यूपीएससी सिविल सेवा GS2 (राजव्यवस्था · शासन · अंतर्राष्ट्रीय संबंध) के सामाजिक न्याय भाग से जुड़ी हर ख़बर, परीक्षा के नज़रिए से: चर्चा में क्यों, पृष्ठभूमि, प्रीलिम्स के तथ्य, अभ्यास प्रश्न और मेन्स प्रश्न। अब तक 1,354 नोट्स, रोज़ अपडेट।
पाठ्यक्रम के विषय: शिक्षा नीति (451) · स्वास्थ्य नीति एवं जन स्वास्थ्य (449) · कमजोर वर्ग (SC/ST, अल्पसंख्यक, दिव्यांग, बुजुर्ग, बच्चे) (416) · गरीबी, भूख एवं पोषण (35) · मानव संसाधन एवं कौशल विकास (3)
चर्चा में क्यों: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने पेपर लीक और अनियमितताओं की संभावना की खुफिया रिपोर्ट के बाद 12 मई को NEET-UG 2026 प्रवेश परीक्षा रद्द कर दी।
NTA ने NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द कर दी है। यह पहली बार है जब इस वार्षिक अखिल भारतीय चिकित्सा परीक्षा को रद्द किया गया है। परीक्षा में अनियमितताओं की रिपोर्टों के बाद, अब 21 जून को पुन: परीक्षा (re-test) आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थानेशनल टेस्टिंग एजेंसी (National Testing Agency - NTA) वह संस्था है जो NEET-UG परीक्षा आयोजित करने के लिए जिम्मेदार है।
तथ्यNEET-UG का उपयोग 10 से अधिक मेडिकल कोर्सेज में एडमिशन के लिए किया जाता है।
तथ्यकैंसिल किए गए NEET-UG 2026 एग्जाम के लिए री-टेस्ट 21 जून को निर्धारित है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: बड़े पैमाने पर आयोजित होने वाली राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं के संचालन में निहित प्रणालीगत कमजोरियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए और प्रवेश प्रक्रिया की अखंडता सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए।
संस्थागत ईमानदारी: पेपर लीक और परीक्षा सामग्री तक अनधिकृत पहुंच जैसी सिस्टम की कमियों को दूर करना
मानकीकरण बनाम सुरक्षा: देशव्यापी टेस्टिंग की लॉजिस्टिक मांगों और मजबूत एंटी-मैल्प्रैक्टिस प्रोटोकॉल के बीच संतुलन
पारदर्शिता की कमी: टेस्टिंग एजेंसियों के इंडिपेंडेंट ऑडिट और शिकायत निवारण तंत्र के जरिए जनता का भरोसा बढ़ाना
मुख्य शब्द: संस्थागत ईमानदारी · परीक्षा में गड़बड़ी · मानकीकरण · पारदर्शिता · जनता का भरोसा
चर्चा में क्यों: केंद्र सरकार 14-18 वर्ष की आयु के उन किशोरों को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) से जोड़ने के लिए एक पायलट प्रोग्राम शुरू कर रही है, जो स्कूल से बाहर हैं। यह कार्यक्रम उन्हें डिस्टेंस लर्निंग (Distance Learning) के माध्यम से शिक्षा प्रदान करने के लिए शुरू किया जा रहा है।
यह पहल वर्तमान में स्कूल से बाहर रहने वाले दो करोड़ से अधिक बच्चों को लक्षित करती है। इसे ऐप-आधारित मैपिंग, निगरानी प्रणालियों और प्रोत्साहन तंत्र (incentive mechanisms) का उपयोग करके नौ राज्यों के दस जिलों में लागू किया जाएगा।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाNIOS: नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (National Institute of Open Schooling) स्कूल से बाहर के बच्चों के लिए डिस्टेंस लर्निंग (distance learning) प्रदान करता है।
तथ्ययह पायलट प्रोग्राम 14-18 आयु वर्ग के किशोरों (adolescents) को लक्षित करता है।
पदसंजय कुमार, Department of School Education & Literacy (DoSEL) के सचिव हैं।
संस्थाDoSEL शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) के अंतर्गत कार्य करता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में सार्वभौमिक साक्षरता प्राप्त करने और स्कूली शिक्षा से वंचित बच्चों की चुनौतियों के समाधान में मुक्त विद्यालय (ओपन स्कूलिंग) और दूरस्थ शिक्षा की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
डेटा-आधारित ट्रैकिंग: स्कूल से बाहर के किशोरों की पहचान करने और उनके बीच के अंतर को पाटने के लिए ऐप-आधारित मैपिंग का उपयोग
इंसेंटिवाइजेशन मॉडल: डिस्टेंस लर्निंग में वित्तीय और सामाजिक इंसेंटिव्स के साथ क्वालिटी पेडागोजिकल आउटकम्स का संतुलन
मुख्य शब्द: सार्वभौमिक शिक्षा · डिस्टेंस लर्निंग · अनौपचारिक शिक्षा · डिजिटल मैपिंग · प्रोत्साहन तंत्र
चर्चा में क्यों: मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने तमिलनाडु में शिक्षण संस्थानों और पूजा स्थलों के पास स्थित 150 से अधिक शराब की दुकानों को बंद करने का आदेश दिया है।
तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (Tasmac) वह संस्था है जो सार्वजनिक स्थानों से दूरी और बिक्री के आंकड़ों के आधार पर आउटलेट्स की पहचान करने और उन्हें बंद करने के लिए जिम्मेदार है। सरकार ने अधिकतम खुदरा मूल्य (Maximum Retail Price - MRP) से अधिक कीमत पर शराब बेचने के खिलाफ चेतावनी जारी करते हुए अचानक निरीक्षण (surprise inspections) करने का आदेश दिया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाTasmac: तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (Tamil Nadu State Marketing Corporation Limited) शराब आउटलेट मैनेजमेंट के लिए जिम्मेदार राज्य निकाय है।
तथ्यतमिलनाडु में तीन दिनों के भीतर 150 से अधिक लिकर आउटलेट्स (liquor outlets) को बंद करने का आदेश दिया गया।
तथ्यक्लोजर क्राइटेरिया (Closure criteria) में शैक्षणिक संस्थानों, पूजा स्थलों से निकटता और औसत बिक्री के आंकड़े शामिल हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: मदिरा बिक्री से राज्य के राजस्व सृजन और शैक्षिक क्षेत्रों के निकट शराब की बिक्री को विनियमित करने के सार्वजनिक स्वास्थ्य उद्देश्यों के बीच संतुलन स्थापित करने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
रेगुलेटरी फ्रिक्शन: तस्माक बिक्री से राज्य के राजस्व और शराब की उपलब्धता पर सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी निर्देशों के बीच संतुलन
एन्फोर्समेंट गैप: सरप्राइज इंसपेक्शन के जरिए MRP कंप्लायंस की निगरानी और अवैध बिक्री को रोकने में कठिनाई
मुख्य शब्द: सार्वजनिक स्वास्थ्य · रेगुलेटरी कंप्लायंस · राजस्व सृजन · स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन · अर्बन प्लानिंग
चर्चा में क्यों: DASE और IMA के सदस्यों ने परीक्षा में धांधली को रोकने के लिए कोचिंग सेंटर का अनिवार्य पंजीकरण कराने और राज्य सरकार की मेडिकल सीटों को राष्ट्रीय NEET सिस्टम से बाहर रखने की मांग की है।
डॉक्टर्स एसोसिएशन फॉर सोशल इक्वालिटी (DASE) और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के प्रतिनिधियों ने NEET-UG 2026 के पेपर लीक के बाद सुधारों का प्रस्ताव दिया है। प्रस्तावित उपायों में कंप्यूटर आधारित परीक्षा, एन्क्रिप्टेड प्रश्न और मल्टी-सेशन टेस्टिंग (multi-session testing) शामिल हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाIMA: इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (Indian Medical Association)।
संस्थाDASE: Doctors’ Association for Social Equality
तथ्यप्रस्तावित सुधारों में सभी मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम कोचिंग सेंटर्स का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन शामिल है।
तथ्यNEET के लिए एन्क्रिप्टेड (encrypted) प्रश्नों और मल्टी-सेशन टेस्टिंग (multi-session testing) के उपयोग का प्रस्ताव।
मेन्स के लिए
प्रश्न: एक केंद्रीकृत राष्ट्रीय चिकित्सा प्रवेश प्रणाली की चुनौतियों पर चर्चा कीजिए और योग्यता-आधारित चयन सुनिश्चित करनेके लिए राज्य-सरकारी सीटों को छूट देने की व्यवहार्यता का मूल्यांकन कीजिए।
संघीय टकराव: मेडिकल सीट आवंटन पर केंद्रीकृत राष्ट्रीय परीक्षा और राज्य स्तर की स्वायत्तता के बीच विवाद
रेगुलेटरी गैप: प्राइवेट मेडिकल कोचिंग सेंटर्स के लिए अनिवार्य रजिस्ट्रेशन और निगरानी की कमी
समान अवसर: पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए सब्सिडी वाली कोचिंग और बोर्डिंग सुविधाओं की ज़रूरत
चर्चा में क्यों: कर्नाटक सरकार ने धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए अपने 2022 के यूनिफॉर्म ऑर्डर को बदलकर एक नया निर्देश जारी किया है, जिसमें छात्रों को 'सीमित' पारंपरिक और आस्था-आधारित प्रतीक पहनने की अनुमति दी गई है।
कर्नाटक सरकार ने स्कूलों और कॉलेजों में यूनिफॉर्म के साथ सीमित धार्मिक प्रतीकों (religious symbols) की अनुमति देने वाला एक नया आदेश जारी किया है। स्कूल शिक्षा और साक्षरता मंत्री मधु बंगारप्पा ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य संस्थागत अनुशासन और विविध परंपराओं के प्रति सम्मान के बीच संतुलन बनाना है।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
