यूपीएससी सिविल सेवा GS1 (इतिहास · समाज · भूगोल) के इतिहास एवं संस्कृति भाग से जुड़ी हर ख़बर, परीक्षा के नज़रिए से: चर्चा में क्यों, पृष्ठभूमि, प्रीलिम्स के तथ्य, अभ्यास प्रश्न और मेन्स प्रश्न। अब तक 190 नोट्स, रोज़ अपडेट।
पाठ्यक्रम के विषय: कला, स्थापत्य एवं संस्कृति (71) · आधुनिक भारत एवं स्वतंत्रता संग्राम (46) · प्राचीन एवं मध्यकालीन भारत (39) · धरोहर स्थल, UNESCO एवं GI टैग (31) · स्वतंत्रता के बाद का भारत (3) · विश्व इतिहास
चर्चा में क्यों: प्राचीन भारतीय शल्य चिकित्सा के योगदान को सम्मानित करनेउद्देश्य से, 'शल्य चिकित्सा के जनक' महर्षि सुश्रुत की एक कांस्य प्रतिमा का 'रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जन्स ऑफ एडिनबर्ग' में अनावरण किया गया।
इस प्रतिमा का निर्माण राघवनंतम स्थापति द्वारा पारंपरिक 'लॉस्ट-वैक्स' कास्टिंग (खोया-मोम ढलाई) तकनीक का उपयोग करके किया गया था। यह आयोजन 'कंपेंडियम ऑफ सुश्रुत' के विमोचन के साथ संपन्न हुआ, जो कि 40 लेखकों के योगदान से युक्त एक प्रकाशन है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
पदमहर्षि सुश्रुत: प्राचीन भारतीय चिकित्सक और शल्य चिकित्सक (surgeon), जिन्हें शल्य चिकित्सा तकनीकों और प्लास्टिक सर्जरी के अग्रदूत के रूप में मान्यता प्राप्त है।
स्थानRoyal College of Surgeons of Edinburgh: दुनिया के सबसे पुराने सर्जिकल कॉलेजों में से एक, जिसकी स्थापना 1505 में हुई थी।
तथ्यलॉस्ट-वैक्स कास्टिंग (Lost-wax casting): जटिल कांस्य मूर्तियों को बनाने के लिए उपयोग की जाने वाली एक पारंपरिक धातुकर्म प्रक्रिया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: आधुनिक शल्य चिकित्सा पद्धतियों और वैश्विक स्वास्थ्य सेवा के विकास में आयुर्वेद और सुश्रुत संहिता जैसे प्राचीन भारतीय चिकित्सा तंत्रों के महत्व पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सामाजिक कार्य, कला और विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए व्यक्तियों को सम्मानित करते हुए पद्म पुरस्कार 2024 प्रदान किए।
राष्ट्रपति भवन में कुल 65 व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। इस वितरण में 2 पद्म विभूषण, 7 पद्म भूषण और 56 पद्म श्री पुरस्कार सम्मिलित रहे।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
पदपद्म पुरस्कार: भारत में राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किए जाने वाले सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार।
तथ्यपद्म विभूषण: भारत में दूसरा सबसे बड़ा नागरिक पुरस्कार।
तथ्यपद्म श्री: भारत में तीसरा सबसे बड़ा नागरिक पुरस्कार।
स्थानराष्ट्रपति भवन: नई दिल्ली में भारत के राष्ट्रपति का आधिकारिक निवास।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में जमीनी स्तर के योगदानों को मान्यता देने और राष्ट्रीय सेवा की संस्कृति को बढ़ावा देने में नागरिक पुरस्कारों के महत्व पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: ASI ने शेषचलम वन में 16वीं शताब्दी के शिलालेखों की खोज की है, जो राजा सदाशिवराय की तीर्थयात्रा और दान संबंधी विवरणों को दर्ज करते हैं। ये शिलालेख मध्यकालीन सांस्कृतिक और भाषाई विविधता को रेखांकित करते हैं।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने तिरुपति जिले के सदाशिवकोना में तीन दुर्लभ शिलालेखों की खोज की है। ये शिलालेख तेलुगु, तमिल और कन्नड़ भाषाओं में उत्कीर्ण हैं, जो राजा सदाशिवराय की तीर्थयात्रा और उनके द्वारा दिए गए दान का विवरण दर्ज करते हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
स्थानसदाशिवकोना आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले के शेषचलम वन में स्थित है।
पदखोज के दौरान के. मुनिरत्नम रेड्डी ने ASI मैसूर के निदेशक (Epigraphy) के रूप में कार्य किया।
तथ्यये शिलालेख 16वीं शताब्दी के हैं और मंदिरों तथा धार्मिक संस्थानों को दिए गए दान का विवरण दर्ज करते हैं।
संस्थाArchaeological Survey of India (ASI) भारत में पुरातात्विक अनुसंधान और संरक्षण के लिए प्राथमिक रूप से जिम्मेदार संस्था है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: विजयनगर काल के पुरालेखीय साक्ष्यों के आधार पर मध्यकालीन दक्षिण भारत के सामाजिक-धार्मिक और भाषाई परिदृश्य के पुनर्निर्माण में उनकी भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) हड़प्पा सभ्यता की जनसांख्यिकी का अध्ययन करने के लिए राखीगढ़ी स्थल से प्राप्त 5,000 वर्ष पुराने कंकालों पर DNA विश्लेषण और चेहरे के पुनर्निर्माण (facial reconstruction) का कार्य कर रहा है।
हरियाणा स्थित राखीगढ़ी स्थल से लगभग 5,000 वर्ष पुराने कंकाल प्राप्त हुए हैं। DNA और भौतिक विश्लेषण हेतु इन नमूनों को कोलकाता स्थित Anthropological Survey of India (AnSI) और लखनऊ स्थित Birbal Sahni Institute of Palaeosciences (BSIP) को भेजा गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
स्थानराखीगढ़ी: हरियाणा राज्य में स्थित हड़प्पा सभ्यता का एक प्रमुख स्थल।
संस्थाAnthropological Survey of India (AnSI): संस्कृति मंत्रालय के अधीन एक निकाय जो मानवशास्त्रीय अनुसंधान के लिए उत्तरदायी है।
संस्थाबिरबल सहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पेलियोसाइंसेज (BSIP): लखनऊ में स्थित पेलियोसाइंसेज (palaeosciences) के लिए एक प्रमुख संस्थान।
तथ्यये कंकाल लगभग 5,000 वर्ष पुराने हैं, जो सिंधु घाटी सभ्यता के युग के हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: आधुनिक पुरा-आनुवंशिकी (palaeogenetics) और फॉरेंसिक पुनर्निर्माण के अनुप्रयोग सिंधु घाटी सभ्यता के सामाजिक-सांस्कृतिक विकास की हमारी समझ में किस प्रकार योगदान देते हैं? चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांस और स्लोवाकिया की अपनी यात्राओं के दौरान कलमकारी पेंटिंग और कश्मीरी कालीनों जैसे भारतीय विरासत और स्वदेशी उत्पादों को राजनयिक उपहारों के रूप में प्रदर्शित किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन को कलमकारी महाभारत की एक पेंटिंग और पोचमपल्ली सिल्क स्टोल भेंट किया। स्लोवाकिया के लिए उपहारों में कश्मीरी रेशमी कालीन, पीतल से निर्मित डोकरा मृग सेट और चरक संहिता एवं सुश्रुत संहिता जैसे पारंपरिक ग्रंथ सम्मिलित थे।
प्रीलिम्स बिंदु (5)
स्थानकलमकारी: आंध्र प्रदेश की एक पारंपरिक वस्त्र कला जिसमें सूती कपड़े पर हाथ से पेंटिंग की जाती है।
स्थानपचमपल्ली: तेलंगाना का एक गाँव जो इकत (Ikat) बुनाई और रेशम के स्टोल (silk stoles) के लिए प्रसिद्ध है।
स्थानडोकरा: 'लॉस्ट-वैक्स' कास्टिंग तकनीक का उपयोग करके बनाई गई गैर-लौह और सीसा-मुक्त धातु की ढलाई।
स्थानचरक संहिता और सुश्रुत संहिता: भारतीय चिकित्सा पद्धति में आयुर्वेद और शल्य चिकित्सा के आधारभूत ग्रंथ।
तथ्यNagauri Ashwagandha और Lakadong Turmeric: क्रमशः राजस्थान और मेघालय के विशिष्ट क्षेत्रीय कृषि उत्पाद।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत की विदेश नीति में पारंपरिक हस्तशिल्प और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना किस प्रकार 'सॉफ्ट पावर' और सांस्कृतिक कूटनीति के एक उपकरण के रूप में कार्य करता है, चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: NCERT ने कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तकों में 'डांसिंग गर्ल' (नृत्य करती हुई लड़की) की मूर्ति के संशोधित संस्करण के उपयोग पर आलोचना का सामना करने के बाद, इसके मूल स्वरूप को पुनः बहाल कर दिया है, जिसमें शरीर के ऊपरी हिस्से को अस्पष्ट दिखाया गया था।
