ASI ने शेषचलम वन में 16वीं शताब्दी के शिलालेखों की खोज की है, जो राजा सदाशिवराय की तीर्थयात्रा और दान संबंधी विवरणों को दर्ज करते हैं
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चर्चा में क्यों
ASI ने शेषचलम वन में 16वीं शताब्दी के शिलालेखों की खोज की है, जो राजा सदाशिवराय की तीर्थयात्रा और दान संबंधी विवरणों को दर्ज करते हैं। ये शिलालेख मध्यकालीन सांस्कृतिक और भाषाई विविधता को रेखांकित करते हैं।
पृष्ठभूमि
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने तिरुपति जिले के सदाशिवकोना में तीन दुर्लभ शिलालेखों की खोज की है। ये शिलालेख तेलुगु, तमिल और कन्नड़ भाषाओं में उत्कीर्ण हैं, जो राजा सदाशिवराय की तीर्थयात्रा और उनके द्वारा दिए गए दान का विवरण दर्ज करते हैं।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- स्थानसदाशिवकोना आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले के शेषचलम वन में स्थित है।
- पदखोज के दौरान के. मुनिरत्नम रेड्डी ने ASI मैसूर के निदेशक (Epigraphy) के रूप में कार्य किया।
- तथ्यये शिलालेख 16वीं शताब्दी के हैं और मंदिरों तथा धार्मिक संस्थानों को दिए गए दान का विवरण दर्ज करते हैं।
- संस्थाArchaeological Survey of India (ASI) भारत में पुरातात्विक अनुसंधान और संरक्षण के लिए प्राथमिक रूप से जिम्मेदार संस्था है।
मेन्स के लिए
Q. विजयनगर काल के पुरालेखीय साक्ष्यों के आधार पर मध्यकालीन दक्षिण भारत के सामाजिक-धार्मिक और भाषाई परिदृश्य के पुनर्निर्माण में उनकी भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- Linguistic synthesis: Evidence of trilingual (Telugu, Tamil, Kannada) inscriptions reflecting regional cultural integration
- Religious patronage: Documentation of royal donations as a tool for state-sponsored religious and social infrastructure
- Preservation challenges: Balancing archaeological documentation with ecological conservation in protected forest areas like Seshachalam
कीवर्ड: Epigraphy · Vijayanagara Empire · Cultural Heritage · Socio-religious landscape · Archaeological Preservation
इतिहास एवं संस्कृति पर और नोट्स
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।