तथ्ययह नया ऑर्डर कर्नाटक के शैक्षणिक संस्थानों में निर्धारित यूनिफॉर्म (uniforms) से संबंधित पिछले 2022 के ऑर्डर को बदल देता है।
पदमधु बंगारप्पा कर्नाटक में स्कूल एजुकेशन और लिटरेसी के मंत्री हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: राज्य द्वारा संचालित शैक्षणिक संस्थानों में संस्थागत अनुशासन बनाए रखने और धर्मनिरपेक्षता के संवैधानिक सिद्धांत को अक्षुण्ण रखने के बीच संतुलन का विश्लेषण कीजिए।
संवैधानिक संघर्ष: अनुच्छेद 29 (सांस्कृतिक अधिकार) और धर्मनिरपेक्ष सार्वजनिक क्षेत्र को बढ़ावा देने में राज्य की भूमिका के बीच संतुलन
शिक्षण प्रभाव: न्यूट्रल लर्निंग एनवायरनमेंट पर धार्मिक प्रतीकों का प्रभाव बनाम समावेशी प्रतिनिधित्व
प्रशासनिक चुनौती: स्कूलों में सांप्रदायिक तनाव या भेदभाव वाली प्रथाओं को रोकने के लिए 'सीमित' प्रतीकों को परिभाषित करना
मुख्य शब्द: धर्मनिरपेक्षता · संस्थागत अनुशासन · सांस्कृतिक बहुलवाद · शिक्षा नीति · संवैधानिक नैतिकता
चर्चा में क्यों: केरल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के परफॉरमेंस ग्रेडिंग इंडेक्स 2.0 (Performance Grading Index 2.0) में 2024-25 के लिए अपने प्रदर्शन में सुधार किया है। केंद्र सरकार से फंड की कमी के बावजूद, केरल ने 'प्रचेष्टा-3' से 'प्रचेष्टा-2' ग्रेड हासिल किया है।
केरल का स्कोर 2023-24 में 594.2 से बढ़कर 2024-25 में 687.7 हो गया। राज्य ने पहुंच (access) के क्षेत्र में सर्वोच्च 'उत्कर्ष' ग्रेड (72.8-80) और शिक्षक शिक्षा एवं प्रशिक्षण में 'उत्तम-1' ग्रेड (81-90.9) हासिल किया।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यPerformance Grading Index 2.0 में 2024-25 के लिए केरल का स्कोर 687.7 है।
तथ्यएक्सेस के लिए उत्कर्ष ग्रेड रेंज 72.8-80 है।
तथ्यशिक्षक शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए Uttam-1 ग्रेड रेंज 81-90.9 है।
संस्थाPerformance Grading Index 2.0 को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय (Union Ministry of Education) द्वारा जारी किया गया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: राजकोषीय बाधाओं के बावजूद शिक्षा सूचकांकों में केरल के उच्च प्रदर्शन में योगदान देने वाले कारकों का विश्लेषण कीजिए और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लिए इसके निहितार्थों का मूल्यांकन कीजिए।
राजकोषीय संघवाद: केंद्र के कम होते फंड आवंटन के बीच राज्यों द्वारा शैक्षिक प्रगति
ह्यूमन कैपिटल डेवलपमेंट: टीचर ट्रेनिंग की क्वालिटी और स्कूल एक्सेस मैट्रिक्स के बीच संबंध
मुख्य शब्द: परफॉरमेंस ग्रेडिंग इंडेक्स · मानव पूंजी · राजकोषीय संघवाद · शैक्षणिक इंफ्रास्ट्रक्चर · राज्य स्वायत्तता
चर्चा में क्यों: कर्नाटक सरकार ने SC/ST छात्रों और कर्मचारियों के खिलाफ भेदभाव को रोकने और शिक्षा तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए संशोधित 'रोहित वेमुला बिल, 2026' (Rohith Vemula Bill, 2026) को मंजूरी दी है।
कर्नाटक रोहित वेमुला (भेदभाव, बहिष्कार या अन्याय की रोकथाम, शिक्षा और गरिमा का अधिकार) विधेयक, 2026 को अप्रैल 2026 में कैबिनेट द्वारा अनुमोदित किया गया था। यह राज्य भर के सार्वजनिक, निजी, धर्मार्थ संस्थानों और डीम्ड यूनिवर्सिटीज (Deemed Universities) पर लागू होता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
अधिनियम / विधेयकरोहित वेमुला बिल, 2026: इसका उद्देश्य SC/ST छात्रों, फैकल्टी और स्टाफ के साथ होने वाले भेदभाव और अन्याय को रोकना है।
तथ्ययह बिल कर्नाटक के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों (higher educational institutions) पर लागू होता है, जिसमें प्राइवेट और चैरिटेबल संस्थान भी शामिल हैं।
स्थानकर्नाटक: वह राज्य जहाँ बिल को मंजूरी दी गई।
मेन्स के लिए
प्रश्न: उच्च शिक्षा संस्थानों में हाशिए पर रहने वाले समुदायों के लिए सामाजिक न्याय और गरिमा सुनिश्चित करने में विधायी उपायों की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
संस्थागत जवाबदेही: प्राइवेट और चैरिटेबल यूनिवर्सिटीज में भेदभावपूर्ण प्रथाओं की निगरानी और दंड देने के लिए मैकेनिज्म बनाना
संवैधानिक तालमेल: निजी शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता के साथ समानता के अधिकार को संतुलित करना
मुख्य शब्द: सामाजिक न्याय · शिक्षा का अधिकार · अवसर की समानता · संस्थागत भेदभाव · विधायी सुरक्षा उपाय
चर्चा में क्यों: कर्नाटक सरकार ने नए आरक्षण कोटा मैट्रिक्स (Reservation Quota Matrix) को लेकर हुए विवादों के कारण एक साल तक रुकी हुई 56,432 पदों के लिए सार्वजनिक भर्ती को फिर से शुरू करने की घोषणा की है।
कर्नाटक सरकार एक साल के विलंब के बाद 56,432 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया को फिर से शुरू कर रही है। नए कोटा मैट्रिक्स (Quota Matrix) की आलोचना इस आधार पर की जा रही है कि यह समग्र आरक्षण प्रतिशत और अनुसूचित जातियों (SCs) के लिए आंतरिक कोटे में बदलाव करता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यकर्नाटक सरकार 56,432 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया फिर से शुरू कर रही है।
तथ्यआरक्षण के मुद्दों के कारण कर्नाटक में सार्वजनिक भर्ती एक साल से अधिक समय तक रुकी रही।
तथ्यनए कोटा मैट्रिक्स ने आरक्षण की कुल मात्रा और आंतरिक SC कोटे में बदलाव किया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारतीय राज्यों में सार्वजनिक भर्ती की दक्षता और समयबद्धता की आवश्यकता तथा आरक्षण के संवैधानिक अधिदेश के बीच संतुलन बनाए रखने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
कानूनी-प्रशासनिक टकराव: मुकदमेबाजी या कोटा मैट्रिक्स पर नीतिगत विवाद के कारण भर्ती में देरी
सोशल इक्विटी ट्रेड-ऑफ: SCs के लिए आंतरिक आरक्षण कोटा और कुल आरक्षण प्रतिशत के बीच संतुलन
प्रशासनिक दक्षता: सरकारी सेवाओं और मानव संसाधन प्रबंधन पर भर्ती में लंबे अंतराल का प्रभाव
मुख्य शब्द: आरक्षण नीति · सार्वजनिक भर्ती · कोटा मैट्रिक्स · अनुसूचित जातियाँ · प्रशासनिक देरी · सामाजिक न्याय
चर्चा में क्यों: स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव ने आंध्र प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने और नकली दवाओं से निपटने के लिए AYUSH सेक्टर में सुधार हेतु तीन समितियों के गठन की घोषणा की है।
आंध्र प्रदेश सरकार नई AYUSH गाइडलाइन्स विकसित करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति, एक स्टेकहोल्डर्स समिति और एक तकनीकी समिति का गठन कर रही है। इस पहल के अंतर्गत क्लीनिकों और अस्पतालों के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क (Regulatory Framework) को मजबूत करने हेतु केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के सर्वोत्तम अभ्यासों (Best Practices) का अध्ययन किया जाएगा।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यतीन कमेटियाँ गठित की गईं: एक्सपर्ट (Expert), स्टेकहोल्डर्स (Stakeholders) और टेक्निकल (Technical)।
स्थानआंध्र प्रदेश: AYUSH सेक्टर सुधारों को लागू करने वाला राज्य।
तथ्यबेस्ट प्रैक्टिसेस के लिए संदर्भ राज्य: केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में रोगी सुरक्षा सुनिश्चित करने और स्वास्थ्य सेवा वितरण के मानकीकरण के लिए आयुष (AYUSH) क्षेत्र हेतु एक सुदृढ़ विनियामक ढांचे की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।
रेगुलेटरी गैप: आयुष प्रैक्टिशनर्स के लिए स्टैंडर्ड सर्टिफिकेशन की कमी से घटिया इलाज का खतरा
क्वालिटी एश्योरेंस: पारंपरिक दवाओं की सप्लाई चेन से नकली दवाएं हटाने के लिए कड़े टेस्टिंग प्रोटोकॉल की ज़रूरत
इंटर-स्टेट लर्निंग: केरल और कर्नाटक जैसे सफल राज्य-स्तरीय मॉडल्स पर आधारित एक एकीकृत नेशनल फ्रेमवर्क की संभावना
मुख्य शब्द: रेगुलेटरी फ्रेमवर्क · क्वालिटी एश्योरेंस · सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा · मानकीकरण · पारंपरिक चिकित्सा
