यूपीएससी सिविल सेवा GS3 (अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा) के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी भाग से जुड़ी हर ख़बर, परीक्षा के नज़रिए से: चर्चा में क्यों, पृष्ठभूमि, प्रीलिम्स के तथ्य, अभ्यास प्रश्न और मेन्स प्रश्न। अब तक 1,426 नोट्स, रोज़ अपडेट।
पाठ्यक्रम के विषय: IT, AI, सेमीकंडक्टर एवं कंप्यूटिंग (517) · अंतरिक्ष तकनीक (ISRO, मिशन) (348) · जैव प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य अनुसंधान (242) · परमाणु एवं नई ऊर्जा तकनीक (197) · रक्षा तकनीक (118) · बौद्धिक संपदा अधिकार (4)
चर्चा में क्यों: ETH ज़्यूरिख (Zurich) के वैज्ञानिकों ने UNITAR और ITU के सहयोग से, वे प्रोटीन (whey protein) से बने एक 'प्रोटीन स्पंज' का उपयोग करके बेकार पड़े इलेक्ट्रॉनिक कचरे से 450 मिलीग्राम 22-कैरेट सोना निकालने की एक टिकाऊ विधि विकसित की है।
ETH ज़्यूरिख (ETH Zurich) के शोधकर्ताओं ने सोने के निष्कर्षण (extraction) के लिए एक प्रोटीन स्पंज बनाने हेतु डेयरी उद्योग के उप-उत्पाद (byproduct) 'व्हे प्रोटीन' (whey protein) का उपयोग किया। इस अध्ययन में पुराने कंप्यूटर मदरबोर्ड से 450 मिलीग्राम 22-कैरेट सोना सफलतापूर्वक प्राप्त किया गया।
प्रीलिम्स बिंदु (5)
विज्ञान-तकनीकETH Zurich: ज़्यूरिख में स्थित स्विस फेडरल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी।
तथ्यछोड़े गए इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट (electronic waste) से 450 मिलीग्राम 22-कैरेट गोल्ड बरामद किया गया।
तथ्यव्हे प्रोटीन (Whey protein): डेयरी इंडस्ट्री का एक उप-उत्पाद (byproduct) जिसका उपयोग गोल्ड एक्सट्रैक्शन (gold extraction) के लिए 'प्रोटीन स्पंज' के रूप में किया जाता है।
संस्थाUNITAR: UN इंस्टीट्यूट फॉर ट्रेनिंग एंड रिसर्च।
संस्थाITU: इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (International Telecommunication Union)।
मेन्स के लिए
प्रश्न: ई-कचरे (इलेक्ट्रॉनिक कचरे) के लिए हरित पुनर्चक्रण प्रौद्योगिकियों का विकास किस प्रकार चक्रीय अर्थव्यवस्था और सतत औद्योगिक विकास में योगदान दे सकता है, चर्चा कीजिए।
सर्कुलर इकोनॉमी: डेयरी उप-उत्पादों और ई-वेस्ट को हाई-वैल्यू इंडस्ट्रियल रिसोर्सेज में बदलना
पर्यावरण सुरक्षा: पारंपरिक गोल्ड एक्सट्रैक्शन तरीकों से होने वाले जहरीले केमिकल रनऑफ को कम करना
मुख्य शब्द: सर्कुलर इकोनॉमी · सतत विकास · ई-वेस्ट मैनेजमेंट · ग्रीन टेक्नोलॉजी · रिसोर्स रिकवरी
चर्चा में क्यों: NASA कनाडा के डेवोन आइलैंड (Devon Island) का उपयोग मंगल ग्रह के स्थलीय एनालॉग (terrestrial analog) के रूप में कर रहा है, ताकि अत्यधिक वातावरण में रोवर्स, लाइफ-सपोर्ट सिस्टम और सूक्ष्मजीवों के जीवित रहने की क्षमता का परीक्षण किया जा सके।
डेवोन आइलैंड दुनिया का सबसे बड़ा निर्जन द्वीप है, जो कनाडा के नुनावुत (Nunavut) में स्थित है। यहाँ ध्रुवीय मरुस्थल (polar desert) का वातावरण है और यहाँ हॉटन इम्पैक्ट क्रेटर (Haughton Impact Crater) स्थित है। वैज्ञानिक मंगल ग्रह की स्थितियों के अनुकरण और सूक्ष्मजीवों पर UV विकिरण के प्रभावों का अध्ययन करने के लिए इसका उपयोग करते हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानडेवोन आइलैंड कनाडा के नुनावुत (Nunavut) क्षेत्र में स्थित है।
