यूपीएससी सिविल सेवा GS3 (अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा) के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी भाग से जुड़ी हर ख़बर, परीक्षा के नज़रिए से: चर्चा में क्यों, पृष्ठभूमि, प्रीलिम्स के तथ्य, अभ्यास प्रश्न और मेन्स प्रश्न। अब तक 1,426 नोट्स, रोज़ अपडेट।
पाठ्यक्रम के विषय: IT, AI, सेमीकंडक्टर एवं कंप्यूटिंग (517) · अंतरिक्ष तकनीक (ISRO, मिशन) (348) · जैव प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य अनुसंधान (242) · परमाणु एवं नई ऊर्जा तकनीक (197) · रक्षा तकनीक (118) · बौद्धिक संपदा अधिकार (4)
चर्चा में क्यों: आर्टेमिस II (Artemis II) मिशन पर सवार NASA और कनाडाई स्पेस एजेंसी के अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा के सुदूर हिस्से (far side) पर स्थित ओरिएंटेल बेसिन (Orientale basin) का अब तक का पहला मानव-दृष्टि से लिया गया दृश्य कैद किया है।
आर्टेमिस II (Artemis II) मिशन में चार चालक दल के सदस्यों (तीन NASA और एक कनाडाई स्पेस एजेंसी से) को चंद्रमा के सुदूर हिस्से तक ले जाने के लिए ओरियन (Orion) अंतरिक्ष यान का उपयोग किया जाता है। अप्रैल 2026 तक, इस अंतरिक्ष यान की दूरी पृथ्वी से 180,000 मील (289,681 किमी) से अधिक दर्ज की गई थी।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
विज्ञान-तकनीकओरियन (Orion) स्पेसक्राफ्ट: यह वह वाहन है जिसका उपयोग आर्टेमिस II (Artemis II) मिशन के दौरान चालक दल को चंद्रमा के चारों ओर ले जाने के लिए किया जाता है।
स्थानओरिएंटेल बेसिन (Orientale basin): चंद्रमा के सुदूर हिस्से में स्थित एक प्रमुख इम्पैक्ट बेसिन (impact basin)।
तथ्यArtemis II मिशन की दूरी: मिशन के दौरान पृथ्वी से 180,000 मील (289,681 km) से अधिक दर्ज की गई।
पदक्रू मेंबर्स: Reid Wiseman, Victor Glover, Christina Koch (NASA), और Jeremy Hansen (Canadian Space Agency)।
मेन्स के लिए
प्रश्न: चंद्र क्षेत्र में मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के महत्व और गहरे अंतरिक्ष अभियानों से जुड़ी तकनीकी चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
तकनीकी बाधा: लूनर फ़ार-साइड ट्रांजिट के दौरान लाइफ सपोर्ट और कम्युनिकेशन लिंक्स बनाए रखना
भू-राजनीतिक आयाम: चंद्र अन्वेषण में NASA और कनाडियन स्पेस एजेंसी के बीच अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
मुख्य शब्द: डीप-स्पेस एक्सप्लोरेशन · चंद्र अन्वेषण · स्पेस डिप्लोमेसी · एयरोस्पेस इंजीनियरिंग
चर्चा में क्यों: BITS Pilani-हैदराबाद के शोधकर्ताओं ने निमोनिया के खिलाफ व्यापक सुरक्षा प्रदान करने के लिए Streptococcus pneumoniae के विरुद्ध एक नया प्रयोगात्मक मल्टी-एपिटोप वैक्सीन (multiepitope vaccine) विकसित किया है।
इस वैक्सीन को कई बैक्टीरियल स्ट्रेन (bacterial strains) को लक्षित करने के लिए कंप्यूटेशनल टूल्स का उपयोग करके डिजाइन किया गया था। इसे एस्चेरिचिया कोली (Escherichia coli) में सफलतापूर्वक सिंथेसाइज किया गया और चूहों में इसने एक मजबूत इम्यून रिस्पॉन्स (immune response) दिखाया।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीकStreptococcus pneumoniae: वह बैक्टीरिया जो निमोनिया और अन्य घातक बीमारियों के लिए जिम्मेदार है।
विज्ञान-तकनीकमल्टी-एपिटोप वैक्सीन (Multiepitope vaccine): एक ऐसा वैक्सीन जिसे किसी पैथोजन (pathogen) के कई एपिटोप्स (antigenic sites) को टारगेट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
तथ्यएस्चेरिचिया कोलाई (Escherichia coli): वह बैक्टीरिया जिसका उपयोग प्रायोगिक वैक्सीन के सफल संश्लेषण (synthesis) के लिए किया गया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में प्रचलित श्वसन संबंधी संक्रमणों से निपटने के लिए बहु-तनु (multi-strain) टीके विकसित करने में कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी और जैव प्रौद्योगिकी की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
R&D की बाधा: मयूरिन मॉडल से ह्यूमन क्लीनिकल ट्रायल तक जाने की भारी लागत
पैथोजन इवोल्यूशन: बैक्टीरियल स्ट्रेन म्यूटेशन और वैक्सीन रेजिस्टेंस की चुनौती को समझना
सार्वजनिक स्वास्थ्य समानता: ग्रामीण आबादी के लिए हाई-टेक बायोटेक वैक्सीन तक किफायती पहुंच सुनिश्चित करना
चर्चा में क्यों: वैज्ञानिकों और अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्थाओं ने रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल (Reflect Orbital) और स्पेसएक्स (SpaceX) द्वारा लो अर्थ ऑर्बिट (low Earth orbit) में रिफ्लेक्टिव सैटेलाइट्स तैनात करने के प्रस्तावों पर चिंता जताई है।
रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल (Reflect Orbital) और स्पेसएक्स (SpaceX) लो अर्थ ऑर्बिट (low Earth orbit) में रिफ्लेक्टिव सैटेलाइट्स का एक विशाल नेटवर्क स्थापित करने का प्रस्ताव दे रहे हैं। वैज्ञानिकों का तर्क है कि ये सैटेलाइट्स रात के आकाश की चमक को बढ़ा सकते हैं, जिससे हार्मोन स्राव, प्रवास पैटर्न और फूड वेब्स (food webs) पर संभावित प्रभाव पड़ सकता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीकReflect Orbital और SpaceX वे संस्थाएं हैं जो रिफ्लेक्टिव सैटेलाइट नेटवर्क (reflective satellite networks) का प्रस्ताव दे रही हैं।