चर्चा में क्यों: एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की है, जिसमें राज्य के नियंत्रण वाले मंदिरों में पुजारियों और मंदिर कर्मचारियों के वेतन और लाभों की समीक्षा के लिए एक न्यायिक आयोग या विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि मंदिर कर्मचारी 'कोड ऑन वेजेस, 2019' (Code on Wages, 2019) के तहत कर्मचारी हैं। इस याचिका में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में न्यूनतम मजदूरी की कमी के संबंध में हुए विरोध प्रदर्शनों और तमिलनाडु के एक परिपत्र (circular) का हवाला दिया गया है, जो पुजारियों को 'आरती प्लेट्स' में 'दक्षिणा' स्वीकार करने से रोकता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यCode on Wages, 2019: मंदिर कर्मचारियों की कर्मचारी स्थिति (employee status) के आधार के रूप में उद्धृत केंद्रीय कानून।
संविधानअनुच्छेद 21: गरिमापूर्ण आजीविका के अधिकार के आधार के रूप में याचिका में उद्धृत किया गया।
स्थानआंध्र प्रदेश और तेलंगाना: वे राज्य जहाँ पुजारियों के लिए न्यूनतम वेतन (minimum wages) को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए।
मेन्स के लिए
प्रश्न: राज्य-नियंत्रित धार्मिक संस्थानों में मंदिर कर्मचारियों की रोजगार स्थिति और गरिमापूर्ण आजीविका के अधिकार के संवैधानिक निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
कानूनी अस्पष्टता: वेजेस कोड के तहत पारंपरिक धार्मिक प्रथाओं और आधुनिक लेबर लॉ सुरक्षा के बीच टकराव
प्रशासनिक टकराव: धार्मिक संस्थानों पर राज्य के रेगुलेटरी ओवरसाइट और मंदिर कर्मचारियों के व्यक्तिगत अधिकारों के बीच संतुलन
आर्थिक असमानता: राज्य द्वारा संचालित धार्मिक स्थलों में गैर-पारंपरिक सेवा प्रदाताओं के लिए मानकीकृत वेतन संरचना का अभाव
मुख्य शब्द: आजीविका का अधिकार · वेज कोड · राज्य-नियंत्रित संस्थान · न्यायिक समीक्षा · सम्मानजनक वेतन
चर्चा में क्यों: कर्नाटक पुलिस ने एक सर्कुलर जारी किया है, जिसमें निजी किराये के बाजार में जाति आधारित भेदभाव का सामना करने वाले SC/ST कर्मियों के लिए सरकारी आवास को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया है।
शिकायत सेल के प्रमुख, ADGP देवज्योति राय ने DGP और IGP की ओर से यह सर्कुलर जारी किया है। यह निर्देश जातिगत भेदभाव से संबंधित विशिष्ट शिकायतों के समाधान के लिए मौजूदा वरिष्ठता-आधारित आवास आवंटन प्रणाली को बदल देता है।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
तथ्यकर्नाटक पुलिस ग्रीवेंस सेल (Grievance Cell) वह संस्था है जो हाउसिंग प्रायोरिटी सर्कुलर (Housing Priority Circular) जारी करने के लिए जिम्मेदार है।
पदADGP देवज्योति राय कर्नाटक पुलिस में ग्रीवेंस सेल (Grievance Cell) के प्रमुख हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: शहरी आवास बाजारों में हाशिए पर रहने वाले समुदायों की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक संस्थागत उपायों की चर्चा कीजिए।
संस्थागत अंतर: रेंटल मार्केट्स में प्राइवेट-सेक्टर भेदभाव के खिलाफ कानूनी सुरक्षा की कमी
पॉलिसी में बदलाव: सार्वजनिक संसाधनों के वितरण में वरिष्ठता के बजाय सामाजिक समानता को प्राथमिकता
मुख्य शब्द: सामाजिक समानता · संस्थागत सुरक्षा उपाय · जातिगत भेदभाव · सार्वजनिक संसाधन आवंटन · प्रशासनिक नीति
चर्चा में क्यों: आंध्र प्रदेश सरकार ने बताया कि Interactive Voice Response System (IVRS) के माध्यम से किए गए अभिभावक फीडबैक सर्वे में पिछड़ा वर्ग (BC) कल्याण छात्रावासों ने सबसे अधिक संतुष्टि दर (78.20%) हासिल की।
यह सर्वेक्षण आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा अभिभावकों की प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए IVRS सिस्टम का उपयोग करके किया गया था। संतुष्टि स्कोर (satisfaction scores) के मामले में, BC कल्याण छात्रावासों ने अन्य कल्याण छात्रावास श्रेणियों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यआंध्र प्रदेश में BC Welfare Hostels ने पेरेंट फीडबैक सर्वे (parent feedback survey) में 78.20% की संतुष्टि दर हासिल की।
संस्थासर्वेक्षण में अभिभावकों से फीडबैक इकट्ठा करने के लिए Interactive Voice Response System (IVRS) का उपयोग किया गया।
पदएस. सविता आंध्र प्रदेश की BC Welfare मंत्री हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में हाशिए पर रहने वाले समुदायों के छात्रों के लिए शैक्षिक समानता सुनिश्चित करने में आवासीय कल्याण छात्रावासों की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: अलग-अलग वेलफेयर हॉस्टल कैटेगरी में पोषण और जीवन स्तर में असमानता
मॉनिटरिंग मैकेनिज्म: सोशल वेलफेयर स्कीम में जवाबदेही सुधारने के लिए रियल-टाइम फीडबैक हेतु IVRS का उपयोग
मुख्य शब्द: शैक्षिक समानता · सामाजिक कल्याण · पिछड़े समुदाय · जवाबदेही · इंफ्रास्ट्रक्चर विकास
चर्चा में क्यों: तमिलनाडु राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (TNSLSA) ने बंधुआ मजदूरी और मानव तस्करी के पीड़ितों को कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए तंजावुर में सात पैनल वकीलों की नियुक्ति की है।
TNSLSA ने तंजावुर जिले में सात पैनल वकीलों की नियुक्ति की है, जो किसी भी एक जिले में सबसे अधिक संख्या है। यह कदम तमिलनाडु में यौन, अंग और श्रम तस्करी से निपटने के लिए वन-स्टॉप क्राइसिस टीम (OSCT) की स्थापना के बाद उठाया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाTNSLSA: तमिलनाडु राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (Tamil Nadu State Legal Services Authority)।
तथ्यथंजावुर जिले में कानूनी सहायता (Legal Aid) के लिए सात पैनल लॉयर्स की नियुक्ति की गई।
संस्थाOSCT: सेक्स, अंग और श्रम तस्करी (trafficking) से निपटने के लिए वन-स्टॉप क्राइसिस टीम (One-Stop Crisis Team) की स्थापना की गई।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में बंधुआ मजदूरी और मानव तस्करी को प्रभावी ढंग से समाप्त करने के लिए आवश्यक संस्थागत तंत्रों पर चर्चा कीजिए, जिसमें कानूनी सहायता और विशेष संकट प्रतिक्रिया टीमों (specialized crisis teams) की भूमिका को रेखांकित किया जाए। चर्चा कीजिए।
लीगल एड गैप: ग्रामीण जिलों में पीड़ितों के लिए विशेषज्ञ कानूनी सलाह की कमी
संस्थागत समन्वय: पीड़ित पुनर्वास के लिए कानून प्रवर्तन और कानूनी सहायता निकायों के बीच एकीकरण
मुख्य शब्द: कानूनी सहायता · बंधुआ मज़दूर · मानव तस्करी · पीड़ित पुनर्वास · संस्थागत ढांचा
चर्चा में क्यों: हेल्थकेयर रिफॉर्म्स डॉक्टर्स एसोसिएशन (HRDA), तेलंगाना ने केंद्र सरकार से सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले की समीक्षा करने का आग्रह किया है, जिसमें डॉक्टर की मृत्यु के बाद भी मेडिकल नेग्लिजेंस (चिकित्सा लापरवाही) मुआवजे की कार्यवाही जारी रखने की अनुमति दी गई है।
HRDA, तेलंगाना ने चिंता व्यक्त की है कि मेडिकल नेगलिजेंस (चिकित्सीय लापरवाही) के मामलों में कानूनी उत्तराधिकारियों को शामिल करने से परिवारों को परेशानी हो सकती है और डॉक्टर उच्च-जोखिम वाले विशेषज्ञता क्षेत्रों (specialties) से दूर हो सकते हैं। इस संघ ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय से स्वास्थ्य सेवाओं की डिलीवरी पर इस फैसले के प्रभाव पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
संस्थाHRDA: Healthcare Reforms Doctors Association, तेलंगाना की एक संस्था।
पदस्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय: भारत में स्वास्थ्य नीति के लिए जिम्मेदार केंद्रीय मंत्रालय।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में चिकित्सा लापरवाही के लिए कानूनी दायित्व के स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणाली और चिकित्सा चिकित्सकों के व्यावसायिक विकल्पों पर पड़ने वाले निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
प्रोफेशनल रिस्क: लगातार मुकदमेबाजी की देनदारी के कारण डॉक्टरों का हाई-रिस्क स्पेशलिटी से दूर होना
कानूनी जटिलता: प्राथमिक प्रैक्टिसर की मृत्यु के मामले में लापरवाही तय करने की चुनौतियां
सिस्टम पर असर: मुकदमेबाजी से प्रेरित डिफेंसिव मेडिसिन की संभावना जिससे मरीज की देखभाल की क्वालिटी प्रभावित हो सकती है
मुख्य शब्द: मेडिकल नेगलिजेंस · प्रोफेशनल लायबिलिटी · स्वास्थ्य सेवा वितरण · लीगल हेयर का प्रभाव · डिफेंसिव मेडिसिन
चर्चा में क्यों: ग्रेट निकोबार आइलैंड प्रोजेक्ट को चुनौती देते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई हैं। इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि ग्राम सभाओं में अनिवार्य 50% कोरम (Quorum) की कमी थी और ट्राइबल काउंसिल (Tribal Council) को दरकिनार कर दिया गया।
