वास्थ्य समानता: यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम के जरिए ज़रूरी वैक्सीन तक किफायती पहुंच सुनिश्चित करना
मैन्युफैक्चरिंग स्टैंडर्ड्स: ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज (GMP) में बदलना
मुख्य शब्द: यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम · गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज · वैक्सीन संप्रभुता · सार्वजनिक स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर · स्वदेशीकरण
चर्चा में क्यों: केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने कर्नाटक में हाई स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की दर में महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की है, जो SC/ST छात्रों के लिए मौजूद प्रणालीगत बाधाओं को उजागर करता है।
कर्नाटक में हाई स्कूल ड्रॉपआउट रेट (स्कूल छोड़ने की दर) 2020-21 में 16.56% से बढ़कर 2024-25 में 18.3% हो गई है। हाई स्कूल स्तर पर SC/ST छात्रों के बीच ड्रॉपआउट रेट काफी अधिक है, जो 31.9% दर्ज की गई है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यकर्नाटक में हाई स्कूल ड्रॉपआउट रेट: 18.3% (2024-25)।
तथ्यकर्नाटक में SC/ST हाई स्कूल ड्रॉपआउट रेट: 31.9%।
योजनाकर्नाटक में स्कूल ड्रॉपआउट्स (school dropouts) की समस्या को हल करने के लिए KPS प्रोग्राम्स और मिडडे मील (midday meals) को पहलों के रूप में उद्धृत किया गया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: कर्नाटक में हाशिए पर रहने वाले समुदायों के बीच उच्च माध्यमिक स्तर पर स्कूल छोड़ने की दर में वृद्धि के लिए उत्तरदायी सामाजिक-आर्थिक कारकों का विश्लेषण कीजिए और सार्वभौमिक माध्यमिक शिक्षा सुनिश्चित करने हेतु उचित उपायों का सुझाव दीजिए। चर्चा कीजिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: ट्रांसपोर्ट सिस्टम की कमी और घरों से स्कूलों के बीच लंबी दूरी
सामाजिक असमानता: सिस्टम की बाधाओं के कारण SC/ST छात्रों में ड्रॉपआउट रेट का असंतुलित होना
संसाधनों की असमानता: प्राइवेट विकल्पों की तुलना में सरकारी स्कूलों में सुविधाओं की कमी
मुख्य शब्द: शिक्षा की समानता · पिछड़ा वर्ग · इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी · रिटेंशन रणनीतियां · सामाजिक-आर्थिक बाधाएं
चर्चा में क्यों: तमिलनाडु के स्कूली शिक्षा मंत्री ने डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा देने और TN SPARK कार्यक्रम को समर्थन देने के लिए 654 हाई-टेक प्रयोगशालाओं (High-tech laboratories) का उद्घाटन किया।
तमिलनाडु सरकार ने ₹41.85 करोड़ की लागत से 654 हाई-टेक प्रयोगशालाओं (high-tech laboratories) का उद्घाटन किया। इन प्रयोगशालाओं को सरकारी सहायता प्राप्त उच्च माध्यमिक विद्यालयों के 9 लाख से अधिक छात्रों को लाभ पहुँचाने के लिए डिजाइन किया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (5)
तथ्यतमिलनाडु में 654 हाई-टेक लैबोरेटरीज (high-tech laboratories) का उद्घाटन किया गया।
तथ्यलैबोरेटरीज के लिए कुल निवेश: ₹41.85 करोड़।
तथ्यलाभार्थी: सरकारी सहायता प्राप्त हायर सेकेंडरी स्कूलों के 9 लाख से अधिक छात्र।
योजनाTN SPARK: AI, रोबोटिक्स (Robotics) और कोडिंग (Coding) पर केंद्रित राज्य कार्यक्रम।
संस्थासमग्र शिक्षा: इस पहल की निगरानी स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर (State Project Director) द्वारा की गई।
मेन्स के लिए
प्रश्न: ग्रामीण सरकारी स्कूलों में डिजिटल विभाजन को पाटने में उच्च-तकनीकी प्रयोगशालाओं और 'टीएन स्पार्क' (TN SPARK) जैसे एआई-केंद्रित कार्यक्रमों के एकीकरण की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: ग्रामीण जिलों में लैब मेंटेनेंस और हाई-स्पीड इंटरनेट एक्सेस में असमानता
शिक्षा पद्धति में बदलाव: रोबोटिक्स और कोडिंग के जरिए रट्टा मारने के बजाय योग्यता आधारित शिक्षा पर ज़ोर
