WDI इंडिया ने NALSA जजमेंट और ट्रांसजेंडर एक्ट के खिलाफ PIL दायर की
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जेंडर आइडेंटिटी (Gender identity) बनाम सेक्स-आधारित अधिकार: GS2 सोशल जस्टिस और कॉन्स्टिट्यूशनल लॉ (Constitutional law) का एक केस स्टडी।
चर्चा में क्यों
विमेंस डिक्लेरेशन इंटरनेशनल (WDI) के भारत चैप्टर ने सुप्रीम कोर्ट में एक PIL दायर की है, जिसमें 2014 के NALSA फैसले और ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) एक्ट, 2026 को चुनौती दी गई है।
पृष्ठभूमि
UK स्थित एक नारीवादी संगठन, WDI का तर्क है कि लैंगिक पहचान (gender identity) को कानूनी मान्यता देने से जैविक रूप से महिलाओं के लिए निर्धारित अधिकारों और लाभों में कमी आती है। यह याचिका विशेष रूप से NALSA के उस फैसले को चुनौती देती है जो लैंगिक पहचान को गरिमा के अधिकार से जोड़ता है, साथ ही आधार कार्ड अपडेट करने के लिए UIDAI के SOPs (Standard Operating Procedures) को भी चुनौती देती है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थाNALSA: National Legal Services Authority, जिसने ट्रांसजेंडर पहचान पर 2014 का ऐतिहासिक फैसला सुनाया था।
- अधिनियम / विधेयकट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) एक्ट, 2026: यह जेंडर आइडेंटिटी को पहचानने और जेंडर सर्टिफिकेट जारी करने के लिए वैधानिक ढांचा (statutory framework) प्रदान करता है।
- तथ्यUIDAI: आधार कार्ड पर नाम और जेंडर (gender) अपडेट करने के संबंध में Standard Operating Procedures (SOPs) को चुनौती दी गई है।
- पदभारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत: उन्होंने उस बेंच की अध्यक्षता की जिसने केंद्रीय मंत्रालयों को नोटिस जारी किए।
प्रीलिम्स अभ्यास प्रश्न
ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) एक्ट के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- यह एक्ट वर्ष 2014 में अधिनियमित किया गया था।
- UIDAI के SOPs बिना किसी कानूनी चुनौती के आधार कार्ड पर नाम और जेंडर (gender) को अपडेट करने की अनुमति देते हैं।
- यह एक्ट जेंडर आइडेंटिटी (gender identity) को मान्यता देने और जेंडर सर्टिफिकेट (gender certificates) जारी करने के लिए वैधानिक ढांचा प्रदान करता है।
- (a)केवल 3
- (b)केवल 1 और 2
- (c)केवल 1 और 3
- (d)केवल 2 और 3
उत्तर देखें
उत्तर: (a) केवल 3 — स्टेटमेंट 3 सही है। स्टेटमेंट 1 गलत है: यह नोट ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) एक्ट, 2026 को संदर्भित करता है। स्टेटमेंट 2 गलत है: आधार कार्ड पर नाम और जेंडर अपडेट करने के लिए UIDAI के SOPs को विशेष रूप से PIL में चुनौती दी गई है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में लैंगिक पहचान के अधिकार और महिलाओं के लिए लिंग-आधारित अधिकारों के संरक्षण के बीच संवैधानिक संतुलन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- संवैधानिक टकराव: जैविक महिलाओं के लिए लिंग-विशिष्ट सुरक्षा बनाम गरिमा के अधिकार और जेंडर आइडेंटिटी के बीच संतुलन
- प्रशासनिक टकराव: आधिकारिक पहचान में जेंडर मार्कर बदलने से जुड़े UIDAI के SOPs को चुनौतियां
- विधायी जांच: मौजूदा महिलाओं के अधिकारों और सुविधाओं पर ट्रांसजेंडर पर्सन्स एक्ट, 2026 के प्रभाव का मूल्यांकन
मुख्य शब्द: जेंडर आइडेंटिटी · गरिमा का अधिकार · जैविक महिलाएं · संवैधानिक अधिकार · वैधानिक ढांचा · समानता
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।