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह प्रशासन का दावा है कि 2% से 15% के बीच उपस्थिति के आंकड़ों के बावजूद कोरम (Quorum) पूरा हो गया था। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह परियोजना वन अधिकार अधिनियम (FRA) का उल्लंघन करती है और उन्होंने जनजातीय परिषद के साथ परामर्श करने की मांग की है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यनिकोबार प्रोजेक्ट में ग्राम सभाओं की उपस्थिति के आंकड़े 2% से 15% के बीच रहे।
संस्थायाचिकाकर्ता यह तर्क दे रहे हैं कि इस प्रोजेक्ट के लिए ट्राइबल काउंसिल (Tribal Council) से सलाह ली जानी चाहिए थी।
स्थानयह प्रोजेक्ट अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के ग्रेट निकोबार द्वीप (Great Nicobar Island) पर स्थित है।
अधिनियम / विधेयकफॉरेस्ट राइट्स एक्ट (FRA) ग्राम सभा के कोरम (quorum) और आदिवासी सहमति के नियमों को नियंत्रित करता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत जनजातीय सहमति के लिए निर्धारित प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं और बड़े पैमाने की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में ग्राम सभा की स्वायत्तता के महत्व का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
प्रक्रियात्मक अखंडता: प्रशासनिक कोरम के दावों और अनिवार्य 50% उपस्थिति की शर्तों के बीच टकराव
संस्थागत बाईपास: ग्राम सभा परामर्श और ट्राइबल काउंसिल की विशिष्ट भूमिका के बीच तनाव
अधिकार बनाम विकास: इंफ्रास्ट्रक्चर लक्ष्यों और वन अधिकार अधिनियम के वैधानिक संरक्षण के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: ग्राम सभा · वन अधिकार अधिनियम · ट्राइबल काउंसिल · प्रक्रियात्मक अखंडता · सूचित सहमति · परामर्श का अधिकार
चर्चा में क्यों: आदि द्रविड़ और जनजातीय कल्याण विभाग ने आदि द्रविड़ और जनजातीय समुदायों के छात्रों की सहायता के लिए 'अंबेडकर ओवरसीज हायर एजुकेशन स्कॉलरशिप स्कीम' (Ambedkar Overseas Higher Education Scholarship Scheme) के लिए आवेदन की अवधि की घोषणा की है।
यह योजना आदि द्रविड़ (ईसाई धर्म में परिवर्तित व्यक्तियों सहित) और जनजातीय समुदायों के छात्रों को लक्षित करती है। आवेदकों को QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में शीर्ष 1000 में शामिल किसी विश्वविद्यालय में मास्टर या PhD प्रोग्राम में प्रवेश प्राप्त होना चाहिए और उनके परिवार की वार्षिक आय ₹12 लाख से कम होनी चाहिए।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
योजनाअंबेडकर ओवरसीज हायर एजुकेशन स्कॉलरशिप स्कीम (Ambedkar Overseas Higher Education Scholarship Scheme): यह आदि द्रविड़ और आदिवासी छात्रों को विदेश में उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
तथ्यपात्रता मानदंड: वार्षिक पारिवारिक आय ₹12 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए।
तथ्यQS World University Rankings में टॉप 1000 में शामिल किसी यूनिवर्सिटी में मास्टर या PhD प्रोग्राम में एडमिशन के लिए शैक्षणिक आवश्यकता।
स्थानयह स्कॉलरशिप आदि द्रविड़ और ट्राइबल वेलफेयर डिपार्टमेंट (Adi Dravidar and Tribal Welfare Department) द्वारा संचालित की जाती है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: हाशिए पर स्थित समुदायों के लिए लक्षित छात्रवृत्ति योजनाओं ने भारत में शैक्षिक अंतराल को पाटने और सामाजिक गतिशीलता को बढ़ावा देने में किस प्रकार भूमिका निभा सकती हैं, चर्चा कीजिए।
संस्थागत बाधा: अंतरराष्ट्रीय यूनिवर्सिटी रैंकिंग और विदेशी एडमिशन स्टेटस को वेरिफाई करने में जटिलता
इक्विटी बनाम मेरिट: उच्च स्तरीय वैश्विक शैक्षणिक आवश्यकताओं के साथ सामाजिक-आर्थिक आरक्षण मानदंडों का संतुलन
मुख्य शब्द: सामाजिक गतिशीलता · समावेशी शिक्षा · लक्षित हस्तक्षेप · मानव पूंजी विकास
चर्चा में क्यों: महाराष्ट्र सरकार ने आदिवासी छात्रों के बीच स्कूल छोड़ने की दर (dropout rates) को कम करने के लिए 19 सेकेंडरी आश्रम स्कूलों और 5 प्राइमरी आश्रम स्कूलों को उच्च स्तर पर अपग्रेड करने को मंजूरी दी है।
ये स्कूल पूरे राज्य में कुल 26 लाख से अधिक छात्रों को सेवा प्रदान करते हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यमहाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों में 2.6 मिलियन से अधिक छात्र पढ़ते हैं।
स्थानअपग्रेड पहल (upgrade initiative) को महाराष्ट्र में लागू किया जा रहा है।
संस्थाइन स्कूलों के अपग्रेडेशन के लिए ट्राइबल डेवलपमेंट डिपार्टमेंट (Tribal Development Department) नोडल बॉडी है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के दूरस्थ क्षेत्रों में आश्रम विद्यालयों के उन्नयन से हाशिए पर स्थित जनजातीय समुदायों द्वारा सामना की जाने वाली शैक्षिक असमानताओं को कैसे दूर किया जा सकता है, इसका विश्लेषण कीजिए।
एक्सेसिबिलिटी गैप: आदिवासी बस्तियों का भौगोलिक अलगाव उच्च माध्यमिक और जूनियर कॉलेज इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंच में बाधा
रिटेंशन स्ट्रैटेजी: प्राइमरी से हायर सेकेंडरी लेवल तक लगातार शैक्षिक रास्ते प्रदान करके ड्रॉपआउट रेट कम करना
रिसोर्स एलोकेशन: मुख्यधारा के शैक्षिक इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरतों के मुकाबले विशेष आदिवासी स्कूलों के लिए प्रति व्यक्ति फंडिंग को संतुलित करना
मुख्य शब्द: शिक्षा में समानता · पिछड़ा वर्ग · जनजातीय विकास · ड्रॉपआउट रोकना · इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार
चर्चा में क्यों: सेंट्रल इंफॉर्मेशन कमीशन (CIC) ने सिफारिश की है कि आरक्षण के लाभों के मूल्यांकन में सुधार के लिए डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनेल एंड ट्रेनिंग (DoPT) UPSC सिविल सर्विसेज परीक्षा के परिणामों में उप-जाति (sub-caste) का डेटा शामिल करे।
CIC की सिफारिश 1995 की भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) परीक्षा के जाति-वार डेटा से संबंधित एक अपील की समीक्षा के बाद की गई। हालांकि DoPT ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में उप-जाति के रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन CIC ने भविष्य के खुलासों में इस डेटा को शामिल करने का सुझाव दिया।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
संस्थाDoPT: डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनेल एंड ट्रेनिंग (Department of Personnel and Training) सिविल सर्विसेज की भर्ती के लिए नोडल मंत्रालय है।
तथ्यCIC की सिफारिश विशेष रूप से सिविल सर्विसेज एग्जाम की लिस्ट में उप-जाति (sub-caste) के विवरण को शामिल करने से संबंधित है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: विविध उप-समुदायों के बीच लाभों के न्यायसंगत वितरण को सुनिश्चित करनेके लिए आरक्षण नीतियों के कार्यान्वयन में सूक्ष्म डेटा (granular data) के महत्व की चर्चा कीजिए।
डेटा पारदर्शिता: OBC श्रेणियों में 'क्रीमी लेयर' के समकक्षों की पहचान के लिए सूक्ष्म उपजाति डेटा की ज़रूरत
प्रशासनिक बाधा: भर्ती प्रक्रिया के दौरान उप-जाति के रिकॉर्ड बनाए रखने में चुनौतियां
पॉलिसी इक्विटी: व्यापक आरक्षण श्रेणियों और पिछड़े उप-समूहों तक पहुँचने की ज़रूरत के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: सकारात्मक कार्रवाई · पारदर्शिता · उप-जाति की बारीकी · आरक्षण नीति · डेटा-आधारित गवर्नेंस
चर्चा में क्यों: NATHEALTH ने नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन स्टैंडर्ड्स (NBCS) 2026 के नोटिफिकेशन का स्वागत किया है, जो अस्पतालों को 45 मीटर से अधिक ऊंचाई पर इंटेंसिव केयर यूनिट्स (ICUs) स्थापित करने की अनुमति देता है।
नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन स्टैंडर्ड्स (NBCS) 2026 उच्च-ऊंचाई वाले ICU (Intensive Care Units) की अनुमति देता है, बशर्ते उनमें बेहतर अग्नि सुरक्षा प्रावधान (fire safety provisions) लागू हों। NATHEALTH, जो कि हेल्थकेयर फेडरेशन ऑफ इंडिया है, ने लागत लाभ को अधिकतम करने और स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता को बढ़ाने के लिए इन नियमों की वकालत की है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यNBCS 2026 अस्पतालों को 45 मीटर से अधिक ऊंचाई पर ICU स्थापित करने की अनुमति देता है।