राजकोषीय स्थिरता: तकनीक पर भारी पूंजीगत खर्च और लंबे समय के रखरखाव व शिक्षक प्रशिक्षण लागत के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: डिजिटल साक्षरता · शिक्षा में नवाचार · कौशल विकास · इंफ्रास्ट्रक्चर इक्विटी · क्षमता आधारित शिक्षा
चर्चा में क्यों: केंद्रीय कैबिनेट ने 2024 की वायनाड भूस्खलन (landslides) से प्रभावित व्यवसायों और इमारतों के मालिकों के लिए आर्थिक सुधार की सुविधा हेतु एक मुआवजा पैकेज को मंजूरी दी है।
कैबिनेट ने नष्ट हुई दुकानों के लिए ₹7 लाख और उद्यमियों के लिए नुकसान का 50% तक मुआवजा स्वीकृत किया है। विनिर्माण (manufacturing) के लिए इसकी अधिकतम सीमा ₹20 लाख, सेवाओं के लिए ₹10 लाख और व्यापार के लिए ₹7 लाख निर्धारित की गई है। यह मुआवजा वायनाड जिला कलेक्टर द्वारा मुख्यमंत्री संकट राहत कोष (Chief Minister’s Distress Relief Fund) से वितरित किया जाएगा।
प्रीलिम्स बिंदु (5)
तथ्यनष्ट हुई दुकानों के लिए मुआवजा: ₹7 लाख।
तथ्यमैन्युफैक्चरिंग के लिए अधिकतम लॉस कंपनसेशन (Loss Compensation): ₹20 लाख।
तथ्यसेवा क्षेत्र (Service Sector) के लिए अधिकतम नुकसान मुआवजा: ₹10 लाख।
तथ्यट्रेड सेक्टर के लिए अधिकतम लॉस कंपनसेशन (loss compensation): ₹7 लाख।
संस्थामुख्यमंत्री आपदा राहत कोष (Chief Minister’s Distress Relief Fund): मुआवजे के फंड का स्रोत।
मेन्स के लिए
प्रश्न: पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों को कम करने में आपदा-लचीले बुनियादी ढांचे और प्रभावी मुआवजा तंत्र के महत्व की चर्चा कीजिए।
राजकोषीय तंत्र: आपदा से हुए आर्थिक पुनर्वास के लिए राज्य-स्तरीय राहत फंड का उपयोग
सेक्टोरल असमानता: मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस और ट्रेड आउटपुट के आधार पर अलग-अलग मुआवजा कैप
प्रशासनिक बाधा: राहत फंड का समान वितरण सुनिश्चित करने में डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर की भूमिका
चर्चा में क्यों: केरल सरकार ने 2024 मुंडक्कई-चोरलमला भूस्खलन (landslide) के पीड़ितों के लिए पुनर्वास परियोजना के पहले चरण की शुरुआत लॉटरी (draw of lots) के माध्यम से की है।
वायनाड जिले में स्थित टाउनशिप प्रोजेक्ट में 410 घर शामिल हैं, जिसमें एक मार्केटप्लेस, स्वास्थ्य केंद्र, आंगनवाड़ी और कम्युनिटी सेंटर भी शामिल हैं। इस प्रोजेक्ट में घर (नंबर 104, ज़ोन 1) प्राप्त करने वाले पहले व्यक्ति पी. अशरफ थे।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानमुंडक्कई-चोरमलमला लैंडस्लाइड (landslide) केरल के वायनाड जिले में हुआ।
तथ्यपुनर्वास टाउनशिप प्रोजेक्ट में 410 घर शामिल हैं।
तथ्यइस प्रोजेक्ट में एक मार्केटप्लेस, हेल्थ सेंटर, आंगनवाड़ी और कम्युनिटी सेंटर शामिल हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के भूस्खलन-संभावित क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन के संदर्भ में समुदाय-केंद्रित पुनर्वास मॉडल के महत्व पर चर्चा कीजिए।
लॉजिस्टिक बॉटलनेक: दूरदराज के पहाड़ी इलाकों में आवास और ज़रूरी सेवाओं का समान वितरण सुनिश्चित करना
आर्थिक सुधार: विस्थापित छोटे व्यवसायों के लिए तत्काल वित्तीय सहायता और दीर्घकालिक आजीविका बहाली के बीच संतुलन
चर्चा में क्यों: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने उच्च शिक्षा पर भारत-स्पेन सम्मेलन के दौरान स्पेनिश विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया।
यह सम्मेलन 'इंडिया AI इम्पैक्ट समिट' (India AI Impact Summit) के साथ आयोजित किया गया और इसमें संयुक्त अनुसंधान, फैकल्टी और छात्रों की गतिशीलता (mobility) तथा स्टार्टअप सहायता पर ध्यान केंद्रित किया गया। इन पर औपचारिक समझौतों को 2026 में स्पेन में होने वाली आगामी बैठकों के दौरान अंतिम रूप दिया जाना अपेक्षित है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
पदधर्मेंद्र प्रधान: भारत के केंद्रीय शिक्षा मंत्री।
तथ्यभारत-स्पेन कॉन्फ्रेंस ऑन हायर एजुकेशन: इसमें संयुक्त रिसर्च, फैकल्टी/स्टूडेंट मोबिलिटी और स्टार्टअप सपोर्ट पर ध्यान केंद्रित किया गया।
