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भाग I · स्था. 11.2025 
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प्राचीन भारतीय शल्य चिकित्सा के योगदान को सम्मानित करनेउद्देश्य से

GS1इतिहास · समाज · भूगोल· प्राचीन एवं मध्यकालीन भारत· प्रीलिम्स·

चर्चा में क्यों

प्राचीन भारतीय शल्य चिकित्सा के योगदान को सम्मानित करनेउद्देश्य से, 'शल्य चिकित्सा के जनक' महर्षि सुश्रुत की एक कांस्य प्रतिमा का 'रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जन्स ऑफ एडिनबर्ग' में अनावरण किया गया।

पृष्ठभूमि

इस प्रतिमा का निर्माण राघवनंतम स्थापति द्वारा पारंपरिक 'लॉस्ट-वैक्स' कास्टिंग (खोया-मोम ढलाई) तकनीक का उपयोग करके किया गया था। यह आयोजन 'कंपेंडियम ऑफ सुश्रुत' के विमोचन के साथ संपन्न हुआ, जो कि 40 लेखकों के योगदान से युक्त एक प्रकाशन है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • पदमहर्षि सुश्रुत: प्राचीन भारतीय चिकित्सक और शल्य चिकित्सक (surgeon), जिन्हें शल्य चिकित्सा तकनीकों और प्लास्टिक सर्जरी के अग्रदूत के रूप में मान्यता प्राप्त है।
  • स्थानRoyal College of Surgeons of Edinburgh: दुनिया के सबसे पुराने सर्जिकल कॉलेजों में से एक, जिसकी स्थापना 1505 में हुई थी।
  • तथ्यलॉस्ट-वैक्स कास्टिंग (Lost-wax casting): जटिल कांस्य मूर्तियों को बनाने के लिए उपयोग की जाने वाली एक पारंपरिक धातुकर्म प्रक्रिया।

मेन्स के लिए

प्रश्न: आधुनिक शल्य चिकित्सा पद्धतियों और वैश्विक स्वास्थ्य सेवा के विकास में आयुर्वेद और सुश्रुत संहिता जैसे प्राचीन भारतीय चिकित्सा तंत्रों के महत्व पर चर्चा कीजिए।

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗यह भी: GS2 · स्वास्थ्य नीति एवं जन स्वास्थ्य

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।