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भाग I · स्था. 11.2025 
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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स — यूपीएससी

यूपीएससी सिविल सेवा GS3 (अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा) के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी भाग से जुड़ी हर ख़बर, परीक्षा के नज़रिए से: चर्चा में क्यों, पृष्ठभूमि, प्रीलिम्स के तथ्य, अभ्यास प्रश्न और मेन्स प्रश्न। अब तक 1,426 नोट्स, रोज़ अपडेट।

पाठ्यक्रम के विषय: IT, AI, सेमीकंडक्टर एवं कंप्यूटिंग (517) · अंतरिक्ष तकनीक (ISRO, मिशन) (348) · जैव प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य अनुसंधान (242) · परमाणु एवं नई ऊर्जा तकनीक (197) · रक्षा तकनीक (118) · बौद्धिक संपदा अधिकार (4)

NASA भविष्य के चंद्र आधारों और मंगल मिशनों के लिए तकनीकों का परीक्षण करने हेतु चार अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजने के लिए आर्टेमिस II (Artemis II) मिशन लॉन्च कर रहा है

चर्चा में क्यों: NASA भविष्य के चंद्र आधारों और मंगल मिशनों के लिए तकनीकों का परीक्षण करने हेतु चार अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजने के लिए आर्टेमिस II (Artemis II) मिशन लॉन्च कर रहा है।

आर्टेमिस (Artemis) कार्यक्रम का उद्देश्य चंद्रमा पर एक बेस स्थापित करना और दुर्लभ मृदा तत्व (rare earth elements), धातु और जल जैसे संसाधनों की खोज करना है। यह मिशन मंगल ग्रह की खोज से जुड़ी तकनीकों के परीक्षण के लिए एक आधार के रूप में कार्य करता है और इसका लक्ष्य अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था (space economy) को बढ़ावा देना है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • विज्ञान-तकनीकआर्टेमिस II (Artemis II): NASA मिशन जो चार अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजेगा।
  • तथ्यलूनर रिसोर्सेज (Lunar resources) के लक्ष्य: रेयर अर्थ एलिमेंट्स (rare earth elements), मेटल्स और वॉटर।
  • अंतर्राष्ट्रीय संगठनUN आउटर स्पेस ट्रीटी (Outer Space Treaty): यह चंद्र सतह (lunar land) के स्वामित्व को प्रतिबंधित करती है लेकिन इसके उपयोग की अनुमति देती है।
  • विज्ञान-तकनीकArtemis प्रोग्राम: इसे भविष्य के Mars मिशनों के लिए एक टेस्टबेड (testbed) के रूप में तैयार किया गया है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: चंद्र संसाधनों के निष्कर्षण के संबंध में अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते अंतरिक्ष अभियान के भू-राजनीतिक और आर्थिक निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।

  • कानूनी अस्पष्टता: UN आउटर स्पेस ट्रीटी के गैर-स्वामित्व नियम और व्यावहारिक संसाधन निष्कर्षण के बीच टकराव
  • भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा: चंद्र प्रभुत्व और रेयर अर्थ एलिमेंट्स के लिए अमेरिका और चीन के बीच रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता
  • आर्थिक सीमा: लूनर इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए स्पेस इकोनॉमी और नौकरी के अवसर पैदा करने की क्षमता

मुख्य शब्द: स्पेस डिप्लोमेसी · चंद्र संसाधन · स्पेस इकोनॉमी · तकनीकी संप्रभुता · एलियन शासन

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › IT, AI, सेमीकंडक्टर एवं कंप्यूटिंगप्रीलिम्स

सुचित्वा मिशन और भारत निर्वाचन आयोग ने 2026 के केरल विधानसभा चुनावों के दौरान कचरे को कम करने और रीसाइक्लिंग (recycling) को बढ़ावा देने के लिए 'ग्रीन बटन' अभियान शुरू किया है

चर्चा में क्यों: सुचित्वा मिशन और भारत निर्वाचन आयोग ने 2026 के केरल विधानसभा चुनावों के दौरान कचरे को कम करने और रीसाइक्लिंग (recycling) को बढ़ावा देने के लिए 'ग्रीन बटन' अभियान शुरू किया है।

'ग्रीन बटन' अभियान में तीन चरण शामिल हैं: चुनाव-पूर्व, चुनाव के दिन और चुनाव-पश्चात की गतिविधियाँ। इसका उद्देश्य प्रतिबंधित सामग्रियों से बचकर कचरे के उत्पादन में 60% से 70% तक की कमी लाना और 100% रीसाइक्लिंग (recycling) हासिल करना है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थासुचित्वा मिशन (Suchitwa Mission): एक संस्था जो वेस्ट मैनेजमेंट (waste management) के लिए भारत निर्वाचन आयोग के साथ मिलकर काम करती है।
  • तथ्ययह अभियान कचरे के उत्पादन में 60% से 70% की कमी का लक्ष्य रखता है।
  • तथ्यइस पहल का उद्देश्य प्रतिबंधित सामग्रियों के उपयोग को हतोत्साहित करके 100% रीसाइक्लिंग (recycling) हासिल करना है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: बड़े पैमाने पर आयोजित होने वाले लोकतांत्रिक अभ्यासों के पारिस्थितिक पदचिह्न (ecological footprint) को कम करने के लिए चुनावी प्रक्रियाओं में पर्यावरणीय स्थिरता को एकीकृत करने के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • लॉजिस्टिक बॉटलनेक: हजारों पोलिंग स्टेशनों पर विकेंद्रीकृत कचरा निपटान की निगरानी में कठिनाई
  • रेगुलेटरी एनफोर्समेंट: कचरे के नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माने और राजनीतिक प्रचार की लॉजिस्टिक जरूरतों के बीच संतुलन
  • सर्कुलर इकोनॉमी: सिंगल-यूज़ चुनाव सामग्री से 100% रिसाइकिल करने योग्य सप्लाई चेन की ओर बदलाव

मुख्य शब्द: सर्कुलर इकोनॉमी · वेस्ट मैनेजमेंट · सतत शासन · प्रदूषण कम करना · रेगुलेटरी कंप्लायंस

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › परमाणु एवं नई ऊर्जा तकनीकप्रीलिम्स

CSIR-NCL पुणे के वैज्ञानिक घरेलू ईंधन के विकल्प के रूप में मेथनॉल से डाइमिथाइल ईथर (Dimethyl Ether

चर्चा में क्यों: CSIR-NCL पुणे के वैज्ञानिक घरेलू ईंधन के विकल्प के रूप में मेथनॉल से डाइमिथाइल ईथर (Dimethyl Ether - DME) उत्पादन की एक अप्रत्यक्ष तकनीक विकसित कर रहे हैं।

सीनियर प्रिंसिपल साइंटिस्ट राजा तिरुमलस्वामी के नेतृत्व में CSIR-नेशनल केमिकल लेबोरेटरी (NCL) की टीम एक उच्च-क्षमता वाली DME उत्पादन विधि विकसित कर रही है। ONGC इस लैब के साथ साझेदारी करके अपने हजीरा प्लांट में प्रतिदिन 2.5 टन DME का उत्पादन करेगी।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • विज्ञान-तकनीकDimethyl Ether (DME) को पारंपरिक LPG के विकल्प के रूप में एक वैकल्पिक ईंधन स्रोत के रूप में विकसित किया जा रहा है।
  • संस्थाCSIR-नेशनल केमिकल लेबोरेटरी (NCL) पुणे में स्थित है।
  • तथ्यONGC, हाजीरा (Hazira) फैसिलिटी में रोजाना 2.5 टन DME उत्पादन के लिए CSIR-NCL के साथ साझेदारी कर रहा है।
  • विज्ञान-तकनीकDME उत्पादन तकनीक में फीडस्टॉक के रूप में मेथनॉल का उपयोग करने वाली एक इनडायरेक्ट मेथड (indirect method) का इस्तेमाल किया जाता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत के ऊर्जा संक्रमण में एलपीजी (LPG) के एक व्यवहार्य विकल्प के रूप में डाइमिथाइल ईथर (DME) की क्षमता और ईंधन आत्मनिर्भरता प्राप्त करने में अनुसंधान एवं विकास (R&D) की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

  • ऊर्जा सुरक्षा: स्वदेशी केमिकल सिंथेसिस के जरिए इम्पोर्टेड एलपीजी पर निर्भरता कम करना
  • तकनीकी छलांग: औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन के लिए उत्प्रेरक के रूप में हाई-एफिशिएंसी DME उत्पादन
  • पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप: CSIR रिसर्च और ONGC इंडस्ट्रियल स्केलिंग के बीच तालमेल

मुख्य शब्द: ऊर्जा ट्रांज़िशन · ईंधन आत्मनिर्भरता · केमिकल इंजीनियरिंग · डीकार्बोनाइजेशन · R&D इनोवेशन

राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (Defence Acquisition Council) ने रूसी S-400 मिसाइल सिस्टम और Su-30 अपग्रेड्स सहित 25 बिलियन डॉलर की रक्षा खरीद को मंजूरी दी

चर्चा में क्यों: राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (Defence Acquisition Council) ने रूसी S-400 मिसाइल सिस्टम और Su-30 अपग्रेड्स सहित 25 बिलियन डॉलर की रक्षा खरीद को मंजूरी दी।

रक्षा मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 6.73 ट्रिलियन INR ($71bn) की कीमत वाले 55 प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। स्वीकृत $25bn की पूंजीगत खरीद (capital procurement) में S-400 सिस्टम, मध्यम परिवहन विमान और आर्मर-पियर्सिंग टैंक गोला-बारूद शामिल हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (5)
  • तथ्यभारत ने एक ही वित्त वर्ष में $25 बिलियन के कैपिटल प्रोक्योरमेंट कॉन्ट्रैक्ट्स (capital procurement contracts) को मंजूरी दी।
  • विज्ञान-तकनीकS-400 एक लॉन्ग-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम है जिसे दुश्मन के लॉन्ग-रेंज एयर खतरों का मुकाबला करने के लिए डिजाइन किया गया है।
  • विज्ञान-तकनीकRemotely Piloted Strike Aircraft (RPSA) हथियारबंद ड्रोन हैं जो हमले और निगरानी (surveillance) दोनों में सक्षम हैं।
  • पदDefence Acquisition Council की अध्यक्षता Defence Minister द्वारा की जाती है।
  • तथ्यमंत्रालय ने वित्त वर्ष 2025-26 में 6.73 ट्रिलियन भारतीय रुपये की 55 प्रस्तावों को मंजूरी दी।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं जैसे रूस के साथ रणनीतिक साझेदारी बनाए रखते हुए रक्षा खरीद के स्रोतों में विविधता लाने के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी: रूस से खरीद और अमेरिका, फ्रांस और इजराइल के साथ बढ़ते संबंधों के बीच संतुलन
  • तकनीकी आधुनिकीकरण: पुराने AN-32 और IL-76 विमानों से आधुनिक ट्रांसपोर्ट और ड्रोन क्षमताओं की ओर बदलाव
  • ऑपरेशनल रेडीनेस: इंटीग्रेटेड सर्विलांस और लॉन्ग-रेंज मिसाइल सिस्टम के जरिए युद्ध के मैदान की निगरानी और एंटी-एयर क्षमताओं को बढ़ाना

मुख्य शब्द: डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल · रणनीतिक स्वायत्तता · S-400 ट्रायम्फ · पूंजी खरीद · रक्षा आधुनिकीकरण · रिमोटली पाइलटेड स्ट्राइक एयरक्राफ्ट

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › जैव प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य अनुसंधानप्रीलिम्स

प्रोजेक्ट CETI ने स्पर्म व्हेल द्वारा अन्य मादाओं की सहायता से बच्चे को जन्म देने के एक दुर्लभ उदाहरण को दर्ज किया है

चर्चा में क्यों: प्रोजेक्ट CETI ने स्पर्म व्हेल द्वारा अन्य मादाओं की सहायता से बच्चे को जन्म देने के एक दुर्लभ उदाहरण को दर्ज किया है, जो गैर-प्राइमेट (non-primate) प्रजातियों द्वारा जन्म में सहायता दिए जाने का पहला प्रमाण प्रदान करता है।