स्थानस्पेन: उच्च शिक्षा समझौतों को औपचारिक रूप देने के लिए फॉलो-अप मीटिंग्स की मेजबानी।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग और विदेशी विश्वविद्यालयों के परिसरों की स्थापना किस प्रकार वैश्विक ज्ञान अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति को सुदृढ़ कर सकती है, चर्चा कीजिए।
क्वालिटी पैरिटी: विदेशी कैंपस के लिए NEP मानकों का पालन सुनिश्चित करना
ब्रेन ड्रेन में बदलाव: घरेलू रिसर्च इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए इंटरनेशनल मोबिलिटी का इस्तेमाल
स्टार्टअप सिनर्जी: विदेशी अकादमिक रिसर्च को भारत के स्टार्टअप सपोर्ट फ्रेमवर्क के साथ जोड़ना
मुख्य शब्द: नॉलेज इकोनॉमी · एकेडमिक मोबिलिटी · मानव पूंजी · रिसर्च कोलैबोरेशन · उच्च शिक्षा नीति
चर्चा में क्यों: दिल्ली सरकार ने हाई कोर्ट में तर्क दिया कि निजी स्कूलों को 1 अप्रैल से बिना अनुमति के अनियंत्रित फीस वसूलने पर रोक है, जब तक कि नए फीस-रेगुलेशन कानून के तहत गठित समितियों से मंजूरी न मिल जाए।
दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने नए अधिनियम का बचाव करते हुए इसे निजी स्कूलों में शोषणकारी व्यावसायीकरण और मुनाफाखोरी को रोकने के एक उपाय के रूप में प्रस्तुत किया। मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की एक बेंच ने स्कूलों के लिए स्कूल-स्तरीय शुल्क विनियमन समितियां (School-Level Fee Regulation Committees - SLFRCs) बनाने की समय सीमा को 24 फरवरी तक बढ़ा दिया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाSLFRCs: स्कूल-लेवल फी रेगुलेशन कमिटी (School-Level Fee Regulation Committees) का गठन फी-रेगुलेशन एक्ट (fee-regulation Act) के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए किया गया है।
तथ्यहाई कोर्ट ने स्कूलों द्वारा SLFRCs बनाने की डेडलाइन को 24 फरवरी तक बढ़ा दिया है।
स्थानदिल्ली सरकार का फीस-रेगुलेशन कानून दिल्ली के NCT के भीतर स्थित प्राइवेट स्कूलों पर लागू होता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में शिक्षा के अधिकार और निजी स्कूली शिक्षा के व्यावसायीकरण के बीच संतुलन पर चर्चा कीजिए। विनियामक तंत्र शुल्क संरचना में पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं, इसका विश्लेषण कीजिए।
रेगुलेटरी ओवरसाइट: यह सुनिश्चित करना कि स्कूल-स्तरीय कमेटियों के पास फीस बढ़ोतरी की ऑडिट और मंजूरी देने का अधिकार हो
व्यावसायीकरण बनाम पहुंच: निजी संस्थानों की वित्तीय व्यवहार्यता और शोषणकारी कीमतों को रोकने की ज़रूरत के बीच संतुलन
संघीय टकराव: राज्य स्तर की शिक्षा नीतियों और केंद्र के शैक्षिक मानकों के बीच संभावित अधिकार क्षेत्र संबंधी विवाद
मुख्य शब्द: शिक्षा का व्यावसायीकरण · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क · फीस में पारदर्शिता · जनहित याचिका · शोषणकारी कीमतें
चर्चा में क्यों: क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (NCERT) और CIIL ने NEP 2020 के तहत राष्ट्र-निर्माण में मातृभाषाओं की भूमिका और भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए AI के एकीकरण पर चर्चा की।
मैसूर स्थित केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (CIIL) ने अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस समारोह की मेजबानी की। चर्चाओं के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और SWAYAM पाठ्यक्रमों के माध्यम से भाषा सीखने की पहुंच बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) के उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाCIIL: सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन लैंग्वेजेज (Central Institute of Indian Languages) मैसूरु में स्थित है।
योजनाSWAYAM: CIIL द्वारा भाषा सीखने के कोर्स प्रदान करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला प्लेटफॉर्म।
तथ्यNEP 2020: शिक्षा में मातृभाषाओं पर जोर देने वाला पॉलिसी फ्रेमवर्क।
मेन्स के लिए