संस्थाNATHEALTH: हेल्थकेयर फेडरेशन ऑफ इंडिया (Healthcare Federation of India)।
तथ्य45 मीटर से अधिक ऊंचाई पर ICU का निर्माण उन्नत फायर सेफ्टी (fire safety) प्रावधानों के अधीन है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में स्वास्थ्य सेवा बुनियादी ढांचे के लिए निर्माण मानदंडों के मानकीकरण से शहरी स्वास्थ्य सुलभता और रोगी सुरक्षा की चुनौतियों का समाधान कैसे किया जा सकता है, इस पर चर्चा कीजिए।
सुरक्षा-इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रेड-ऑफ: हाई-राइज़ ICU निर्माण और कड़े फायर सेफ्टी प्रोटोकॉल व इमरजेंसी इवैक्युएशन लॉजिस्टिक्स के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: स्वास्थ्य सेवा इन्फ्रास्ट्रक्चर · NBCS 2026 · अर्बन प्लानिंग · मरीज की सुरक्षा · रेगुलेटरी रिलैक्सेशन
चर्चा में क्यों: आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव ने बताया कि केंद्र सरकार की टेली-MANAS (Tele-MANAS) हेल्पलाइन राज्य में हर महीने 3,000 लोगों को मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रदान कर रही है।
टेली-मानस (Tele-MANAS) केंद्र सरकार द्वारा 2022 में शुरू की गई एक राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन है। इसका संचालन NIMHANS, बेंगलुरु द्वारा किया जाता है और यह कॉल्स को राज्य-विशिष्ट कॉल सेंटरों तक पहुँचाता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
योजनाTele-MANAS: केंद्र सरकार द्वारा 2022 में शुरू की गई एक राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन।
संस्थाNIMHANS: Tele-MANAS हेल्पलाइन को संचालित करने के लिए जिम्मेदार संस्था।
तथ्यआंध्र प्रदेश में विजयवाड़ा और विशाखापट्टनम में दो Tele-MANAS कॉल सेंटर स्थित हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में बढ़ते मानसिक स्वास्थ्य संकट के समाधान में टेली-मेडिसिन के महत्व और ऐसी राष्ट्रीय हेल्पलाइन सेवाओं के विस्तार में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: ग्रामीण और कम सेवा वाले क्षेत्रों में स्पेशलाइज्ड साइकियाट्रिक प्रोफेशनल्स की कमी
डेटा प्राइवेसी: डिजिटल मेंटल हेल्थ प्लेटफॉर्म पर मरीज की गोपनीयता बनाए रखने से जुड़े जोखिम
एक्सेसिबिलिटी: डिजिटल डिवाइड और इंटरनेट पहुंच की समस्याएं ग्रामीण मानसिक स्वास्थ्य पहुंच को प्रभावित कर रही हैं
मुख्य शब्द: टेली-मेडिसिन · मानसिक स्वास्थ्य · सार्वजनिक स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर · निमहंस · डिजिटल हेल्थ
चर्चा में क्यों: कर्नाटक ने तंबाकू के सेवन और तपेदिक (Tuberculosis) के बीच के संबंध को दूर करने के लिए नेशनल टीबी एलिमिनेशन प्रोग्राम (NTEP) और नेशनल टोबैको कंट्रोल प्रोग्राम (NTCP) को एकीकृत करनेकी एक डिविजनल-लेवल पहल शुरू की है।
स्टेट टोबैको कंट्रोल सेल ने वाइटल स्ट्रैटेजीज (Vital Strategies) के साथ साझेदारी में बेंगलुरु में एक कार्यशाला आयोजित की। इस कार्यशाला का उद्देश्य नौ जिलों में टीबी-टोबैको इंटीग्रेशन फ्रेमवर्क (TB-Tobacco Integration Framework) को प्रभावी ढंग से लागू करना है। यह पहल मुख्य रूप से 'आस्क-एडवाइज-रेफर' (Ask-Advise-Refer - AAR) संक्षिप्त हस्तक्षेप मॉडल पर केंद्रित है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
योजनाNTEP: National TB Elimination Programme (राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम)।
योजनाNTCP: नेशनल टोबैको कंट्रोल प्रोग्राम (National Tobacco Control Programme)।
तथ्यइंटीग्रेशन फ्रेमवर्क (Integration framework) को कर्नाटक के नौ जिलों में लागू किया जा रहा है।
विज्ञान-तकनीकAsk-Advise-Refer (AAR): तंबाकू छोड़ने और TB स्क्रीनिंग के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक संक्षिप्त हस्तक्षेप मॉडल (brief intervention model)।
मेन्स के लिए
प्रश्न: राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम जैसे संक्रामक रोग नियंत्रण कार्यक्रमों के साथ तंबाकू निषेध सेवाओं को एकीकृत करने के सार्वजनिक स्वास्थ्य महत्व का विश्लेषण कीजिए।
क्लिनिकल सिनर्जी: टीबी इलाज की सफलता दर सुधारने के लिए तंबाकू से होने वाली श्वसन संबंधी कमजोरी को दूर करना
ऑपरेशनल बॉटलनैक: अलग-अलग जिला स्वास्थ्य इकाइयों के बीच इंटर-डिपार्टमेंटल रिसोर्सेस और स्टाफ ट्रेनिंग में तालमेल की कमी
मुख्य शब्द: सार्वजनिक स्वास्थ्य एकीकरण · तंबाकू छोड़ना · संक्रामक रोग नियंत्रण · अंतर-क्षेत्रीय सहयोग · निवारक स्वास्थ्य सेवा
चर्चा में क्यों: तमिलनाडु सरकार ने लापता बच्चों के माता-पिता की सहायता करने और उन्हें भावनात्मक समर्थन प्रदान करने के लिए पुलिस स्टेशनों में पैरा-लीगल वॉलंटियर्स (PLVs) तैनात करने की एक योजना की घोषणा की है।
तमिलनाडु सरकार लापता बच्चों के मामलों से निपटने के लिए PLVs की शुरुआत कर रही है। ये स्वयंसेवक बच्चों को भावनात्मक समर्थन प्रदान करेंगे, अधिकारियों के साथ संपर्क सूत्र (liaison) के रूप में कार्य करेंगे और बच्चों के मिलने के बाद परिवारों को आवश्यक सहायता प्रदान करेंगे।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
तथ्यतमिलनाडु सरकार लापता बच्चों के मामलों को मैनेज करने के लिए विशेष रूप से पुलिस स्टेशनों में PLVs तैनात कर रही है।
स्थानयह पहल तमिलनाडु राज्य में लागू की जा रही है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में संवेदनशील बच्चों के संरक्षण के लिए न्यायिक और प्रशासनिक तंत्र को सुदृढ़ करने में समुदाय-आधारित स्वयंसेवकों की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
संस्थागत बाधा: पुलिस-टू-पॉपुलेशन रेशियो कम होने से संवेदनशील लापता बच्चों के मामलों में तुरंत कार्रवाई में रुकावट
सपोर्ट मैकेनिज्म: संकट में घिरे परिवारों के लिए कानूनी कार्रवाई और भावनात्मक समर्थन के बीच की दूरी को कम करना
प्रक्रियात्मक दक्षता: कम्युनिटी-लेड लियज़ॉन और पोस्ट-ट्रेसिंग सहायता के ज़रिए पुलिस पर प्रशासनिक बोझ कम करना
मुख्य शब्द: कमज़ोर वर्ग · कम्युनिटी पुलिसिंग · सामाजिक न्याय · प्रशासनिक दक्षता · कानूनी सहायता
चर्चा में क्यों: कर्नाटक सरकार ने इंटीग्रेटेड पब्लिक ग्रीवेंस रिड्रेसल सिस्टम (IPGRS) लॉन्च किया है। यह प्लेटफॉर्म-आधारित गिग वर्कर्स (gig workers) के लिए भुगतान और काम करने की स्थितियों से जुड़ी शिकायतें दर्ज करने हेतु भारत का पहला डिजिटल पोर्टल है।
IPGRS को कर्नाटक प्लेटफॉर्म-आधारित गिग वर्कर्स बोर्ड और ई-गवर्नेंस विभाग द्वारा विकसित किया गया है। यह गिग वर्कर्स के लिए एक औपचारिक विवाद समाधान ढांचा (dispute resolution framework) है, जिसका उपयोग वे भुगतान और प्लेटफॉर्म से जुड़े विवादों जैसे मुद्दों को हल करने के लिए कर सकते हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाकर्नाटक प्लेटफॉर्म-आधारित गिग वर्कर्स बोर्ड (Karnataka Platform-based Gig Workers’ Board): IPGRS पोर्टल विकसित करने के लिए जिम्मेदार संस्था।
तथ्यIPGRS: गिग वर्कर्स (gig workers) के लिए विशेष रूप से बनाया गया भारत का पहला डिजिटल ग्रीवेंस रिड्रेसल सिस्टम (grievance redressal system)।
स्थानकर्नाटक: राज्य सरकार इस पहल की शुरुआत कर रही है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: प्लेटफ़ॉर्म अर्थव्यवस्था के युग में गिग वर्कर्स (gig workers) के लिए औपचारिक शिकायत निवारण तंत्र की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए और उनकी सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए।
रेगुलेटरी गैप: अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में प्लेटफॉर्म-आधारित श्रमिकों के लिए औपचारिक विवाद समाधान ढांचे की कमी
पारदर्शिता के मुद्दे: गिग वर्कर्स के लिए स्टैंडर्ड पे स्ट्रक्चर और वर्किंग कंडीशन प्रोटोकॉल की ज़रूरत
सरकारी हस्तक्षेप: फैसिलिटेटर के रूप में सरकार की भूमिका और प्राइवेट प्लेटफॉर्म की स्वायत्तता के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: गिग इकोनॉमी · प्लेटफ़ॉर्म वर्कर्स · डिजिटल गवर्नेंस · श्रम अधिकार · सामाजिक सुरक्षा · निवारण तंत्र
चर्चा में क्यों: कर्नाटक हाई कोर्ट ने RGUHS सिंडिकेट द्वारा लिए गए एक प्रस्ताव को रद्द कर दिया है, जिसमें संबद्ध कॉलेजों के निरीक्षण के लिए लोकल इंस्पेक्शन कमिटी (LICs) से सीनेट सदस्यों को बाहर करने की मांग की गई थी।