प्रोजेक्ट CETI, जो व्हेल की बातचीत को समझने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय प्रयास है, ने 'राउंडर' नामक एक स्पर्म व्हेल को बच्चे को जन्म देते हुए फिल्माया। 'साइंटिफिक रिपोर्ट्स' और 'साइंस' में प्रकाशित इस फुटेज में परिवार के सदस्यों और अन्य मादा व्हेल को नवजात बच्चे को उठाते और उसका मार्गदर्शन करते हुए दिखाया गया है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकProject CETI: व्हेल कम्युनिकेशन (whale communication) को समझने पर केंद्रित एक अंतरराष्ट्रीय प्रयास।
  • पर्यावरणस्पर्म व्हेल (Sperm whales): Cetaceans में गैर-प्राइमेट (non-primate) जन्म सहायता प्रदान करने के प्रमाण देखे गए हैं।
  • तथ्ययह फुटेज Cetaceans में non-primate birth assistance के पहले प्रमाण को दर्ज करता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: समुद्री जैव विविधता में विकासवादी अनुकूलन की हमारी समझ में सीटेसीन (cetacean) सामाजिक व्यवहारों और संचार के अध्ययन का क्या योगदान है? चर्चा कीजिए।

  • इवोल्यूशनरी बायोलॉजी: सेटेसियन उत्तरजीविता के लिए एक विशेष अनुकूलन के रूप में गैर-प्राइमेट जन्म सहायता
  • एथोलॉजिकल इनसाइट्स: समुद्री स्तनधारियों में कोऑपरेटिव ब्रीडिंग व्यवहार और सोशल स्ट्रक्चर

मुख्य शब्द: विकासवादी अनुकूलन · सीटीनियन संचार · कोऑपरेटिव ब्रीडिंग · समुद्री जैव विविधता · प्रोजेक्ट CETI

IIT गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने गर्म और आर्द्र क्षेत्रों में इमारतों के तापमान को नियंत्रित करने के लिए Phase Change Materials (PCMs) और बायोचार (biochar) का उपयोग करके ऊर्जा-कुशल ईंटें विकसित की हैं

चर्चा में क्यों: IIT गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने गर्म और आर्द्र क्षेत्रों में इमारतों के तापमान को नियंत्रित करने के लिए Phase Change Materials (PCMs) और बायोचार (biochar) का उपयोग करके ऊर्जा-कुशल ईंटें विकसित की हैं।

बिटुपन दास और अन्य के नेतृत्व वाली शोध टीम ने दिन के समय गर्मी को सोखने और रात में उसे छोड़ने के लिए ईंटों में OM35 PCM को शामिल किया। PCM के रिसाव (leakage) को रोकने के लिए ईंटों में विशेष रूप से बायोचार (Biochar) को एकीकृत किया गया।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकOM35 PCM: अध्ययन में हॉट, ह्यूमिड (hot, humid) क्षेत्रों के लिए Phase Change Material को सबसे उपयुक्त पाया गया।
  • तथ्यBiochar: इसका उपयोग ईंटों में एक एडिटिव (additive) के रूप में किया जाता है ताकि उसमें मौजूद मटेरियल के लीकेज को रोका जा सके।
  • संस्थाIIT Guwahati: ऊर्जा-कुशल ईंटों (energy-efficient bricks) के विकास के लिए जिम्मेदार संस्थान।
मेन्स के लिए

प्रश्न: निर्माण सामग्री में 'फेज चेंज मैटेरियल्स' (Phase Change Materials) और 'बायोचार' के एकीकरण से उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढांचे के विकास में किस प्रकार योगदान दिया जा सकता है, चर्चा कीजिए।

  • आर्थिक बाधा: पारंपरिक चिनाई की तुलना में PCM-इंटीग्रेटेड ईंटों की उच्च शुरुआती मैन्युफैक्चरिंग लागत
  • जागरूकता की कमी: पैसिव कूलिंग टेक्नोलॉजी के बारे में स्थानीय बिल्डरों और ठेकेदारों के बीच तकनीकी ज्ञान का अभाव
  • पॉलिसी की ज़रूरत: शहरी नियोजन में ऊर्जा-कुशल सामग्री के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए बिल्डिंग कोड्स की आवश्यकता

मुख्य शब्द: फेज चेंज मैटेरियल्स · पैसिव कूलिंग · बायोचार · क्लाइमेट-रेज़िलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर · थर्मल रेगुलेशन

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › अंतरिक्ष तकनीक (ISRO, मिशन)प्रीलिम्स

लॉस अलामोज नेशनल लेबोरेटरी (Los Alamos National Laboratory) के शोधकर्ता भविष्य के आर्टेमिस (Artemis) मिशनों के लिए चंद्रमा की भूकंपीय गतिविधियों का पता लगाने हेतु फाइबर-ऑप्टिक केबल्स और डिस्ट्रीब्यूटेड एकॉस्टिक सेंसिंग (Distributed Acoustic Sensing) के उपयोग की संभावनाओं पर शोध कर रहे हैं

चर्चा में क्यों: लॉस अलामोज नेशनल लेबोरेटरी (Los Alamos National Laboratory) के शोधकर्ता भविष्य के आर्टेमिस (Artemis) मिशनों के लिए चंद्रमा की भूकंपीय गतिविधियों का पता लगाने हेतु फाइबर-ऑप्टिक केबल्स और डिस्ट्रीब्यूटेड एकॉस्टिक सेंसिंग (Distributed Acoustic Sensing) के उपयोग की संभावनाओं पर शोध कर रहे हैं।

यह तकनीक 'डिस्ट्रीब्यूटेड एकॉस्टिक सेंसिंग' (Distributed Acoustic Sensing) का उपयोग करती है, जिसमें लेजर पल्स फाइबर-ऑप्टिक केबल्स के माध्यम से यात्रा करते हैं और किसी भी हलचल से टकराकर वापस लौटते हैं। कृत्रिम चंद्रमा की सतहों पर किए गए परीक्षणों ने लंबी दूरी तक भूकंपीय गतिविधियों (Seismic Activity) का पता लगाने में इन केबल्स की क्षमता की पुष्टि की है।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • विज्ञान-तकनीकडिस्ट्रीब्यूटेड एकॉस्टिक सेंसिंग (Distributed acoustic sensing): एक ऐसी तकनीक जिसमें फाइबर-ऑप्टिक केबल्स के माध्यम से लेजर पल्स (laser pulses) का उपयोग भूकंपीय हलचल (seismic disturbances) का पता लगाने के लिए किया जाता है।
  • स्थानलोस अलामोस नेशनल लेबोरेटरी (Los Alamos National Laboratory): वह रिसर्च बॉडी जो लूनर सीस्मिक डिटेक्शन (lunar seismic detection) टेक्नोलॉजी की खोज कर रही है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: वितरित ध्वनिक संवेदन (distributed acoustic sensing) और फाइबर-ऑप्टिक तकनीक में हो रही प्रगति किस प्रकार भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए चंद्र अन्वेषण और भूकंपीय निगरानी को सुदृढ़ कर सकती है, इसका विश्लेषण कीजिए।

  • डेटा रिज़ॉल्यूशन: अपोलो युग के सीमित उपकरणों की तुलना में चंद्र आंतरिक हलचलों का बेहतर पता लगाना
  • मिशन सेफ्टी: लूनर बेस निर्माण और वहां रहने के दौरान जोखिमों को कम करने के लिए बेहतर सिस्मिक मैपिंग

मुख्य शब्द: डिस्ट्रीब्यूटेड एकॉस्टिक सेंसिंग · लूनर सीस्मोलॉजी · आर्टेमिस मिशन · फाइबर-ऑप्टिक टेक्नोलॉजी · अंतरिक्ष अन्वेषण

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › जैव प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य अनुसंधानप्रीलिम्स

वन्यजीव प्रबंधन प्राधिकरण (Wildlife Management Authority) और कोरिंगा वन्यजीव अभयारण्य (Coringa Wildlife Sanctuary) के अधिकारियों ने काकिनाडा बे में होप आइलैंड पर लगभग 20,000 ओलिव रिडले कछुए के अंडों को संरक्षित किया

चर्चा में क्यों: वन्यजीव प्रबंधन प्राधिकरण (Wildlife Management Authority) और कोरिंगा वन्यजीव अभयारण्य (Coringa Wildlife Sanctuary) के अधिकारियों ने काकिनाडा बे में होप आइलैंड पर लगभग 20,000 ओलिव रिडले कछुए के अंडों को संरक्षित किया।

इन-सिटु संरक्षण (in-situ conservation) के उद्देश्य से अधिकारियों ने काकीनाडा बे में स्थित होप आइलैंड पर लगभग 20,000 ओलिव रिडले कछुए के अंडे एकत्र किए। 26 मार्च को स्थानीय अधिकारियों द्वारा 585 नन्हे कछुओं (hatchlings) को समुद्र में छोड़ा गया।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • पर्यावरणओलिव रिडले टर्टल्स (Olive Ridley Turtles): वह प्रजाति जिनके अंडों को काकिनाडा बे में होप आइलैंड पर संरक्षित किया गया था।
  • तथ्यसंरक्षण के लिए लगभग 20,000 अंडे एकत्र किए गए।
  • तथ्य26 मार्च को 585 ओलिव रिडले टर्टल (Olive Ridley turtle) के हैचलिंग्स (hatchlings) को समुद्र में छोड़ा गया।
मेन्स के लिए

प्रश्न: लुप्तप्राय समुद्री प्रजातियों के संरक्षण में इन-सिटु (in-situ) संरक्षण विधियों के महत्व और जैव विविधता संरक्षण में समुदाय-आधारित वन्यजीव प्रबंधन की भूमिका पर चर्चा कीजिए।

  • हैबिटेट इंटीग्रिटी: तटीय विकास और मानव जनित बाधाओं से नेस्टिंग साइट्स की सुरक्षा
  • संरक्षण के ट्रेड-ऑफ: तटीय आर्थिक गतिविधियों और समुद्री मेगाफ़ौना की पारिस्थितिक आवश्यकताओं के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: इन-सिटू कंजर्वेशन · जैव विविधता संरक्षण · समुद्री मेगाफ़ौना · आवास बहाली · वन्यजीव प्रबंधन

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › अंतरिक्ष तकनीक (ISRO, मिशन)प्रीलिम्स

Science में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चला है कि SWOT सैटेलाइट ने 2025 के कामचटका भूकंप से जुड़े शुरुआती सुनामी संकेतों को सफलतापूर्वक रिकॉर्ड किया है

चर्चा में क्यों: Science में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चला है कि SWOT सैटेलाइट ने 2025 के कामचटका भूकंप से जुड़े शुरुआती सुनामी संकेतों को सफलतापूर्वक रिकॉर्ड किया है।

SWOT सैटेलाइट मिशन ने भूकंप के स्रोत के पास बनने वाले सूक्ष्म तरंग पैटर्न (wave patterns) का पता लगाने के लिए महत्वपूर्ण डेटा प्रदान किया। इस अध्ययन में विश्लेषण किया गया कि भूकंप के दौरान समुद्री तल (seafloor) में किस प्रकार बदलाव आए और गहरे समुद्री खाइयों (deep-ocean trenches) के पास होने वाली उन भूकंपीय प्रक्रियाओं पर प्रकाश डाला गया जिन्हें अब तक कम देखा गया था।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकSWOT: एक सैटेलाइट मिशन जो सुनामी के उद्गम की निगरानी के लिए सूक्ष्म वेव पैटर्न्स (wave patterns) और सीफ्लोर शिफ्ट्स (seafloor shifts) का पता लगाने में सक्षम है।
  • स्थानकामचटका: 2025 के भूकंप का स्थान जिसका उपयोग अध्ययन के लिए किया गया।
  • तथ्ययह अध्ययन SWOT सैटेलाइट डेटा का उपयोग करके 'Science' जर्नल में प्रकाशित किया गया था।
मेन्स के लिए

प्रश्न: अंतरिक्ष-आधारित सुदूर संवेदन प्रौद्योगिकियां गहरे समुद्री क्षेत्रों में सुनामी और अन्य भू-भौतिकीय खतरों के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को किस प्रकार सुदृढ़ कर सकती हैं, इसका विश्लेषण कीजिए।

  • डेटा इंटीग्रेशन: स्पेस-बेस्ड वेव पैटर्न डिटेक्शन को पारंपरिक सीफ़्लोर प्रेशर सेंसर के साथ जोड़ना
  • भू-भौतिकीय निगरानी: रिस्क मॉडलिंग सुधारने के लिए गहरे समुद्री खाइयों में कम देखे गए भूकंपीय प्रोसेस की पहचान

मुख्य शब्द: रिमोट सेंसिंग · अर्ली वार्निंग सिस्टम · भू-भौतिक खतरे · स्पेस-आधारित ऑब्जर्वेशन · सुनामी से बचाव