प्रश्न: प्राथमिक शिक्षा में मातृभाषा को बढ़ावा देना किस प्रकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप है और यह राष्ट्रीय एकीकरण को कैसे सुदृढ़ करता है, चर्चा कीजिए।
शिक्षण प्रभावशीलता: शुरुआती बचपन के विकास में मातृभाषा में शिक्षा के संज्ञानात्मक लाभ
तकनीकी छलांग: क्षेत्रीय भाषा के कंटेंट में डिजिटल डिवाइड को कम करने के लिए AI का इस्तेमाल
भाषाई संरक्षण: विविध बोलियों को बढ़ावा देने और एक साझा राष्ट्रीय माध्यम की ज़रूरत के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: बहुभाषीवाद · शिक्षण प्रभावशीलता · भाषाई विविधता · डिजिटल समावेश · राष्ट्रीय शिक्षा नीति
चर्चा में क्यों: गुजरात सरकार ने असामाजिक तत्वों द्वारा लड़कियों के शोषण को रोकने और प्रक्रियात्मक कमियों को दूर करने के लिए विवाह पंजीकरण नियमों में संशोधन करने की योजना की घोषणा की है।
गुजरात सरकार ने प्रस्ताव दिया है कि आवेदकों को सहायक रजिस्ट्रार (Assistant Registrar) के समक्ष आवेदन जमा करना होगा। नए नियमों के तहत माता-पिता की सहमति का घोषणापत्र देना और उनके संपर्क विवरण प्रदान करना अनिवार्य होगा।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यगुजरात सरकार ने विवाह पंजीकरण संशोधनों पर सार्वजनिक फीडबैक के लिए 30 दिनों की विंडो का प्रस्ताव दिया है।
पदहर्ष संघवी गुजरात के उपमुख्यमंत्री हैं।
संस्थाप्रस्तावित नियमों के तहत विवाह पंजीकरण के आवेदनों के लिए असिस्टेंट रजिस्ट्रार (Assistant Registrar) को नामित अधिकारी बनाया गया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: वंचित वर्गों को शोषण से बचाने और नागरिक पंजीकरण प्रक्रियाओं की अखंडता सुनिश्चित करने में राज्य-स्तरीय विनियामक ढाँचों की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
रेगुलेटरी ओवरसाइट: रजिस्ट्रेशन में आसानी और जबरन शादियों के खिलाफ सुरक्षा के बीच संतुलन
डेटा प्राइवेसी: सार्वजनिक रिकॉर्ड में माता-पिता के संपर्क विवरण के अनिवार्य सबमिशन से जुड़े जोखिम
सामाजिक सुरक्षा: असामाजिक तत्वों द्वारा नाबालिगों और कमज़ोर लड़कियों के शोषण को रोकना
मुख्य शब्द: रेगुलेटरी फ्रेमवर्क · सामाजिक सुरक्षा उपाय · प्रक्रियात्मक अखंडता · कमज़ोर वर्ग · सिविल रजिस्ट्रेशन
चर्चा में क्यों: अशोका यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर सोशल इम्पैक्ट एंड फिलैंथ्रोपी ने 'हाउ इंडिया गिव्स 2025' रिपोर्ट जारी की है, जिसमें बताया गया है कि आम परिवार सालाना दान के रूप में 6 बिलियन डॉलर का योगदान देते हैं।
रिपोर्ट का अनुमान है कि भारतीय परिवार नकद, वस्तु के रूप में दान और स्वयंसेवा के माध्यम से सालाना 540 बिलियन रुपये (6 बिलियन डॉलर) का योगदान देते हैं। इसमें उल्लेख किया गया है कि धार्मिक संस्थानों को इन दानों का एक बड़ा हिस्सा प्राप्त होता है, जो मुख्य रूप से आस्था और व्यक्तिगत अपील से प्रेरित होता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यHow India रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में वार्षिक घरेलू योगदान का अनुमान 540 बिलियन रुपये ($6 बिलियन) है।
संस्थासेंटर फॉर सोशल इम्पैक्ट एंड फिलैंथ्रोपी (Centre for Social Impact and Philanthropy) अशोक यूनिवर्सिटी में स्थित है।
तथ्यभारत में घरेलू खपत (household consumption) बढ़ने के साथ फिलैंथ्रोपी (Philanthropy) में भागीदारी की दर बढ़ रही है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के सामाजिक कल्याण के अंतराल को पाटने में जमीनी स्तर पर होने वाले परोपकार और घरेलू दान की भूमिका पर चर्चा कीजिए। इन अनौपचारिक प्रणालियों को औपचारिक सरकारी योजनाओं के साथ किस प्रकार एकीकृत किया जा सकता है? विश्लेषण कीजिए।
संस्थागत अंतर: घरेलू दान को व्यवस्थित सामाजिक कल्याण प्रोजेक्ट्स में बदलने के लिए औपचारिक फ्रेमवर्क की कमी
ट्रस्ट डायनेमिक्स: दान के लिए धार्मिक संस्थानों पर भारी निर्भरता बनाम पारदर्शी और ऑडिटेड पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप की ज़रूरत
आर्थिक संबंध: बढ़ते घरेलू उपभोग और बढ़ते परोपकारी भागीदारी के बीच जुड़ाव
