सत्याधीशसत्याधीश
SatyaDheesh
भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
ताज़ा करने के लिए खींचें
भाग I · स्था. 11.2025 
SatyaDheesh
सत्याधीश
भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
लाइव

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- दीपावली पटाखों के नियम हर तरफ टूटे, विराट कोहली का सुझाव

GS2राजव्यवस्था · शासन · अंतर्राष्ट्रीय संबंध· स्वास्थ्य नीति एवं जन स्वास्थ्य· प्रीलिम्स + मेन्स·

धार्मिक स्वतंत्रता और स्वास्थ्य के अधिकार के बीच संतुलन: पर्यावरण शासन (Environmental Governance) पर GS2 और एथिक्स का एक केस स्टडी।

चर्चा में क्यों

सुप्रीम कोर्ट ने दीपावली के दौरान पटाखों पर लगे प्रतिबंधों के व्यापक उल्लंघन पर गौर किया और सरकार से प्रतिबंधित पटाखों के खिलाफ नियमों को सख्ती से लागू करने का आग्रह किया। साथ ही, कोर्ट ने इसके लिए जन जागरूकता अभियान चलाने का सुझाव भी दिया।

पृष्ठभूमि

न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वरले की एक बेंच ने टिप्पणी की कि बार-बार न्यायिक आदेशों के बावजूद पटाखों से संबंधित नियमों का उल्लंघन होता रहता है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार सार्वजनिक स्वास्थ्य और मौलिक अधिकारों के संरक्षण के अधीन है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • संस्थासुप्रीम कोर्ट: प्रदूषण और पटाखों के प्रवर्तन (enforcement) पर मामला सुनने वाली न्यायिक संस्था।
  • तथ्यकोर्ट ने नोट किया कि पटाखों के शोर और प्रदूषण का विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों, बीमार व्यक्तियों, गर्भवती महिलाओं और specially-abled व्यक्तियों (दिव्यांगों) पर प्रभाव पड़ता है।
  • पदऐश्वर्या भाटी: केंद्र और दिल्ली सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाली एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (Additional Solicitor General)।

प्रीलिम्स अभ्यास प्रश्न

पटाखा नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से प्रतिबंधित पटाखों के खिलाफ नियम लागू करने और जन जागरूकता अभियान चलाने का सुझाव दिया।
  2. पटाखों का शोर और प्रदूषण विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों, बीमारों, गर्भवती महिलाओं और दिव्यांग व्यक्तियों (specially-abled persons) को प्रभावित करता है।
  3. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार पूर्ण है और इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के आधार पर प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता।
  1. (a)केवल 1
  2. (b)केवल 1 और 2
  3. (c)केवल 1 और 3
  4. (d)केवल 2 और 3
उत्तर देखें

उत्तर: (b) केवल 1 और 2 — कथन 1 और 2 सही हैं। कथन 3 गलत है: कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार सार्वजनिक स्वास्थ्य और मौलिक अधिकारों के संरक्षण के अधीन है।

मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में त्योहारों के उत्सवों के संदर्भ में धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार और स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार के मध्य उत्पन्न होने वाले द्वंद्व का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • संवैधानिक संतुलन: अनुच्छेद 25 (धर्म की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (स्वास्थ्य और स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार) के बीच तालमेल
  • एन्फोर्समेंट गैप: मौसमी कमर्शियल गतिविधियों और नकली या प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री पर पुलिसिंग की चुनौतियां
  • जनता की भागीदारी: प्रदूषण नियंत्रण में न्यायिक आदेशों से हटकर समुदाय के नेतृत्व वाले व्यवहारिक बदलाव की ओर बदलाव

मुख्य शब्द: स्वास्थ्य का अधिकार · धार्मिक स्वतंत्रता · पर्यावरण गवर्नेंस · न्यायिक सक्रियता · पब्लिक पॉलिसी · प्रदूषण नियंत्रण

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗यह भी: GS2 · न्यायपालिका एवं ऐतिहासिक फैसले

सामाजिक न्याय पर और नोट्स

सभी सामाजिक न्याय करेंट अफेयर्स →

कोई गलती या कोई कमी?

किसी नोट में गलती दिखे, या तैयारी के लिए कोई टॉपिक, फॉर्मेट या पीडीएफ चाहिए, तो हमें लिखें। हम हर मेल पढ़ते हैं और गलतियाँ जल्दी ठीक करते हैं।

गलती बताएँ →कुछ और चाहिए? बताएँ →[email protected]

यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।