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › जैव प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य अनुसंधानप्रीलिम्स

RIMT यूनिवर्सिटी और ट्रावनकोर नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के शोधकर्ताओं ने अरुणाचल प्रदेश में तितलियों की एक नई प्रजाति

चर्चा में क्यों: RIMT यूनिवर्सिटी और ट्रावनकोर नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के शोधकर्ताओं ने अरुणाचल प्रदेश में तितलियों की एक नई प्रजाति, यूथालिया जुबेंगार्गी (Euthalia zubeengargi) को रिकॉर्ड किया है और इसका नाम सांस्कृतिक आइकन जुबीन गर्ग के नाम पर रखा है।

*Euthalia zubeengargi* प्रजाति को अरुणाचल प्रदेश के लेपाराडा जिले में देखा गया है। 2025 के फील्ड सर्वे के दौरान, शोधकर्ताओं ने केवल दो नर व्यक्तियों को दर्ज किया, जो यह दर्शाता है कि यह प्रजाति दुर्लभ है या एक विशिष्ट क्षेत्र तक ही सीमित है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • पर्यावरणEuthalia zubeengargi: अरुणाचल प्रदेश में रिकॉर्ड की गई एक नई तितली की प्रजाति।
  • स्थानलेपाराडा: अरुणाचल प्रदेश का एक जिला जहाँ नई प्रजाति देखी गई।
  • तथ्य2025 के फील्ड सर्वे के दौरान इस प्रजाति के केवल दो नर दर्ज किए गए।
मेन्स के लिए

प्रश्न: पूर्वोत्तर भारत में जैव विविधता के दस्तावेजीकरण के महत्व और संरक्षण जागरूकता को बढ़ावा देने में स्थानीय सांस्कृतिक प्रतीकों की भूमिका पर चर्चा कीजिए।

  • डेटा गैप: कम सैंपल संख्या और सीमित आवास के कारण लाइफ साइकिल की जानकारी कम
  • संरक्षण तालमेल: स्थानीय जिम्मेदारी को बढ़ावा देने के लिए सांस्कृतिक पहचान को जैव विविधता संरक्षण के साथ जोड़ना

मुख्य शब्द: जैव विविधता दस्तावेज़ीकरण · स्थानिक प्रजातियां · संरक्षण जागरूकता · आवास का स्थानीयकरण

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › अंतरिक्ष तकनीक (ISRO, मिशन)प्रीलिम्स

NASA ने यात्रा के समय को कम करने के लिए न्यूक्लियर इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन (Nuclear Electric Propulsion

चर्चा में क्यों: NASA ने यात्रा के समय को कम करने के लिए न्यूक्लियर इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन (Nuclear Electric Propulsion - NEP) तकनीक का उपयोग करते हुए 2028 तक मंगल ग्रह पर एक परमाणु ऊर्जा संचालित मिशन भेजने की योजना की घोषणा की है।

NASA, न्यूक्लियर इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन (Nuclear Electric Propulsion - NEP) तकनीक का परीक्षण करने के लिए डिफेंस एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी (DARPA) के साथ मिलकर काम कर रहा है। इस मिशन का उद्देश्य मंगल ग्रह की यात्रा के समय को छह से नौ महीनों से घटाकर आधे से भी कम समय तक लाना है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकन्यूक्लियर इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन (Nuclear Electric Propulsion - NEP): वह तकनीक जो स्पेसक्राफ्ट प्रोपल्शन के लिए एक स्थिर और कुशल पावर सोर्स प्रदान करती है।
  • तथ्यNASA का लक्ष्य: 2028 तक मंगल ग्रह के लिए न्यूक्लियर-पावर्ड मिशन लॉन्च करना।
  • संस्थाDARPA: डिफेंस एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी (Defense Advanced Research Projects Agency), NEP टेस्टिंग पर NASA के साथ सहयोग कर रही है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: परमाणु विद्युत प्रणोदन (Nuclear Electric Propulsion - NEP) तकनीक का विकास दीर्घकालिक मानव अंतरिक्ष अन्वेषण और अंतरग्रहीय बस्तियों की व्यवहार्यता को किस प्रकार पुनर्परिभाषित कर सकता है, चर्चा कीजिए।

  • तकनीकी छलांग: ट्रांजिट समय में कमी से अंतरिक्ष यात्रियों के लिए रेडिएशन एक्सपोजर काफी कम हुआ
  • रणनीतिक बदलाव: डीप स्पेस के लिए केमिकल प्रोपल्शन से हाई-एफिशिएंसी न्यूक्लियर-इलेक्ट्रिक सिस्टम की ओर बदलाव
  • सुरक्षा-सुरक्षा संबंध: न्यूक्लियर प्रोपल्शन के जोखिमों और हाई-थ्रस्ट एफिशिएंसी की ज़रूरत के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: न्यूक्लियर इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन · अंतरग्रहीय अन्वेषण · अंतरिक्ष अन्वेषण · डीप स्पेस मिशन · तकनीकी प्रगति

स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया ↗+2 और खबरें इस विषय पर
GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › जैव प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य अनुसंधानप्रीलिम्स + मेन्स

वी.ओ

चर्चा में क्यों: वी.ओ. चिदंबरम कॉलेज के शोधकर्ताओं ने पाया है कि चेन्नई के तटीय पारिस्थितिकी तंत्र (Coastal Ecosystems) में नायलॉन फाइबर प्रमुख माइक्रोप्लास्टिक है, जो समुद्री जीवन के लिए गंभीर पारिस्थितिक जोखिम पैदा करता है।

थूथुकुडी स्थित वी.ओ. चिदंबरम कॉलेज के एक अध्ययन में पाया गया कि चेन्नई में माइक्रोप्लास्टिक्स की मात्रा कुछ वैश्विक स्थलों की तुलना में कम है, फिर भी यह उच्च पारिस्थितिक जोखिम (ecological risks) पैदा करता है। अध्ययन में नायलॉन फाइबर को प्रमुख माइक्रोप्लास्टिक प्रकार के रूप में पहचाना गया है, जो अंतर्ग्रहण (ingestion) और रासायनिक प्रदूषण के माध्यम से नुकसान पहुँचाता है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • स्थानवी.ओ. चिदंबरम कॉलेज तमिलनाडु के थूथुकुडी में स्थित है।
  • तथ्यचेन्नई के तटीय इकोसिस्टम (ecosystems) में पाए जाने वाले माइक्रोप्लास्टिक में नायलॉन फाइबर (Nylon fibers) सबसे प्रमुख प्रकार हैं।
  • पर्यावरणचेन्नई में माइक्रोप्लास्टिक्स (Microplastics) समुद्री जीवन और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र (Coastal Ecosystems) के लिए पारिस्थितिक जोखिम पैदा करते हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: तटीय पारिस्थितिकी तंत्रों में माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण के पारिस्थितिक निहितार्थों की चर्चा कीजिए और समुद्री जैव विविधता पर इसके प्रभाव को कम करने के लिए उचित उपायों का सुझाव दीजिए।

  • पारिस्थितिक जोखिम: समुद्री जीवों द्वारा नायलॉन फाइबर का सेवन और बायोएक्युमुलेशन
  • वेस्ट मैनेजमेंट गैप: अपर्याप्त फिल्ट्रेशन और वेस्ट प्रोसेसिंग से माइक्रोप्लास्टिक का रिसाव
  • पॉलिसी इंटरवेंशन: प्लास्टिक के प्रवाह को रोकने के लिए विनियमित मछली पकड़ने के तरीकों और जन जागरूकता की ज़रूरत

मुख्य शब्द: माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण · बायोएक्युमुलेशन · तटीय इकोसिस्टम · अपशिष्ट प्रबंधन · समुद्री जैव विविधता

515 आर्मी बेस वर्कशॉप ने स्वदेशी ड्रोन निर्माण और सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए नॉटिकल विंग्स एयरोस्पेस

चर्चा में क्यों: 515 आर्मी बेस वर्कशॉप ने स्वदेशी ड्रोन निर्माण और सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए नॉटिकल विंग्स एयरोस्पेस, यानेंद्रिया प्राइवेट लिमिटेड और NFSU के साथ MoUs पर हस्ताक्षर किए।

515 आर्मी बेस वर्कशॉप, भारतीय सेना की आठ बेस वर्कशॉप्स में से एक है। इसने प्रोपल्शन सिस्टम्स (propulsion systems) के लिए नॉटिकल विंग्स एयरोस्पेस, AI-केंद्रित डीप-टेक के लिए यानेंद्रिय प्राइवेट लिमिटेड और सुरक्षा खतरे के फ्रेमवर्क (security threat frameworks) के लिए नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) के साथ साझेदारी की है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • संस्था515 आर्मी बेस वर्कशॉप: भारतीय सेना के अंतर्गत आने वाली आठ वर्कशॉप्स में से एक।
  • विज्ञान-तकनीकनॉटिकल विंग्स एयरोस्पेस (Nautical Wings Aerospace): बेंगलुरु स्थित एक स्टार्टअप जो एडवांस्ड ड्रोन प्रोपल्शन सिस्टम्स (drone propulsion systems) में विशेषज्ञता रखता है।
  • विज्ञान-तकनीकयानेंद्रिया प्राइवेट लिमिटेड: AI-केंद्रित deep-tech स्टार्टअप।
  • संस्थानेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU): ड्रोन से संबंधित सुरक्षा खतरों के विश्लेषणात्मक फ्रेमवर्क (analytical frameworks) के लिए पार्टनरशिप।
मेन्स के लिए

प्रश्न: रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु स्वदेशी ड्रोन तकनीक के विकास में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) को बढ़ावा देने के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • R&D की बाधा: स्टार्टअप इनोवेशन और मिलिट्री-ग्रेड रिलायबिलिटी स्टैंडर्ड्स के बीच की दूरी को कम करना
  • सिक्योरिटी-टेक नेक्सस: ड्रोन आधारित बदलते एसिमेट्रिक खतरों से निपटने के लिए फॉरेंसिक फ्रेमवर्क विकसित करना
  • सप्लाई चेन रेजिलिएंस: ड्रोन प्रोपल्शन और AI कंपोनेंट्स पर आयात निर्भरता कम करना

मुख्य शब्द: आत्मनिर्भर भारत · पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप · असिमेट्रिक वॉरफेयर · डीप-टेक · स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने UNFCCC को भारत के अपडेटेड नेशनली डिटरमिन्ड कंट्रीब्यूशन (NDC) की घोषणा की है

चर्चा में क्यों: केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने UNFCCC को भारत के अपडेटेड नेशनली डिटरमिन्ड कंट्रीब्यूशन (NDC) की घोषणा की है, जिसका लक्ष्य 2035 तक 60% गैर-जीवाश्म ईंधन बिजली क्षमता हासिल करना है।

भारत के अपडेटेड NDC लक्ष्यों में जीडीपी की प्रति इकाई उत्सर्जन तीव्रता (emissions intensity) में 47% की कमी और कार्बन सिंक को बढ़ाकर 3.5-4 बिलियन टन करने का लक्ष्य शामिल है। इन लक्ष्यों की घोषणा कैबिनेट की बैठक के बाद की गई थी और ये पेरिस समझौते (Paris Agreement) के अनुरूप हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यभारत का गैर-जीवाश्म ईंधन (non-fossil fuel) बिजली क्षमता का लक्ष्य 2035 तक 60% है।
  • तथ्यभारत का लक्ष्य GDP की प्रति इकाई उत्सर्जन तीव्रता (emission intensity) को 47% तक कम करना है।
  • तथ्यभारत का लक्ष्य कार्बन सिंक (carbon sink) 3.5 से 4 बिलियन टन है।
  • अंतर्राष्ट्रीय संगठनNDC (Nationally Determined Contribution) को UNFCCC को सबमिट किया जाता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: तेजी से हो रही आर्थिक वृद्धि को बनाए रखते हुए भारत के 2035 के गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित विद्युत लक्ष्यों को प्राप्त करने में निहित चुनौतियों और अवसरों का विश्लेषण कीजिए।