न्यायालय ने फैसला सुनाया कि विश्वविद्यालय के नियमों (Statute) में संशोधन या उन्हें निरस्त करने की एकमात्र शक्ति RGUHS सेनेट के पास है, जिसे राज्य सरकार को भेजने से पहले अनुमोदित किया जाना आवश्यक है। इस फैसले ने कर्नाटक स्टेट एसोसिएशन ऑफ द मैनेजमेंट ऑफ नर्सिंग एंड एलाइड हेल्थ साइंस इंस्टीट्यूशंस द्वारा दायर एक याचिकाको खारिज कर दिया।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाRGUHS: राजीव गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज।
स्थानकर्नाटक हाई कोर्ट: कर्नाटक राज्य की न्यायिक संस्था।
तथ्यSenate: RGUHS के statute संशोधनों को मंजूरी देने की शक्ति वाली बॉडी।
तथ्यLIC: नर्सिंग और संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान कॉलेजों का निरीक्षण करने के लिए जिम्मेदार लोकल इंस्पेक्शन कमिटी (Local Inspection Committees)।
मेन्स के लिए
प्रश्न: उच्च शिक्षा में शैक्षणिक अखंडता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में स्वायत्त विश्वविद्यालय शासन के महत्व और वैधानिक निकायों की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
संस्थागत स्वायत्तता: यूनिवर्सिटी के आंतरिक शासन और राज्य सरकार की निगरानी के बीच संतुलन
रेगुलेटरी ट्रांसपेरेंसी: मनमाने संबद्धता फैसलों को रोकने के लिए समावेशी कमेटी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना
चर्चा में क्यों: कर्नाटक गृह विभाग ने ट्रैफिक पुलिस और शहरी वायु प्रदूषण के संपर्क में आने वाले फ्रंटलाइन वर्कर्स के लिए राज्यव्यापी श्वसन स्वास्थ्य निगरानी और अनुसंधान कार्यक्रम (Respiratory Health Surveillance and Research Program) शुरू किया है।
यह पहल बेंगलुरु स्थित 'वायू चेस्ट एंड स्लीप स्पेशलिस्ट्स' (Vaayu Chest and Sleep Specialists) में आयोजित दो साल के स्क्रीनिंग प्रोजेक्ट के बाद शुरू की गई है। इसमें व्यापक स्वास्थ्य मूल्यांकन, नॉन-इनवेसिव डायग्नोस्टिक्स (non-invasive diagnostics) और 'वायू रेस्पिरेटरी फाउंडेशन' (Vaayu Respiratory Foundation) द्वारा समर्थित पांच साल का लॉन्गिट्यूडिनल फॉलो-अप स्टडी (longitudinal follow-up study) शामिल है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाइस प्रोग्राम को कर्नाटक होम डिपार्टमेंट द्वारा लागू किया जा रहा है।
तथ्यइस पहल में फ्रंटलाइन वर्कर्स के लिए पांच साल का लॉन्गिट्यूडनल फॉलो-अप स्टडी (longitudinal follow-up study) शामिल है।
स्थानप्रारंभिक स्क्रीनिंग प्रोजेक्ट बेंगलुरु स्थित Vaayu Chest and Sleep Specialists में आयोजित किया गया था।
मेन्स के लिए
प्रश्न: शहरी परिवेश में अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं (frontline workers) के लिए व्यावसायिक स्वास्थ्य निगरानी (occupational health surveillance) के महत्व पर चर्चा कीजिए और उनके कल्याण पर वायु प्रदूषण के प्रभाव को कम करने के लिए आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए।
व्यावसायिक खतरा: घने शहरी वायु प्रदूषण के कारण ट्रैफिक पुलिस में पुरानी श्वसन संबंधी समस्याएं
डेटा-आधारित नीति: निवारक सार्वजनिक स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के लिए लॉन्गिट्यूडिनल हेल्थ स्टडीज का उपयोग
संस्थागत ढांचा: उच्च प्रदूषण वाले क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए मानकीकृत स्वास्थ्य निगरानी प्रोटोकॉल की ज़रूरत
मुख्य शब्द: व्यावसायिक स्वास्थ्य · श्वसन संबंधी निगरानी · शहरी वायु प्रदूषण · लॉन्जिट्यूडिनल स्टडी · निवारक नीति
चर्चा में क्यों: UN Women ने 'Tipping Point' शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें बताया गया है कि 2020 के बाद से AI-आधारित डीपफेक (deepfakes) और ऑनलाइन हिंसा में दोगुनी वृद्धि हुई है। इसके कारण महिला पत्रकारों के बीच आत्म-सेंसरशिप (self-censorship) में बढ़ोतरी हुई है।
UN Women के अध्ययन में पाया गया कि सर्वेक्षण में शामिल 12% महिला पत्रकारों के साथ उनकी व्यक्तिगत तस्वीरों को उनकी सहमति के बिना साझा किया गया, जबकि 6% को डीपफेक (deepfakes) के जरिए निशाना बनाया गया। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि ऑनलाइन दुर्व्यवहार के कारण 45% महिला पत्रकार सोशल मीडिया पर खुद को सेंसर (self-censor) करती हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
रिपोर्ट / सूचकांकटिपिंग पॉइंट: AI युग में ऑनलाइन हिंसा के प्रभाव, अभिव्यक्तियाँ और निवारण।
तथ्यऑनलाइन दुर्व्यवहार के कारण 45% महिला पत्रकार सोशल मीडिया पर सेल्फ-सेंसरशिप (self-censorship) करती हैं।
तथ्य6% महिला पत्रकारों ने बताया कि उन्हें deepfakes या हेरफेर की गई तस्वीरों (manipulated imagery) के जरिए निशाना बनाया गया।
संस्थाUN Women।
मेन्स के लिए
प्रश्न: डिजिटल युग में, एआई-जनित 'डीपफेक' (deepfakes) के प्रसार से प्रेस की स्वतंत्रता और महिला पत्रकारों के मानसिक स्वास्थ्य पर उत्पन्न होने वाले खतरों का विश्लेषण कीजिए।
डिजिटल सुरक्षा का अंतर: गैर-सहमति वाले डीपफेक प्रसार के खिलाफ कानूनी ढाँचे की कमी
चिलिंग इफ़ेक्ट: महिला पत्रकारों के बीच बढ़ती सेल्फ-सेंसॉरशिप लोकतांत्रिक विमर्श को कमजोर कर रही है
कॉर्पोरेट जवाबदेही: AI-आधारित उत्पीड़न के खिलाफ टेक प्लेटफॉर्म्स के लिए प्रोएक्टिव मॉडरेशन की ज़रूरत
मुख्य शब्द: डीपफेक्स · स्व-सेंसरशिप · डिजिटल उत्पीड़न · प्रेस की आज़ादी · मानसिक स्वास्थ्य · एल्गोरिथमिक जवाबदेही
चर्चा में क्यों: कर्नाटक सरकार ने एक विशेषज्ञ समिति (Expert Committee) की सिफारिशों के आधार पर कर्नाटक इंजीनियरिंग एजुकेशन रिफॉर्म अथॉरिटी (KEERA) स्थापित करने की योजना की घोषणा की है।
कर्नाटक इंजीनियरिंग एजुकेशन रिफॉर्म अथॉरिटी (KEERA) की स्थापना एक अलग कानून के माध्यम से की जाएगी। यह प्रस्ताव एस. सदगोपन (IIIT-B के पूर्व निदेशक) के नेतृत्व वाली तकनीकी शिक्षा में सुधार पर विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार किया गया है।
पदएस. सदागोपन: IIIT-B के पूर्व डायरेक्टर और एक्सपर्ट कमेटी (Expert Committee) के प्रमुख।
तथ्यकर्नाटक सरकार द्वारा अलग कानून के माध्यम से KEERA की स्थापना की जाएगी।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में उभरती औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम को संरेखित करने के लिए तकनीकी शिक्षा में संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।
करिकुलम-इंडस्ट्री गैप: मैन्युफैक्चरिंग और टेक में एकेडमिक थ्योरी और प्रैक्टिकल स्किल की ज़रूरतों के बीच तालमेल की कमी
रेगुलेटरी ऑटोनॉमी: AICTE द्वारा तय किए गए राष्ट्रीय मानकों के साथ राज्य-स्तरीय शैक्षिक सुधारों का संतुलन
मुख्य शब्द: संरचनात्मक सुधार · तकनीकी शिक्षा · विधायी ढांचा · स्किल अलाइनमेंट
चर्चा में क्यों: नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने MBBS सीटों की संख्या पर लगी सीमा को हटाने और कॉलेजों एवं संबद्ध अस्पतालों के बीच की दूरी से जुड़ी पाबंदियों को खत्म करने के लिए अंडरग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशंस में संशोधन किया है।
NMC के संशोधित नियम मेडिकल कॉलेजों को बिना किसी निश्चित सीमा के छात्रों की संख्या बढ़ाने की अनुमति देते हैं। यह कॉलेजों को भौगोलिक स्थिति के आधार पर कैंपस और संबद्ध अस्पताल के बीच की दूरी को समायोजित करने की भी अनुमति देता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थानेशनल मेडिकल कमीशन (NMC): भारत में मेडिकल शिक्षा के लिए नियामक संस्था (Regulatory body)।
तथ्यNMC ने कॉलेज द्वारा दी जाने वाली MBBS सीटों की संख्या पर लगाई गई सीमा (ceiling) को हटा दिया है।
तथ्यNMC ने कॉलेज और उससे जुड़े अस्पताल के बीच की अधिकतम दूरी पर लगाई गई पाबंदियों को हटा दिया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता और सुलभता पर सीटों की सीमा और दूरी संबंधी प्रतिबंधों को हटाने के निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
क्वालिटी में गिरावट: छात्र-टू-बेड रेशियो ज्यादा होने से क्लिनिकल ट्रेनिंग के प्रभावित होने का खतरा
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: उन 'सैटेलाइट' कॉलेजों की संभावना जिनमें टर्शियरी केयर सुविधाओं की तुरंत निकटता नहीं है
रेगुलेटरी ओवरसाइट: देखभाल के मानक सुनिश्चित करने के लिए NMC की सख्त निगरानी की ज़रूरत
मुख्य शब्द: नियामक स्वायत्तता · स्वास्थ्य सेवा इन्फ्रास्ट्रक्चर · शिक्षा के मानक · पहुँच योग्यता · क्वालिटी एश्योरेंस