विज्ञान-तकनीकNASA, मंगल ग्रह के लिए टेरेस्ट्रियल एनालॉग (terrestrial analog) के रूप में डेवोन आइलैंड के पोलर डेजर्ट वातावरण का उपयोग करता है।
विज्ञान-तकनीकहॉटन इम्पैक्ट क्रेटर (Haughton Impact Crater) का उपयोग अत्यधिक UV रेडिएशन के तहत माइक्रोबियल सर्वाइवल (microbial survival) के अध्ययन के लिए किया जाता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अंतरिक्ष अन्वेषण में स्थलीय अनुरूप स्थलों (terrestrial analog sites) के महत्व और मानव उपनिवेशीकरण के लिए अलौकिक वातावरण के अनुकरण में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
बायोलॉजिकल रिस्क: प्लैनेटरी प्रोटेक्शन के लिए एक्सट्रीम UV रेडिएशन में माइक्रोबियल सर्वाइवल का आकलन
तकनीकी सत्यापन: पोलर डेजर्ट की स्थितियों में रोवर मोबिलिटी और लाइफ-सपोर्ट की मजबूती की टेस्टिंग
लॉजिस्टिक बाधाएं: आर्कटिक वातावरण में दूरस्थ रिसर्च स्टेशनों के रखरखाव की भारी लागत
मुख्य शब्द: स्थलीय एनालॉग · ग्रहीय अन्वेषण · स्पेस कोलोनाइजेशन · माइक्रोबियल सर्वाइवल · अत्यधिक कठिन वातावरण
चर्चा में क्यों: VEM Technologies और जर्मन कंपनी TKMS ने भारतीय नौसेना के पनडुब्बी बेड़े (submarine fleet) के लिए भारत में भारी वजन वाले टॉरपीडो (heavyweight torpedoes) के संयुक्त उत्पादन के लिए एक टीमिंग एग्रीमेंट (Teaming Agreement) पर हस्ताक्षर किए हैं।
VEM Technologies और TKMS (जर्मनी) ने टॉरपीडो उत्पादन के लिए एक रणनीतिक टीमिंग एग्रीमेंट (Teaming Agreement) किया है। इस साझेदारी का उद्देश्य भारतीय नौसेना के मौजूदा पनडुब्बी बेड़े को आपूर्ति करना और एक संभावित जॉइंट वेंचर (Joint Venture) के माध्यम से भविष्य के निर्यात अवसरों की संभावनाओं को तलाशना है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीकTKMS: टोरपीडो और नेवल सिस्टम्स (naval systems) में विशेषज्ञता रखने वाली एक जर्मन नेवल फर्म।
तथ्ययह समझौता भारतीय नौसेना के सबमरीन बेड़े के लिए हैवीवेट टॉरपीडो (heavyweight torpedoes) के उत्पादन पर केंद्रित है।
पदVEM Technologies: घरेलू टॉरपीडो निर्माण के लिए TKMS के साथ साझेदारी करने वाली एक भारतीय इकाई।
मेन्स के लिए
प्रश्न: रणनीतिक रक्षा साझेदारी और 'मेक इन इंडिया' पहल किस प्रकार भारत की समुद्री सुरक्षा और नौसेना प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता में योगदान देती हैं, इसका विश्लेषण कीजिए।
टेक्नोलॉजी ट्रांसफर: हाई-प्रिसिजन वेपनीरी के लिए स्वदेशी आरएंडडी और विदेशी तकनीकी विशेषज्ञता के बीच संतुलन
स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी: समुद्री डिफेंस को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण अंडरवॉटर वॉरफेयर कंपोनेंट्स पर आयात निर्भरता कम करना
मुख्य शब्द: आत्मनिर्भर भारत · रक्षा स्वदेशीकरण · समुद्री सुरक्षा · तकनीकी हस्तांतरण · रणनीतिक साझेदारी
चर्चा में क्यों: कर्नाटक हाई कोर्ट ने श्रवथी वैली लायन मकाक सेंचुरी (Sharavathi Valley Lion Macaque Sanctuary) पर पड़ने वाले इसके प्रभाव की चिंताओं के कारण ₹10,000 करोड़ की श्रवथी पम्प्ड स्टोरेज हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट पर काम रोकने का अंतरिम आदेश जारी किया है।