  • ग्रिड स्टेबिलिटी: बेस-लोड जरूरतों के साथ रुक-रुक कर मिलने वाली रिन्यूएबल एनर्जी सप्लाई को बैलेंस करना
  • फाइनेंसिंग गैप: नॉन-फॉसिल इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार के लिए भारी कैपिटल की ज़रूरत
  • पॉलिसी फ्रिक्शन: घरेलू औद्योगिक विकास और अंतरराष्ट्रीय क्लाइमेट कमिटमेंट्स के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: नेशनलली डिटरमिन्ड कंट्रीब्यूशन · उत्सर्जन तीव्रता · कार्बन सिंक · पेरिस समझौता · डिकार्बोनाइजेशन

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राज्य सरकार ने चिन्हित हॉटस्पॉट्स में तपेदिक (Tuberculosis) की पहचान और निगरानी में तेजी लाने के लिए 100 AI-इनेबल्ड हैंडहेल्ड एक्स-रे (X-ray) मशीनों की खरीद की घोषणा की है

चर्चा में क्यों: राज्य सरकार ने चिन्हित हॉटस्पॉट्स में तपेदिक (Tuberculosis) की पहचान और निगरानी में तेजी लाने के लिए 100 AI-इनेबल्ड हैंडहेल्ड एक्स-रे (X-ray) मशीनों की खरीद की घोषणा की है।

राज्य सरकार ₹20 करोड़ की लागत से 100 AI-सक्षम हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनें खरीदेगी। इन मशीनों को केंद्रीय टीबी डिवीजन (Central TB Division) द्वारा हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित किए गए गांवों में तैनात किया जाएगा, ताकि प्रति व्यक्ति दो मिनट के भीतर रिपोर्ट तैयार की जा सके।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यइस खरीद में 100 AI-enabled हैंडहेल्ड X-ray मशीनें शामिल हैं।
  • तथ्यखरीद की कुल लागत ₹20 करोड़ है।
  • तथ्यये मशीनें प्रति व्यक्ति दो मिनट के भीतर रिपोर्ट जेनरेट करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।
  • संस्थासेंट्रल TB डिवीजन मशीन की तैनाती के लिए हॉटस्पॉट्स की पहचान करने के लिए जिम्मेदार संस्था है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: ग्रामीण भारत में बीमारियों के प्रारंभिक निदान की चुनौतियों के समाधान में नैदानिक स्वास्थ्य सेवा (diagnostic healthcare) में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के एकीकरण की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

  • डायग्नोस्टिक एफिशिएंसी: ग्रामीण हॉटस्पॉट्स में टीबी रिपोर्ट के टर्नअराउंड टाइम को दो मिनट से कम करना
  • इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: गाँवों में हाई-टेक AI डिप्लॉयमेंट के साथ निरंतर मेंटेनेंस और बिजली की ज़रूरत को संतुलित करना

मुख्य शब्द: जल्दी पहचान · सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी · हेल्थकेयर में AI · ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच · तकनीकी हस्तक्षेप

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केंद्र सरकार और JICA ने बेंगलुरु मेट्रो रेल प्रोजेक्ट फेज 3 (I) के वित्तपोषण के लिए 1,02,480 मिलियन जापानी येन के ऑफिशियल डेवलपमेंट असिस्टेंस (ODA) के लिए एक ऋण समझौता किया है

चर्चा में क्यों: केंद्र सरकार और JICA ने बेंगलुरु मेट्रो रेल प्रोजेक्ट फेज 3 (I) के वित्तपोषण के लिए 1,02,480 मिलियन जापानी येन के ऑफिशियल डेवलपमेंट असिस्टेंस (ODA) के लिए एक ऋण समझौता किया है।

इस परियोजना के अंतर्गत लगभग 44.65 किलोमीटर लंबी मेट्रो लाइनों और 31 एलिवेटेड स्टेशनों के लिए सिविल और आर्किटेक्चरल कार्य शामिल हैं। बेंगलुरु में बढ़ते ट्रैफिक डिमांड और शहरी भीड़भाड़ की समस्या को हल करने के लिए इसे जनवरी 2032 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यऋण राशि: 1,02,480 मिलियन जापानी येन।
  • स्थानबेंगलुरु मेट्रो रेल प्रोजेक्ट फेज 3 (I) में 44.65 किलोमीटर की मेट्रो लाइनें शामिल हैं।
  • तथ्यप्रोजेक्ट पूरा होने का लक्ष्य: जनवरी 2032।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारतीय महानगरों में शहरी बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण में अंतर्राष्ट्रीय विकास सहायता की भूमिका और सतत शहरी गतिशीलता पर इसके प्रभाव का विश्लेषण कीजिए।

  • कर्ज की स्थिरता: ODA-फंडेड इंफ्रास्ट्रक्चर और लंबी अवधि की राजकोषीय देनदारियों के बीच संतुलन
  • अर्बन मोबिलिटी: मास रैपिड ट्रांजिट विस्तार के जरिए कार्बन फुटप्रिंट कम करना
  • प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन: केंद्र सरकार, राज्य निकायों और अंतरराष्ट्रीय लेंडर्स के बीच तालमेल

मुख्य शब्द: आधिकारिक विकास सहायता · अर्बन मोबिलिटी · इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग · मास रैपिड ट्रांजिट · टिकाऊ शहरीकरण

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पिछले आधे दशक में मीठे पानी की प्रवासी मछलियों की आबादी में 81% की गिरावट देखी गई है

चर्चा में क्यों: पिछले आधे दशक में मीठे पानी की प्रवासी मछलियों की आबादी में 81% की गिरावट देखी गई है। इस कारण UN ने गोल्डन महसिर और गूंच कैटफिश सहित 30 प्रमुख मछली प्रजातियों को वैश्विक संरक्षण के लिए प्राथमिकता दी है।

अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक अध्ययन से संकेत मिलता है कि अत्यधिक मछली पकड़ना (overfishing) और आवास का विनाश मीठे पानी की प्रवासी मछलियों के लिए प्राथमिक खतरे हैं। IUCN ने मीठे पानी की प्रवासी मछलियों की 15,000 से अधिक प्रजातियों का आकलन किया है, जिनमें से 325 प्रजातियों की पहचान की गई है जिन्हें एक वैश्विक निगरानी समझौते में शामिल करने की आवश्यकता है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • पर्यावरणगोल्डन महसीर और गूंच कैटफ़िश उन 30 फ्लैगशिप फिश प्रजातियों में शामिल हैं जिन्हें UN द्वारा वैश्विक संरक्षण के लिए प्राथमिकता दी गई है।
  • तथ्यपिछले आधे दशक में फ्रेशवॉटर माइग्रेटरी फिश (Freshwater migratory fish) की आबादी में अनुमानित 81% की गिरावट आई है।
  • संस्थाIUCN (International Union for the Conservation of Nature) ने मीठे पानी की प्रवासी मछलियों (freshwater migratory fish) की 15,000 से अधिक प्रजातियों का आकलन किया है।
  • अंतर्राष्ट्रीय संगठनUN ने तीन साल के भीतर कन्वेंशन ऑन द कंजर्वेशन ऑफ माइग्रेटरी स्पीशीज (Convention on the Conservation of Migratory Species) में 30 प्राथमिकता वाली मछली की प्रजातियों को जोड़ने का प्रस्ताव दिया है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: प्रवासी मछली की घटती आबादी के पारिस्थितिक और आर्थिक निहितार्थों की चर्चा कीजिए और आवास के नुकसान को कम करने में अंतर्राष्ट्रीय संरक्षण ढाँचों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन कीजिए।

  • बायोडायवर्सिटी का नुकसान: ओवरफिशिंग और हैबिटेट डिग्रेडेशन के कारण एक्वाटिक फूड वेब्स का अपरिवर्तनीय पतन
  • रेगुलेटरी गैप: सीमा पार प्रवासी प्रजातियों से निपटने में मौजूदा मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क की सीमाएं
  • आर्थिक ट्रेड-ऑफ: कारीगर और कमर्शियल फिशिंग आजीविका और दीर्घकालिक पारिस्थितिक स्थिरता के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: जैव विविधता संरक्षण · प्रवासी प्रजातियां · आवास का क्षरण · अत्यधिक मछली पकड़ना · सीमा पार शासन

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › अंतरिक्ष तकनीक (ISRO, मिशन)प्रीलिम्स

NASA और यूरोपियन स्पेस एजेंसी चंद्रमा पर लंबे समय तक मानव उपस्थिति को सुगम बनाने के लिए वहां रहने हेतु 'इन्फ्लेटेबल हैबिटेट्स' (Inflatable habitats) के विकल्प पर विचार कर रहे हैं

चर्चा में क्यों: NASA और यूरोपियन स्पेस एजेंसी चंद्रमा पर लंबे समय तक मानव उपस्थिति को सुगम बनाने के लिए वहां रहने हेतु 'इन्फ्लेटेबल हैबिटेट्स' (Inflatable habitats) के विकल्प पर विचार कर रहे हैं।

NASA और यूरोपियन स्पेस एजेंसी (European Space Agency) ऐसे इन्फ्लेटेबल हैबिटेट्स (inflatable habitats) पर शोध कर रहे हैं जिन्हें संकुचित रूप में ले जाया जा सकता है और चंद्रमा की सतह पर फुलाया जा सकता है। इन संरचनाओं को कम द्रव्यमान (low mass), उच्च आयतन दक्षता (high volume efficiency) और अंतरिक्ष यात्रियों के लिए रेडिएशन शील्डिंग (radiation shielding) प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकInflatable habitats को इस तरह डिजाइन किया गया है कि उन्हें कंप्रेस्ड फॉर्म (compressed form) में ट्रांसपोर्ट किया जा सके और चंद्रमा पर पहुँचने पर इन्फ्लेट (inflate) किया जा सके।
  • विज्ञान-तकनीकइन्फ्लेटेबल लूनर हैबिटेट्स (inflatable lunar habitats) के मुख्य फायदों में कम द्रव्यमान (low mass), उच्च वॉल्यूम एफिशिएंसी (high volume efficiency) और रेडिएशन शील्डिंग (radiation shielding) शामिल हैं।
  • पदNASA और European Space Agency (ESA) इन लूनर हैबिटेशन (lunar habitation) समाधानों की खोज करने वाली प्राथमिक एजेंसियां हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: चंद्रमा पर दीर्घकालिक मानव निवास स्थापित करने की तकनीकी और रसद संबंधी चुनौतियों तथा अंतरिक्ष के खतरों पर विजय प्राप्त करने में नवीन इंजीनियरिंग की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

  • रेडिएशन मिटिगेशन: हाई-एनर्जी कॉस्मिक किरणों और सोलर फ्लेयर्स के खिलाफ इंजीनियरिंग शील्डिंग
  • लॉजिस्टिकल एफिशिएंसी: पेलोड मास की सीमाओं और अधिक लिविंग स्पेस की ज़रूरत के बीच संतुलन
  • सस्टेनेबिलिटी: लंबे समय तक चंद्रमा पर रहने के लिए लाइफ-सपोर्ट सिस्टम विकसित करना

मुख्य शब्द: चंद्र आवास · अंतरिक्ष अन्वेषण · रेडिएशन शील्डिंग · एयरोस्पेस इंजीनियरिंग · सस्टेनेबल स्पेस मिशन

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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत के मीडिया और डिजिटल क्षेत्रों को मजबूत करने के लिए गूगल (Google) और यूट्यूब (YouTube) के साथ साझेदारी में 'नेशनल AI स्किलिंग इनिशिएटिव' (National AI Skilling Initiative) का अनावरण किया

चर्चा में क्यों: केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत के मीडिया और डिजिटल क्षेत्रों को मजबूत करने के लिए गूगल (Google) और यूट्यूब (YouTube) के साथ साझेदारी में 'नेशनल AI स्किलिंग इनिशिएटिव' (National AI Skilling Initiative) का अनावरण किया।

इस पहल में सरकार, Google और YouTube के बीच भारतीय इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज (IICT) के माध्यम से साझेदारी शामिल है। इसमें WAVES OTT पर एक नागरिक निर्माता प्लेटफॉर्म 'MyWAVES' की शुरुआत और DD Free Dish सेवाओं के लिए उन्नत इलेक्ट्रॉनिक प्रोग्राम गाइड (EPG) और इन-बिल्ट सैटेलाइट ट्यूनर्स की तैनाती भी शामिल है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • विज्ञान-तकनीकनेशनल AI स्किलिंग इनिशिएटिव (National AI Skilling Initiative): गूगल (Google) और यूट्यूब (YouTube) के साथ साझेदारी में सरकार द्वारा संचालित एक अभियान।
  • संस्थाइंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज (IICT): यह संस्था AI स्किलिंग इनिशिएटिव (AI skilling initiative) को सुगम बनाने का कार्य करती है।
  • तथ्यMyWAVES: WAVES OTT प्लेटफॉर्म पर लॉन्च किया गया एक सिटीजन क्रिएटर प्लेटफॉर्म।
  • तथ्यDD Free Dish: इसे एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक प्रोग्राम गाइड (Electronic Programme Guide) और इन-बिल्ट सैटेलाइट ट्यूनर्स के जरिए बेहतर बनाया जाएगा।
मेन्स के लिए