मुख्य शब्द: जमीनी स्तर पर परोपकार · सिविल सोसाइटी · सामाजिक कल्याण · अनौपचारिक अर्थव्यवस्था · परोपकारी भागीदारी
चर्चा में क्यों: ITDA, उटनूर, तेलंगाना के लिम्बुगुडा में एक मल्टीपर्पज सेंटर (MPC) मॉडल का विस्तार कर रहा है। यह मॉडल विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) के सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए AI-असिस्टेड टूल्स का उपयोग करता है।
लिम्बुगुडा स्थित मल्टीपर्पज सेंटर (MPC) एकीकृत शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, पोषण और आजीविका सहायता प्रदान करता है। इसे PVTG समुदायों की सहायता के लिए प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (PM-JANMAN) योजना के तहत स्थापित किया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
योजनाPM-JANMAN: प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान।
स्थानलिम्बुगुडा: तेलंगाना में एक आदिवासी बस्ती।
तथ्यMPC: एक ही छत के नीचे शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, पोषण और आजीविका सहायता प्रदान करता है।
संस्थाITDA, उत्नूर: वह संस्था जो MPC मॉडल के विस्तार की निगरानी करती है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) के बीच सामाजिक-आर्थिक अंतराल को पाटने में प्रौद्योगिकी-सहायक हस्तक्षेपों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
डिजिटल डिवाइड: दूरदराज के आदिवासी बस्तियों में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से AI टूल तक पहुंच में बाधा
होलिस्टिक इंटरवेंशन: आदिवासी कल्याण सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा के साथ स्वास्थ्य और पोषण को जोड़ना
संस्थागत निगरानी: राष्ट्रीय जनजातीय योजनाओं के स्थानीय कार्यान्वयन में ITDA की भूमिका
चर्चा में क्यों: कर्नाटक राज्य सरकार ने फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज डिपार्टमेंट में सीधी भर्ती में महिलाओं के लिए 10% आरक्षण और पदों के नाम को जेंडर-न्यूट्रल (gender-neutral) करने का प्रस्ताव दिया है।
कर्नाटक राज्य सरकार सभी आधिकारिक रिकॉर्ड में 'Fireman' के स्थान पर 'Firefighter' और 'Leading Fireman' के स्थान पर 'Leading Firefighter' नाम रखने की योजना बना रही है। इस प्रस्ताव में गृह मंत्रालय की सिफारिशों के अनुरूप सीधी भर्ती में महिलाओं के लिए 10% कोटा शामिल है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यकर्नाटक फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज में सीधी भर्ती में महिलाओं के लिए 10% आरक्षण।
पदफायरफाइटर (Firefighter): विभाग के लिए प्रस्तावित जेंडर-न्यूट्रल (gender-neutral) टाइटल।
संस्थागृह मंत्रालय: वह बॉडी जिसने फायर सर्विसेज में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने की सिफारिश की थी।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में आपातकालीन प्रतिक्रिया सेवाओं (emergency response services) में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने में लिंग-तटस्थ शब्दावली और आरक्षण नीतियों के महत्व पर चर्चा कीजिए।
संस्थागत समावेशिता: महिला रिक्रूट्स के लिए मनोवैज्ञानिक बाधाएं कम करने हेतु जेंडर आधारित टाइटल्स से न्यूट्रल टर्मिनोलॉजी की ओर बदलाव
पॉलिसी अलाइनमेंट: जेंडर पैरिटी हासिल करने के लिए राज्य स्तर पर गृह मंत्रालय की सिफारिशों को लागू करना
मुख्य शब्द: लैंगिक समानता · समावेशी शासन · आपातकालीन सेवाएँ · नीति कार्यान्वयन · सामाजिक समावेश
चर्चा में क्यों: ओडिशा के एक पोल्ट्री फार्म से पंचानन मुदुली को बचाए गए मामले ने ऋण बंधन (debt bondage) की निरंतर बनी रहने वाली समस्या और बचाए गए बंधुआ मजदूरों के लिए पुनर्वास कार्यक्रमों की प्रणालीगत विफलता को उजागर किया है।
बंधुआ श्रम प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 (Bonded Labour System (Abolition) Act, 1976) का निर्माण व्यक्तियों को शोषणकारी ऋण बंधन से बचाने के लिए किया गया था। इस कानून के बावजूद, ईंट भट्टों और पोल्ट्री फार्म जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों को आज भी कठिन परिस्थितियों और दीर्घकालिक वित्तीय सहायता के अभाव का सामना करना पड़ रहा है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