तथ्यप्रस्तावित सैटेलाइट्स को लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में तैनात करने के लिए बनाया गया है।
पर्यावरणसंभावित पारिस्थितिक प्रभावों (ecological impacts) में प्रवास के पैटर्न (migration patterns) और फूड वेब्स (food webs) में व्यवधान शामिल है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: निम्न पृथ्वी कक्षा (Low Earth Orbit) में उपग्रहों की बढ़ती परावर्तकता (reflectivity) के पर्यावरणीय और जैविक निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए और इन प्रभावों को कम करने के लिए उपयुक्त विनियामक तंत्रों का सुझाव दीजिए। चर्चा कीजिए।
जैविक व्यवधान: रात के वन्यजीवों के प्रवास और हार्मोन स्राव चक्र में हस्तक्षेप
रेगुलेटरी वैक्यूम: नाइट स्काई ब्राइटनेस लिमिट के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों की कमी
मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव: बढ़ते लाइट पॉल्यूशन के कारण मानव सर्कैडियन रिदम में संभावित गड़बड़ी
मुख्य शब्द: सर्कैडियन रिदम · प्रकाश प्रदूषण · लो अर्थ ऑर्बिट · पारिस्थितिक प्रभाव · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क
चर्चा में क्यों: सऊदी अरब ने NASA के आर्टेमिस II (Artemis II) मिशन के साथ अपना 'शम्स' (Shams) सैटेलाइट लॉन्च किया है। यह पहली बार है जब किसी अरब देश ने आर्टेमिस प्रोग्राम में शामिल हुआ है।
'शम्स' (Shams) सैटेलाइट को उच्च ऊंचाई पर अंतरिक्ष के मौसम और सौर गतिविधियों की निगरानी के लिए डिजाइन किया गया है। यह सौर विकिरण, पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र और उच्च-ऊर्जा वाले कणों (high-energy particles) पर डेटा एकत्र करेगा।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीकShams: स्पेस वेदर (space weather) और सोलर एक्टिविटी (solar activity) की निगरानी के लिए सऊदी अरब का सैटेलाइट।
विज्ञान-तकनीकArtemis II: NASA मिशन जिसमें Shams सैटेलाइट को शामिल किया गया है।
तथ्यShams सैटेलाइट के कार्य: सोलर रेडिएशन, पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड और हाई-एनर्जी पार्टिकल्स की निगरानी करना।
मेन्स के लिए
प्रश्न: वैज्ञानिक अनुसंधान को आगे बढ़ाने और अंतरिक्ष मौसम के खतरों के विरुद्ध वैश्विक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग के महत्व पर चर्चा कीजिए।
डेटा सॉवरेन्टी: अंतरराष्ट्रीय डेटा शेयरिंग और राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के बीच संतुलन
टेक्नोलॉजिकल लीपफ्रॉगिंग: घरेलू स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर को तेज़ करने के लिए ग्लोबल पार्टनरशिप का लाभ उठाना
स्पेस वेदर मिटिगेशन: ग्लोबल कम्युनिकेशन और पावर ग्रिड की कमियों को दूर करना
मुख्य शब्द: स्पेस वेदर · आर्टेमिस प्रोग्राम · सैटेलाइट टेक्नोलॉजी · वैज्ञानिक सहयोग · सौर विकिरण
चर्चा में क्यों: गुजरात हाई कोर्ट ने एक नई AI पॉलिसी लागू की है, जो न्यायिक निर्णय लेने, निर्णय का ड्राफ्ट तैयार करने और सजा सुनाने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) के उपयोग को प्रतिबंधित करती है ताकि मानवीय निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
गुजरात हाई कोर्ट की नीति अनुसंधान और केस मैनेजमेंट जैसे प्रशासनिक कार्यों के लिए AI के उपयोग की अनुमति देती है, लेकिन निर्णय लिखने या सजा तय करने के लिए इस पर पूरी तरह से रोक लगाती है। इस नीति का प्राथमिक उद्देश्य न्यायिक स्वतंत्रता को बनाए रखना और मानवीय सत्यापन (human verification) के माध्यम से कानूनी कार्यवाही की सटीकता सुनिश्चित करना है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीकगुजरात हाई कोर्ट की AI पॉलिसी में जजमेंट ड्राफ्टिंग और सेंटेंसिंग में AI के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है।
विज्ञान-तकनीकनई पॉलिसी के तहत रिसर्च और केस मैनेजमेंट जैसे प्रशासनिक कार्यों के लिए AI की अनुमति दी गई है।
पदयह पॉलिसी सभी न्यायिक निर्णयों के लिए मानवीय निरीक्षण (human oversight) और वेरिफिकेशन (verification) को अनिवार्य बनाती है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: न्यायिक स्वतंत्रता की रक्षा सुनिश्चित करते हुए न्यायिक प्रक्रिया में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के एकीकरण के नैतिक निहितार्थों और जोखिमों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
एल्गोरिद्मिक बायस: सजा और कानूनी नतीजों को प्रभावित करने वाले कोडित पूर्वाग्रहों का जोखिम
अकाउंटेबिलिटी गैप: ऑटोनॉमस सिस्टम द्वारा की गई गलतियों के लिए ज़िम्मेदारी तय करने में मुश्किल
न्यायिक अखंडता: तकनीकी दक्षता और मानवीय तर्क की आवश्यकता के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: न्यायिक स्वतंत्रता · एल्गोरिद्मिक जवाबदेही · मानवीय निगरानी · नैतिक AI · लीगल टेक