'डांसिंग गर्ल' (नृत्य करती हुई युवती) सिंधु घाटी सभ्यता के एक प्रमुख स्थल, मोहनजोदड़ो में प्राप्त एक कांस्य मूर्तिकला है। शिक्षा मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त निकाय, NCERT, राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकों के निर्माण के लिए उत्तरदायी है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानमोहनजो-दड़ो: सिंधु घाटी सभ्यता का एक प्रमुख पुरातात्विक स्थल जो वर्तमान पाकिस्तान में स्थित है।
विज्ञान-तकनीकडांसिंग गर्ल: हड़प्पा सभ्यता के कलात्मक और धातुकर्म कौशल का प्रतिनिधित्व करने वाली एक प्रसिद्ध कांस्य मूर्ति।
संस्थाNCERT: शिक्षा मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संगठन।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत की प्राचीन विरासत की सूक्ष्म समझ विकसित करने के लिए स्कूली पाठ्यपुस्तकों में ऐतिहासिक अखंडता और पुरातात्विक सटीकता बनाए रखने के महत्व की चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: डीक्लासिफाइड ब्रिटिश सरकारी दस्तावेजों से यह जानकारी सामने आई है कि ब्रिटिश सैन्य सलाहकारों ने 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' के लिए हेलीकॉप्टर के माध्यम से अचानक प्रवेश की रणनीति का सुझाव दिया था, जिसे अंततः भारतीय सेना द्वारा अस्वीकार कर दिया गया था।
वर्गीकृत ब्रिटिश दस्तावेजों से ज्ञात होता है कि फरवरी 1984 में एक ब्रिटिश सैन्य सलाहकार ने भारत का दौरा किया था। इन दस्तावेजों से यह स्पष्ट होता है कि यद्यपि प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने एक आकस्मिक योजना को स्वीकृति प्रदान की थी, तथापि भारतीय सेना ने प्रत्यक्ष आक्रमण की रणनीति को प्राथमिकता दी।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यऑपरेशन ब्लू स्टार 1984 में हुआ था।
पदइन्दिरा गांधी ने 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' के दौरान भारत की प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया।
तथ्यUK सरकार के दस्तावेज़ जून 2026 से लगभग 12 वर्ष पूर्व डीक्लासिफाई (declassified) किए गए थे।
मेन्स के लिए
प्रश्न: 1980 के दशक के दौरान भारत के आंतरिक सुरक्षा अभियानों को आकार देने में बाहरी सैन्य परामर्श और आंतरिक कमान संरचनाओं की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: भारत की स्वतंत्रता की तिथि को जून 1948 से बदलकर 15 अगस्त, 1947 करने के लॉर्ड लुई माउंटबेटन के निर्णय का ऐतिहासिक विश्लेषण।
लॉर्ड लुई माउंटबेटन ने सत्ता के हस्तांतरण की प्रक्रिया को 10 महीने पहले ही शीघ्रता से संपन्न कराया। उन्होंने इस त्वरित समय-सीमा के कारणों के रूप में जापान के आत्मसमर्पण की वर्षगांठ और राजनीतिक जटिलताओं का उल्लेख किया।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
पदलॉर्ड लुई माउंटबेटन: भारत के अंतिम वायसराय जिन्होंने सत्ता के हस्तांतरण की प्रक्रिया को गति दी।
तथ्यस्वतंत्रता की तिथि को 10 महीने पहले बढ़ाकर 15 अगस्त, 1947 कर दिया गया था।
तथ्ययह निर्णय जापान के आत्मसमर्पण की वर्षगांठ से प्रभावित था।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के विभाजन के दौरान ब्रिटिश शासन की जल्दबाजी में की गई वापसी किस सीमा तक सांप्रदायिक हिंसा और प्रशासनिक चुनौतियों के लिए उत्तरदायी थी? का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
चर्चा में क्यों: वायलिन वादक एन. राजम को संगीत के क्षेत्र में उनके आजीवन योगदान, विशेष रूप से यूरोपीय वायलिन को हिंदुस्तानी और कर्नाटक परंपराओं के अनुकूल ढालने के लिए पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
एन. राजम एक प्रतिष्ठित वायलिन वादक हैं जिन्होंने वायलिन वादन में शास्त्रीय रागों का समावेश किया है। उन्हें अपने पिता और पंडित ओमकारनाथ ठाकुर से प्रशिक्षण प्राप्त हुआ है और उन्होंने संगीतकारों की कई पीढ़ियों को प्रशिक्षित किया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
पदN Rajam: संगीत के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्म विभूषण से सम्मानित।
तथ्यN. Rajam की शैली: वायलिन का उपयोग करते हुए कर्नाटक और हिंदुस्तानी परंपराओं का मिश्रण।
तथ्यपं. ओमकारनाथ ठाकुर: प्रसिद्ध संगीतकार जिन्होंने N Rajam को प्रशिक्षित किया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारतीय शास्त्रीय संगीत में पश्चिमी वाद्यों के अनुकूलन किस प्रकार भारत में वैश्विक और स्वदेशी सांस्कृतिक पहचानों के संश्लेषण को प्रतिबिंबित करता है, चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: यह लेख इस बात पर प्रकाश डालता है कि कैसे भरत मुनि द्वारा 17वीं शताब्दी से पहले किया गया वाद्य यंत्रों का वर्गीकरण, सौरेंद्र मोहन टैगोर के माध्यम से पश्चिमी हॉर्नबोस्टेल-सैक्स (Hornbostel-Sachs) प्रणाली को प्रभावित किया।
भरत मुनि के नाट्य शास्त्र में वाद्य यंत्रों को उनके कंपन करने वाले हिस्से के आधार पर चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है: तंतु (string), वायु, ठोस और झिल्ली (membrane) आधारित। 19वीं शताब्दी में सौंद्रो मोहन टैगोर ने इस ज्ञान को यूरोप में प्रसारित किया।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यनात्य शास्त्र में वाद्य यंत्रों को चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है: स्ट्रिंग (string), एयर (air), सॉलिड (solid) और मेंब्रेन (membrane)।
पदशौरेंद्र मोहन टैगोर एक बंगाली कुलीन (aristocrat) और संगीत शास्त्रीयज्ञ (musicologist) थे, जिन्होंने 19वीं शताब्दी में यूरोप में भारतीय संगीत के ज्ञान का प्रसार किया।
तथ्यनाट्य शास्त्र में श्रुति (pitch में सबसे छोटा अंतर) और ताल (musical time) की अवधारणाएं शामिल हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: संगीत विज्ञान और ध्वनि विज्ञान की वैश्विक समझ में नाट्यशास्त्र के ऐतिहासिक योगदान का विश्लेषण कीजिए।
एपिस्टेमिक एप्रोप्रिएशन: पश्चिमी विद्वानों द्वारा भारतीय संगीत के सिद्धांतों को अपनाना और उनके स्वदेशी मूल को नज़रअंदाज़ करना
वैज्ञानिक निरंतरता: प्राचीन भारतीय ध्वनिक सिद्धांतों का आधुनिक वैश्विक वर्गीकरण प्रणालियों में बदलाव
मुख्य शब्द: नाट्य शास्त्र · संगीतशास्त्र · ज्ञान संबंधी विनियोग · ध्वनि विज्ञान · सांस्कृतिक विरासत
चर्चा में क्यों: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विरोध प्रदर्शन में हताहत हुए लोगों के परिवारों के लिए वित्तीय सहायता की घोषणा की और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला स्थल को मंदिर घोषित कर दिया।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मुस्लिम समुदाय के इस दावे को खारिज कर दिया कि भोजशाला स्थल एक मस्जिद थी, और इसे एक मंदिर घोषित किया। राज्य सरकार ने इस स्थल पर 'सरस्वती लोक' कॉरिडोर और राजा भोज रिसर्च इंस्टीट्यूट के निर्माण की घोषणा की है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानभोजशाला: मध्य प्रदेश स्थित एक स्थल जिसे हाई कोर्ट ने मंदिर घोषित किया है।
तथ्यराज्य सरकार ने 2003 में साइट पर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान जान गंवाने वाले तीन व्यक्तियों के परिवारों के लिए वित्तीय सहायता की घोषणा की।