अधिनियम / विधेयकबंधुआ श्रम प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 (Bonded Labour System (Abolition) Act, 1976)।
तथ्य2025 में ओडिशा के एक पोल्ट्री फार्म से पंचानन मुदुली (Panchanan Muduli) को रेस्क्यू किया गया।
संस्थाAid et Action: निरंतर हस्तक्षेप और पुनर्वास (rehabilitation) की वकालत करने वाला संगठन।
मेन्स के लिए
प्रश्न: बंधुआ श्रम प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के अस्तित्व के बावजूद, मुक्त कराए गए बंधुआ श्रमिकों के प्रभावी पुनर्वास में बाधा डालने वाली संरचनात्मक और प्रशासनिक चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
पुनर्वास का अंतर: तत्काल बचाव के बाद निरंतर वित्तीय सहायता और दीर्घकालिक समर्थन की कमी
अंतर-विभागीय टकराव: श्रम विभागों और समाज कल्याण एजेंसियों के बीच तालमेल की विफलता
निगरानी में कमी: जारी किए गए श्रमिकों की ट्रैकिंग में विफलता से वे फिर से कर्ज के चक्र में फंस रहे हैं
मुख्य शब्द: ऋण बंधन · संरचनात्मक शोषण · पुनर्वास ढांचा · विभागीय समन्वय · सामाजिक न्याय
चर्चा में क्यों: श्रम और रोजगार मंत्रालय ने कामकाजी वर्ग को पारंपरिक स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के लिए कोल्लम के एझुकोन (Ezhukone) में भारत के पहले ESIC आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज की स्थापना को मंजूरी दी है।
यह परियोजना श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) द्वारा शुरू की जा रही है। यह कोल्लम के एझुकोन (Ezhukone) में स्थित होगी और इसका मुख्य उद्देश्य श्रमिकों और उनके परिवारों को विशेष आयुर्वेदिक उपचार प्रदान करना होगा।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाESIC: Employees’ State Insurance Corporation, श्रम और रोजगार मंत्रालय के अधीन एक statutory body है।
स्थानएझुकोन (Ezhukone) केरल के कोल्लम जिले में स्थित है।
तथ्ययह ESIC फ्रेमवर्क के तहत स्थापित होने वाला पहला आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारतीय कार्यबल के लिए औपचारिक सामाजिक सुरक्षा ढांचे में आयुर्वेद जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को एकीकृत करने के महत्व पर चर्चा कीजिए।
संस्थागत एकीकरण: वैधानिक ESIC हेल्थकेयर फ्रेमवर्क के भीतर आयुर्वेदिक प्रोटोकॉल को मानकीकृत करने में चुनौतियां
एक्सेसिबिलिटी गैप: पारंपरिक इलाज और फॉर्मल ऑक्यूपेशनल हेल्थ इंश्योरेंस के बीच की दूरी को कम करना
सांस्कृतिक संरक्षण: श्रमिक वर्ग के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने हेतु क्षेत्रीय आयुर्वेदिक विरासत का लाभ उठाना
मुख्य शब्द: सामाजिक सुरक्षा · व्यावसायिक स्वास्थ्य · आयुर्वेद · पारंपरिक चिकित्सा · सार्वजनिक स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर
चर्चा में क्यों: यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने बेंगलुरु स्थित ग्लोबल ह्यूमन पीस यूनिवर्सिटी को एक 'फर्जी यूनिवर्सिटी' घोषित किया है और मान्यता की कमी के कारण छात्रों को इसमें नामांकन न करने की चेतावनी दी है।
UGC ने स्पष्ट किया है कि ग्लोबल ह्यूमन पीस यूनिवर्सिटी (Global Human Peace University) को AICTE सहित किसी भी वैधानिक संस्था (Statutory body) द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है। UGC ने यह भी स्पष्ट किया कि इस संस्थान से प्राप्त डिग्रियां उच्च शिक्षा या सरकारी रोजगार के लिए मान्य नहीं हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाUGC: University Grants Commission भारत में उच्च शिक्षा के मानकों को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार एक statutory body है।
संस्थाAICTE: All India Council for Technical Education तकनीकी शिक्षा के लिए एक statutory body (सांविधिक निकाय) है।