प्रश्न: एआई (AI) तकनीक का लोकतंत्रीकरण और 'ऑरेंज इकोनॉमी' (Orange Economy) को बढ़ावा देना भारत के एक वैश्विक डिजिटल महाशक्ति बनने के लक्ष्य में किस प्रकार योगदान दे सकता है, चर्चा कीजिए।

  • स्किल गैप: पारंपरिक मीडिया शिक्षा और बदलते AI-आधारित कंटेंट क्रिएशन टूल्स के बीच के अंतर को दूर करना
  • मार्केट लोकतंत्रीकरण: पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप और OTT प्लेटफॉर्म के जरिए स्वतंत्र क्रिएटर्स के लिए बाधाएं कम करना

मुख्य शब्द: ऑरेंज इकोनॉमी · तकनीक का लोकतंत्रीकरण · पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप · डिजिटल स्किलिंग · क्रिएटिव इकोनॉमी

खगोलशास्त्री (Astronomers) SpaceX के 'Reflect Orbital' मिरर प्रोजेक्ट और एक मिलियन AI-पावर्ड सैटेलाइट्स की योजना का विरोध कर रहे हैं

चर्चा में क्यों: खगोलशास्त्री (Astronomers) SpaceX के 'Reflect Orbital' मिरर प्रोजेक्ट और एक मिलियन AI-पावर्ड सैटेलाइट्स की योजना का विरोध कर रहे हैं। यह विरोध प्रकाश प्रदूषण (light pollution) और खगोलीय अवलोकनों (astronomical observations) में होने वाली बाधाओं की चिंताओं के कारण किया जा रहा है।

SpaceX एक मिलियन AI-आधारित डेटा प्रोसेसिंग सैटेलाइट लॉन्च करने की योजना बना रहा है। Reflect Orbital प्रोजेक्ट का उद्देश्य अंतरिक्ष में दर्पण (mirrors) लॉन्च करना है ताकि वे सूरज की रोशनी को परावर्तित कर सकें। वैज्ञानिकों का तर्क है कि इससे रात के आकाश को अपूरणीय क्षति (irreversible damage) हो सकती है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकReflect Orbital: एक प्रोजेक्ट जिसका उद्देश्य सूरज की रोशनी को रिफ्लेक्ट करने के लिए अंतरिक्ष में मिरर्स (mirrors) लॉन्च करना है।
  • तथ्यSpaceX के प्रस्तावित सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन में AI-पावर्ड डेटा प्रोसेसिंग सैटेलाइट्स की एक मिलियन संख्या शामिल है।
  • विज्ञान-तकनीकऑर्बिटल मिरर्स और सैटेलाइट्स से होने वाला लाइट पोल्यूशन अंतरिक्ष में धुंधली वस्तुओं (faint objects) के अध्ययन में बाधा डाल सकता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: तेजी से होते वाणिज्यिक अंतरिक्ष अन्वेषण और एक वैश्विक साझा संसाधन के रूप में रात्रि आकाश के संरक्षण के बीच उत्पन्न होने वाले द्वंद्व का विश्लेषण कीजिए।

  • रेगुलेटरी वैक्यूम: ऑर्बिटल लाइट पॉल्यूशन को सीमित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाइंडिंग फ्रेमवर्क की कमी
  • वैज्ञानिक सत्यनिष्ठा: डीप-स्पेस ऑब्जर्वेशन और रेडियो एस्ट्रोनॉमी डेटा में हस्तक्षेप
  • स्पेस डेब्री: विशाल सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन से ऑर्बिटल कंजेशन का संचयी जोखिम

मुख्य शब्द: प्रकाश प्रदूषण · अंतरिक्ष का कचरा · ऑर्बिटल मैकेनिक्स · ग्लोबल कॉमन्स · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क

वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन (WMO) ने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के कारण पृथ्वी की जलवायु में पैदा हुए एक अभूतपूर्व ऊर्जा असंतुलन (energy imbalance) के संबंध में चेतावनी जारी की है, जो एल नीनो (El Niño) के आने से और अधिक गंभीर हो गया है

चर्चा में क्यों: वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन (WMO) ने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के कारण पृथ्वी की जलवायु में पैदा हुए एक अभूतपूर्व ऊर्जा असंतुलन (energy imbalance) के संबंध में चेतावनी जारी की है, जो एल नीनो (El Niño) के आने से और अधिक गंभीर हो गया है।

WMO ने चेतावनी दी है कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन से ऊर्जा असंतुलन पैदा हो रहा है, जिसके कारण 2025 में रिकॉर्ड तोड़ तापमान दर्ज किया गया। UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पिघलते हुए आइस कैप्स और बढ़ते समुद्र के स्तर के प्रभाव को कम करने के लिए जीवाश्म ईंधन (fossil fuels) से नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों (renewable energy sources) की ओर बढ़ने का आह्वान किया है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • संस्थाWMO: वर्ल्ड मेटियोरोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन (World Meteorological Organization)।
  • तथ्यवर्ष 2025 में रिकॉर्ड तोड़ तापमान दर्ज किया गया।
  • स्थानएल नीनो (El Niño): एक प्राकृतिक वार्मिंग फेज (warming phase) जिसकी भविष्यवाणी जलवायु रुझानों को और गंभीर बनाने के लिए की गई है।
  • विज्ञान-तकनीकग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (Greenhouse gas emissions) को वर्तमान ऊर्जा असंतुलन (energy imbalance) का मुख्य कारण माना गया है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: वैश्विक जलवायु स्थिरता पर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के प्रभावों की चर्चा कीजिए और चरम मौसमी घटनाओं के शमन के लिए नवीकरणीय ऊर्जा की ओर संक्रमण की आवश्यकता का मूल्यांकन कीजिए।

  • ऊर्जा असंतुलन: मानव निर्मित उत्सर्जन और ध्रुवीय आइस कैप्स के तेज़ी से पिघलने के बीच संबंध
  • क्लाइमेट फीडबैक लूप्स: नेचुरल एल नीनो साइकल और इंसानों द्वारा पैदा की गई ग्लोबल वार्मिंग के बीच इंटरैक्शन
  • पॉलिसी ट्रांज़िशन: ग्लोबल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को फॉसिल फ्यूल्स से रिन्यूएबल्स में बदलने में स्ट्रक्चरल बाधाएं

मुख्य शब्द: ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन · ऊर्जा असंतुलन · रिन्यूएबल एनर्जी ट्रांज़िशन · जलवायु परिवर्तन का प्रभाव कम करना · एल नीनो

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › जैव प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य अनुसंधानप्रीलिम्स

वैज्ञानिकों ने खतरनाक वातावरण में रास्ता खोजने और पाइपलाइन से होने वाले रिसाव (leaks) का पता लगाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक बैकपैक से लैस 'साइबोर्ग कॉकरोच' (cyborg cockroaches) विकसित किए हैं

चर्चा में क्यों: वैज्ञानिकों ने खतरनाक वातावरण में रास्ता खोजने और पाइपलाइन से होने वाले रिसाव (leaks) का पता लगाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक बैकपैक से लैस 'साइबोर्ग कॉकरोच' (cyborg cockroaches) विकसित किए हैं।

इन बायो-रोबॉट्स को छोटे पेलोड और सेंसर ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, ताकि बुनियादी ढांचे (infrastructure) पर रियल-टाइम डेटा प्रदान किया जा सके। तंग जगहों में उनकी चपलता (agility) के कारण, पारंपरिक रोबॉट्स के विकल्प के रूप में इनकी संभावनाओं को तलाशा जा रहा है।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • विज्ञान-तकनीकCyborg कॉकरोच (Cockroaches): इंडस्ट्रियल मॉनिटरिंग के लिए इलेक्ट्रॉनिक बैकपैक से लैस कीड़े।
  • तथ्यप्राथमिक उपयोग: खतरनाक वातावरण में छिपे हुए पाइपलाइन लीकेज (leaks) का पता लगाना।
मेन्स के लिए

प्रश्न: खतरनाक वातावरण में औद्योगिक सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की निगरानी को बढ़ाने में जैव-रोबोटिक्स (bio-robotics) और कीट-आधारित सेंसरों (insect-based sensors) के एकीकरण की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

  • ऑपरेशनल एडवांटेज: सीमित जगहों में पारंपरिक मैकेनिकल रोबोट्स के मुकाबले जैविक जीवों की बेहतर मूवैबिलिटी
  • डेटा विश्वसनीयता: बायो-हाइब्रिड सिस्टम से रियल-टाइम सेंसर कैलिब्रेशन और डेटा ट्रांसमिशन में चुनौतियां

मुख्य शब्द: बायो-रोबोटिक्स · इंफ्रास्ट्रक्चर मॉनिटरिंग · साइबॉर्ग टेक्नोलॉजी · औद्योगिक सुरक्षा · सेंसर इंटीग्रेशन

EarthDay.org के शोध से पता चलता है कि भूमि की कमी और पेड़ों के जीवित रहने की दर (survival rates) के कारण केवल पेड़ लगाना ही ग्लोबल वार्मिंग से लड़ने के लिए पर्याप्त नहीं है

चर्चा में क्यों: EarthDay.org के शोध से पता चलता है कि भूमि की कमी और पेड़ों के जीवित रहने की दर (survival rates) के कारण केवल पेड़ लगाना ही ग्लोबल वार्मिंग से लड़ने के लिए पर्याप्त नहीं है। यह शोध वनों के संरक्षण (forest preservation) को एक बेहतर रणनीति के रूप में रेखांकित करता है।

EarthDay.org के शोध से पता चलता है कि पेड़ों में कार्बन भंडारण की एक भौतिक सीमा है और यह भूमि की उपलब्धता तथा स्थान से प्रभावित होता है। अध्ययन का निष्कर्ष है कि मौजूदा वनों का संरक्षण नए वृक्षारोपण की तुलना में अधिक प्रभावी है, क्योंकि वनों की कटाई (deforestation) अभी भी ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का एक प्राथमिक स्रोत बनी हुई है।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • पर्यावरणEarthDay.org के रिसर्च के अनुसार, पेड़ लगाने की प्रभावशीलता के लिए ज़मीन की उपलब्धता और दीर्घकालिक उत्तरजीविता (long-term survival) प्रमुख सीमित कारक (limiting factors) हैं।
  • तथ्यपुनर्वनीकरण (Reforestation) के प्रयासों के बावजूद, वनों की कटाई (Deforestation) को ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में पहचाना गया है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: वैश्विक जलवायु शमन रणनीतियों में व्यापक स्तर पर वनीकरण के बजाय वन संरक्षण को प्राथमिकता देने के कारणों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

  • इकोलॉजिकल बॉटलनैक: नए प्लांटेशन की सीमित कार्बन सिक्वेस्ट्रेशन क्षमता बनाम पुराने पुराने-ग्रोथ बायोमास
  • भूमि-उपयोग विवाद: पुनर्वनीकरण प्रोजेक्ट्स और कृषि/शहरी विस्तार की जरूरतों के बीच मुकाबला
  • उत्सर्जन डायनेमिक्स: वनों की कटाई से होने वाला कार्बन उत्सर्जन नए पौधों द्वारा किए जाने वाले सीक्वेस्ट्रेशन रेट से अधिक है

मुख्य शब्द: कार्बन सिक्वेस्ट्रेशन · जलवायु शमन · वनों की कटाई · वृक्षारोपण · ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › परमाणु एवं नई ऊर्जा तकनीकप्रीलिम्स

प्रधानमंत्री मोदी और जल शक्ति मंत्रालय ने विश्व जल दिवस पर जल संरक्षण और टिकाऊ प्रथाओं पर जोर दिया, जिसमें SDG 6 के लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया

चर्चा में क्यों: प्रधानमंत्री मोदी और जल शक्ति मंत्रालय ने विश्व जल दिवस पर जल संरक्षण और टिकाऊ प्रथाओं पर जोर दिया, जिसमें SDG 6 के लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