चर्चा में क्यों: कर्नाटक सरकार ने अनुसूचित जातियों और जनजातियों के छात्रों, फैकल्टी और कर्मचारियों को भेदभाव से बचाने और उच्च शिक्षा तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए संशोधित रोहित वेमुला बिल, 2026 को मंजूरी दी है।
इस विधेयक का शीर्षक 'कर्नाटक रोहित वेमुला (भेदभाव, बहिष्कार या अन्याय की रोकथाम) (शिक्षा और गरिमा का अधिकार) विधेयक, 2026' है। इसका उद्देश्य कर्नाटक राज्य के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में होने वाले भेदभाव और बहिष्कार को लक्षित करना है।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
अधिनियम / विधेयकरोहित वेमुला बिल, 2026: इसका उद्देश्य कर्नाटक में उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव और बहिष्कार को रोकना है।
तथ्ययह बिल अनुसूचित जातियों और जनजातियों से संबंधित छात्रों, फैकल्टी और स्टाफ के लिए सुरक्षा प्रदान करता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में हाशिए पर रहने वाले समुदायों के लिए सामाजिक न्याय और उच्च शिक्षा तक समान पहुँच सुनिश्चित करने में विधायी उपायों के महत्व पर चर्चा कीजिए।
संस्थागत सुरक्षा: शैक्षणिक वातावरण में व्यवस्थित बहिष्कार के खिलाफ मजबूत शिकायत निवारण तंत्र की ज़रूरत
संवैधानिक तालमेल: समानता के अधिकार और समावेशी शैक्षिक इंफ्रास्ट्रक्चर की व्यावहारिक चुनौतियों के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: सामाजिक न्याय · समावेशी शिक्षा · प्रणालीगत भेदभाव · विधायी ढांचा · पिछड़ा वर्ग
चर्चा में क्यों: तेलंगाना राज्य सरकार ने स्कूली पाठ्यक्रम में कानूनी साक्षरता और बाल संरक्षण को शामिल करने के लिए तेलंगाना स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (TSLSA) के साथ एक MoU (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह पहल तेलंगाना के 5,711 हाई स्कूलों को कवर करती है। इसमें कानूनी साक्षरता और बाल अधिकार क्लबों की स्थापना, शिक्षकों का प्रशिक्षण, तथा छात्रों और स्कूल छोड़ने वाले बच्चों के लिए कानूनी सहायता/परामर्श शामिल है।
तथ्ययह पहल तेलंगाना के 5,711 हाई स्कूलों को कवर करती है।
तथ्ययह MoU दो साल की अवधि के लिए प्रभावी है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: बच्चों के अधिकारों के संरक्षण और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए स्कूली पाठ्यक्रम में कानूनी साक्षरता को एकीकृत करने के महत्व पर चर्चा कीजिए।
संस्थागत तालमेल: राज्य शिक्षा विभागों और लीगल सर्विसेज अथॉरिटीज के बीच सहयोगात्मक ढांचा
सामाजिक समावेश: लक्षित कानूनी सहायता और काउंसलिंग सेवाओं के जरिए स्कूल ड्रॉपआउट रेट को कम करना
अधिकार-आधारित शिक्षा: अकादमिक सीखने से मौलिक अधिकारों और बाल संरक्षण कानूनों के प्रति जागरूकता की ओर बदलाव
मुख्य शब्द: कानूनी साक्षरता · बाल अधिकार · सामाजिक न्याय · संस्थागत सहयोग · कानूनी सहायता
चर्चा में क्यों: बड़गुरु रामचंद्रप्पा समिति ने सिफारिश की है कि विश्वविद्यालयों में समान फंडिंग सुनिश्चित करने और भेदभाव को खत्म करने के लिए राज्य सरकारों को प्रत्येक एकेडमिक चेयर (Academic Chair) के लिए कम से कम ₹1 करोड़ का एक निश्चित फंड प्रदान करना चाहिए।
समिति ने शैक्षणिक कुर्सियों (Academic Chairs) की स्थापना पर अनिवार्य वित्तीय आवंटन का प्रस्ताव दिया है। इसने सुझाव दिया कि इन कुर्सियों का नाम उन व्यक्तियों के नाम पर रखा जाना चाहिए जिन्होंने महत्वपूर्ण सांस्कृतिक योगदान दिया हो और इन्हें ज्ञान सृजन के केंद्र बनाने के लिए क्षेत्रीय समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यप्रस्तावित फिक्स्ड फंड: प्रत्येक एकेडमिक चेयर (Academic Chair) के लिए कम से कम ₹1 करोड़।
पदबरागुरु रामचंद्रप्पा: सिफारिशें देने वाली कमेटी के प्रमुख।
संस्थाएकेडमिक चेयर्स (Academic chairs): इन्हें क्षेत्रीय समस्याओं पर केंद्रित ज्ञान सृजन के केंद्रों के रूप में प्रस्तावित किया गया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारतीय उच्च शिक्षा में शैक्षणिक कुर्सियों (Academic Chairs) के संस्थागतकरण से क्षेत्रीय ज्ञान सृजन और सांस्कृतिक संरक्षण को कैसे बढ़ावा दिया जा सकता है, इस पर चर्चा कीजिए।
फंडिंग इक्विटी: स्थापित और नए एकेडमिक चेयर्स के बीच संसाधन आवंटन में असमानता को दूर करना
क्षेत्रीय फोकस: सामान्य सिलेबस से हटकर स्थानीय समस्याओं और सांस्कृतिक रिसर्च पर ध्यान देना
अकाउंटेबिलिटी फ्रेमवर्क: रिसर्च आउटपुट और गतिविधि की निगरानी के लिए अनिवार्य रिपोर्टिंग मैकेनिज्म बनाना
मुख्य शब्द: ज्ञान का सृजन · संसाधन समानता · सांस्कृतिक संरक्षण · संस्थागत स्वायत्तता · क्षेत्रीय विकास
चर्चा में क्यों: केरल का वन विभाग सांप के काटने की आपातकालीन स्थिति में फर्स्ट रिस्पॉन्डर और डॉक्टरों को रियल-टाइम गाइडेंस प्रदान करने के लिए SARPA स्नेक-रिस्पॉन्स प्लेटफॉर्म को अपग्रेड कर रहा है।
केरल के वन विभाग द्वारा SARPA प्लेटफॉर्म को चिकित्सा पेशेवरों और सांप विशेषज्ञों को जोड़ने के लिए अपग्रेड किया जा रहा है। इसका उद्देश्य दूरस्थ क्लिनिकल निर्णय लेने की प्रक्रिया को सुगम बनाना और सांप के काटने की घटनाओं के दौरान तत्काल मार्गदर्शन प्रदान करना है, क्योंकि हालिया हीटवेव (Heatwave) के कारण ऐसी घटनाओं में भारी वृद्धि हुई है।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
संस्थाSARPA केरल के फॉरेस्ट डिपार्टमेंट (Forest Department) द्वारा मैनेज किया जाने वाला एक स्नेक-रिस्पॉन्स (snake-response) प्लेटफॉर्म है।
तथ्ययह प्लेटफॉर्म रियल-टाइम गाइडेंस के लिए मेडिकल प्रोफेशनल्स और स्नेक एक्सपर्ट्स को जोड़ता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में सर्पदंश से होने वाली मृत्यु दर के प्रभाव को कम करने में डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म और वास्तविक समय के विशेषज्ञ परामर्श किस प्रकार सहायक हो सकते हैं, चर्चा कीजिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेष एंटी-वेनम और प्रशिक्षित कर्मियों की कमी
टेली-मेडिसिन इंटीग्रेशन: रियल-टाइम रिमोट क्लिनिकल गाइडेंस के जरिए 'गोल्डन ऑवर' में होने वाली मौतों को कम करना
डेटा-आधारित प्रतिक्रिया: इमरजेंसी रिसोर्स एलोकेशन को बेहतर बनाने के लिए हीटवेव से जुड़े इंसिडेंट मैपिंग का इस्तेमाल
मुख्य शब्द: टेली-मेडिसिन · आपातकालीन प्रतिक्रिया · सार्वजनिक स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर · रियल-टाइम गाइडेंस · स्नेकबाइट मैनेजमेंट
चर्चा में क्यों: कर्नाटक का मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट अपने 24 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में वित्तीय आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए NRI के लिए 15% सीटें आरक्षित करने की योजना बना रहा है।
कर्नाटक मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट ने शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से शुरू होने वाले 24 सरकारी मेडिकल कॉलेजों के लिए 15% NRI कोटा का प्रस्ताव दिया है। सरकार ने 2025-26 के लिए NRI कोटा शुल्क ₹25 लाख प्रति वर्ष निर्धारित किया है, जबकि निजी कॉलेजों की फीस ₹40 लाख से ₹47 लाख प्रति वर्ष के बीच है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यकर्नाटक ने अपने 24 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में NRIs के लिए 15% सीटों के आरक्षण का प्रस्ताव दिया है।
तथ्यवर्ष 2025-26 के लिए NRI कोटा सीटों के लिए सरकार द्वारा निर्धारित शुल्क ₹25 लाख प्रति वर्ष है।
तथ्यप्राइवेट मेडिकल कॉलेज वर्तमान में NRI सीटों के लिए ₹40 लाख से ₹47 लाख प्रति वर्ष तक शुल्क लेते हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में एनआरआई (NRI) कोटा लागू करने से घरेलू छात्रों के लिए स्वास्थ्य सेवा शिक्षा की सुलभता और राज्य संस्थानों की राजकोषीय स्वायत्तता पर पड़ने वाले प्रभावों की चर्चा कीजिए।
मार्केट डिस्टॉर्शन: सरकारी सब्सिडी वाली NRI सीटों से प्राइवेट हेल्थकेयर संस्थानों के खिलाफ असमान अवसर पैदा होने की संभावना
चर्चा में क्यों: कर्नाटक के आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) से पता चला है कि डायरिया (diarrhoea) से होने वाली मौतों को कम करने में महत्वपूर्ण प्रगति के बावजूद, निमोनिया राज्य में शिशु मृत्यु का प्रमुख कारण बना हुआ है।
कर्नाटक आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, 4,709 शिशुओं की मृत्यु दर्ज की गई। इन मौतों में से 204 मौतें निमोनिया के कारण हुईं, जबकि दस्त (diarrhoea) के कारण केवल 12 मौतें हुईं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्य2025-26 में कर्नाटक में 4,709 शिशु मौतों में से 204 मौतें न्यूमोनिया (Pneumonia) के कारण हुईं।