तथ्यग्लोबल ह्यूमन पीस यूनिवर्सिटी (Global Human Peace University) बेंगलुरु में स्थित है।
तथ्यअनमान्य संस्थानों (unrecognized institutions) से प्राप्त डिग्रियां सरकारी नौकरियों के लिए मान्य नहीं हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में 'फर्जी विश्वविद्यालयों' के प्रसार को रोकने और शैक्षणिक प्रमाणों की अखंडता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपायों की चर्चा कीजिए।
रेगुलेटरी ओवरसाइट: निजी संस्थानों के लिए रियल-टाइम वेरिफिकेशन मैकेनिज्म की कमी
छात्रों की संवेदनशीलता: सूचना की कमी के कारण ग्रामीण और पिछड़े वर्ग के छात्रों के करियर पर असर
संस्थागत अखंडता: मान्यता प्राप्त डिग्रियों के लिए एक केंद्रीकृत नेशनल डेटाबेस की ज़रूरत
मुख्य शब्द: अकादमिक ईमानदारी · रेगुलेटरी ओवरसाइट · सांविधिक मान्यता · क्रेडेंशियल वेरिफिकेशन · शिक्षा शासन
चर्चा में क्यों: केरल के सामान्य शिक्षा मंत्री वी. शिवकुट्टी ने STARS योजना के तहत सभी 14 जिलों में मॉडल ऑटिज्म कॉम्प्लेक्स (Autism Complexes) का उद्घाटन किया। इन केंद्रों का उद्देश्य दिव्यांग छात्रों को समावेशी शिक्षा और विशेषज्ञ उपचार प्रदान करना है।
केरल सरकार ने 14 जिला-स्तरीय ऑटिज्म कॉम्प्लेक्स (Autism Complexes) में से प्रत्येक को ₹2.7 करोड़ आवंटित किए हैं। इन सुविधाओं में बाधा-मुक्त प्रवेश (barrier-free entry), विशेष थेरेपी और मूल्यांकन कक्ष, तथा अभिभावकों के लिए प्रशिक्षण सुविधाएं शामिल हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
योजनाSTARS स्कीम: मॉडल ऑटिज़्म कॉम्प्लेक्स (autism complexes) स्थापित करने के लिए केरल राज्य की एक पहल।
तथ्यफंडिंग: 14 जिलों में प्रत्येक कॉम्प्लेक्स के लिए ₹2.7 करोड़ आवंटित।
स्थानलोकेशन: केरल।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में ऑटिज्म जैसे न्यूरोडेवलपमेंटल विकारों से ग्रस्त बच्चों को सशक्त बनाने में समावेशी शिक्षा बुनियादी ढांचे के महत्व पर चर्चा कीजिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: ग्रामीण शैक्षिक सेटिंग्स में स्पेशलाइज्ड थेरेपी रूम और बैरियर-फ्री एक्सेस की कमी
अभिभावकों की भागीदारी: होम-बेस्ड बिहेवियरल इंटरवेंशन को सपोर्ट करने के लिए स्ट्रक्चर्ड ट्रेनिंग मॉड्यूल की ज़रूरत
मुख्य शब्द: समावेशी शिक्षा · न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर · बाधा-मुक्त एक्सेस · विशेष शिक्षा · STARS स्कीम
चर्चा में क्यों: केंद्र सरकार ने बुजुर्गों के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन 'एल्डरलाइन' (Elderline) के राज्य-स्तरीय कार्यालयों को बंद करने का निर्णय लिया है। इसे 1 अप्रैल से एक केंद्रीकृत क्षेत्रीय परियोजना (Centralized Zonal Project) में बदल दिया जाएगा।
एल्डरलाइन (Elderline) बुजुर्गों के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन है। इसके पुनर्गठन के तहत संचालन को टेलीकम्युनिकेशंस कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड (Telecommunications Consultants India Ltd.) को स्थानांतरित किया जाएगा और इसे ज़ोनल मॉडल (zonal model) पर आधारित किया जाएगा। इस बदलाव से सामाजिक न्याय विभाग की सल्लपम (Sallapam) योजना और 'सयंप्रभा' रैपिड रिस्पांस टीम प्रभावित होगी।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाएल्डरलाइन (Elderline): भारत में बुजुर्गों के लिए नेशनल हेल्पलाइन।
तथ्यसेंट्रलाइज्ड जोनल प्रोजेक्ट (Centralized Zonal Project) में पुनर्गठन 1 अप्रैल से शुरू होगा।
पदटेलीकम्युनिकेशंस कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड (TCCIL) वह एजेंसी है जो हेल्पलाइन ऑपरेशंस को संभालती है।
योजनाSallapam scheme: बुजुर्गों के रखरखाव के लिए केरल सरकार की एक पहल।
मेन्स के लिए
प्रश्न: एक संघीय संरचना में सामाजिक कल्याण वितरण तंत्र के केंद्रीकरण की चुनौतियों और संवेदनशील आबादी के लिए सेवाओं की सुलभता पर इसके प्रभाव का विश्लेषण कीजिए।
