केरल में गवाह सुरक्षा स्कीम लागू करने में सरकार पीछे, कोर्ट ने लिया नोटिस
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गवाहों की सुरक्षा पर न्यायिक निगरानी: आपराधिक न्याय और प्रशासनिक देरी पर एक GS2 केस स्टडी।
चर्चा में क्यों
केरल हाई कोर्ट ने टिप्पणी की है कि राज्य 2018 की गवाह सुरक्षा योजना (Witness Protection Scheme) को लागू करने में पिछड़ रहा है, जिसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2019 में मंजूरी दी गई थी।
पृष्ठभूमि
केरल हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और जस्टिस वी.एम. श्याम कुमार की डिवीज़न बेंच, केरल विटनेस प्रोटेक्शन स्कीम 2026 में होने वाली देरी (delay) के संबंध में पी.एम. जोसेफ साजू द्वारा दायर एक PIL की निगरानी कर रही है। इस योजना में खतरे का आकलन (threat assessment), सुरक्षा उपाय, विटनेस प्रोटेक्शन सेल और एक समर्पित फंड के प्रावधान शामिल हैं।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थाकेरल स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (KeLSA) वह संस्था है जिसने योजना के संबंध में याचिकाकर्ता के सवालों का जवाब दिया।
- तथ्यविटनेस प्रोटेक्शन स्कीम (Witness Protection Scheme) को 2018 में तैयार किया गया था और इसे 2019 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंजूरी दी गई थी।
- तथ्यकेरल हाई कोर्ट ने राज्य को 18 नवंबर, 2026 तक एक विस्तृत एफिडेविट (affidavit) दाखिल करने का आदेश दिया है।
- तथ्यइस योजना में सक्षम अधिकारियों (competent authorities) और विटनेस प्रोटेक्शन सेल्स (witness protection cells) का गठन शामिल है।
प्रीलिम्स अभ्यास प्रश्न
केरल विटनेस प्रोटेक्शन स्कीम (Kerala Witness Protection Scheme) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- केरल हाई कोर्ट ने राज्य को 18 नवंबर, 2025 तक एक विस्तृत एफिडेविट (affidavit) दाखिल करने का आदेश दिया।
- इस योजना में खतरे के आकलन (threat assessment), सुरक्षा उपायों और एक समर्पित फंड (dedicated fund) के प्रावधान शामिल हैं।
- इस योजना को 2018 में तैयार किया गया था और इसे 2019 में सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी मिली।
- (a)केवल 1
- (b)केवल 2
- (c)केवल 3
- (d)केवल 2 और 3
उत्तर देखें
उत्तर: (d) केवल 2 और 3 — कथन 2 और 3 सही हैं। कथन 1 गलत है: नोट के अनुसार समय सीमा 18 नवंबर, 2026 है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में गवाह संरक्षण योजनाओं के कार्यान्वयन में निहित संस्थागत और प्रशासनिक बाधाओं का परीक्षण कीजिए और उच्च-स्तरीय आपराधिक मामलों में गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु उचित उपायों का सुझाव दीजिए।
उत्तर के आयाम
- प्रशासनिक सुस्ती: केरल विटनेस प्रोटेक्शन स्कीम 2026 का ड्राफ्ट होने के बावजूद औपचारिक नोटिफिकेशन और सर्कुलर जारी करने में देरी
- न्यायिक निगरानी: कमजोर गवाहों के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनिवार्य सुरक्षा प्रोटोकॉल के कार्यान्वयन की निगरानी में हाई कोर्ट की भूमिका
- प्रक्रियात्मक कमियाँ: संवेदनशील आपराधिक जाँच में गवाहों की उपस्थिति और जाँच के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर की कमी
मुख्य शब्द: गवाह सुरक्षा · जनहित याचिका · न्यायिक निगरानी · प्रशासनिक देरी · क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।