GS2राजव्यवस्था · शासन · अंतर्राष्ट्रीय संबंध· Judiciary & landmark judgments· Mains·
न्यायिक सक्रियता और दंड निर्धारण के दिशा-निर्देश: प्रतिशोधात्मक और सुधारात्मक न्याय के बीच संतुलन पर आधारित एक GS2 विषय।
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों ने टिप्पणी की कि बढ़ते अपराध की दरों के आलोक में मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदलने के संबंध में न्यायपालिका के 'क्षमाशील स्वभाव' का पुनर्मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने टिप्पणी की कि 'दुर्लभतम से दुर्लभ' (rarest of rare) सिद्धांत को वर्तमान सामाजिक अपराध स्तरों के साथ संतुलन स्थापित करना चाहिए। न्यायमूर्ति दत्ता ने एक विशिष्ट उदाहरण का उल्लेख किया जहाँ एक दोषी और उसकी माता, दोनों ही न्यायालय के कम्यूटेशन (commutation) तर्क के शिकार हुए थे।
'rarest of rare' सिद्धांत और सजा के प्रत्यायोजन (commutation of sentences) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
उत्तर: (d) केवल 2 और 3 — कथन 2 और 3 सही हैं। कथन 1 गलत है: 'Commutation' का तात्पर्य मृत्युदंड को कम करके किसी अन्य कम सजा में परिवर्तित करने से है।
Q. भारत में 'दुर्लभतम में दुर्लभ' (rarest of rare) सिद्धांत के विकास का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए और प्रतिशोधात्मक न्याय एवं पुनर्वास लक्ष्यों के बीच संतुलन स्थापित करने में आने वाली न्यायिक चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
कीवर्ड: rarest of rare · capital punishment · judicial activism · commutation · retributive justice · sentencing guidelines
यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।