चर्चा में क्यों: रक्षा मंत्रालय ने रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए भारतीय वायुसेना हेतु एक स्वदेशी 1,000-kg हवाई बम विकसित करने की प्रक्रिया शुरू की है।
इस परियोजना के अंतर्गत छह प्रोटोटाइप (Prototypes) डिजाइन करने के बाद 600 बमों की खरीद शामिल है। इसका लक्ष्य न्यूनतम 50% स्वदेशी सामग्री (Indigenous content) सुनिश्चित करना है और इसके पूरा होने में लगभग ढाई साल का समय लगने की उम्मीद है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
विज्ञान-तकनीकस्वदेशी बम को Mk-84 एरियल बम (aerial bomb) के समान डिजाइन किया गया है।
तथ्ययह प्रोजेक्ट कम से कम 50% इंडिजिनस कंटेंट (indigenous content) का लक्ष्य रखता है।
तथ्यप्रोक्योरमेंट फेज (Procurement phase) में 'Buy (Indian–IDDM)' कैटेगरी के तहत 600 बम शामिल हैं।
तथ्ययह प्रोजेक्ट 'Make-II' (इंडस्ट्री-फंडेड) और 'Buy (Indian–IDDM)' कैटेगरी के तहत निष्पादित किया जाएगा।
मेन्स के लिए
प्रश्न: रक्षा उत्पादन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के भारत के लक्ष्य में 'मेक-II' और 'बाय (भारतीय-IDDM)' श्रेणियां किस प्रकार योगदान देती हैं, इसका विश्लेषण कीजिए।
इंडस्ट्रियल बॉटलनेक: भारी गोला-बारूद के लिए असेंबली से हाई-प्रिसिजन स्वदेशी डिज़ाइन की ओर बदलाव
राजकोषीय रणनीति: इंडस्ट्री-फंडेड 'मेक-II' मॉडल और सरकार द्वारा संचालित 'बाय (इंडियन-IDDM)' प्रोक्योरमेंट के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: आत्मनिर्भर भारत · स्वदेशीकरण · रक्षा खरीद · IDDM · रणनीतिक स्वायत्तता
चर्चा में क्यों: ISRO के चेयरमैन वी. नारायणन ने NASA के आर्टेमिस II (Artemis II) मिशन पर विश्वास जताया है। उन्होंने भारत के बढ़ते अंतरिक्ष क्षेत्र और गगनयान (Gaganyaan) तथा भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksh Station) जैसे घरेलू प्रोजेक्ट्स पर जोर दिया।
ISRO के अध्यक्ष वी. नारायणन ने 1960 के दशक से भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में हुई प्रगति पर प्रकाश डाला। वर्तमान फोकस में गगनयान मिशन और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksh Station) प्रोजेक्ट शामिल हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
विज्ञान-तकनीकArtemis II: चंद्रमा पर भविष्य के मानव लैंडिंग के लिए रास्ता तैयार करने के उद्देश्य से NASA का एक मिशन।
विज्ञान-तकनीकगगनयान: भारत का मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन (human spaceflight mission)।
विज्ञान-तकनीकभारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksh Station): भारत का नियोजित स्पेस स्टेशन प्रोजेक्ट।
पदवी. नारायणन: इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) के चेयरमैन।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के दीर्घकालिक अंतरिक्ष अन्वेषण लक्ष्यों की प्राप्ति में अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग और निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के विकास के महत्व पर चर्चा कीजिए।
स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी: अंतरराष्ट्रीय सहयोग और स्वदेशी तकनीकी विकास के बीच संतुलन
इकोनॉमिक मल्टीप्लायर: स्टेट-लेड मिशन से स्टार्टअप-ड्रिवन स्पेस इकोनॉमी की ओर बदलाव
ह्यूमन कैपिटल: लूनर ऑर्बिट्स में निरंतर मानव उपस्थिति के लिए तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करना
मुख्य शब्द: अंतरिक्ष अन्वेषण · मानव अंतरिक्ष उड़ान · स्पेस सेक्टर स्टार्टअप्स · अंतरराष्ट्रीय सहयोग · तकनीकी संप्रभुता
चर्चा में क्यों: NASA के आर्टेमिस (Artemis) अंतरिक्ष यात्रियों ने अपनी चंद्र यात्रा के आधे रास्ते को पार कर लिया है और वे पृथ्वी से 219,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर चुके हैं।
ओरियन अंतरिक्ष यान में अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच, विक्टर ग्लोवर, रीड वाइजमैन और जेरेमी हैनसेन सवार हैं। यह मिशन 'फ्री-रिटर्न' (free-return) प्रक्षेपवक्र का उपयोग करता है, जिसमें चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण की मदद से अंतरिक्ष यान को वापस पृथ्वी की ओर भेजा जाता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीकओरियन (Orion): NASA द्वारा आर्टेमिस (Artemis) लूनर मिशन के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला स्पेसक्राफ्ट।
तथ्यमिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने पृथ्वी से 219,000 किलोमीटर की दूरी तय की।
विज्ञान-तकनीकफ्री-रिटर्न ट्रेजेक्टरी (Free-return trajectory): एक ऐसा फ्लाइट पाथ (flight path) जो अंतरिक्ष यान को वापस पृथ्वी पर लाने के लिए चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण का उपयोग करता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अंतरिक्ष अन्वेषण के अंतर्राष्ट्रीय महत्व और चंद्रमा पर एक स्थायी मानव उपस्थिति स्थापित करने में निहित तकनीकी चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
