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मूल ढांचा और मौलिक अधिकार: मतदान के अधिकार की संवैधानिक पवित्रता पर एक GS2 केस स्टडी।
उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां ने स्पष्ट किया कि करोड़ों भारतीय नागरिकों को मताधिकार से वंचित करना अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 326 का उल्लंघन है, और तर्क दिया कि मतदान 'आधारभूत संरचना' (Basic Structure) सिद्धांत का एक केंद्रीय हिस्सा है।
उच्चतम न्यायालय की यह टिप्पणी मई के उस निर्णय के अनुरूप है, जिसमें भारत निर्वाचन आयोग द्वारा किए गए 'विशेष गहन पुनरीक्षण' को बरकरार रखा गया था। विपक्षी दलों ने तीन चरणों में प्रारूप निर्वाचन सूची से बाहर किए गए 13 करोड़ नामों को पुनः सम्मिलित करने की मांग की है।
मतदाता मताधिकार के हनन (voter disenfranchisement) पर सर्वोच्च न्यायालय के अवलोकनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
उत्तर: (d) केवल 2 और 3 — कथन 2 और 3 सही हैं। कथन 1 गलत है: नोट में उल्लेख है कि कथित तौर पर 13 करोड़ नाम बाहर कर दिए गए थे।
Q. मतदाताओं के मताधिकार से वंचित किए जाने के संवैधानिक निहितार्थों का परीक्षण कीजिए और संविधान के बुनियादी ढांचे के एक घटक के रूप में मतदान के अधिकार के महत्व पर चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
कीवर्ड: Basic Structure Doctrine · Right to Equality · Universal Adult Franchise · Electoral Roll Integrity · Constitutionalism
यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।