पदमोहन यादव: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में ऐतिहासिक स्थलों की धार्मिक पहचान निर्धारित करने में न्यायिक हस्तक्षेपों के सांप्रदायिक सद्भाव और विरासत संरक्षण पर पड़ने वाले निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
न्यायिक निगरानी: ऐतिहासिक दावों और धार्मिक स्वतंत्रता के संवैधानिक संरक्षण के बीच संतुलन
हेरिटेज मैनेजमेंट: पुरातात्विक संरक्षण और समकालीन धार्मिक पहचान के बीच टकराव
सांप्रदायिक तनाव: स्थानीय सामाजिक एकजुटता पर साइट-विशिष्ट धार्मिक पदनामों का प्रभाव
मुख्य शब्द: न्यायिक सक्रियता · सांप्रदायिक सद्भाव · विरासत का संरक्षण · धार्मिक पहचान · राज्य का हस्तक्षेप
चर्चा में क्यों: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 25 मई, 2026 को नई दिल्ली में पद्म पुरस्कारों का वितरण किया, जिसमें सिनेमा और खेल सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया गया।
ये पुरस्कार सोमवार, 25 मई, 2026 को नई दिल्ली में प्रदान किए गए। पुरस्कार विजेताओं में धर्मेंद्र (मरणोपरांत पद्म विभूषण), एन. राजम (पद्म विभूषण), भगत सिंह कोश्यारी और उदय कोटक (पद्म भूषण), तथा हरमनप्रीत कौर और प्रोसेनजीत चटर्जी (पद्म श्री) शामिल थे।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
पदराष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पद्म पुरस्कारों को प्रदान करने वाली अथॉरिटी हैं।
तथ्यधर्मेंद्र को मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
तथ्यप्रोसेनजित चटर्जी को भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया।
तथ्यहरमनप्रीत कौर को पद्म श्री पुरस्कार मिला।
मेन्स के लिए
प्रश्न: समकालीन युग में भारत की सांस्कृतिक विरासत और विविध उपलब्धियों को मान्यता देने और उन्हें बढ़ावा देने में पद्म पुरस्कारों के महत्व पर चर्चा कीजिए।
सांस्कृतिक सॉफ्ट पावर: राष्ट्रीय पहचान के लिए सिनेमा और खेल को एक टूल के रूप में पहचान
मेरिटोक्रेटिक पहचान: पारंपरिक कलाओं और आधुनिक प्रोफेशनल उपलब्धियों के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: सांस्कृतिक पहचान · राष्ट्रीय सम्मान · सॉफ्ट पावर · योग्यता आधारित व्यवस्था · सांस्कृतिक विरासत
चर्चा में क्यों: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले के बाद, हिंदू याचिकाकर्ताओं ने ASI और केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के पास भोजशाला परिसर में मुफ्त प्रवेश और इस्लामी प्रतीकों को हटाने की मांग करते हुए आवेदन दायर किए हैं।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 15 मई को भोजशाला स्थल को वागदेवी मंदिर घोषित कर दिया है। कोर्ट ने पिछले उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसमें मुस्लिमों को वहां नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी। याचिकाकर्ता वैज्ञानिक खुदाई के माध्यम से भगवान हनुमान और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियों को वापस निकालने की मांग कर रहे हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
स्थानभोजशाला: मध्य प्रदेश में स्थित एक ऐतिहासिक कॉम्प्लेक्स।
तथ्यमध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 15 मई को इस स्थल को वागदेवी मंदिर घोषित किया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में ऐसे विरासत स्थलों के प्रबंधन और संरक्षण में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए जो परस्पर विरोधी धार्मिक और ऐतिहासिक दावों के अधीन हैं। चर्चा कीजिए।
कानूनी-धार्मिक विवाद: पूजा के अधिकार और पुरातात्विक अखंडता के बीच संतुलन
प्रशासनिक बाधा: विवादित ऐतिहासिक पहचान वाले स्थलों को संभालने के लिए ASI के जनादेश में जटिलता
सांप्रदायिक संवेदनशीलता: साझा सांस्कृतिक स्थानों के संरक्षण में सार्वजनिक भावना और सांप्रदायिक सद्भाव का प्रबंधन
मुख्य शब्द: हेरिटेज मैनेजमेंट · धार्मिक बहुलता · पुरातात्विक अखंडता · न्यायिक हस्तक्षेप · सांस्कृतिक पहचान
चर्चा में क्यों: पुरातत्वविद् महाराष्ट्र में खोजे गए 2,000 साल पुराने एक गोलाकार पत्थर के भूलभुलैया (labyrinth) का अध्ययन कर रहे हैं, जो भारत और रोमन मेडिटेरेनियन के बीच प्राचीन व्यापारिक संबंधों का संकेत दे सकता है।
इस संरचना की खोज महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के बोरामणी घास के मैदानों में हुई थी। इसे भारत की सबसे बड़ी गोलाकार भूलभुलैया (circular labyrinth) के रूप में पहचाना गया है और माना जाता है कि यह सातवाहन वंश के काल की है।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
तथ्यआयु: अनुमानित रूप से 2,000 साल से अधिक पुरानी।
तथ्यसांस्कृतिक संबंध: यह रोमन काल के प्राचीन क्रेटन सिक्कों (Cretan coins) के डिजाइन के साथ समानताएं साझा करता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: बोरमानी भूलभुलैया (Boramani labyrinth) जैसे पुरातात्विक निष्कर्षों के आलोक में प्राचीन भारत और भूमध्यसागरीय क्षेत्र के बीच समुद्री व्यापार और सांस्कृतिक विनिमय के विस्तार का विश्लेषण कीजिए।
ट्रेड रूट एनालिसिस: सातवाहन बंदरगाहों को रोमन मेडिटेरेनियन से जोड़ने वाले मैरीटाइम सिल्क रूट्स के प्रमाण
सांस्कृतिक समन्वय: भारतीय 'चक्रव्यूह' अवधारणाओं और क्रेटन कॉइन आइकनोग्राफी के बीच स्थापत्य समानताएं
मुख्य शब्द: सातवाहन वंश · समुद्री व्यापार · सांस्कृतिक आदान-प्रदान · पुरातात्विक साक्ष्य · भूमध्य सागर संबंध
चर्चा में क्यों: लेडेन यूनिवर्सिटी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डच पीएम रॉब जेटन की उपस्थिति में एक समारोह के दौरान चोल काल की अनामंगलम प्लेट्स (Anaimangalam Plates) भारत को वापस लौटा दीं।
अनईमंगलम प्लेट्स लगभग 300 साल पहले खो गई थीं और 1862 से लीडन यूनिवर्सिटी (Leiden University) के पास थीं। ये चोल और श्रीविजय साम्राज्यों के बीच संबंधों के बारे में ऐतिहासिक जानकारी प्रदान करती हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
स्थानलेडेन यूनिवर्सिटी (Leiden University): डच संस्थान जिसने 1862 से इन प्लेट्स को अपने पास रखा था।
तथ्यअनईमंगलम प्लेट्स (Anaimangalam Plates): चोल-श्रीविजय संबंधों को दर्शाने वाले ऐतिहासिक अवशेष।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के ऐतिहासिक समुद्री व्यापार और सांस्कृतिक कूटनीति को समझने में प्राचीन पुरावशेषों की पुनर्प्राप्ति और संरक्षण के महत्व पर चर्चा कीजिए।
डिप्लोमैटिक लेवरेज: द्विपक्षीय सॉफ्ट पावर के लिए सांस्कृतिक विरासत का इस्तेमाल
पुरालेख संरक्षण: सदियों से खोई हुई कलाकृतियों के दस्तावेजीकरण और वापसी में चुनौतियां
मुख्य शब्द: सांस्कृतिक कूटनीति · वापसी · समुद्री इतिहास · सॉफ्ट पावर · हेरिटेज कंजर्वेशन
चर्चा में क्यों: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर में हिंदू समुदाय को निर्बाध पहुंच की अनुमति देने के निर्देश जारी किए हैं।
हाई कोर्ट ने भोजशाला स्थल को देवी सरस्वती को समर्पित एक हिंदू मंदिर और संस्कृत शिक्षण केंद्र घोषित किया है। ASI को 'एंशिएंट मॉन्यूमेंट्स एंड आर्कियोलॉजिकल साइट्स एंड रिमेन्स (AMASR) एक्ट, 1958' के तहत स्मारक संरक्षण सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाASI: Archaeological Survey of India स्मारक संरक्षण के लिए जिम्मेदार संस्था है।
अधिनियम / विधेयकAMASR Act, 1958: Ancient Monuments and Archaeological Sites and Remains Act हेरिटेज साइट्स के संरक्षण को नियंत्रित करता है।
