मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच के अधिवक्ताओं ने जस्टिस जी.आर
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चर्चा में क्यों
मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच के अधिवक्ताओं ने जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन को हटाने के प्रस्ताव का विरोध करते हुए लोकसभा अध्यक्ष को एक ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने इस प्रस्ताव को संवैधानिक शक्तियों का दुरुपयोग बताया है।
पृष्ठभूमि
न्यायमूर्ति जी.आर. स्वामीनाथन को हटाने के प्रस्ताव के संबंध में लोकसभा अध्यक्ष को एक ज्ञापन सौंपा गया। अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि यह कदम न्यायपालिका को अस्थिर करने का एक 'आधारहीन' प्रयास है और उन्होंने इस प्रस्ताव को शुरू में ही (in limine) खारिज करने का आग्रह किया।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थान्यायाधीश को हटाने के प्रस्ताव (motion) को लोकसभा स्पीकर के पास प्रस्तुत किया जाता है।
- तथ्यमद्रास हाई कोर्ट के मदुरै बेंच में प्रैक्टिस करने वाले एडवोकेट्स ने इस मोशन की निंदा की।
मेन्स के लिए
प्रश्न: महाभियोग की प्रक्रिया के दौरान विधायी हस्तक्षेप से न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए प्रदान किए गए संवैधानिक सुरक्षा उपायों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- संस्थागत अखंडता: विशिष्ट न्यायिक फैसलों को निशाना बनाने के लिए महाभियोग प्रक्रिया के राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल होने का जोखिम
- संवैधानिक टकराव: आर्टिकल 124 के तहत न्यायिक स्वतंत्रता के सिद्धांत और संसदीय ओवरसाइट के बीच संतुलन
- प्रक्रियात्मक जांच: निष्पक्ष न्यायिक मानक बनाए रखने में जजों (इन्क्वायरी) एक्ट की भूमिका
मुख्य शब्द: न्यायिक स्वतंत्रता · महाभियोग · संवैधानिकवाद · शक्तियों का पृथक्करण · जज (इन्क्वायरी) एक्ट
राजव्यवस्था एवं संविधान पर और नोट्स
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