यह परियोजना ₹10,000 करोड़ की एक पम्प्ड स्टोरेज हाइड्रोइलेक्ट्रिक (Pumped Storage Hydroelectric) पहल है, जो श्रवथी वैली लायन मकाक सेंचुरी और उसके इको-सेंसिटिव ज़ोन (Eco-sensitive zone) के भीतर स्थित है। कर्नाटक हाई कोर्ट ने स्टेट वाइल्डलाइफ बोर्ड और नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ से प्राप्त मंजूरियों की वैधता को चुनौती देने वाली एक याचिका के बाद निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यशरावती पंपड स्टोरेज हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत ₹10,000 करोड़ है।
स्थानयह प्रोजेक्ट कर्नाटक में शरवथी वैली लायन मकाक सेंचुरी (Sharavathi Valley Lion Macaque Sanctuary) के भीतर स्थित है।
संस्थानेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ (National Board for Wildlife) और स्टेट वाइल्डलाइफ बोर्ड प्रोजेक्ट की मंजूरी देने के लिए जिम्मेदार संस्थाएं हैं।
अधिनियम / विधेयकWildlife (Protection) Act संरक्षित अभयारण्यों (sanctuaries) के भीतर निर्माण पर लगने वाली पाबंदियों को नियंत्रित करता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों (eco-sensitive zones) में बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा बुनियादी ढांचे के विकास और जैव विविधता के संरक्षण के बीच उत्पन्न होने वाले द्वंद्व का विश्लेषण कीजिए।
रेगुलेटरी ओवरसाइट: वाइल्डलाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट के तहत 'इको-सेंसिटिव ज़ोन' की सीमाओं की व्याख्या में अस्पष्टता
विकास के ट्रेड-ऑफ: ग्रिड स्थिरता के लिए पंप्ड स्टोरेज हाइड्रो की तत्काल ज़रूरत और लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए हैबिटेट फ्रैगमेंटेशन के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: इको-सेंसिटिव ज़ोन · पंप स्टोरेज हाइड्रोइलेक्ट्रिसिटी · जैव विविधता संरक्षण · सतत विकास · रेगुलेटरी जांच
चर्चा में क्यों: परमाणु ऊर्जा विभाग ने घोषणा की है कि आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में थोरियम को यूरेनियम ईंधन में बदलने के लिए एक हाई-एनर्जी प्रोटॉन एक्सेलरेटर (High-energy proton accelerator) स्थापित किया जाएगा।
राजा रमन्ना सेंटर फॉर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी (RRCAT) परमाणु ऊर्जा के लिए थोरियम भंडार का उपयोग करने की परियोजना का नेतृत्व करेगा। इस सुविधा का उद्देश्य रिएक्टरों के लिए थोरियम को यूरेनियम ईंधन में बदलकर भारत के दीर्घकालिक परमाणु अनुसंधान रोडमैप को समर्थन देना है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
स्थानविशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश: हाई-एनर्जी प्रोटॉन एक्सेलेरेटर (high-energy proton accelerator) के लिए चुना गया स्थल।
संस्थाराजा रमन्ना सेंटर फॉर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी (RRCAT): इसकी स्थापना 1984 में डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी (Department of Atomic Energy) के तहत की गई थी।
विज्ञान-तकनीकप्रोटॉन एक्सेलेरेटर (Proton Accelerator): इसका उपयोग न्यूक्लियर रिएक्टर के लिए थोरियम को यूरेनियम फ्यूल में बदलने के लिए किया जाता है।
तथ्यRRCAT: यह पार्टिकल एक्सेलरेटर (particle accelerators) और लेजर टेक्नोलॉजी (laser technologies) में रिसर्च का नेतृत्व करता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत की ऊर्जा सुरक्षा में थोरियम-आधारित परमाणु ऊर्जा के महत्व और थोरियम-से-यूरेनियम रूपांतरण में आने वाली तकनीकी बाधाओं का विश्लेषण कीजिए।