ऑर्बिटल मैकेनिक्स: सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए 'फ्री-रिटर्न' ट्रेजेक्टरी के लिए लूनर ग्रेविटी का इस्तेमाल
तकनीकी बाधाएं: लंबी दूरी के लूनर ट्राजेक्टरी पर लाइफ सपोर्ट और कम्युनिकेशन बनाए रखना
चर्चा में क्यों: पर्यावरण मंत्रालय ने प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स (Plastic Waste Management Rules) में संशोधन किया है, जिसके तहत अब कंपनियां अपने छूटे हुए रीसाइक्लिंग लक्ष्यों को तीन साल तक आगे ले जा सकेंगी। इसके साथ ही, मंत्रालय ने एक ट्रेडेबल सर्टिफिकेट सिस्टम (tradable certificate system) भी शुरू किया है।
2026 का संशोधन छूटे हुए रीसाइक्लिंग लक्ष्यों को तीन साल तक आगे ले जाने (carry-forward) की अनुमति देता है। यह एक ट्रेड करने योग्य सर्टिफिकेट सिस्टम (tradable certificate system) की शुरुआत करता है, जिसके तहत कंपनियाँ उन संस्थाओं से क्रेडिट खरीद सकती हैं जिन्होंने अपने निर्धारित लक्ष्यों से अधिक रीसाइक्लिंग की है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यप्रोड्यूसर्स को 2028–29 तक रिजिड पैकेजिंग (rigid packaging) में कम से कम 30% रिसाइकिल्ड मटेरियल (recycled material) सुनिश्चित करना होगा।
अधिनियम / विधेयकप्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स (2026 Amendment) के तहत छूटे हुए लक्ष्यों (missed targets) को तीन साल तक कैरी-फॉरवर्ड करने की अनुमति दी गई है।
तथ्यनए नियम रीसाइक्लिंग दायित्वों को पूरा करने के लिए ट्रेड करने योग्य सर्टिफिकेट्स (tradable certificates) की एक प्रणाली पेश करते हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन में व्यापार योग्य प्रमाणपत्रों (tradable certificates) और कैरी-फॉरवर्ड तंत्र (carry-forward mechanisms) की शुरुआत औद्योगिक व्यवहार्यता और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलन को कैसे स्थापित करती है, इसका समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
रेगुलेटरी आर्बिट्रेज: फूड और बेवरेज जैसे कुछ पैकेजिंग सेगमेंट के मैंडेट से बाहर होने का जोखिम
मार्केट-आधारित कंप्लायंस: रीसाइक्लिंग क्रेडिट के लिए सेकेंडरी मार्केट बनाने हेतु ट्रेड करने योग्य सर्टिफिकेट्स की संभावना
अनुपालन में लचीलापन: कम कॉर्पोरेट लागत और कचरा कम करने में देरी के जोखिम के बीच समझौता
मुख्य शब्द: एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी · सर्कुलर इकोनॉमी · रेगुलेटरी फ्लेक्सिबिलिटी · मार्केट-आधारित इंस्ट्रूमेंट्स · वेस्ट मैनेजमेंट
चर्चा में क्यों: इंडियन प्लंबिंग एसोसिएशन ने 2030 तक पानी की मांग में अनुमानित दोगुनी वृद्धि को देखते हुए, सप्लाई-साइड ऑग्मेंटेशन (supply-side augmentation) के बजाय दक्षता-आधारित जल प्रबंधन (efficiency-led water management) की ओर बढ़ने का आग्रह किया है।
इंडियन प्लंबिंग एसोसिएशन (Indian Plumbing Association) ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि बेंगलुरु की 85% से अधिक झीलें यूट्रोफिक (eutrophic) हो गई हैं। एसोसिएशन ने इसके समाधान के रूप में स्मार्ट प्लंबिंग सिस्टम, ग्रे-वॉटर का पुन: उपयोग (जैसे कि ITC होटल्स का 'सुन्या एक्वा' कार्यक्रम) और कुशल बाथरूम फिटिंग्स के उपयोग का प्रस्ताव दिया है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यभारत में पानी की अनुमानित मांग 2030 तक दोगुनी होने की उम्मीद है।
स्थानबेंगलुरु की झीलें: रिपोर्ट के अनुसार 85% से अधिक झीलें यूट्रोफिक (eutrophic) हैं।
तथ्यबेंगलुरु पाइप से पानी की सप्लाई के लिए काफी हद तक कावेरी नदी पर निर्भर है।
योजनासन्या एक्वा (Sunya Aqua): ITC होटल्स द्वारा ग्रे-वॉटर (greywater) के पुन: उपयोग की एक पहल।
मेन्स के लिए
प्रश्न: तेजी से शहरीकरण की ओर अग्रसर होते भारतीय शहरों में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आपूर्ति-पक्ष के विस्तार से मांग-पक्ष के प्रबंधन की ओर संक्रमण की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।
संसाधन की कमी: अनियंत्रित दोहन के कारण शहरी जल निकायों में तेजी से यूट्रोफिकेशन
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: मौजूदा पाइप वाले पानी के सिस्टम की हाई एनर्जी इंटेंसिटी बनाम डिसेंट्रलाइज्ड ग्रे-वॉटर रियूज़
पॉलिसी में बदलाव: बड़े पैमाने पर नदी डायवर्जन के बजाय स्मार्ट प्लंबिंग और एफिशिएंसी-आधारित कंजर्वेशन पर ज़ोर
मुख्य शब्द: सप्लाई-साइड ऑग्मेंटेशन · यूट्रोफिकेशन · ग्रेवॉटर का पुन: उपयोग · जल सुरक्षा · स्मार्ट प्लंबिंग
चर्चा में क्यों: ISRO और IAF के इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन ने गगनयान कार्यक्रम के लिए उच्च ऊंचाई वाली स्थितियों में चालक दल की सुरक्षा और प्रदर्शन का अध्ययन करने के उद्देश्य से लेह में मिशन MITRA लॉन्च किया है।