तथ्यहाई कोर्ट ने साइट को एक हिंदू मंदिर और संस्कृत शिक्षण केंद्र घोषित किया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: पुरातत्वीय विरासत के संरक्षण और धार्मिक भावनाओं तथा सामुदायिक पहुंच की मांगों के बीच संतुलन स्थापित करने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
कानूनी विवाद: ऐतिहासिक स्थलों की न्यायिक व्याख्या बनाम AMASR एक्ट के तहत वैधानिक संरक्षण आदेश
प्रशासनिक बाधा: धार्मिक प्रथाओं के लिए सार्वजनिक पहुंच के अधिकारों और ASI के संरक्षण प्रोटोकॉल के बीच संतुलन
सामाजिक घर्षण: सांप्रदायिक सद्भाव और धर्मनिरपेक्ष शासन पर साइट-विशिष्ट धार्मिक घोषणाओं का प्रभाव
मुख्य शब्द: हेरिटेज कंजर्वेशन · धार्मिक भावना · न्यायिक सक्रियता · AMASR एक्ट · सांप्रदायिक सद्भाव
चर्चा में क्यों: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि भोजशाला-कमल मौला स्थल एक हिंदू मंदिर है, और इसमें हिंदू श्रद्धालुओं को पूर्ण पूजा अधिकार दिए गए हैं।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने लंबे समय से चले आ रहे भोजशाला-कमल मौला विवाद पर अपना फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस स्थल को हिंदू मंदिर घोषित करते हुए पूर्ण पूजा अधिकार प्रदान किए हैं। इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सकती है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानभोजशाला-कमल मौला साइट मध्य प्रदेश में स्थित है।
संस्थामध्य प्रदेश हाई कोर्ट वह न्यायिक संस्था है जिसने साइट की स्थिति पर फैसला सुनाया।
तथ्यकोर्ट ने साइट को 'पूर्ण पूजा अधिकार' (full worship rights) प्रदान किए।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में सांप्रदायिक सद्भाव को संतुलित करते हुए, दीर्घकालिक धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत संबंधी विवादों को सुलझाने में न्यायपालिका की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
न्यायिक व्याख्या: ऐतिहासिक दावों और समकालीन धार्मिक भावनाओं के बीच संतुलन
संवैधानिक संरक्षण: सार्वजनिक व्यवस्था को संभालते हुए आर्टिकल 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करना
हेरिटेज मैनेजमेंट: पुरातात्विक अखंडता को बचाए रखने और सक्रिय धार्मिक पूजा के बीच टकराव
मुख्य शब्द: न्यायिक समीक्षा · धार्मिक स्वतंत्रता · सांस्कृतिक विरासत · सांप्रदायिक सद्भाव · सार्वजनिक व्यवस्था
चर्चा में क्यों: एक CAG रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश में विरासत स्थलों की बिगड़ती स्थिति पर प्रकाश डाला गया है। रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि Archaeological Survey of India (ASI) द्वारा पर्याप्त प्रवर्तन (enforcement) न होने के कारण 96 केंद्र द्वारा संरक्षित स्मारकों पर अतिक्रमण हो गया है।
CAG की रिपोर्ट में यह पाया गया कि उत्तर प्रदेश में 31 केंद्र सरकार द्वारा संरक्षित स्मारक (centrally protected monuments) लापता हैं और केवल 31 स्मारकों के पास ही स्वामित्व संबंधी उचित दस्तावेज़ मौजूद हैं। सर्वेक्षण किए गए स्थलों में से 96 स्मारकों पर अतिक्रमण पाया गया।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
तथ्यCAG ने पाया कि उत्तर प्रदेश में 31 केंद्र द्वारा संरक्षित स्मारक (centrally protected monuments) लापता हैं।
तथ्यक्षेत्र में 96 स्मारकों (monuments) को अतिक्रमण (encroached) के रूप में पहचाना गया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: तेजी से होते शहरीकरण और अतिक्रमण के बीच भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में मौजूद संस्थागत और विधायी कमियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
एन्फोर्समेंट गैप: ASI द्वारा निगरानी और डॉक्यूमेंटेशन की कमी से ऐतिहासिक अखंडता का नुकसान
विधायी शून्य: केंद्रीय सुरक्षा को पूरा करने के लिए व्यापक राज्य-स्तरीय विरासत कानूनों का अभाव
अर्बन-हेरिटेज संघर्ष: संरक्षित स्थलों पर शहरी विस्तार का दबाव और सांस्कृतिक विरासत का नुकसान
मुख्य शब्द: हेरिटेज कंजर्वेशन · संस्थागत जवाबदेही · सांस्कृतिक संरक्षण · अतिक्रमण · विधायी ढांचा
चर्चा में क्यों: 'किंग ऑफ स्वैंग' के नाम से मशहूर सतीश जॉर्ज कश्यप ने लोक नाट्य 'जानी चोर' के 25 साल पूरे होने का जश्न मनाया। यह नाटक अब स्थानीय गाँवों के प्रदर्शन से निकलकर अंतरराष्ट्रीय फेस्टिवल्स (festivals) तक पहुँच चुका है।
स्वांग हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में प्रचलित एक सदियों पुराना लोक नाट्य रूप है। यह संगीत, कविता, प्रहसन और नृत्य के माध्यम से कहानियाँ सुनाता है, जैसे कि चतुर चोर 'जानी चोर' की कहानी जो अमीर और भ्रष्ट लोगों को अपनी चतुराई से मात देता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानस्वांग हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से जुड़ा एक लोक नाट्य (folk theatre) रूप है।
तथ्यनाटक 'जानी चोर' ने 2001 में हिसार जेल में अपनी यात्रा शुरू की।
तथ्यस्वंग (Swang) की विशेषता संगीत, कविता, फार्स (farce) और नृत्य का मिश्रण है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: क्षेत्रीय सांस्कृतिक पहचानों के संरक्षण में लोक नाट्य की भूमिका और वैश्विक सांस्कृतिक कूटनीति में इसकी क्षमता का विश्लेषण कीजिए।
सांस्कृतिक संरक्षण: कमर्शियल डाइल्यूशन का जोखिम बनाम क्षेत्रीय भाषाई बारीकियों का संरक्षण
ग्लोबल आउटरीच: इंटरनेशनल फेस्टिवल के दर्शकों के लिए लोकल लोक सौंदर्य को ट्रांसलेट करने की चुनौतियां
मुख्य शब्द: लोक थिएटर · सांस्कृतिक विरासत · क्षेत्रीय पहचान · सांस्कृतिक कूटनीति · अमूर्त विरासत
चर्चा में क्यों: प्रगतिशील संगठन भारत के पहले किसान आंदोलन के रूप में कागोडु सत्याग्रह की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं, ताकि भूमि सुधारों पर इसके प्रभाव और इसकी भूमिका को रेखांकित किया जा सके।
कागोडू सत्याग्रह मार्च 1951 में कागोडू गाँव में हुआ था। इसमें बटाईदारों ने उपज के बंटवारे को लेकर ज़मींदारों के खिलाफ विद्रोह किया था, जिसके परिणामस्वरूप पुलिस की बर्बरता और गिरफ्तारियां हुईं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानकगोडु गाँव: भारत के पहले किसान आंदोलन का स्थल।
तथ्यमार्च 1951: कगोडु सत्याग्रह (Kagodu Satyagraha) विद्रोह की तारीख।
तथ्य75वीं वर्षगांठ: इसे 2026 में मनाया जाएगा।
मेन्स के लिए
प्रश्न: स्वतंत्रता के पश्चात भारत में भूमि सुधार आंदोलनों और कृषि अधिकारों की दिशा को आकार देने में कागोडु सत्याग्रह के ऐतिहासिक महत्व का विश्लेषण कीजिए।
संस्थागत विरासत: किरायेदार-ज़मींदार विवादों से औपचारिक लैंड सीलिंग और पुनर्वितरण नीतियों तक का सफर
सोशल मोबिलाइजेशन: सामंती ज़मींदारी व्यवस्था को चुनौती देने में ज़मीनी किसान आंदोलनों की भूमिका
मुख्य शब्द: कृषि आंदोलन · भूमि सुधार · किसान और किरायेदार अधिकार · सामाजिक न्याय · ऐतिहासिक स्मरण
चर्चा में क्यों: ब्रिटिश निजी संग्रह से वापस लाए गए बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेष, सार्वजनिक प्रदर्शनी के लिए लद्दाख के लेह पहुंचे हैं।
ये अवशेष उत्तर प्रदेश के पिपरहवा में खोजे गए थे और इन्हें 29 अप्रैल, 2026 को नई दिल्ली से लेह के लिए भेजा गया। इन्हें 1 मई से 10 मई तक लेह के जीवत्सल में प्रदर्शित किया जाएगा और उसके बाद इन्हें ज़ांस्कर ले जाया जाएगा।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