जल शक्ति मंत्रालय ने 23 मार्च को नई दिल्ली में 'वर्ल्ड वॉटर डे कॉन्क्लेव 2026' का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य केंद्र उद्योग-आधारित समाधान, डेटा-आधारित शासन और 2030 तक जल तक समान पहुंच सुनिश्चित करना है।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • अंतर्राष्ट्रीय संगठनSDG 6: 2030 तक पानी तक समान पहुंच के लिए संयुक्त राष्ट्र का लक्ष्य।
  • स्थानवर्ल्ड वॉटर डे कॉन्क्लेव 2026: नई दिल्ली में आयोजित।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में सतत विकास लक्ष्य-6 (SDG-6) की प्राप्ति में डेटा-आधारित जल शासन और उद्योग-आधारित समाधानों के महत्व का विश्लेषण कीजिए।

  • गवर्नेंस गैप: औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों में एकीकृत ताजे पानी प्रबंधन की ज़रूरत
  • डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर: पानी के इस्तेमाल की एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग की ज़रूरत
  • इक्विटी मुद्दे: औद्योगिक जल मांग और पिछड़े समुदायों के लिए सार्वभौमिक पहुंच के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: सतत विकास लक्ष्य · जल शासन · संसाधन प्रबंधन · समावेशी शासन · जल संरक्षण

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › IT, AI, सेमीकंडक्टर एवं कंप्यूटिंगप्रीलिम्स + मेन्स

NASA और यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) ने संवेदनशील सैटेलाइट सिस्टम पर AI-आधारित साइबर हमलों के कारण होने वाले संभावित 'सैटेलाइट कयामत' (satellite apocalypse) के प्रति चेतावनी दी है

चर्चा में क्यों: NASA और यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) ने संवेदनशील सैटेलाइट सिस्टम पर AI-आधारित साइबर हमलों के कारण होने वाले संभावित 'सैटेलाइट कयामत' (satellite apocalypse) के प्रति चेतावनी दी है।

ESA और NASA ने पहचान की है कि पुराने डिजाइन और एकीकृत साइबर सुरक्षा उपायों (integrated cybersecurity measures) की कमी के कारण सैटेलाइट तकनीक अत्यधिक संवेदनशील है। ये सिस्टम संचार, नेविगेशन, मौसम के पूर्वानुमान और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • विज्ञान-तकनीकESA: यूरोप में स्पेस एक्सप्लोरेशन और सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के लिए जिम्मेदार यूरोपियन स्पेस एजेंसी (European Space Agency)।
  • तथ्यविशेषज्ञों ने 2 साल के भीतर संभावित सैटेलाइट अपोकैलिप्स (satellite apocalypse) की चेतावनी दी है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: अंतरिक्ष बुनियादी ढांचे पर एआई-संचालित साइबर हमलों के सुरक्षा निहितार्थों की चर्चा कीजिए और वैश्विक अंतरिक्ष प्रणाली की सुदृढ़ता बढ़ाने के लिए आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए।

  • इंफ्रास्ट्रक्चर की कमजोरी: पुराने सैटेलाइट डिज़ाइन में आधुनिक एन्क्रिप्शन और रियल-टाइम थ्रेट डिटेक्शन की कमी
  • भू-राजनीतिक जोखिम: वैश्विक नेविगेशन और कम्युनिकेशन नेटवर्क में एक के बाद एक फेलियर होने की संभावना
  • रेगुलेटरी गैप: स्पेस-आधारित साइबर सिक्योरिटी स्टैंडर्ड्स के लिए एकीकृत अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल की कमी

मुख्य शब्द: साइबर सिक्योरिटी · स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर · आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस · राष्ट्रीय सुरक्षा · लचीलापन

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › अंतरिक्ष तकनीक (ISRO, मिशन)प्रीलिम्स

NASA ने अप्रैल 2026 में होने वाले आर्टेमिस II (Artemis II) मिशन के लॉन्च से पहले उच्च-ऊर्जा विकिरण (high-energy radiation) के खतरों की निगरानी के लिए 24/7 सोलर वॉच और एक नया स्पेस वेदर एनालिसिस ऑफिस (Space Weather Analysis Office) स्थापित किया है

चर्चा में क्यों: NASA ने अप्रैल 2026 में होने वाले आर्टेमिस II (Artemis II) मिशन के लॉन्च से पहले उच्च-ऊर्जा विकिरण (high-energy radiation) के खतरों की निगरानी के लिए 24/7 सोलर वॉच और एक नया स्पेस वेदर एनालिसिस ऑफिस (Space Weather Analysis Office) स्थापित किया है।

NASA का 'मून टू मार्स स्पेस वेदर एनालिसिस ऑफिस' सौर गतिविधियों के पूर्वानुमान के लिए सूर्य की परिक्रमा करने वाले उपग्रहों और मंगल ग्रह पर स्थित 'परसेवेरेंस' (Perseverance) रोवर से प्राप्त डेटा का उपयोग करता है। 'ओरियन' (Orion) अंतरिक्ष यान को HERA रेडिएशन सेंसर से लैस किया गया है, जो चालक दल को वास्तविक समय (real-time) में अलर्ट प्रदान करता है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • विज्ञान-तकनीकArtemis II: NASA मिशन जिसे अप्रैल 2026 में लॉन्च करने की योजना है।
  • विज्ञान-तकनीकPerseverance rover: वर्तमान में Mars पर सौर गतिविधि (solar activity) का डेटा प्रदान करने के लिए कार्यरत है।
  • विज्ञान-तकनीकHERA: Orion स्पेसक्राफ्ट पर रियल-टाइम अलर्ट के लिए रेडिएशन सेंसर्स।
  • तथ्यमून टू मार्स स्पेस वेदर एनालिसिस ऑफिस (Moon to Mars Space Weather Analysis Office): हाई-एनर्जी रेडिएशन खतरों की निगरानी के लिए स्थापित एजेंसी।
मेन्स के लिए

प्रश्न: उच्च-विकिरण वाले वातावरण में मानव अंतरिक्ष अन्वेषण से जुड़ी तकनीकी और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों तथा इन जोखिमों को कम करने में अंतरिक्ष मौसम निगरानी की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

  • रेडिएशन शील्डिंग: हाई-एनर्जी सोलर पार्टिकल्स से पर्याप्त सुरक्षा देने में स्पेसक्राफ्ट मास की सीमाएं
  • डेटा इंटीग्रेशन: रियल-टाइम टेरेस्ट्रियल और ऑर्बिटल सुरक्षा के लिए पर्सिवियरेंस रोवर जैसे मल्टी-प्लैनेटरी एसेट्स का इस्तेमाल

मुख्य शब्द: स्पेस वेदर · सौर विकिरण · आर्टेमिस प्रोग्राम · रेडिएशन शील्डिंग · अंतरिक्ष अन्वेषण

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › IT, AI, सेमीकंडक्टर एवं कंप्यूटिंगप्रीलिम्स

IIT मद्रास ने उभरती हुई तकनीकी और शासन संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए रोबोटिक्स

चर्चा में क्यों: IIT मद्रास ने उभरती हुई तकनीकी और शासन संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर मैटेरियल्स और पब्लिक पॉलिसी सहित फ्रंटियर टेक्नोलॉजीज में नए MA और M.Tech प्रोग्राम शुरू किए हैं।

IIT मद्रास ने मानविकी और सामाजिक विज्ञान विभाग के अंतर्गत पब्लिक पॉलिसी (Public Policy) में MA कोर्स शुरू किया है। इसके साथ ही सेमीकंडक्टर मैटेरियल्स टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स और मैकेनिकल सिस्टम्स में कंप्यूटेशनल इंजीनियरिंग में M.Tech प्रोग्राम भी शुरू किए गए हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाIIT मद्रास: डिपार्टमेंट ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज, MA इन पब्लिक पॉलिसी कोर्स ऑफर करता है।
  • विज्ञान-तकनीकसेमीकंडक्टर मैटेरियल्स टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स और मैकेनिकल सिस्टम्स में कम्प्यूटेशनल इंजीनियरिंग में M.Tech प्रोग्राम शुरू किए गए।
  • तथ्यM.Tech प्रोग्राम्स Metallurgical and Materials Engineering, Engineering Design, और Mechanical Engineering विभागों द्वारा ऑफर किए जाते हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत के मानव संसाधन विकास में सार्वजनिक नीति शिक्षा के साथ रोबोटिक्स और सेमीकंडक्टर्स जैसी अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के एकीकरण के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • स्किल गैप: सेमीकंडक्टर और रोबोटिक्स मैन्युफैक्चरिंग में तेज़ी से हो रही प्रगति के साथ एकेडमिक करिकुलम को जोड़ना
  • पॉलिसी-टेक नेक्सस: तकनीकी इंजीनियरिंग क्षमताओं और सार्वजनिक नीति कार्यान्वयन के बीच की दूरी को कम करना

मुख्य शब्द: फ्रंटियर टेक्नोलॉजीज · मानव संसाधन विकास · सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी · पब्लिक पॉलिसी · करिकुलम अलाइनमेंट

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › जैव प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य अनुसंधानप्रीलिम्स + मेन्स

CSIR–CCMB के वैज्ञानिकों ने अपशिष्ट जल (wastewater) पर एक अध्ययन किया है, जिसमें दिल्ली, मुंबई

चर्चा में क्यों: CSIR–CCMB के वैज्ञानिकों ने अपशिष्ट जल (wastewater) पर एक अध्ययन किया है, जिसमें दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में व्यापक रूप से एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (Antimicrobial Resistance - AMR) पाया गया है। इस अध्ययन में रोगजनकों (pathogens) की रियल-टाइम निगरानी की वकालत की गई है।

इस अध्ययन में भारत के चार प्रमुख शहरों से लिए गए 447 अपशिष्ट जल (wastewater) के नमूनों का विश्लेषण किया गया। इसमें यह पाया गया कि बैक्टीरिया विशिष्ट जीन के माध्यम से प्रतिरोध विकसित करते हैं, जिन्हें अन्य बैक्टीरिया के साथ साझा किया जा सकता है। इस प्रक्रिया के कारण एंटीबायोटिक दवाओं का प्रभाव कम हो जाता है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाCSIR–सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB) ने AMR मैपिंग स्टडी आयोजित की।
  • तथ्यइस अध्ययन में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई से लिए गए 447 वेस्टवॉटर (wastewater) सैंपल्स का विश्लेषण किया गया।
  • विज्ञान-तकनीकAMR विशिष्ट जीन्स (genes) द्वारा संचालित होता है जिन्हें बैक्टीरिया के बीच साझा किया जा सकता है, जो एंटीबायोटिक की प्रभावशीलता को प्रभावित करते हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: शहरी भारत में रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR) के सार्वजनिक स्वास्थ्य निहितार्थों पर चर्चा कीजिए और एक सक्रिय शमन रणनीति के रूप में अपशिष्ट जल-आधारित निगरानी की व्यवहार्यता का मूल्यांकन कीजिए।

  • निगरानी में कमी: नगर निगम के सीवेज सिस्टम में रियल-टाइम पैथोजन ट्रैकिंग के लिए स्टैंडर्ड सिस्टम का अभाव
  • बायोलॉजिकल रिस्क: मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट बैक्टीरिया के तेज़ी से फैलने में हॉरिजॉन्टल जीन ट्रांसफर की भूमिका
  • पॉलिसी ट्रेड-ऑफ: अपशिष्ट जल उपचार की लागत और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस · पैथोजन सर्विलांस · हॉरिजॉन्टल जीन ट्रांसफर · वन हेल्थ · सार्वजनिक स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › अंतरिक्ष तकनीक (ISRO, मिशन)प्रीलिम्स

NASA, बोइंग के स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) में देरी और लागत संबंधी समस्याओं के कारण, आर्टेमिस मिशनों में तेजी ला रहा है

चर्चा में क्यों: NASA, बोइंग के स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) में देरी और लागत संबंधी समस्याओं के कारण, आर्टेमिस मिशनों में तेजी ला रहा है। इसके लिए वह स्पेसएक्स के स्टारशिप को प्राथमिक ह्यूमन लैंडिंग सिस्टम (HLS) के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।