मिशन MITRA का आयोजन 2 से 9 अप्रैल तक लेह में चालक दल की शारीरिक और मनोवैज्ञानिक गतिशीलता का आकलन करने के लिए किया गया था। ISRO ने सुविधा प्रबंधन और अनुपालन प्रोटोकॉल के लिए बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप मेसर्स प्रोटोप्लैनेट प्राइवेट लिमिटेड (Protoplanet Pvt. Ltd.) के साथ साझेदारी की।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
विज्ञान-तकनीकमिशन MITRA: उच्च-ऊंचाई (high-altitude) की स्थितियों में मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए क्रू की सुरक्षा और प्रदर्शन का आकलन करने के लिए एक अध्ययन।
विज्ञान-तकनीकगगनयान (Gaganyaan): भारत का मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम जिसका लक्ष्य तीन अंतरिक्ष यात्रियों के दल को 400 किमी की कक्षा में भेजना है।
पदIAF इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन: लेह में हाई-एल्टीट्यूड स्टडी के लिए ISRO के साथ पार्टनरशिप में।
तथ्यगगनयान मिशन: भारतीय समुद्री जलमार्ग से वापसी के साथ नियोजित तीन दिवसीय मिशन।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान अभियानों की सुरक्षा और सफलता सुनिश्चित करने में उच्च-ऊंचाई वाले शारीरिक अध्ययन (high-altitude physiological studies) के महत्व पर चर्चा कीजिए।
ऑपरेशनल इंटरऑपरेबिलिटी: हाई-स्ट्रेस और लो-ऑक्सीजन एनवायरनमेंट में क्रू-ग्राउंड टीम के डिसीजन-मेकिंग डायनेमिक्स का आकलन
पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप: स्पेस रिसर्च में फैसिलिटी मैनेजमेंट और कंप्लायंस के लिए स्टार्टअप क्षमताओं का लाभ उठाना
मुख्य शब्द: मानव अंतरिक्ष उड़ान · हाई-ऑल्टीट्यूड फिजियोलॉजी · इंटरऑपरेबिलिटी · एयरोस्पेस मेडिसिन · मिशन मित्र
चर्चा में क्यों: जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) ने घोषणा की है कि एस्टेरॉयड (क्षुद्रग्रह) 'रयूगु' से लिए गए नमूनों में DNA और RNA के सभी पांच मुख्य 'बेस' पाए गए हैं। यह खोज सौर मंडल में जीवन के निर्माण के लिए आवश्यक तत्वों की व्यापक मौजूदगी की ओर इशारा करती है।
यह खोज Hayabusa2 मिशन द्वारा वापस लाए गए नमूनों का उपयोग करने वाली एक शोध टीम द्वारा की गई। विश्लेषण से प्यूरीन (purines) और पाइरीमिडिन (pyrimidines) के बीच एक संतुलित अनुपात का पता चला है। यह खोज पहले बेन्नू (Bennu) जैसे क्षुद्रग्रहों या विभिन्न उल्कापिंडों के नमूनों में दर्ज नहीं की गई थी।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीकHayabusa2: एक जापानी स्पेस मिशन जिसने एस्टेरॉयड Ryugu से सैंपल इकट्ठे किए।
तथ्यRyugu: एक asteroid जिसमें DNA और RNA के सभी पांच canonical 'letters' मौजूद हैं।
विज्ञान-तकनीकप्यूरीन (Purines) और पिरीमिडिन (Pyrimidines): र्युगु (Ryugu) के एस्टेरॉयड डस्ट में संतुलित अनुपात में पाए जाने वाले रासायनिक घटक।
मेन्स के लिए
प्रश्न: बाह्य-ग्रहीय क्षुद्रग्रहों के अध्ययन से जीवन के रासायनिक विकास और जैविक अणुओं की उत्पत्ति की हमारी समझ में किस प्रकार योगदान मिलता है, इसका विश्लेषण कीजिए।
केमिकल इवोल्यूशन: ग्रहों के बनने से पहले सौर मंडल में जीवन बनाने वाले तत्वों के प्रमाण
विश्लेषणात्मक सीमाएं: प्रीबायोटिक मॉलिक्यूल्स की मौजूदगी और पिछले एलियन जीवन के सबूत के बीच अंतर
चर्चा में क्यों: आर्टेमिस II (Artemis II) मिशन के हिस्से के रूप में, ओरियन (Orion) स्पेसक्राफ्ट पर सवार NASA के अंतरिक्ष यात्रियों ने स्पेसक्राफ्ट को चंद्रमा की ओर भेजने के लिए सफलतापूर्वक एक महत्वपूर्ण इंजन बर्न (engine burn) पूरा किया।
ओरियन अंतरिक्ष यान ने चंद्रमा तक पहुँचने के लिए एक महत्वपूर्ण इंजन बर्न (engine burn) को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया। कक्षा में रहते हुए चालक दल ने चंद्रमा द्वारा प्रकाशित पृथ्वी के अंधेरे हिस्से की तस्वीरें लीं।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
विज्ञान-तकनीकओरियन (Orion): NASA द्वारा आर्टेमिस (Artemis) मिशन के लिए अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा तक ले जाने के लिए उपयोग किया जाने वाला स्पेसक्राफ्ट।
तथ्यइस मिशन ने चंद्रमा द्वारा प्रकाशित पृथ्वी के अंधेरे हिस्से की तस्वीरें कैद कीं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: वैश्विक अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में आर्टेमिस कार्यक्रम के महत्व और अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष कानून पर इसके निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा: चंद्र अन्वेषण और संसाधन अधिकारों में रणनीतिक स्थिति
तकनीकी छलांग: डीप-स्पेस लाइफ सपोर्ट और प्रोपल्शन सिस्टम्स में प्रगति
रेगुलेटरी वैक्यूम: लूनर माइनिंग और हैबिटेशन के लिए व्यापक अंतरराष्ट्रीय फ्रेमवर्क की कमी
मुख्य शब्द: चंद्र अन्वेषण · डीप-स्पेस नेविगेशन · स्पेस डिप्लोमेसी · एयरोस्पेस इंजीनियरिंग
चर्चा में क्यों: NASA ने केनेडी स्पेस सेंटर से आर्टेमिस II (Artemis II) मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया है। इस मिशन के जरिए पहली महिला और पहली अश्वेत व्यक्ति को सिज़लूनर स्पेस (cislunar space) में भेजा जाएगा।