स्थानपिपरहवा: उत्तर प्रदेश में वह स्थान जहाँ बुद्ध के अवशेष (relics) मिले थे।
स्थानजीवेट्सल: लद्दाख के लेह में स्थित स्थान, जहाँ अवशेषों (relics) को प्रदर्शित किया जा रहा है।
तथ्यपुरावशेषों (Relics) को एक निजी ब्रिटिश परिवार के कलेक्शन से वापस लाया गया।
पदविनय कुमार सक्सेना: लद्दाख के उपराज्यपाल जिन्होंने अवशेषों का स्वागत किया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: सांस्कृतिक विरासत की वापसी (repatriation) अंतरराष्ट्रीय संबंधों को सुदृढ़ करने और बौद्ध सभ्यता की ऐतिहासिक पहचान को संरक्षित करने में किस प्रकार महत्वपूर्ण है, चर्चा कीजिए।
डिप्लोमैटिक लेवरेज: सॉफ्ट पावर और कल्चरल डिप्लोमेसी के लिए प्रत्यावर्तन एक टूल
हेरिटेज संरक्षण: स्थानांतरित अवशेषों की पुरातात्विक अखंडता बनाए रखने में चुनौतियां
सांस्कृतिक पर्यटन: लद्दाख और ज़ांस्कर क्षेत्रों में धार्मिक पर्यटन की संभावनाएं
मुख्य शब्द: सांस्कृतिक प्रत्यावर्तन · सॉफ्ट पावर · हेरिटेज कंजर्वेशन · बौद्ध सर्किट · सांस्कृतिक कूटनीति
चर्चा में क्यों: तमिलनाडु के थूथुकुडी में भारी बारिश के कारण 12,000 साल पुराना जीवाश्म भंडार (fossil bed) सामने आ गया है। इसके बाद, ज़ूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ZSI) ने होलोसीन इकोसिस्टम (Holocene ecosystems) के अध्ययन के लिए इसके महत्व की पुष्टि की है।
जीवाश्मों का यह भंडार तमिलनाडु के थूथुकुडी में खोजा गया है, जो 12,000 साल पुराना है। ज़ूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ZSI) ने इसे भारत के क्वाटरनरी (Quaternary) रिकॉर्ड का हिस्सा बताया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानथूथुकुडी: तमिलनाडु का वह जिला जहाँ 12,000 साल पुराना फॉसिल बेड (fossil bed) खोजा गया था।
संस्थाZoological Survey of India (ZSI): यह संस्था Quaternary रिकॉर्ड के हिस्से के रूप में साइट के महत्व की पुष्टि के लिए जिम्मेदार है।
तथ्ययह फॉसिल साइट दक्षिणी भारत में होलोसीन (Holocene) इकोसिस्टम और कोस्टल डायनेमिक्स (coastal dynamics) के बारे में जानकारी प्रदान करती है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: यह स्पष्ट कीजिए कि चतुर्थांश (Quaternary) जीवाश्म रिकॉर्ड का अध्ययन भारतीय उपमहाद्वीप में पुरा-जलवायु परिवर्तनों और जैव विविधता में आए बदलावों को समझने में किस प्रकार सहायक हो सकता है? चर्चा कीजिए।
पेलियोक्लाइमैटिक रिकंस्ट्रक्शन: पुराने वनस्पति और तटीय डायनेमिक्स को मॉडल करने के लिए फॉसिल डेटा का उपयोग
बायोडायवर्सिटी मैपिंग: होलोसीन इकोसिस्टम के विकास को समझने के लिए दक्षिण भारतीय फॉसिल रिकॉर्ड की कमियों को भरना
मुख्य शब्द: क्वाटरनरी रिकॉर्ड · होलोसीन इकोसिस्टम · पेलियोक्लाइमेटोलॉजी · जैव विविधता संरक्षण · तटीय गतिशीलता
चर्चा में क्यों: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में आंबेडकर की मूर्तियों को सुंदर बनाने और उनके संरक्षण के लिए लखनऊ में 'डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर स्टैच्यू डेवलपमेंट स्कीम' (Dr. Bhimrao Ramji Ambedkar Statue Development Scheme) शुरू की।
इसका उद्देश्य पूरे उत्तर प्रदेश राज्य में बी.आर. अंबेडकर की मूर्तियों को सुंदर बनाना और उनका संरक्षण करना है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
योजनाडॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर स्टैच्यू डेवलपमेंट स्कीम: मूर्तियों के संरक्षण के लिए उत्तर प्रदेश की एक राज्य-स्तरीय पहल।
तथ्यकार्यक्रम के दौरान जारी किए गए स्मारिका (souvenir) का शीर्षक 'भारत भाग्य विधाता' था।
पदयोगी आदित्यनाथ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री।
मेन्स के लिए
प्रश्न: आधुनिक भारत में सामाजिक एकजुटता को बढ़ावा देने और संवैधानिक शिल्पकारों के योगदान को सम्मानित करने में सार्वजनिक स्मारकों और स्मारक योजनाओं के महत्व पर चर्चा कीजिए।
सांस्कृतिक संरक्षण: स्मारक स्थलों की ऐतिहासिक अखंडता और सौंदर्यपूर्ण सौंदर्यीकरण के बीच संतुलन
सामाजिक समावेशिता: भारतीय संविधान में हाशिए पर रहने वाले समुदायों के योगदान को स्वीकार करने के लिए सार्वजनिक स्थानों का उपयोग
मुख्य शब्द: सामाजिक एकजुटता · स्मृति योजनाएं · संवैधानिक ढांचा · सार्वजनिक स्थान · सांस्कृतिक विरासत
चर्चा में क्यों: 48 वर्षों के बाद, ओडिशा सरकार, RBI और मंदिर के पुजारियों ने पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर के भितरा रत्न भंडार में कीमती वस्तुओं की व्यापक सूची (inventory) बनाना शुरू किया है।
इस इन्वेंट्री के अंतर्गत 3D मैपिंग और कलर-कोडिंग सिस्टम का उपयोग करके 20 प्रकार के आभूषणों का दस्तावेजीकरण किया जाएगा। कीमती वस्तुओं के प्रत्येक बैग को एक विशिष्ट सीरियल नंबर दिया जाएगा, ताकि वर्तमान स्थिति की तुलना 1978 के रिकॉर्ड से की जा सके।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानभितर रत्न भंडार: ओडिशा के पुरी में स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर का आंतरिक कक्ष, जहाँ कीमती वस्तुएं रखी जाती हैं।
तथ्यइन्वेंट्री प्रक्रिया में 20 प्रकार के आभूषणों (ornaments) का दस्तावेजीकरण शामिल है।
तथ्यवर्तमान इन्वेंट्री का उद्देश्य 1978 के रिकॉर्ड के आधार पर कीमती वस्तुओं (valuables) का सत्यापन करना है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के प्राचीन मंदिरों की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और सुरक्षा में व्यवस्थित सूची प्रबंधन (इन्वेंटरी मैनेजमेंट) और पारदर्शिता के महत्व पर चर्चा कीजिए।
हेरिटेज संरक्षण: सार्वजनिक पारदर्शिता और धार्मिक परंपराओं की पवित्रता के बीच संतुलन
संस्थागत सहयोग: राज्य सरकार, केंद्रीय बैंकिंग संस्थानों और धार्मिक निकायों के बीच तालमेल
ऑडिट इंटीग्रिटी: चोरी रोकने और सांस्कृतिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रिकॉर्ड-कीपिंग की पुरानी कमियों को दूर करना
मुख्य शब्द: सांस्कृतिक विरासत · पारदर्शिता · इन्वेंटरी मैनेजमेंट · विरासत संरक्षण · संस्थागत तालमेल
चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि भक्तों को मंदिर में पूजा करने के लिए उस मंदिर के संप्रदाय की विशिष्ट परंपराओं और रीति-रिवाजों का पालन करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि धार्मिक संप्रदायों (religious denominations) की व्याख्या 'संप्रदाय' के दृष्टिकोण से की जानी चाहिए, जिनकी विशेषता साझा धार्मिक समझ और सामुदायिक निष्ठा होती है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि मंदिर प्रबंधन और आचरण को धर्म के अभ्यास के अधिकार के एक रूप में संरक्षित किया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीकसंप्रदाय: फैसले में इसे एक साझा धार्मिक समझ और पूजा पद्धतियों के प्रति सामुदायिक पालन के रूप में परिभाषित किया गया है।
तथ्य2018 के सबरीमाला फैसले ने मासिक धर्म की आयु वाली महिलाओं पर लगे प्रतिबंधों को हटा दिया।
पदमुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मंदिर के अनुष्ठानों से संबंधित फैसले की अध्यक्षता की।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में मंदिर प्रबंधन के संदर्भ में व्यक्तिगत मौलिक अधिकारों और धार्मिक संप्रदायों के संरक्षण के बीच संतुलन का विश्लेषण कीजिए।
संवैधानिक संघर्ष: परंपराओं को बनाए रखने के लिए धार्मिक संप्रदायों के सामूहिक अधिकार और आर्टिकल 25 की व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन
