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भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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भाग I · स्था. 11.2025 
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एक रिपोर्ट में बताया गया है कि सितंबर 2018 और सितंबर 2019 के बीच सरकारी स्कूलों की संख्या में 4.78% की कमी आई

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चर्चा में क्यों

एक रिपोर्ट में बताया गया है कि सितंबर 2018 और सितंबर 2019 के बीच सरकारी स्कूलों की संख्या में 4.78% की कमी आई, जबकि निजी स्कूलों में नामांकन (Enrollment) में 3.6% की वृद्धि हुई।

पृष्ठभूमि

यह रिपोर्ट सरकारी स्कूलों में गिरावट के लिए कम नामांकन वाले स्कूलों को विलय (merger) के माध्यम से बंद करने की नीति को जिम्मेदार ठहराती है। इसके प्रमुख कारकों में शिक्षकों की कमी, शिक्षण की अपर्याप्त गुणवत्ता और सीखने के परिणामों (learning outcomes) पर ध्यान न देना शामिल है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • तथ्यसितंबर 2018 और सितंबर 2019 के बीच सरकारी स्कूलों की संख्या में 4.78% की कमी आई।
  • तथ्यउसी अवधि के दौरान प्राइवेट स्कूल में नामांकन 3.6% बढ़ गया।
  • तथ्यसरकारी नीति में विलय (mergers) के माध्यम से कम नामांकन वाले स्कूलों को बंद करना शामिल है।

मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में स्कूली शिक्षा के बढ़ते निजीकरण की प्रवृत्ति के संवैधानिक शिक्षा के अधिकार और न्यायसंगत शिक्षण परिणामों पर पड़ने वाले प्रभावों की चर्चा कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • संस्थागत बाधा: सरकारी स्कूलों में योग्य शिक्षकों की कमी और लर्निंग आउटकम पर फोकस का अभाव
  • इक्विटी गैप: निजीकरण के रुझान कम आय वाले परिवारों के छात्रों को हाशिए पर धकेल सकते हैं
  • पॉलिसी ट्रेड-ऑफ: स्कूलों के विलय से मिलने वाली एफिशिएंसी बनाम ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में शिक्षा की पहुंच

मुख्य शब्द: निजीकरण · सीखने के परिणाम · शिक्षा में समानता · सार्वजनिक बुनियादी ढांचा · विलय नीति

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।