यह मिशन स्पेस लॉन्च सिस्टम (Space Launch System - SLS) रॉकेट और ओरियन (Orion) अंतरिक्ष यान का उपयोग करता है। चार अंतरिक्ष यात्रियों का दल भविष्य के चंद्र मिशनों के लिए अंतरिक्ष यान के सिस्टम्स का परीक्षण करने हेतु 10 दिनों तक चंद्रमा की कक्षा में रहेगा।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
विज्ञान-तकनीकArtemis II: Space Launch System (SLS) रॉकेट का उपयोग करके चंद्रमा की कक्षा में जाने वाला NASA का मिशन।
विज्ञान-तकनीकओरियन (Orion) स्पेसक्राफ्ट: आर्टेमिस (Artemis) मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला स्पेसक्राफ्ट।
तथ्यArtemis II मिशन की अवधि: सिस्टम टेस्टिंग के लिए 10 दिनों का लूनर ऑर्बिट (lunar orbit)।
स्थानकेनेडी स्पेस सेंटर: Artemis II मिशन के लिए लॉन्च साइट।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष अन्वेषण अभियानों के वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग और तकनीकी प्रगति को बढ़ावा देने में महत्व पर चर्चा कीजिए।
तकनीकी छलांग: सिसलूनर स्पेस में लंबे समय तक इंसानों की मौजूदगी के लिए SLS और ओरियन सिस्टम का विकास
अन्वेषण में समावेशिता: अंतरिक्ष अन्वेषण में विविध प्रतिनिधित्व का प्रतीकात्मक और व्यावहारिक महत्व
सिस्टमैटिक टेस्टिंग: डीप-स्पेस मानव मिशनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में ऑर्बिटल टेस्टिंग फेज का महत्व
मुख्य शब्द: सिसलुनर स्पेस · स्पेस लॉन्च सिस्टम · चंद्र अन्वेषण · मानव अंतरिक्ष उड़ान · तकनीकी मील का पत्थर
चर्चा में क्यों: भारतीय नौसेना को कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित आठ एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW SWC) में से दूसरा जहाज, INS मालवन प्राप्त हुआ है।
INS मालवन एक 80 मीटर लंबी वेसल (vessel) है जिसे अंडरवाटर सर्विलांस, एंटी-सबमरीन वारफेयर, लो-इंटेंसिटी मैरीटाइम ऑपरेशंस और माइन वारफेयर के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें वॉटरजेट प्रोपल्शन, टॉरपीडो, एंटी-सबमरीन रॉकेट और उन्नत रडार/सोनार सिस्टम शामिल हैं, जिनमें 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री (indigenous content) का उपयोग किया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यINS Malwan की लंबाई 80 मीटर है।
विज्ञान-तकनीकASW SWC में वॉटरजेट प्रोपल्शन (waterjet propulsion), टॉरपीडो और एंटी-सबमरीन रॉकेट की सुविधा है।
तथ्यइस वेसल (vessel) में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री (indigenous content) है।
संस्थाकोचिन शिपयार्ड लिमिटेड (Cochin Shipyard Limited) ASW SWC जहाजों का निर्माता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत की समुद्री सुरक्षा को सुदृढ़ करने और रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने में स्वदेशी रक्षा विनिर्माण के महत्व पर चर्चा कीजिए।
स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी: महत्वपूर्ण समुद्री निगरानी और माइन वारफेयर कंपोनेंट्स के लिए विदेशी OEMs पर निर्भरता कम करना
इंडस्ट्रियल सिनर्जी: मजबूत डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम और हाई-टेक जॉब्स बनाने के लिए घरेलू शिपयार्ड्स का इस्तेमाल
मुख्य शब्द: समुद्री सुरक्षा · स्वदेशी कंटेंट · आत्मनिर्भर भारत · एंटी-सबमरीन · रक्षा मैन्युफैक्चरिंग
चर्चा में क्यों: NASA और यूनिवर्सिटी ऑफ लेस्टर गहरे अंतरिक्ष अभियानों (deep space missions) को ऊर्जा देने के लिए प्लूटोनियम-238 के एक लंबे समय तक चलने वाले विकल्प के रूप में अमेरिसियम-241 की संभावनाओं की जांच कर रहे हैं।
NASA, अमेरिसियम-241 (Americium-241) का मूल्यांकन करने के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ लेस्टर और लॉस अलोमोस नेशनल लेबोरेटरी के साथ मिलकर काम कर रहा है। इस आइसोटोप की अर्ध-आयु (half-life) 433 वर्ष है, जो अंतरिक्ष में उपयोग होने वाली परमाणु बैटरियों में वर्तमान में इस्तेमाल होने वाले प्लूटोनियम-238 की 88 वर्ष की अर्ध-आयु की तुलना में काफी अधिक है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
विज्ञान-तकनीकAmericium-241: स्पेस बैटरियों (space batteries) के लिए 433 साल की हाफ-लाइफ (half-life) वाला एक न्यूक्लियर आइसोटोप (Nuclear isotope)।
विज्ञान-तकनीकप्लूटोनियम-238 (Plutonium-238): स्पेस न्यूक्लियर बैटरियों में इस्तेमाल होने वाला वर्तमान आइसोटोप, जिसकी हाफ-लाइफ 88 साल है।
विज्ञान-तकनीकलॉस एलामोस नेशनल लेबोरेटरी (Los Alamos National Laboratory): अमेरिसियम-241 (Americium-241) के उत्पादन और सुरक्षा का मूल्यांकन करने वाली रिसर्च बॉडी।
तथ्यPerseverance और Curiosity रोवर्स: स्पेसक्राफ्ट जो वर्तमान में न्यूक्लियर बैटरी टेक्नोलॉजी का उपयोग कर रहे हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: दीर्घकालिक गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण को सक्षम बनाने में परमाणु बैटरी तकनीक के महत्व और रेडियोधर्मी आइसोटोपों के प्रबंधन से जुड़ी सुरक्षा संबंधी चिंताओं का विश्लेषण कीजिए।