न्यायिक व्याख्या: धार्मिक प्रथाओं के दायरे और प्रतिबंधों को निर्धारित करने के लिए 'संप्रदाय टेस्ट' एक मापदंड के रूप में
मुख्य शब्द: परंपरा · धार्मिक संप्रदाय · अनुच्छेद 25 · अभ्यास का अधिकार · न्यायिक समीक्षा
चर्चा में क्यों: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने एलीफेंटा द्वीप पर 1,500 साल पुराने एक सीढ़ीदार जलाशय और विभिन्न पुरावशेषों (artifacts) की खोज की घोषणा की है।
सीमित वर्षा के प्रबंधन के लिए इस जलाशय का निर्माण द्वीप के बाहर से लाए गए पत्थर के ब्लॉकों का उपयोग करके किया गया था। नवंबर 2025 से शुरू हुई खुदाई में कपड़ा रंगने के लिए एक ईंटों से बनी संरचना, भंडारण के बर्तन और छठी शताब्दी ईस्वी की कलचुरी राजवंश के सिक्के मिले हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
स्थानएलिफेंटा आइलैंड मुंबई के तट पर स्थित है।
तथ्यइस जलाशय की अनुमानित आयु लगभग 1,500 वर्ष है।
तथ्यकलचुरी राजवंश के शासक कृष्णराज के सिक्के खोजे गए।
संस्थाआर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) वह संस्था है जो खुदाई (excavation) का कार्य करती है।
मेन्स के लिए
हाइड्रोलॉजिकल इंजीनियरिंग: पथरीले इलाकों में पानी की कमी से निपटने के लिए स्टेपेड डिज़ाइन और आयातित पत्थर का इस्तेमाल
वंशवादी जुड़ाव: सिक्कों और कपड़ा कलाकृतियों के ज़रिए कलचुरी वंश का प्रभाव और समुद्री व्यापार के प्रमाण
मुख्य शब्द: जल प्रबंधन · समुद्री व्यापार · मुद्राशास्त्र · पुरातत्व खुदाई · कलचुरी राजवंश
चर्चा में क्यों: IIT गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने खुलासा किया है कि 1961 का मातृत्व लाभ अधिनियम (Maternity Benefit Act) 1960 के दशक की जनसंख्या नियंत्रण की चिंताओं से प्रभावित था, जिसमें बड़े परिवारों के लिए लाभों को सीमित करने का प्रस्ताव एक नकारात्मक प्रोत्साहन (disincentive) के रूप में दिया गया था।
प्रार्थना दत्ता और मिथिलेश कुमार झा (IIT Guwahati) द्वारा किए गए एक अध्ययन में मातृत्व लाभ अधिनियम (Maternity Benefit Act), 1961 का विश्लेषण किया गया है। इस अध्ययन में पाया गया कि हालांकि मातृ स्वास्थ्य इसका प्राथमिक आधार था, लेकिन जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए लाभों को सीमित करने के ऐतिहासिक प्रस्ताव भी सामने आए थे।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
अधिनियम / विधेयकMaternity Benefit Act, 1961: गर्भावस्था और प्रसव के दौरान महिलाओं को लाभ प्रदान करने वाला कानून।
तथ्ययह स्टडी 1960 के दशक को एक ऐसे कालखंड के रूप में पहचानती है जहाँ कल्याणकारी नीतियां (welfare policies) जनसंख्या नियंत्रण के साथ जुड़ी हुई थीं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत की मातृत्व लाभ नीतियों के ऐतिहासिक विकास का विश्लेषण कीजिए और सामाजिक कल्याण एवं जनसंख्या नियंत्रण उपायों के मध्य विद्यमान अंतर्विरोधों का परीक्षण कीजिए।
पॉलिसी पैराडॉक्स: व्यक्तिगत प्रजनन अधिकारों और राज्य के डेमोग्राफिक लक्ष्यों के बीच संतुलन
विधायी बदलाव: आबादी पर आधारित बाधाओं से हटकर प्रजनन स्वास्थ्य और मातृ कल्याण पर ध्यान केंद्रित करना
मुख्य शब्द: जनसांख्यिकीय परिवर्तन · समाज कल्याण · विधायी इतिहास · प्रजनन स्वास्थ्य · आबादी नियंत्रण
चर्चा में क्यों: तेलंगाना हेरिटेज विभाग ने मुलुगु जिले में मेगालिथिक (Megalithic) मानव दफन स्थलों का एक विशाल समूह खोजा है, जो एक सुव्यवस्थित प्रागैतिहासिक बस्ती की ओर संकेत करता है।
'रकासी बंदालु' और 'रकासी गुहालू' के रूप में जानी जाने वाली ये साइट्स, एतूरनगरम अनुसूचित क्षेत्र के मोटलगुडेम गांव और उसके आसपास पाई गई हैं। इन संरचनाओं में बलुआ पत्थर की स्लैब और पत्थर के ऐसे कुंड शामिल हैं जो सरकोफेगी (sarcophagi) जैसे दिखते हैं, जिनके ऊपरी पत्थर (capstones) का वजन लगभग 10 से 20 टन है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
स्थानमुलुगु जिला तेलंगाना राज्य में स्थित है।
तथ्यमेगालिथिक (Megalithic) दफन स्थलों के कैपस्टोन्स (capstones) का वजन लगभग 10 से 20 टन है।
तथ्यइन संरचनाओं का निर्माण सैंडस्टोन स्लैब और पत्थर के उन ट्रफ्स (troughs) से किया गया है जो सरकोफेगी (sarcophagi) जैसे दिखते हैं।
तथ्यइस खोज में एतूरनगरम (Eturnagaram) शेड्यूल्ड एरिया में सैकड़ों दफन स्थल (burial sites) शामिल हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारतीय उपमहाद्वीप में प्रागैतिहासिक मानव समुदायों के सामाजिक-धार्मिक जीवन और अधिवास प्रतिरूपों को समझने में महापाषाणकालीन (मेगालिथिक) कब्रिस्तानों के महत्व की चर्चा कीजिए।
सांस्कृतिक निरंतरता: प्रागैतिहासिक भारत में जटिल अंत्येष्टि प्रथाओं और परलोक में विश्वास के प्रमाण
सेटलमेंट प्लानिंग: बलुआ पत्थर के निर्माण में आर्किटेक्चरल बारीकियां जो संगठित सामुदायिक श्रम की ओर इशारा करती हैं
पुरातात्विक महत्व: प्रागैतिहासिक क्षेत्रीय पहचान के संकेत के रूप में बड़े पैमाने पर डोलमेन समूहों की पहचान
मुख्य शब्द: मेगालिथिक संस्कृति · डोलमेन दफ़नेने की जगह · पुरातात्विक विरासत · प्रागैतिहासिक बस्ती · अंतिम संस्कार की रस्में
चर्चा में क्यों: राजा रवि वर्मा द्वारा बनाई गई 19वीं सदी की एक पेंटिंग, जिसका शीर्षक 'यशोदा एंड कृष्ण' है, दिल्ली में एक Saffronart नीलामी में रिकॉर्ड 17.9 मिलियन डॉलर में बिकी।
यह पेंटिंग सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के संस्थापक, साइरस पूनावल्ला द्वारा खरीदी गई थी। दिल्ली में सैफ्रॉनआर्ट (Saffronart) में हुई इस बिक्री ने भारतीय कलाकृतियों के लिए एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
पदराजा रवि वर्मा: 19वीं सदी के भारतीय पेंटर, जिन्हें पौराणिक विषयों को चित्रित करने के लिए जाना जाता है।
तथ्य'यशोदा एंड कृष्णा' की बिक्री कीमत: $17.9 मिलियन।
स्थानSaffronart ऑक्शन: दिल्ली में आयोजित।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारतीय विरासत कला के संरक्षण और वाणिज्यिक मूल्यांकन में निजी संग्राहकों और नीलामी घरों की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
मार्केट डायनेमिक्स: भारतीय मास्टरपीस का पब्लिक गैलरी से प्राइवेट हाई-वैल्यू एसेट पोर्टफोलियो में शिफ्ट
सांस्कृतिक संरक्षण: विरासत कला के व्यावसायीकरण और सार्वजनिक पहुंच की ज़रूरत के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: आर्ट मार्केट · सांस्कृतिक विरासत · एसेट वैल्यूएशन · राजा रवि वर्मा · प्राइवेट कलेक्शन
चर्चा में क्यों: आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) उत्तर प्रदेश के अवध में सदियों पुराने एक शाही रसोईघर के जीर्णोद्धार (restoration) का नेतृत्व कर रहा है, ताकि इसकी वास्तुकला विरासत और सामुदायिक सेवा की विरासत को संरक्षित किया जा सके।
इस रसोई का निर्माण 1837 में अवध के शासक मुहम्मद अली शाह द्वारा किया गया था। इसकी मूल वास्तुकला की अखंडता को बनाए रखने के लिए इसे पारंपरिक चूने आधारित मोर्टार और दीवारों पर की गई जटिल नक्काशी के साथ पुनर्जीवित (Restore) किया जा रहा है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाआर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) वह संस्था है जो रेस्टोरेशन प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रही है।
स्थानरॉयल किचन उत्तर प्रदेश के अवध में स्थित है।
