सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह Immoral Trafficking Prevention Act (ITPA) में संशोधन करे
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चर्चा में क्यों
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह Immoral Trafficking Prevention Act (ITPA) में संशोधन करे, ताकि व्यावसायिक यौन शोषण के शिकार हुए पीड़ितों को आपराधिक कार्यवाही से छूट दी जा सके।
पृष्ठभूमि
सुप्रीम कोर्ट ने वाणिज्यिक यौन शोषण (Commercial Sexual Exploitation - CSE) के पीड़ितों की सुरक्षा के लिए एक योजना जारी की है, जिसमें एक गैर-समान दृष्टिकोण (non-uniform approach) की आवश्यकता को स्वीकार किया गया है। कोर्ट ने विशेष रूप से मानव तस्करी के पीड़ितों के लिए कानूनी छूट की मांग की है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन पर वेश्यावृत्ति के लिए मुकदमा न चलाया जाए।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- अधिनियम / विधेयकImmoral Trafficking Prevention Act (ITPA) भारत में तस्करी और वेश्यावृत्ति को नियंत्रित करने वाला प्राथमिक कानून है।
- संस्थासुप्रीम कोर्ट ने CSE पीड़ितों के संबंध में कानूनी संशोधनों के लिए निर्देश जारी किए।
- तथ्यकोर्ट की योजना में बचाए गए पीड़ितों की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस रेड्स (Police raids) की विशिष्ट प्रक्रियाएं शामिल हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में वाणिज्यिक यौन शोषण के पीड़ितों के संरक्षण और तस्करी विरोधी कानूनों के प्रवर्तन के बीच संतुलन स्थापित करने में निहित कानूनी और नैतिक जटिलताओं का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- कानूनी अस्पष्टता: वेश्यावृत्ति को अपराध बनाने और मानव तस्करी के पीड़ितों की सुरक्षा के बीच टकराव
- प्रक्रियात्मक सुरक्षा: रेस्क्यू रेड्स के दौरान सेकेंडरी विक्टिमाइजेशन रोकने के लिए स्टैंडर्ड पुलिस प्रोटोकॉल की ज़रूरत
- विधायी अंतर: कमर्शियल सेक्स एक्सप्लॉइटेशन के विविध रूपों को संबोधित करने वाले व्यापक कानूनी ढांचे का अभाव
मुख्य शब्द: व्यावसायिक यौन शोषण · पीड़ित संरक्षण · विधायी संशोधन · मानव तस्करी · प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपाय
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।