सुरक्षा-एफिशिएंसी ट्रेड-ऑफ: अंतरिक्ष में रेडियोएक्टिव मटेरियल हैंडलिंग के जोखिमों के बीच अमेरिसियम-241 के लंबे जीवन को संतुलित करना
तकनीकी स्वायत्तता: आंतरिक सौर मंडल से बाहर के मिशनों के लिए सौर ऊर्जा पर निर्भरता कम करना जहाँ सूरज की रोशनी कम होती है
चर्चा में क्यों: SpaceX ने वेंडरबर्ग स्पेस फोर्स बेस से ट्रांसपोर्टर-16 (Transporter-16) मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया है, जिसके तहत 119 पेलोड्स को सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट (Sun-Synchronous orbit) में तैनात किया गया है।
इस मिशन में अंतरराष्ट्रीय स्टार्टअप्स, अनुसंधान संस्थानों और सरकारी एजेंसियों के लिए उपग्रहों को तैनात करने हेतु Falcon 9 रॉकेट और राइडशेयर मॉडल (rideshare model) का उपयोग किया गया। इसके मुख्य पेलोड्स में वर्ल्ड मैग्नेटिक मॉडल के लिए NGA का MagQuest प्रोजेक्ट और ब्रिटेन के क्वांटम कम्युनिकेशन सैटेलाइट शामिल थे।
प्रीलिम्स बिंदु (5)
विज्ञान-तकनीकTransporter-16: एक SpaceX मिशन जो 119 payloads को Sun-Synchronous orbit में तैनात करेगा।
स्थानवैंडनबर्ग स्पेस फोर्स बेस (Vandenberg Space Force Base): ट्रांसपोर्टर-16 (Transporter-16) मिशन के लिए लॉन्च साइट।
विज्ञान-तकनीकMagQuest: एक NGA प्रोजेक्ट जो World Magnetic Model को डेटा प्रदान करता है।
विज्ञान-तकनीकUK क्वांटम कम्युनिकेशन सैटेलाइट: इसका उद्देश्य एक सुरक्षित क्वांटम इंटरनेट (Quantum Internet) विकसित करना है।
तथ्यFalcon 9: Transporter-16 मिशन के लिए इस्तेमाल किया गया रॉकेट, जिसने Landing Zone 4 पर सफलतापूर्वक बूस्टर लैंडिंग की।
मेन्स के लिए
प्रश्न: राइडशेयर मॉडल की ओर झुकाव और निजी अंतरिक्ष अन्वेषण किस प्रकार अंतरिक्ष तक पहुंच का लोकतंत्रीकरण कर रहे हैं और वैश्विक उपग्रह बुनियादी ढांचे को प्रभावित कर रहे हैं, चर्चा कीजिए।
कॉस्ट-एफिशिएंसी: राइडशेयर मॉडल स्टार्टअप्स और रिसर्च संस्थानों के लिए बाधाएं कम कर रहे हैं
स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी: स्वतंत्र सैटेलाइट इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए सुरक्षित क्वांटम इंटरनेट का विकास
कमर्शियल-पब्लिक सिनर्जी: प्राइवेट संस्थाएं जैसे सरकारी नेतृत्व वाले वैज्ञानिक प्रोजेक्ट्स को आसान बना रही हैं
चर्चा में क्यों: रक्षा मंत्रालय ने वायु सेना के लिए उच्च ऊंचाई पर निगरानी (surveillance) को बेहतर बनाने हेतु दो स्वदेशी माउंटेन रडार खरीदने के लिए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के साथ ₹1,950 करोड़ का अनुबंध किया है।
रक्षा मंत्रालय ने दो माउंटेन राडार (mountain radars) के लिए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के साथ ₹1,950 करोड़ का एक अनुबंध किया है। इन सिस्टम्स को डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड रडार डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया था।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यमाउंटेन राडार के लिए कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू ₹1,950 करोड़ है।
संस्थाभारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) इन रडार के लिए मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर है।
संस्थाDRDO के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स एंड रडार डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (LRDE) ने इन सिस्टम्स को डिजाइन और डेवलप किया।
विज्ञान-तकनीकये रडार विशेष रूप से वायु सेना के लिए हाई-एल्टीट्यूड (high-altitude) तैनाती के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: स्वदेशी रक्षा विनिर्माण और उच्च-ऊंचाई वाले निगरानी प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना किस प्रकार भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और सीमा सुरक्षा में योगदान देता है, इसका विश्लेषण कीजिए।
रणनीतिक स्वायत्तता: महत्वपूर्ण सर्विलांस हार्डवेयर के लिए विदेशी OEMs पर निर्भरता कम करना
तकनीकी संप्रभुता: डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स में 'आत्मनिर्भर भारत' हासिल करने के लिए DRDO-BEL तालमेल का लाभ उठाना
ऑपरेशनल क्षमता: जटिल हाई-ऑल्टीट्यूड इलाकों में डिटेक्शन एक्यूरेसी को बेहतर बनाना
मुख्य शब्द: आत्मनिर्भर भारत · रणनीतिक स्वायत्तता · रक्षा खरीद · हाई-ऑल्टीट्यूड सर्विलांस · स्वदेशीकरण
चर्चा में क्यों: NASA और कनाडियन स्पेस एजेंसी ने आर्टेमिस II (Artemis II) मिशन के लिए चालक दल (crew) की घोषणा की है। यह मिशन भविष्य के चंद्र अन्वेषण के लिए मार्ग का परीक्षण करने हेतु चंद्रमा की कक्षा में जाएगा।
आर्टेमिस II (Artemis II) चालक दल में NASA के अंतरिक्ष यात्री रीड वाइजमैन, क्रिस्टीना कोच, विक्टर ग्लोवर और कनाडियन स्पेस एजेंसी के जेरेमी हैनसेन शामिल हैं। इस मिशन का उद्देश्य चंद्रमा की कक्षा में घूमकर अगली पीढ़ी के चंद्र मिशनों के लिए वापसी के मार्ग का परीक्षण करना है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