NASA ने 2027 के बाद से वार्षिक चंद्र लैंडिंग (Lunar Landings) की योजना बनाई है। चंद्रमा के परिवहन के लिए SpaceX के Starship को ह्यूमन लैंडिंग सिस्टम (Human Landing System - HLS) के रूप में उपयोग किया जाएगा, जबकि Boeing के SLS को केवल पृथ्वी की कक्षा (Earth Orbit) के प्रक्षेपण तक सीमित रखा जाएगा।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकStarship: SpaceX के उस वाहन को NASA के Artemis मिशन के लिए Human Landing System (HLS) के रूप में नामित किया गया है।
  • विज्ञान-तकनीकSpace Launch System (SLS): लागत और देरी की समस्याओं के कारण Boeing वाहन को केवल Earth orbit लॉन्च तक सीमित कर दिया गया है।
  • तथ्यNASA आर्टेमिस (Artemis) मिशन: इसकी योजनाओं में 2027 में एक उड़ान और उसके बाद वार्षिक लूनर लैंडिंग (lunar landings) शामिल हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: अंतरिक्ष अन्वेषण में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) की ओर बढ़ते रुझान और चंद्र अभियानों की लागत-प्रभावशीलता एवं गति पर इसके निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।

  • लागत-दक्षता का ट्रेड-ऑफ: सरकारी भारी लिफ्ट सिस्टम की उच्च लागत और प्राइवेट-सेक्टर के रियूजेबल लॉन्च व्हीकल के बीच संतुलन
  • रिस्क-शेयरिंग मॉडल: महत्वपूर्ण मानव-रेटेड लूनर ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम में प्राइवेट कॉन्ट्रैक्टर्स की विश्वसनीयता का मूल्यांकन

मुख्य शब्द: पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप · अंतरिक्ष अन्वेषण · लागत-प्रभावशीलता · रीयूजेबल टेक्नोलॉजी · आर्टेमिस प्रोग्राम

ISRO ने भारतीय अंतरिक्ष मलबे (space debris) के 129 ट्रैक करने योग्य टुकड़ों की पहचान की है और टकराव के जोखिमों और ऑर्बिटल सस्टेनेबिलिटी (orbital sustainability) से निपटने के लिए 'डिब्रिस फ्री स्पेस मिशन' (Debris Free Space Mission

चर्चा में क्यों: ISRO ने भारतीय अंतरिक्ष मलबे (space debris) के 129 ट्रैक करने योग्य टुकड़ों की पहचान की है और टकराव के जोखिमों और ऑर्बिटल सस्टेनेबिलिटी (orbital sustainability) से निपटने के लिए 'डिब्रिस फ्री स्पेस मिशन' (Debris Free Space Mission - DFSM) शुरू किया है।

ISRO ने भारतीय अंतरिक्ष कचरे के 129 ट्रैक करने योग्य टुकड़ों की पहचान की है, जिनमें निष्क्रिय सैटेलाइट और PSLV, GSLV और LVM3 लॉन्च से निकले रॉकेट बॉडी शामिल हैं। सुरक्षित डी-ऑर्बिटिंग (deorbiting) के लिए सैटेलाइट डिजाइन करने के उद्देश्य से 2024 में 'डिब्रिस फ्री स्पेस मिशन' (Debris Free Space Mission - DFSM) शुरू किया गया था।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • विज्ञान-तकनीकDFSM: भविष्य में स्पेस डेब्रिस (space debris) को कम करने के लिए ISRO द्वारा 2024 में लॉन्च किया गया मिशन।
  • तथ्यISRO ने पृथ्वी की कक्षा में घूमने वाले 129 ट्रैक करने योग्य भारतीय स्पेस डिब्रिस (space debris) के टुकड़ों की पहचान की है।
  • विज्ञान-तकनीकप्रोजेक्ट Netra: अंतरिक्ष वस्तुओं की निगरानी और टकराव के अलर्ट (collision alerts) प्रदान करने के लिए ISRO की एक पहल।
  • विज्ञान-तकनीकस्पेस डेब्रिस (Space debris) के स्रोत: इसमें निष्क्रिय सैटेलाइट्स, रॉकेट बॉडीज और PSLV, GSLV और LVM3 लॉन्च से निकले टुकड़े शामिल हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: अंतरिक्ष मलबे के प्रबंधन की चुनौतियों और कक्षीय अंतरिक्ष की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के महत्व का विश्लेषण कीजिए।

  • रेगुलेटरी वैक्यूम: बेकार हो चुके सैटेलाइट्स के लिए अनिवार्य डी-ऑर्बिटिंग प्रोटोकॉल पर बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संधियों की कमी
  • तकनीकी बाधा: हाई-स्पीड ऑर्बिटल मैकेनिक्स के कारण छोटे मलबे से टकराने से बचने की गणना जटिल हो गई
  • आर्थिक ट्रेड-ऑफ: सैटेलाइट लॉन्च की कमर्शियल व्यवहार्यता के मुकाबले मलबे को कम करने वाली टेक्नोलॉजी की लागत को संतुलित करना

मुख्य शब्द: स्पेस सस्टेनेबिलिटी · ऑर्बिटल डेब्रीस · डीऑर्बिटिंग प्रोटोकॉल्स · स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस · स्पेस गवर्नेंस

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यूनिवर्सिटी ऑफ यूटा हेल्थ के वैज्ञानिकों ने प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम (Plasmodium falciparum) परजीवी में एक 'रॉकेट इंजन' सिस्टम की खोज की है

चर्चा में क्यों: यूनिवर्सिटी ऑफ यूटा हेल्थ के वैज्ञानिकों ने प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम (Plasmodium falciparum) परजीवी में एक 'रॉकेट इंजन' सिस्टम की खोज की है, जो आयरन क्रिस्टल्स (iron crystals) को आगे बढ़ाने के लिए हाइड्रोजन पेरोक्साइड का उपयोग करता है।

इस खोज में प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम (Plasmodium falciparum) परजीवी के भीतर लोहे के सूक्ष्म क्रिस्टल शामिल हैं। ये क्रिस्टल प्राकृतिक रूप से उत्पन्न हाइड्रोजन पेरोक्साइड द्वारा संचालित एक प्रतिक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ते हैं, जो परजीवी को जीवित रहने और विषाक्त पदार्थों को बेअसर करने में मदद करते हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • विज्ञान-तकनीकप्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम (Plasmodium falciparum): वह विशिष्ट परजीवी (parasite) जो मलेरिया का कारण बनता है।
  • विज्ञान-तकनीकमैकेनिज्म: आयरन क्रिस्टल्स को रॉकेट प्रोपल्शन (rocket propulsion) जैसी प्रतिक्रिया द्वारा आगे बढ़ाया जाता है।
  • तथ्यईंधन का स्रोत: परजीवी (parasite) के भीतर प्राकृतिक रूप से उत्पादित हाइड्रोजन पेरोक्साइड।
  • विज्ञान-तकनीकउपयोग: यह खोज लक्षित एंटी-मलेरियल दवाओं (anti-malarial drugs) और नैनोटेक्नोलॉजी (nanotechnology) के अनुप्रयोगों की ओर ले जा सकती है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: आणविक जीव विज्ञान और परजीवी यांत्रिकी में हुई प्रगति किस प्रकार संक्रामक रोगों के लिए लक्षित औषधि वितरण प्रणालियों (targeted drug delivery systems) के विकास में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकती है, इस पर चर्चा कीजिए।

  • ड्रग रेजिस्टेंस: टारगेटेड मॉलिक्यूलर इंटरफेरेंस के जरिए प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम के सर्वाइवल मैकेनिज्म को हराना
  • नैनोटेक्नोलॉजी एकीकरण: नई ड्रग डिलीवरी सिस्टम के लिए पैरासाइट प्रोपल्शन मैकेनिक्स का उपयोग

मुख्य शब्द: मॉलिक्यूलर बायोलॉजी · ड्रग डिलीवरी · प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम · नैनोटेक्नोलॉजी · पैथोजन सर्वाइवल

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NASA के हबल स्पेस टेलिस्कोप ने नवंबर 2025 में धूमकेतु C/2025 K1 (ATLAS) के कम से कम चार टुकड़ों में टूटने की तस्वीरें कैद की हैं

चर्चा में क्यों: NASA के हबल स्पेस टेलिस्कोप ने नवंबर 2025 में धूमकेतु C/2025 K1 (ATLAS) के कम से कम चार टुकड़ों में टूटने की तस्वीरें कैद की हैं।

हबल स्पेस टेलीस्कोप ने नवंबर 2025 की तीन दिनों की अवधि के दौरान धूमकेतु C/2025 K1 (ATLAS) के विखंडन को कैद किया। ऑबर्न यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों सहित अनुसंधान टीम ने इस विखंडन से उत्पन्न कम से कम चार अलग-अलग टुकड़ों की पहचान की।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकहबल स्पेस टेलिस्कोप (Hubble Space Telescope): NASA द्वारा संचालित एक स्पेस टेलिस्कोप जिसका उपयोग धूमकेतु C/2025 K1 की तस्वीरें लेने के लिए किया गया।
  • तथ्यकॉमेट C/2025 K1 (ATLAS) कम से कम चार अलग-अलग टुकड़ों में विभाजित हो गया।
  • स्थानऑबर्न यूनिवर्सिटी (Auburn University): धूमकेतु के विखंडन (fragmentation) के अवलोकन में शामिल शोध संस्थान।
मेन्स के लिए

प्रश्न: धूमकेतु विखंडन और उनकी रासायनिक संरचना के अध्ययन से प्रारंभिक सौर मंडल के विकास की हमारी समझ में किस प्रकार योगदान मिलता है, इसका विश्लेषण कीजिए।

  • कंपोजिशनल एनालिसिस: शुरुआती सोलर सिस्टम के केमिकल इवोल्यूशन को ट्रैक करने के लिए वायोलेटाइल कंपाउंड्स और मिनरल्स की पहचान
  • डायनेमिक मॉडलिंग: धूमकेतु के टूटने के कारणों के लिए मैकेनिकल स्ट्रेस और थर्मल प्रेशर को समझना

मुख्य शब्द: धूमकेतु का विखंडन · सोलर सिस्टम का विकास · एस्ट्रोफिजिकल ऑब्जर्वेशन · रासायनिक संरचना

GS3विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी › IT, AI, सेमीकंडक्टर एवं कंप्यूटिंगप्रीलिम्स + मेन्स

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक AI समिट में कहा कि भारत को स्वदेशी AI मॉडल विकसित करने और जिम्मेदार नवाचार (Responsible Innovation) को बढ़ावा देने के माध्यम से दुनिया की शीर्ष तीन AI महाशक्तियों में शामिल होने का लक्ष्य रखना चाहिए

चर्चा में क्यों: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक AI समिट में कहा कि भारत को स्वदेशी AI मॉडल विकसित करने और जिम्मेदार नवाचार (Responsible Innovation) को बढ़ावा देने के माध्यम से दुनिया की शीर्ष तीन AI महाशक्तियों में शामिल होने का लक्ष्य रखना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने भारत की प्रतिभाओं को सशक्त बनाने और एक समावेशी AI इकोसिस्टम (AI ecosystem) को बढ़ावा देने के लिए 'IndiaAI मिशन' को एक प्रमुख पहल के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कार्यबल के लिए नए अवसर पैदा करने के साथ-साथ, पूर्वाग्रहों को कम करने और सामाजिक चुनौतियों का समाधान करने के लिए जिम्मेदार AI तैनाती (responsible AI deployment) की आवश्यकता पर जोर दिया।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकIndiaAI मिशन: भारतीय प्रतिभाओं को सशक्त बनाने और AI इनोवेशन में एक वैश्विक लीडर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई एक सरकारी पहल।
  • तथ्यभारत का लक्ष्य: वैश्विक स्तर पर शीर्ष तीन AI सुपरपावर्स में शामिल होना।
  • विज्ञान-तकनीकResponsible AI: इसका मुख्य फोकस बायस (bias) को कम करने और यह सुनिश्चित करने पर है कि इसके लाभ सभी नागरिकों तक पहुँचें।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत की सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों के समाधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) की क्षमता का विश्लेषण कीजिए, साथ ही रोजगार विस्थापन और एल्गोरिथम संबंधी पूर्वाग्रहों से जुड़े जोखिमों पर भी चर्चा कीजिए।

  • स्किल गैप: वर्कफोर्स को AI-ऑगमेंटेड रोल्स में बदलने के लिए बड़े पैमाने पर स्किलिंग प्रोग्राम की ज़रूरत
  • नैतिक शासन: एल्गोरिद्मिक बायस को कम करने और समावेशिता सुनिश्चित करने के लिए फ्रेमवर्क के साथ तेज़ी से AI डिप्लॉयमेंट को संतुलित करना

मुख्य शब्द: ज़िम्मेदार AI · डिजिटल संप्रभुता · एल्गोरिद्मिक बायस · कौशल परिवर्तन · समावेशी इनोवेशन

