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भाग I · स्था. 11.2025 
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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, चुनाव आयोग फॉर्म 6, 7 और 8 नहीं बदल सकता

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चर्चा में क्यों

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि चुनाव आयोग फॉर्म 6, 7 और 8 में बदलाव नहीं कर सकता। यह फैसला उन तर्कों के जवाब में दिया गया है जिनमें कहा गया था कि 47 लाख लोग 30 अक्टूबर की समय सीमा तक ये फॉर्म जमा करने में विफल रहे।

पृष्ठभूमि

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता में जॉयमल्या बागची और वी मोहना सहित एक सुप्रीम कोर्ट बेंच ने यह फैसला सुनाया। इस मामले में याचिकाकर्ता अंजलि भारद्वाज और अमृता जोहरी थीं, और प्रशांत भूषण द्वारा तर्क प्रस्तुत किए गए।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • तथ्ययाचिकाकर्ता के तर्क के अनुसार, 47 लाख लोग आवश्यक फॉर्म जमा करने में विफल रहे।
  • तथ्यकोर्ट ने फैसला दिया कि चुनाव आयोग फॉर्म 6, 7 और 8 में बदलाव नहीं कर सकता।

मेन्स के लिए

प्रश्न: निर्वाचन प्रक्रियाओं में प्रक्रियात्मक निरंतरता के महत्व और चुनाव आयोग की प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने में न्यायपालिका की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • प्रशासनिक ईमानदारी: एक समान मतदाता पंजीकरण सुनिश्चित करने के लिए मानकीकृत चुनावी फॉर्मों में मनमाने बदलावों को रोकना
  • न्यायिक निगरानी: चुनाव आयोग की कार्यकारी शक्तियों और प्रक्रियात्मक पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों की ज़रूरत के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: प्रक्रियात्मक अखंडता · न्यायिक समीक्षा · चुनावी पारदर्शिता · प्रशासनिक जवाबदेही

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: एनडीटीवी ↗यह भी: GS2 · पारदर्शिता, जवाबदेही एवं RTI

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।