ट्रांसजेंडर एक्ट के प्रावधानों को विमेंस डिक्लेरेशन इंटरनेशनल इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी
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संवैधानिक अधिकार और लिंग-विशिष्ट सुरक्षा: समावेशिता और कानूनी मान्यता पर एक GS2 केस स्टडी।
चर्चा में क्यों
विमेंस डिक्लेरेशन इंटरनेशनल इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट में एक PIL दायर की है, जिसमें ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) एक्ट को चुनौती दी गई है।
पृष्ठभूमि
यह याचिका 'विमेंस डिक्लेरेशन इंटरनेशनल इंडिया' द्वारा दायर की गई है, जो यूके स्थित एक संगठन की भारत शाखा है। यह याचिका भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत 'ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) एक्ट, 2019' के खिलाफ दायर की गई है, जिसमें 2026 में संशोधन किया गया था।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संविधानआर्टिकल 32: मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन (enforcement) के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार प्रदान करता है।
- अधिनियम / विधेयकट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) एक्ट, 2019: भारत में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों और सुरक्षा को नियंत्रित करने वाला कानून।
- तथ्यविमेंस डिक्लेरेशन इंटरनेशनल इंडिया (Women’s Declaration International India): वह याचिकाकर्ता संस्था जो 2026 के संशोधन को चुनौती दे रही है।
प्रीलिम्स अभ्यास प्रश्न
भारतीय संविधान का कौन सा आर्टिकल एक नागरिक को मौलिक अधिकार (Fundamental Rights) के प्रवर्तन के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने की अनुमति देता है?
- (a)अनुच्छेद 32
- (b)अनुच्छेद 14
- (c)अनुच्छेद 21
- (d)अनुच्छेद 44
उत्तर देखें
उत्तर: (a) अनुच्छेद 32 — अनुच्छेद 32 मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार प्रदान करता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारतीय कानून में महिलाओं को प्रदान किए गए लिंग-विशिष्ट संरक्षण और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने में निहित कानूनी और संवैधानिक जटिलताओं का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- कानूनी अस्पष्टता: खुद से चुनी गई जेंडर आइडेंटिटी और जैविक लिंग पर आधारित सुरक्षा के बीच टकराव
- संवैधानिक टकराव: आर्टिकल 14 (समानता) और लिंग-आधारित स्पेस और सुरक्षा की ज़रूरत के बीच संतुलन
- पॉलिसी ट्रेड-ऑफ: महिलाओं के लिए कानूनी सुरक्षा को कम किए बिना ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए समावेशिता सुनिश्चित करना
मुख्य शब्द: जेंडर आइडेंटिटी · संवैधानिक सुरक्षा · सांविधिक अधिकार · अनुच्छेद 32 · समावेशिता · कानूनी मान्यता
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।