AIPOWA द्वारा अवैध नियुक्ति के आरोप के साथ दायर एक याचिका के बाद, दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र और कंट्रोलर जनरल ऑफ पेटेंट्स

चर्चा में क्यों: AIPOWA द्वारा अवैध नियुक्ति के आरोप के साथ दायर एक याचिका के बाद, दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र और कंट्रोलर जनरल ऑफ पेटेंट्स, डिज़ाइन्स एंड ट्रेड मार्क्स को नोटिस जारी किया है।

ऑल इंडिया पेटेंट ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन (AIPOWA) ने पेटेंट, डिजाइन और ट्रेड मार्क्स के कंट्रोलर जनरल (CGPDTM) के रूप में प्रो. उन्नत पी. पंडित की नियुक्ति को चुनौती दी है। याचिका में पात्रता मानदंडों और चयन प्रक्रियाओं के संबंध में सरकारी नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाCGPDTM: पेटेंट्स, डिज़ाइन्स और ट्रेड मार्क्स के कंट्रोलर जनरल।
  • पदप्रो. उन्नत पी. पंडित: कंट्रोलर जनरल ऑफ पेटेंट्स, डिज़ाइन्स एंड ट्रेड मार्क्स।
  • स्थानदिल्ली हाई कोर्ट: याचिका पर अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction)।
मेन्स के लिए

प्रश्न: बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) नियामक ढांचे में प्रमुख अधिकारियों की नियुक्ति में पारदर्शी चयन मानदंडों और पात्रता मानकों के महत्व का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

  • संस्थागत ईमानदारी: मनमानी नियुक्तियों को रोकने के लिए स्थापित सरकारी नियमों का पालन सुनिश्चित करना
  • रेगुलेटरी ओवरसाइट: नेतृत्व के चुनाव का पेटेंट और ट्रेडमार्क प्रशासन की प्रभावशीलता पर असर

मुख्य शब्द: पारदर्शिता · प्रशासनिक कानून · बौद्धिक संपदा अधिकार · योग्यता के मानदंड · न्यायिक समीक्षा

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रूस-यूक्रेन और ईरान-इजराइल संघर्षों से मिले सबक का हवाला देते हुए घरेलू ड्रोन निर्माताओं से उत्पादन में

चर्चा में क्यों: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रूस-यूक्रेन और ईरान-इजराइल संघर्षों से मिले सबक का हवाला देते हुए घरेलू ड्रोन निर्माताओं से उत्पादन में, जिसमें कंपोनेंट्स और सॉफ्टवेयर भी शामिल हैं, पूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल करने का आग्रह किया।

इस बैठक में घरेलू रक्षा कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) के अधिकारियों ने भाग लिया। चर्चा का मुख्य केंद्र ड्रोन निर्माण इकोसिस्टम में AI, रोबोटिक्स और सिमुलेशन तकनीक को एकीकृत करना था।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • विज्ञान-तकनीकड्रोन मैन्युफैक्चरिंग के कंपोनेंट्स में हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और बैटरियां शामिल हैं।
  • तथ्यआधुनिक ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग में AI, रोबोटिक्स और सिमुलेशन टेक्नोलॉजी को प्रमुख ड्राइवर्स (drivers) के रूप में पहचाना गया है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: ड्रोन तकनीक में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के रणनीतिक महत्व और भारत के रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र पर इसके निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।

  • सप्लाई चेन सुरक्षा: भू-राजनीतिक जोखिमों को कम करने के लिए विदेशी ड्रोन कंपोनेंट्स और सॉफ्टवेयर पर निर्भरता घटाना
  • तकनीकी एकीकरण: स्वदेशी ड्रोन सिस्टम में सटीकता और स्वायत्तता बढ़ाने के लिए AI और रोबोटिक्स का इस्तेमाल

मुख्य शब्द: आत्मनिर्भर भारत · रक्षा निर्माण · रणनीतिक स्वायत्तता · दोहरे उपयोग वाली टेक्नोलॉजी · स्वदेशीकरण

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एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने आनुवंशिक रूप से संशोधित (genetically modified) बैक्टीरिया का उपयोग करके फेंकी गई PET प्लास्टिक की बोतलों को L-DOPA में बदलने की एक विधि विकसित की है

चर्चा में क्यों: एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने आनुवंशिक रूप से संशोधित (genetically modified) बैक्टीरिया का उपयोग करके फेंकी गई PET प्लास्टिक की बोतलों को L-DOPA में बदलने की एक विधि विकसित की है। L-DOPA, पार्किंसंस रोग (Parkinson's disease) के लिए एक महत्वपूर्ण दवा घटक है।

इस प्रक्रिया में PET प्लास्टिक से प्राप्त टेरेफ्थैलिक एसिड (terephthalic acid) को L-DOPA में बदलने के लिए जेनेटिकली मॉडिफाइड बैक्टीरिया (genetically modified bacteria) का उपयोग किया जाता है। इस पद्धति का उद्देश्य पार्किंसंस की थेरेपी के लिए पारंपरिक फार्मास्युटिकल उत्पादन के एक टिकाऊ विकल्प (sustainable alternative) को प्रदान करना है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • विज्ञान-तकनीकPET: पॉलीइथाइलीन टेरेफ्थलेट (Polyethylene terephthalate), एक सामान्य प्लास्टिक जिसका उपयोग ड्रिंक बोतल्स में किया जाता है।
  • विज्ञान-तकनीकL-DOPA: पार्किंसंस बीमारी (Parkinson's disease) के इलाज में इस्तेमाल होने वाला एक प्रमुख केमिकल कंपोनेंट।
  • विज्ञान-तकनीकटेरेफ्थैलिक एसिड (Terephthalic acid): PET से प्राप्त एक केमिकल इंटरमीडिएट (chemical intermediate) जिसका उपयोग कन्वर्जन प्रोसेस (conversion process) में किया जाता है।
  • तथ्ययह रिसर्च यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग के वैज्ञानिकों द्वारा की गई थी।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में सिंथेटिक बायोलॉजी और 'अपशिष्ट-से-औषधि' (waste-to-medicine) प्रौद्योगिकियों में होने वाली प्रगति किस प्रकार सतत स्वास्थ्य सेवा और चक्रीय अर्थव्यवस्था (circular economy) के लक्ष्यों में योगदान दे सकती है, चर्चा कीजिए।

  • सर्कुलर इकोनॉमी: औद्योगिक कचरे को कम करने के लिए फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग के साथ प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट को जोड़ना
  • बायोटेक स्केलेबिलिटी: बड़े पैमाने पर दवा उत्पादन के लिए बैक्टीरियल फर्मेंटेशन को ऑप्टिमाइज़ करने में तकनीकी बाधाएं
  • आर्थिक व्यवहार्यता: वेस्ट-डिराइव्ड प्रीकर्सर्स की लागत-प्रभावशीलता और स्थापित सिंथेटिक पाथवे के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: सिंथेटिक बायोलॉजी · सर्कुलर इकोनॉमी · बायोफार्मास्यूटिकल्स · वेस्ट वैलराइजेशन · सस्टेनेबल हेल्थकेयर

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क्रॉससेंस लिमिटेड (CrossSense Ltd) ने अपने 'विस्पी' (Wispy) AI सॉफ्टवेयर के लिए 1 मिलियन पाउंड का पुरस्कार जीता है

चर्चा में क्यों: क्रॉससेंस लिमिटेड (CrossSense Ltd) ने अपने 'विस्पी' (Wispy) AI सॉफ्टवेयर के लिए 1 मिलियन पाउंड का पुरस्कार जीता है। यह सॉफ्टवेयर स्मार्ट ग्लास में शामिल किया गया है, जिसे प्रॉम्प्ट्स और बातचीत के माध्यम से डिमेंशिया (dementia) से पीड़ित व्यक्तियों की सहायता के लिए डिजाइन किया गया है।

Wispy सॉफ्टवेयर का परीक्षण डिमेंशिया (dementia) से पीड़ित 23 व्यक्तियों और उनके देखभाल करने वालों (caregivers) के जोड़ों पर किया गया। यह सॉफ्टवेयर कार्यों के दौरान रियल-टाइम प्रॉम्प्ट्स और फीडबैक प्रदान करता है, साथ ही याददाश्त की सटीकता में सुधार के लिए पुरानी यादों को ताजा करने (reminiscence) में सहायता करता है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • विज्ञान-तकनीकWispy: स्मार्ट ग्लासेस में एम्बेडेड AI सॉफ्टवेयर जो डिमेंशिया (dementia) के मरीजों की सहायता करता है।
  • तथ्यक्रॉससेंस लिमिटेड (CrossSense Ltd) ने इस टेक्नोलॉजी के लिए £1 मिलियन का इनाम जीता।
  • तथ्यडिमेंशिया (dementia) से पीड़ित 23 व्यक्तियों और उनके केयरगिवर्स (caregivers) पर टेस्टिंग की गई।
मेन्स के लिए

प्रश्न: वृद्धजनों के लिए स्वास्थ्य सेवा में एआई-संचालित सहायक प्रौद्योगिकियों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए और व्यक्तिगत डेटा गोपनीयता से जुड़ी नैतिक चुनौतियों का परीक्षण कीजिए।

  • डेटा प्राइवेसी: स्मार्ट ग्लासेस द्वारा लगातार ऑडियो-विजुअल डेटा कलेक्शन के जोखिम
  • डिजिटल डिवाइड: ग्रामीण आबादी के लिए महंगे AI हेल्थकेयर टेक तक पहुंच की समस्या
  • नैतिक निगरानी: AI-आधारित कॉग्निटिव प्रॉम्प्ट्स के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की ज़रूरत

मुख्य शब्द: असिस्टिव टेक्नोलॉजी · कॉग्निटिव हेल्थ · डेटा प्राइवेसी · आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस · वृद्धों की देखभाल

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चार्ल्स एच

चर्चा में क्यों: चार्ल्स एच. बेनेट और जिल ब्रासार्ड को साइबर खतरों के खिलाफ संचार को सुरक्षित करने के लिए 1984 में क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (BB84) के आविष्कार के लिए ट्यूरिंग अवार्ड (Turing Award) से सम्मानित किया गया।

अमेरिकी भौतिक विज्ञानी चार्ल्स एच. बेनेट और कनाडाई कंप्यूटर वैज्ञानिक गिल्स ब्रासार्ड को ट्यूरिंग अवार्ड (Turing Award) से सम्मानित किया गया। उनका कार्य, BB84 प्रोटोकॉल, सुरक्षित संचार और कंप्यूटिंग सुनिश्चित करने के लिए क्वांटम फिजिक्स के सिद्धांतों का उपयोग करता है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • विज्ञान-तकनीकBB84: एक क्वांटम क्रिप्टोग्राफी प्रोटोकॉल जिसे 1984 में बेनेट (Bennett) और ब्रासार्ड (Brassard) द्वारा विकसित किया गया था।
  • पदचार्ल्स एच बेनेट: अमेरिकी भौतिक विज्ञानी जिन्हें ट्यूरिंग अवार्ड (Turing Award) से सम्मानित किया गया।
  • पदगिल्स ब्रासार्ड (Gilles Brassard): कनाडाई कंप्यूटर साइंटिस्ट जिन्हें ट्यूरिंग अवार्ड (Turing Award) से सम्मानित किया गया।
  • तथ्यट्यूरिंग अवार्ड (Turing Award): कंप्यूटर साइंस और इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बुनियादी योगदान को मान्यता देता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: क्वांटम कंप्यूटिंग के युग में शास्त्रीय एन्क्रिप्शन (classical encryption) की कमियों को दूर करने में क्वांटम क्रिप्टोग्राफी किस प्रकार प्रभावी है, इसका विश्लेषण कीजिए।

  • क्रिप्टोग्राफ़िक ट्रांज़िशन: मैथमेटिकल कॉम्प्लेक्सिटी से क्वांटम मैकेनिक्स के नियमों की ओर बदलाव
  • साइबरसिक्योरिटी इंफ्रास्ट्रक्चर: क्वांटम-सक्षम एक्टर्स द्वारा 'अभी हार्वेस्ट करें, बाद में डिक्रिप्ट करें' के खतरे से निपटना

मुख्य शब्द: क्वांटम क्रिप्टोग्राफी · BB84 प्रोटोकॉल · साइबर सिक्योरिटी · क्वांटम फिजिक्स · डेटा इंटीग्रिटी

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