तथ्यइस संरचना का निर्माण 1837 में मुहम्मद अली शाह द्वारा किया गया था।
तथ्यकिचन रमजान और मुहर्रम के दौरान भोजन परोसना जारी रखता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: आधुनिक भारत में सामाजिक सामंजस्य और सांस्कृतिक निरंतरता को बढ़ावा देने में सांप्रदायिक विरासत स्थलों के संरक्षण के महत्व पर चर्चा कीजिए।
सांस्कृतिक निरंतरता: अवधी खान-पान की परंपराओं और सामुदायिक सेवा मॉडल का संरक्षण
हेरिटेज मैनेजमेंट: पुरातात्विक अखंडता और सक्रिय सामुदायिक उपयोग व धार्मिक परंपराओं के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: सांस्कृतिक विरासत · सामुदायिक सेवा · आर्किटेक्चरल रेस्टोरेशन · सामाजिक एकजुटता · अवधी संस्कृति
चर्चा में क्यों: एक संसदीय पैनल ने सिफारिश की है कि संस्कृति मंत्रालय भारत में सभी UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स पर रखरखाव के मानकों और आगंतुकों की सुविधाओं की व्यापक समीक्षा करे।
पैनल ने संस्कृति मंत्रालय से संरक्षण मानकों की समीक्षा के लिए आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) के साथ समन्वय करने का आग्रह किया है। पैनल ने साथ ही पांच साल की एक UNESCO नामांकन रणनीति की भी मांग की है, जिसमें कम से कम 10 संभावित नामांकनों की पाइपलाइन और बहुराष्ट्रीय नामांकनों के लिए एक व्यवस्थित योजना शामिल हो।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाआर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI): हेरिटेज साइट के रखरखाव पर मिनिस्ट्री ऑफ कल्चर के साथ समन्वय करने के लिए जिम्मेदार संस्था।
तथ्यUNESCO नामांकन रणनीति: पैनल ने कम से कम 10 संभावित नामांकन की पाइपलाइन की मांग की।
तथ्यटाइमलाइन: मंत्रालय से यह उम्मीद की जा रही है कि वह एक साल के भीतर रणनीति पेश करेगा और 90 दिनों के भीतर 2025-26 के उपयोग के आंकड़े (utilization figures) प्रदान करेगा।
संस्थाUNESCO Operational Guidelines: वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स (World Heritage Sites) के संरक्षण, व्याख्या और विज़िटर मैनेजमेंट (visitor management) मानकों को नियंत्रित करने वाला फ्रेमवर्क।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में पर्यटन की बढ़ती मांगों और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों की अखंडता को बनाए रखने के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए आवश्यक संस्थागत और बजटीय आवश्यकताओं का विश्लेषण कीजिए।
संरक्षण और पर्यटन के बीच संतुलन: UNESCO ऑपरेशनल गाइडलाइन्स के तहत साइट की अखंडता और विज़िटर मैनेजमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर का तालमेल
संस्थागत समन्वय: संस्कृति मंत्रालय और ASI के बीच सुव्यवस्थित बजट प्रावधान और समर्पित स्टाफ की ज़रूरत
स्ट्रेटेजिक प्लानिंग: एड-हॉक साइट मैनेजमेंट से स्ट्रक्चर्ड पांच साल के नामांकन और मेंटेनेंस पाइपलाइन की ओर बदलाव
चर्चा में क्यों: एडवोकेट आकाश वशिष्ठ द्वारा दायर एक PIL के बाद, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में विरासत स्थलों (Heritage sites) की जर्जर स्थिति के संबंध में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और ASI को नोटिस जारी किया है।
कोर्ट ने केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय, ASI, नेशनल मॉन्यूमेंट्स अथॉरिटी और राज्य पुरातत्व विभाग को नोटिस जारी किए हैं। याचिका में उपेक्षित संरचनाओं के संबंध में इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (INTACH) के आंकड़ों का हवाला दिया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाINTACH: इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (Indian National Trust for Art and Cultural Heritage) हेरिटेज कंजर्वेशन (heritage conservation) के लिए एक नॉन-प्रॉफिट ऑर्गनाइजेशन है।
संस्थानेशनल मॉन्यूमेंट्स अथॉरिटी (National Monuments Authority): स्मारकों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए जिम्मेदार संस्था।
स्थानइलाहाबाद हाई कोर्ट: उत्तर प्रदेश में याचिका की निगरानी करने वाली न्यायिक संस्था।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत की क्षय होती विरासत स्थलों के संरक्षण में आने वाली संस्थागत और रसद संबंधी चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए तथा उनके दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित करने हेतु उचित उपाय सुझाइए। चर्चा कीजिए।
एजेंसियों के बीच टकराव: ASI, राज्य पुरातत्व विभागों और शहरी विकास निकायों के बीच ओवरलैपिंग अधिकार क्षेत्र
फंडिंग की कमी: गैर-स्मारक विरासत संरचनाओं के रखरखाव के लिए बजट आवंटन अपर्याप्त
शहरी अतिक्रमण: तेज़ी से होता शहरीकरण और बफर ज़ोन की कमी ऐतिहासिक स्थलों की संरचनात्मक मजबूती के लिए खतरा
मुख्य शब्द: हेरिटेज कंजर्वेशन · जनहित याचिका · सांस्कृतिक संरक्षण · संस्थागत जवाबदेही · शहरी अतिक्रमण
चर्चा में क्यों: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने प्राचीन मंदिरों के ऊपर इसके निर्माण से संबंधित Archaeological Survey of India (ASI) की रिपोर्ट की समीक्षा करने के लिए भोजशाला-कमल मौला मस्जिद का स्थल निरीक्षण (site visit) निर्धारित किया है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट एक ऐसी ASI रिपोर्ट की समीक्षा कर रहा है जिसमें यह निष्कर्ष निकाला गया है कि वर्तमान मस्जिद की संरचना प्राचीन मंदिरों के ऊपर बनाई गई थी। कोर्ट 2 अप्रैल को होने वाली अंतिम बहस से पहले स्थल का दौरा करेगा।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
स्थानभोजशाला-कमल मौला मस्जिद: मध्य प्रदेश में स्थित यह साइट न्यायिक समीक्षा (judicial review) के अधीन है।
तथ्य2 अप्रैल: मस्जिद स्थल मामले में अंतिम बहस के लिए अगली सुनवाई की तारीख।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में विरासत स्थलों से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे सांप्रदायिक विवादों को सुलझाने में पुरातात्विक साक्ष्यों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
साक्ष्यों का टकराव: पुरातात्विक खोजों, धार्मिक भावनाओं और ऐतिहासिक वृत्तांतों के बीच संतुलन
न्यायिक निगरानी: साझा सांस्कृतिक स्थानों पर सांप्रदायिक दावों के बीच न्यायपालिका की भूमिका
मुख्य शब्द: आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया · विरासत का संरक्षण · न्यायिक समीक्षा · सांप्रदायिक सद्भाव · सांस्कृतिक विरासत
चर्चा में क्यों: केरल सरकार ने केरल कल्चरल एक्टिविस्ट्स वेलफेयर फंड बोर्ड (Kerala Cultural Activists Welfare Fund Board) के माध्यम से कलाकारों के लिए वित्तीय सहायता और सुपरएनुएशन पेंशन (superannuation pensions) में वृद्धि की है।
केरल सरकार ने कलाकारों के लिए सुपरएनुएशन पेंशन (superannuation pension) को ₹4,000 से बढ़ाकर ₹5,000 कर दिया है। केरल कल्चरल एक्टिविस्ट्स वेलफेयर फंड बोर्ड ने फैमिली पेंशन, डिसेबिलिटी पेंशन और लाइफटाइम मेडिकल असिस्टेंस सहित अन्य लाभों में भी वृद्धि की है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यकेरल में कलाकारों के लिए सुपरएनुएशन पेंशन (Superannuation pension) ₹4,000 से बढ़ाकर ₹5,000 कर दी गई है।
संस्थाकेरल कल्चरल एक्टिविस्ट्स वेलफेयर फंड बोर्ड (Kerala Cultural Activists Welfare Fund Board) वह संस्था है जो कलाकारों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