विज्ञान-तकनीकआर्टेमिस II (Artemis II): NASA का एक मिशन जिसे चंद्रमा की कक्षा में घूमने और भविष्य के चंद्र मिशनों के लिए वापसी के रास्ते का परीक्षण करने के लिए डिजाइन किया गया है।
पदजेरेमी हैनसेन: Artemis II क्रू के हिस्से के रूप में चंद्रमा की यात्रा करने वाले पहले गैर-अमेरिकी व्यक्ति।
पदविक्टर ग्लोवर: चंद्रमा की यात्रा करने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति।
पदक्रिस्टीना कोच: एक इंजीनियर और फिजिसिस्ट, जिनके नाम एक महिला द्वारा की गई सबसे लंबी एकल अंतरिक्ष उड़ान (single spaceflight) का रिकॉर्ड है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: गहन अंतरिक्ष अन्वेषण (deep-space exploration) में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के महत्व और वैश्विक अंतरिक्ष शासन (global space governance) पर इसके निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
मल्टीलैटरल सिनर्जी: NASA और कनाडियन स्पेस एजेंसी के बीच साझा फंडिंग और टेक्नोलॉजी शेयरिंग
भू-राजनीतिक नेतृत्व: गहरे अंतरिक्ष में चंद्र अन्वेषण और संसाधन प्रबंधन के लिए मानक तय करना
मुख्य शब्द: अंतरिक्ष अन्वेषण · अंतरराष्ट्रीय सहयोग · लूनर ऑर्बिट · डीप-स्पेस मिशन · तकनीकी तालमेल
चर्चा में क्यों: NASA अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच, आर्टेमिस II (Artemis II) मिशन के दौरान पृथ्वी से अब तक के किसी भी इंसान की तुलना में सबसे दूर जाने वाली पहली महिला बनने वाली हैं।
आर्टेमिस II (Artemis II) मिशन एक 10 दिवसीय लूनर फ्लाईबाई (lunar flyby) मिशन है, जो 1 अप्रैल, 2026 को शुरू होने के लिए निर्धारित है। इस मिशन के चालक दल में क्रिस्टीना कोच (NASA), रीड वाइजमैन (NASA), विक्टर ग्लोवर (NASA) और जेरेमी हैनसेन (CSA) शामिल हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीकArtemis II: यह एक लूनर फ्लाईबाई (lunar flyby) मिशन है, जिसे भविष्य के लूनर लैंडिंग से पहले डीप स्पेस स्थितियों के लिए एक टेस्ट रन के रूप में तैयार किया गया है।
पदक्रिस्टीना कोच: NASA एस्ट्रोनॉट और आर्टेमिस II (Artemis II) मिशन के लिए मिशन स्पेशलिस्ट।
तथ्यआर्टेमिस II (Artemis II) मिशन की अवधि: 10 दिन।
मेन्स के लिए
प्रश्न: वैश्विक अंतरिक्ष अन्वेषण के संदर्भ में 'आर्टेमिस कार्यक्रम' के महत्व और दीर्घकालिक मानव अंतरिक्ष उड़ान से जुड़ी तकनीकी चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
तकनीकी बाधा: गहरे अंतरिक्ष विकिरण और लंबी अवधि के लूनर ट्रांजिट के लिए लाइफ-सपोर्ट सिस्टम विकसित करना
भू-राजनीतिक आयाम: चंद्रमा पर स्थायी मानवीय उपस्थिति स्थापित करने में प्रतिस्पर्धा और सहयोग
मुख्य शब्द: डीप स्पेस एक्सप्लोरेशन · लूनर मिशन · मानव अंतरिक्ष उड़ान · स्पेस एक्सप्लोरेशन टेक्नोलॉजी
चर्चा में क्यों: NASA के वैज्ञानिकों ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर चूहों पर प्रयोग करके मांसपेशियों की ताकत के लिए एक 'ग्रेविटी थ्रेशोल्ड' (gravity threshold) का पता लगाया है। यह अध्ययन संकेत देता है कि मंगल ग्रह का गुरुत्वाकर्षण अंतरिक्ष यात्रियों में मांसपेशियों के क्षय (muscle atrophy) को रोकने के लिए अपर्याप्त हो सकता है।
NASA ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर चूहों के माध्यम से विभिन्न गुरुत्वाकर्षण स्तरों पर मांसपेशियों की प्रतिक्रियाओं का अध्ययन किया। इस शोध में मांसपेशियों की मजबूती बनाए रखने के लिए आवश्यक एक विशिष्ट गुरुत्वाकर्षण सीमा (gravity threshold) की पहचान की गई। यह अध्ययन दर्शाता है कि मंगल ग्रह के कम गुरुत्वाकर्षण के कारण मांसपेशियों में कमजोरी आ सकती है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीकISS: International Space Station का उपयोग अंतरिक्ष में मसल एट्रोफी (muscle atrophy) और बोन डेंसिटी लॉस (bone density loss) के अध्ययन के लिए एक प्लेटफॉर्म के रूप में किया जाता है।
तथ्यग्रेविटी थ्रेशोल्ड (Gravity threshold): अंतरिक्ष यात्रा के दौरान मांसपेशियों की कमजोरी को रोकने के लिए आवश्यक ग्रेविटी का एक विशिष्ट स्तर।
विज्ञान-तकनीकमंगल ग्रह की खोज: रिसर्च संकेत देती है कि मंगल का ग्रेविटी (gravity) इंसानों में मांसपेशियों की कमजोरी को रोकने के लिए अपर्याप्त हो सकता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: मंगल ग्रह के दीर्घकालिक अंतरिक्ष अभियानों में मानव शरीर के समक्ष आने वाली शारीरिक चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए और मानव अन्वेषण के लिए कृत्रिम गुरुत्वाकर्षण प्रणालियों की आवश्यकता का मूल्यांकन कीजिए।
फिजियोलॉजिकल बॉटलनैक: लंबे समय तक माइक्रोग्रेविटी के संपर्क में रहने से मांसपेशियों की कमजोरी और हड्डियों के घनत्व में कमी
तकनीकी आवश्यकता: डीप स्पेस मिशन के लिए आर्टिफिशियल ग्रेविटी सिस्टम या विशेष एक्सरसाइज प्रोटोकॉल का विकास
मुख्य शब्द: मसल एट्रोफी · माइक्रोग्रैविटी · अंतरिक्ष अन्वेषण · शारीरिक चुनौतियां · आर्टिफिशियल ग्रेविटी