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भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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भाग I · स्था. 11.2025 
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दलित समूहों के लिए आंतरिक उप-वर्गीकरण (internal sub-classification) शुरू करने की कोशिश के साथ ही

GS2राजव्यवस्था · शासन · अंतर्राष्ट्रीय संबंध· कमजोर वर्ग (SC/ST, अल्पसंख्यक, दिव्यांग, बुजुर्ग, बच्चे)· प्रीलिम्स + मेन्स·

चर्चा में क्यों

दलित समूहों के लिए आंतरिक उप-वर्गीकरण (internal sub-classification) शुरू करने की कोशिश के साथ ही, अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण को वापस 15% पर लाने के कर्नाटक सरकार के फैसले ने कानूनी और सामुदायिक विरोध को जन्म दिया है।

पृष्ठभूमि

कर्नाटक सरकार 56,432 पदों की भर्ती का प्रबंधन कर रही है। राज्यपाल ने अनुसूचित जातियों (Scheduled Castes) के लिए 17% आरक्षण के भीतर दलित समूहों के उप-वर्गीकरण (sub-classification) के लिए एक विधेयक को मंजूरी दी है। साथ ही, मंत्रियों ने 15% कोटा के भीतर आंतरिक आरक्षण देने की प्रतिबद्धता जताई है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • तथ्यकर्नाटक में भर्ती के लिए कुल पद: 56,432।
  • तथ्यअनुसूचित जातियों के लिए प्रस्तावित आंतरिक आरक्षण कोटा: 15%।
  • तथ्यगवर्नर द्वारा स्वीकृत बिल 17% Scheduled Caste आरक्षण के भीतर सब-क्लासिफिकेशन (sub-classification) का प्रावधान प्रदान करता है।

मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित श्रेणियों के भीतर उप-वर्गीकरण की संवैधानिक वैधता और सामाजिक निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • कानूनी विवाद: सब-क्लासिफिकेशन की न्यायिक जांच बनाम अविभाज्य आरक्षण का सिद्धांत
  • सामाजिक घर्षण: पिछड़े समूहों के बीच लाभ के वितरण को लेकर समुदायों के भीतर तनाव
  • प्रशासनिक बाधा: बड़े पैमाने पर सार्वजनिक भर्ती के दौरान बारीकी वाले कोटे को लागू करने में जटिलता

मुख्य शब्द: उप-वर्गीकरण · अनुसूचित जातियाँ · सकारात्मक कार्रवाई · संवैधानिक वैधता · सामाजिक न्याय

पूरा कालक्रम (रिवीजन के लिए) →पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗यह भी: GS2 · संविधान, संशोधन एवं मूल ढांचा

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।