तथ्य60 वर्ष से अधिक आयु के पात्र कलाकार 1 अप्रैल, 2026 से तीन महीने के भीतर 10 साल का योगदान देकर सदस्यता के लिए आवेदन कर सकते हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और पारंपरिक कलाकारों की आजीविका को सुदृढ़ करने में राज्य-प्रायोजित कल्याणकारी कोषों के महत्व पर चर्चा कीजिए।
आर्थिक भेद्यता: गैर-व्यावसायिक पारंपरिक कला रूपों के लिए टिकाऊ आय मॉडल की कमी
संस्थागत समर्थन: सांस्कृतिक कलाकारों के लिए सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में राज्य-संचालित कल्याण बोर्डों की भूमिका
मुख्य शब्द: सामाजिक सुरक्षा · सांस्कृतिक संरक्षण · राज्य कल्याण · अमूर्त विरासत · आजीविका सहायता
चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार आशीष राय द्वारा दायर एक याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने टोक्यो के एक मंदिर से नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अवशेषों को वापस लाने की मांग की थी। कोर्ट ने सुझाव दिया है कि यह अनुरोध नेताजी की बेटी द्वारा किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने टोक्यो के एक मंदिर से नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अवशेषों की वापसी के संबंध में वरिष्ठ पत्रकार आशीष राय द्वारा दायर एक याचिकाखारिज कर दी है। कोर्ट ने सुझाव दिया है कि नेताजी की पुत्री और उनकी एकमात्र उत्तराधिकारी, प्रोफेसर अनीता बोस पफ, इस अनुरोध के साथ सीधे मंदिर से संपर्क करें।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
पदप्रोफेसर अनीता बोस पाफ: नेताजी सुभाष चंद्र बोस की बेटी और एकमात्र उत्तराधिकारी।
स्थानटोक्यो: वह मंदिर जहाँ नेताजी के अवशेष वर्तमान में रखे गए हैं।
तथ्यसुप्रीम कोर्ट: नेताजी के अवशेषों की वापसी की मांग करने वाली याचिकाको खारिज कर दिया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की विरासत के महत्व और राष्ट्रीय पहचान के निर्माण हेतु उनके अवशेषों की पुनर्प्राप्ति के महत्व पर चर्चा कीजिए।
डिप्लोमैटिक प्रोटोकॉल: राज्य के रिपैट्रिएशन प्रयासों के मुकाबले निजी उत्तराधिकार अधिकारों को संतुलित करना
प्रतीकात्मक मूल्य: राष्ट्रीय एकता और ऐतिहासिक विमर्श को बढ़ावा देने में ऐतिहासिक अवशेषों की भूमिका
मुख्य शब्द: वापसी · स्वतंत्रता संग्राम · न्यायिक निगरानी · राष्ट्रीय विरासत · ऐतिहासिक विरासत
चर्चा में क्यों: विलुपुरम जिले में पम्बाई नदी के किनारे हुई सतह जांच (surface investigation) के दौरान, तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग (TNSDA) ने लौह युग की सांस्कृतिक सामग्री, जिसमें कलश दफन (urn burials) और मिट्टी के बर्तन शामिल हैं, की खोज की है।
पुरातत्वविदों ने बी. करैमेडु, सेंगाडु, कुरुम्बनकोट्टई, पोय्यापक्कम, वी. पुधुर और अय्यनकोविलपट्टू जैसे स्थानों पर रिहाइश के टीले और दफन स्थल (burial sites) की पहचान की है। बरामद किए गए अवशेष लौह युग, प्रारंभिक ऐतिहासिक काल और ऐतिहासिक काल के हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानपम्बाई नदी तमिलनाडु के विल्लुपुरम जिले में स्थित है।
तथ्यबरामद किए गए अवशेषों में लौह युग के urn burials (मटकेनुमा दफन स्थल), potsherds (मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े), glass beads (कांच के मनके) और ceramics (मिट्टी के बर्तन) शामिल हैं।
तथ्यTNSDA ने लौह युग (Iron Age), प्रारंभिक ऐतिहासिक (Early Historic) और ऐतिहासिक काल (Historic period) के अवशेषों वाले स्थलों की पहचान की है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: पम्बाई नदी बेसिन में होने वाले पुरातात्विक उत्खनन दक्षिण भारत की प्रारंभिक सभ्यताओं के सामाजिक-आर्थिक विकास के पुनर्निर्माण में किस प्रकार योगदान देते हैं? चर्चा कीजिए।
कालानुक्रमिक मैपिंग: लौह युग की दफन प्रथाओं और शुरुआती शहरीकरण के पैटर्न के बीच संबंध
मटेरियल कल्चर विश्लेषण: व्यापार नेटवर्क और शिल्प विशेषज्ञता को ट्रैक करने के लिए सिरेमिक और ग्लास बीड्स का उपयोग
मुख्य शब्द: आर्कियोलॉजिकल सर्वे · भौतिक संस्कृति · लौह युग · आवास टीले · ऐतिहासिक पुनर्निर्माण
चर्चा में क्यों: द हिंदू ने मीनमबल सिवराज के जीवन पर प्रकाश डाला है, जो एक अग्रणी दलित महिला कार्यकर्ता थीं। उन्होंने बी.आर. अंबेडकर और पेरियार जैसे नेताओं के साथ मिलकर SC अधिकारों और लैंगिक समानता (Gender Equality) की वकालत की थी।
मीनामबल सिवराज ऑल इंडिया अनुसूचित जातियाँ फेडरेशन (All India Scheduled Castes Federation) में शामिल होने वाली पहली दलित महिला थीं। उन्होंने एक मजिस्ट्रेट के रूप में कार्य किया और बी.आर. अंबेडकर, पेरियार ई.वी. रामास्वामी और जवाहरलाल नेहरू जैसे प्रमुख व्यक्तित्वों के साथ मिलकर काम किया।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
पदमीनामबल सिवराज: ऑल इंडिया अनुसूचित जातियाँ फेडरेशन (All India Scheduled Castes Federation) में शामिल होने वाली पहली दलित महिला।
पदमीनमबल सिवराज ने मजिस्ट्रेट और विभिन्न बोर्ड्स और कमेटियों के सदस्य के रूप में कार्य किया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: स्वतंत्रता के पश्चात भारत में दलित और महिला अधिकारों के विकास में जमीनी स्तर की सक्रियता और अंतर्विभागीय आंदोलनों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
इंटरसेक्शनल एडवोकेसी: सामाजिक सुधार में जाति-आधारित अधिकारों और लैंगिक समानता की एक साथ मांग
संस्थागत भागीदारी: जमीनी स्तर की सक्रियता से लेकर मजिस्ट्रेट और कमेटी की सदस्यता जैसी औपचारिक भूमिकाओं तक का बदलाव
मुख्य शब्द: सामाजिक सुधार · दलित अधिकार · लैंगिक समानता · इंटरसेक्शनलिटी · जमीनी स्तर पर सक्रियता
चर्चा में क्यों: द हिंदू ने बारपेटा के 'डोल यात्रा' उत्सव को नव-वैष्णव परंपरा के एक मॉडल के रूप में रेखांकित किया है, जो सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से सामाजिक समानता और पारिस्थितिक कल्याण (Ecological well-being) को बढ़ावा देता है।
भारत के बारपेटा में आयोजित होने वाला 'डोल यात्रा' उत्सव, श्रीमंत शंकरदेव द्वारा स्थापित नव-वैष्णव परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह उत्सव साझा श्रम और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से कठोर पदानुक्रमों को समाप्त कर आध्यात्मिक और पारिस्थितिक कल्याण के अंतर्संबंधों पर जोर देता है।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
पदश्रीमंत शंकरदेव: Neo-Vaishnavite परंपरा के संस्थापक/निर्माता।
तथ्यडोल जत्रा: एक ऐसा त्योहार जिसमें कारीगरों और व्यापारियों के बीच कार्यों का पुनर्वितरण और सामूहिक आर्थिक गतिविधि (collective economic activity) की विशेषता होती है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: असम की नव-वैष्णव परंपराओं जैसी सांस्कृतिक प्रथाएं समकालीन भारत में सामाजिक एकजुटता और पारिस्थितिक संरक्षण के साधनों के रूप में किस प्रकार कार्य करती हैं, चर्चा कीजिए।
सोशल इंजीनियरिंग: साझा सामुदायिक श्रम और कार्यों के पुनर्वितरण के जरिए कठोर पदानुक्रम को खत्म करना
इको-स्पिरिचुअल नेक्सस: आध्यात्मिक प्रथाओं के साथ पारिस्थितिक कल्याण का एक गैर-नौकरशाही मॉडल
आर्थिक एकजुटता: स्थानीय कारीगरों और व्यापारियों की सामूहिक भागीदारी के जरिए सामाजिक बंधन को मजबूत करना
मुख्य शब्द: नव-वैष्णववादी · सामाजिक एकजुटता · सांप्रदायिक भागीदारी · पारिस्थितिक कल्याण · सामाजिक समानता