विरोध प्रदर्शन के दौरान मेट्रो और इंटरनेट बंद नहीं होगा, सुप्रीम कोर्ट का आदेश
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चर्चा में क्यों
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान मेट्रो और इंटरनेट सेवाओं को निर्बाध रूप से चालू रखा जाए ताकि अवैध हिरासत को रोका जा सके।
पृष्ठभूमि
न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की एक बेंच ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 'कॉकरोच जनता पार्टी' के विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित उल्लंघन के बाद यह आदेश जारी किया। अदालत ने इस प्रदर्शन के दौरान की गई गिरफ्तारियों की वैधता के संबंध में नोटिस जारी किया है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- तथ्यकोर्ट के आदेश में विशेष रूप से विरोध प्रदर्शनों के दौरान मेट्रो और इंटरनेट सेवाओं को चालू रखने का निर्देश दिया गया है।
- पदकपिल सिब्बल: एक राज्यसभा MP और एडवोकेट जिन्होंने कोर्ट के ऑर्डर का स्वागत किया।
मेन्स के लिए
Q. सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य की शक्ति और शांतिपूर्ण विरोध तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के बीच संतुलन के महत्व का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- Judicial oversight: Role of the judiciary in preventing arbitrary detentions during public demonstrations
- Digital rights: Ensuring internet access as a prerequisite for exercising the right to assembly
- Public infrastructure: Balancing logistical constraints of metro services with the right to protest
कीवर्ड: Right to Assembly · Freedom of Expression · Judicial Review · Public Order · Arbitrary Detention
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।