तथ्य2025-26 में कर्नाटक में डायरिया (Diarrhoea) के कारण केवल 12 शिशु मौतों की संख्या दर्ज की गई।
स्थानकर्नाटक इकोनॉमिक सर्वे 2025-26।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में शिशुओं में श्वसन संक्रमण के प्रबंधन में निरंतर बनी रहने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए और प्रारंभिक जीवन के स्वास्थ्य सेवा वितरण में मौजूद अंतराल को पाटने के लिए उचित उपायों का सुझाव दीजिए।
डायग्नोस्टिक गैप: ग्रामीण कर्नाटक में रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट और स्पेशलाइज्ड पीडियाट्रिक रेस्पिरेटरी केयर तक सीमित पहुंच
इंफ्रास्ट्रक्चर में असमानता: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में ऑक्सीजन-सपोर्टेड नियोनेटल यूनिट्स और स्पेशलाइज्ड पीडियाट्रिशियन की कमी
मुख्य शब्द: शिशु मृत्यु दर · सार्वजनिक स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर · शुरुआती जीवन की देखभाल · एपिडेमियोलॉजिकल ट्रांज़िशन · प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा
चर्चा में क्यों: भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त (RG&CCI) ने राज्य निदेशालयों को निर्देश दिए हैं कि वे संवेदनशील आबादी की पहचान करें और 2027 की जनगणना में गलतियों को रोकने के लिए निष्पक्ष गणना सुनिश्चित करें।
जनगणना दो चरणों में आयोजित की जा रही है: 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक हाउसिंग लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस (HLO) होगा, जिसके बाद फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना (Population Enumeration) की जाएगी। RG&CCI ने सटीकता सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों और स्थानीय अधिकारियों को गणनाकार (enumerators) के रूप में उपयोग करने को प्राथमिकता दी है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाRG&CCI: रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त (Census Commissioner) भारत की वह अथॉरिटी है जो जनगणना (Census) प्रक्रिया की निगरानी करती है।
तथ्यCensus 2027 Phase 1 (HLO): 1 अप्रैल से 30 सितंबर।
पदपसंदीदा enumerators में शिक्षक और क्षेत्र से परिचित स्थानीय अधिकारी शामिल होते हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: जनगणना में जनसांख्यिकीय सटीकता सुनिश्चित करने के महत्व पर चर्चा कीजिए और संवेदनशील आबादी से डेटा संग्रह के दौरान उत्पन्न होने वाले पूर्वाग्रहों को कम करने के लिए आवश्यक उपायों का विश्लेषण कीजिए।
डेटा इंटीग्रिटी: हाशिए के समूहों को छोड़ देने से कानूनी चुनौतियों और पॉलिसी फेलियर का जोखिम
संस्थागत पक्षपात: डेटा में सांप्रदायिक या राजनीतिक हस्तक्षेप रोकने के लिए तटस्थ गणना की ज़रूरत
लॉजिस्टिक रणनीति: जटिल सामाजिक-राजनीतिक इलाकों में नेविगेट करने के लिए स्थानीय अधिकारियों और शिक्षकों का इस्तेमाल
चर्चा में क्यों: तमिलनाडु स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ (IMH) ने 2026 के चुनावों के दौरान समावेशी चुनावी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए मानसिक बीमारियों से पीड़ित 53 निवासियों के लिए मतदान की सुविधा प्रदान की।
तमिलनाडु के अयानवरम स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ (IMH) ने अपने परिसर में एक समर्पित पोलिंग बूथ (251AV) स्थापित किया है। हालांकि शुरुआत में 100 निवासियों को पात्र माना गया था, लेकिन मेडिकल पुन: परीक्षण और डिस्चार्ज के बाद अंतिम संख्या को संशोधित कर 53 कर दिया गया।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यअयानवरम में IMH कैंपस में मानसिक बीमारियों से पीड़ित 53 निवासियों ने वोट डाले।
स्थानइंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ (IMH) तमिलनाडु के अयानवरम में स्थित है।
तथ्यमानसिक स्वास्थ्य संस्थान (mental health institution) के निवासियों के लिए विशेष रूप से पोलिंग बूथ नंबर 251AV बनाया गया था।
मेन्स के लिए
प्रश्न: मानसिक बीमारियों से ग्रस्त व्यक्तियों के लिए समावेशी चुनावी प्रक्रियाओं के महत्व और उनके मतदान के संवैधानिक अधिकार को सुनिश्चित करने में संस्थागत समर्थन की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
संस्थागत बाधा: गंभीर मानसिक विकारों वाले मरीजों में मतदान के लिए संज्ञानात्मक क्षमता का आकलन करने में कठिनाई
लॉजिस्टिक समावेशिता: कमजोर समूहों के लिए गतिशीलता और पहुंच की बाधाओं को दूर करने हेतु ऑन-साइट पोलिंग बूथों की आवश्यकता
मुख्य शब्द: समावेशी लोकतंत्र · मतदान का अधिकार · मानसिक स्वास्थ्य वकालत · चुनावी सुगमता · कमज़ोर वर्ग
चर्चा में क्यों: केरल स्टेट कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (Kerala State Commission for Protection of Child Rights) ने जनरल एजुकेशन प्रिंसिपल सेक्रेटरी को 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों द्वारा मोबाइल फोन और स्क्रीन के उपयोग को विनियमित करने के लिए कानून बनाने का निर्देश दिया है।
पलक्कड़ के अनाक्करा स्थित एक स्कूल में हुई घटना की रिपोर्ट के बाद, आयोग ने स्वतः संज्ञान (suo motu) लेते हुए कार्यवाही शुरू की। इन नियमों का मसौदा तैयार करने के लिए प्रिंसिपल सचिवों, विभाग सचिवों और राज्य पुलिस प्रमुख सहित एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाकेरल स्टेट कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स: बाल अधिकारों की निगरानी के लिए जिम्मेदार राज्य निकाय।
स्थानअन्नकारा, पलक्कड़: स्कूल की वह घटना जहाँ आयोग की कार्रवाई शुरू हुई।
तथ्यरेगुलेशन के लिए आयु सीमा: 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे।
मेन्स के लिए
प्रश्न: बच्चों पर अनियंत्रित स्क्रीन समय के सामाजिक-मनोवैज्ञानिक प्रभावों की चर्चा कीजिए और डिजिटल युग में बाल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विधायी हस्तक्षेपों की आवश्यकता का मूल्यांकन कीजिए।
रेगुलेटरी फ्रिक्शन: पर्सनल डिवाइसेस पर माता-पिता के अधिकारों और राज्य द्वारा तय किए गए सेफ्टी प्रोटोकॉल के बीच संतुलन
एन्फोर्समेंट की बाधाएं: स्कूल के माहौल से बाहर प्राइवेट डिवाइस के इस्तेमाल की निगरानी में मुश्किल
डिजिटल साक्षरता का अंतर: मोबाइल एक्सेस पर पूरी तरह रोक के बजाय उम्र के हिसाब से कंटेंट फ़िल्टरिंग की ज़रूरत
मुख्य शब्द: बाल अधिकार · डिजिटल रेगुलेशन · विधायी ढांचा · स्वो मोटो · स्क्रीन टाइम · बच्चों की सुरक्षा
चर्चा में क्यों: राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के दौरान, केंद्र सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) में महिलाओं के आरक्षण की प्रगति पर प्रकाश डाला और निर्धारित और प्राप्त लक्ष्यों के बीच के अंतर को रेखांकित किया।
संविधान शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 33% कोटा अनिवार्य करता है। वर्तमान में, 19 राज्यों ने इसे 50% आरक्षण तक बढ़ा दिया है, लेकिन केवल 10 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने निर्धारित कोटा से अधिक प्रतिनिधित्व हासिल किया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्य19 राज्यों ने पंचायती राज संस्थानों (Panchayati Raj Institutions) में महिलाओं के लिए आरक्षण को 50% तक बढ़ा दिया है।
तथ्यवर्तमान में केवल 10 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व निर्धारित कोटा से अधिक है।
तथ्यसंविधान शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए न्यूनतम 33% कोटा अनिवार्य करता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत की पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए विधायी आरक्षण को वास्तविक राजनीतिक प्रतिनिधित्व में परिवर्तित करने में आने वाली चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
संरचनात्मक बाधाएं: 'सरपंच पति' संस्कृति का बोलबाला जहां पुरुष रिश्तेदार वास्तविक सत्ता चलाते हैं
डेटा में विसंगति: वैधानिक आरक्षण लक्ष्यों और वास्तविक महिला नेतृत्व की मौजूदगी के बीच अंतर
संस्थागत टकराव: 50% आरक्षण के आदेश को राज्यों द्वारा लागू करने के तरीके में अंतर
मुख्य शब्द: ठोस प्रतिनिधित्व · पंचायती राज संस्थाएं · जेंडर कोटा · राजनीतिक सशक्तिकरण · जमीनी लोकतंत्र