एक्सेसिबिलिटी गैप: ग्रामीण बुजुर्गों के लिए क्षेत्रीय भाषा के विकल्पों और IVR टेक्नोलॉजी की कमी
संघीय टकराव: पुनर्गठन पर राज्यों से सलाह की कमी से सल्लपम जैसी राज्य-विशिष्ट कल्याणकारी योजनाओं पर असर
ऑपरेशनल बॉटलनेक: मेंटेनेंस एप्लिकेशन और रैपिड रिस्पॉन्स सेवाओं की ट्रैकिंग में रुकावट की संभावना
मुख्य शब्द: समाज कल्याण · संघवाद · सेवा वितरण · कमज़ोर वर्ग · केंद्रीकरण
चर्चा में क्यों: आंध्र प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग ने AI और डेटा एनालिटिक्स (Data Analytics) का उपयोग करके 'dokka Seethamma मिडडे मील स्कीम' को बेहतर बनाने के लिए इंटरनेशनल इनोवेशन कॉर्प्स (IIC) के साथ एक MoU (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह समझौता आंध्र प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग और इंटरनेशनल इनोवेशन कॉर्प्स (IIC) के बीच शिकागो यूनिवर्सिटी ट्रस्ट (इंडिया) के अंतर्गत हस्ताक्षरित किया गया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य डॉक्का सीतम्मा मिडडे मील स्कीम (Dokka Seethamma Midday Meal Scheme) में पारदर्शिता और दक्षता में सुधार करना है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
योजनाडोक्का सीतम्मा मिडडे मील स्कीम (Dokka Seethamma Midday Meal Scheme): आंध्र प्रदेश में पोषण और शिक्षा की एक पहल।
संस्थाइंटरनेशनल इनोवेशन कॉर्प्स (International Innovation Corps - IIC): AI-आधारित मील एस्टिमेशन (meal estimations) के लिए AP सरकार के साथ साझेदारी।
तथ्ययह स्कीम पोषण की निगरानी (nutritional monitoring) और प्रशासनिक बोझ को कम करने के लिए डेटा एनालिटिक्स और AI का उपयोग करती है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) और डेटा एनालिटिक्स का एकीकरण मध्याह्न भोजन योजना जैसी सार्वजनिक कल्याणकारी योजनाओं की पारदर्शिता और पोषण संबंधी निगरानी को किस प्रकार सुदृढ़ कर सकता है, इसका विश्लेषण कीजिए।
डेटा इंटीग्रिटी: लीकेज रोकने के लिए छात्रों के भोजन का सटीक अनुमान सुनिश्चित करना
तकनीकी समानता: AI लागू करने के लिए ग्रामीण स्कूलों में डिजिटल डिवाइड को कम करना
प्रशासनिक दक्षता: पोषण के परिणामों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए नौकरशाही का बोझ कम करना
मुख्य शब्द: पारदर्शिता · डेटा एनालिटिक्स · आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस · जन कल्याण · पोषण की निगरानी
चर्चा में क्यों: कर्नाटक राज्य स्वास्थ्य विभाग ने गुणवत्ता के समान मानक सुनिश्चित करने के लिए राज्य के सभी ब्लड बैंकों के लिए एक साल के भीतर NABH या NQAS मान्यता प्राप्त करना अनिवार्य कर दिया है।
यह निर्देश सभी सरकारी ब्लड बैंकों (जिन्हें NQAS प्राप्त करना अनिवार्य है) और निजी ब्लड बैंकों (जिन्हें NABH प्राप्त करना अनिवार्य है) पर लागू होता है। यह आदेश कर्नाटक स्टेट एड्स प्रिवेंशन सोसाइटी के एक प्रस्ताव और NABH अधिकारियों के साथ किए गए परामर्श के बाद जारी किया गया है।
योजनाNQAS: National Quality Assurance Standards प्रोग्राम।
तथ्यसरकारी ब्लड बैंकों के पास NQAS सर्टिफिकेशन होना अनिवार्य है।
तथ्यसरकारी योजनाओं के तहत पात्र न होने वाले प्राइवेट ब्लड बैंक को NABH एक्रेडिटेशन प्राप्त करना अनिवार्य है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और स्वास्थ्य सेवा वितरण की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए रक्त केंद्रों के मानकीकृत प्रत्यायन (standardized accreditation) के महत्व पर चर्चा कीजिए।
क्वालिटी एश्योरेंस: ट्रांसफ्यूजन-ट्रांसमिटेड इन्फेक्शन रोकने के लिए स्टोरेज और टेस्टिंग प्रोटोकॉल को स्टैंडर्डाइज़ करना
रेगुलेटरी ओवरसाइट: प्राइवेट हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स की ऑपरेशनल व्यवहार्यता के साथ अनिवार्य एक्रेडिटेशन आवश्यकताओं को संतुलित करना
मुख्य शब्द: क्वालिटी एश्योरेंस · सार्वजनिक स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर · एक्रेडिटेशन स्टैंडर्ड्स · रेगुलेटरी कंप्लायंस · स्वास्थ्य सेवा शासन