रिसोर्स ऑप्टिमाइजेशन: न्यूक्लियर फ्यूल मिक्स में विविधता लाने के लिए भारत के विशाल थोरियम भंडार का इस्तेमाल
तकनीकी बाधा: हाई-एनर्जी प्रोटॉन एक्सेलेरेटर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए लॉन्ग-टर्म R&D ज़रूरतें
ऊर्जा सुरक्षा: घरेलू थोरियम कन्वर्जन के जरिए यूरेनियम आयात पर निर्भरता कम करना
मुख्य शब्द: न्यूक्लियर रोडमैप · थोरियम साइकिल · पार्टिकल एक्सीलरेटर · ऊर्जा सुरक्षा · RRCAT
चर्चा में क्यों: एक्सेस टू मेडिसिन फाउंडेशन (AMF) और वेलकॉम ट्रस्ट ने रिपोर्ट दी है कि पिछले पांच वर्षों में सुपरबग्स (superbugs) से लड़ने वाली नई दवाओं की पाइपलाइन में 35% की कमी आई है।
रिपोर्ट इस बात पर प्रकाश डालती है कि हालांकि ज़ोलिफ्लोडासिन (zoliflodacin) और गेपोटिडैसिन (gepotidacin) जैसी एंटीबायोटिक्स को हाल ही में मंजूरी मिली है, फिर भी दवा प्रतिरोध (drug resistance) के कारण 2050 तक प्रतिरोधी संक्रमण से होने वाली मौतों की संख्या दोगुनी हो सकती है। वर्तमान में GSK, 30 प्रोजेक्ट्स के साथ एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस R&D का नेतृत्व कर रहा है, जिसके साथ शियोनोगी (Shionogi), ओत्सुका (Otsuka) और फाइजर (Pfizer) द्वारा किए जा रहे निवेश भी शामिल हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यपिछले पांच वर्षों में सुपरबग्स (superbugs) से लड़ने वाली नई दवाओं की पाइपलाइन में 35% की कमी आई है।
विज्ञान-तकनीकZoliflodacin और gepotidacin हाल ही में सुपरबग्स (superbugs) से लड़ने के लिए स्वीकृत एंटीबायोटिक्स हैं।
तथ्यGSK, 30 प्रोजेक्ट्स के साथ एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (Antimicrobial Resistance) R&D का नेतृत्व कर रहा है।
तथ्यअनुमान है कि रेजिस्टेंट इन्फेक्शन (Resistant infections) से होने वाली मौतें 2050 तक संभावित रूप से दोगुनी हो सकती हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) के संदर्भ में फार्मास्युटिकल अनुसंधान एवं विकास (R&D) पाइपलाइन के समक्ष आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए और जीवन रक्षक एंटीबायोटिक दवाओं में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने हेतु आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए। चर्चा कीजिए।
मार्केट फेल्योर: क्रोनिक बीमारी की दवाओं के मुकाबले एंटीबायोटिक्स पर कम ROI से प्राइवेट R&D में ठहराव
ग्लोबल हेल्थ सिक्योरिटी: मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट पैथोजन्स से बढ़ती मौतें सार्वजनिक स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए खतरा
मुख्य शब्द: एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस · फार्मास्युटिकल R&D · सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट · मार्केट फेल्योर · सुपरबग्स
चर्चा में क्यों: काज़ुओ इशिगुरो सहित हजारों लेखकों ने AI कंपनियों द्वारा बिना अनुमति के कॉपीराइट सामग्री का उपयोग करने के विरोध में 'डोंट स्टील दिस बुक' (Don’t Steal This Book) नामक एक 'खाली' किताब प्रकाशित की है।
यह विरोध प्रदर्शन लंदन बुक फेयर में हुआ। प्रकाशकों की एक गैर-लाभकारी संस्था, पब्लिशर्स लाइसेंसिंग सर्विसेज (Publishers' Licensing Services), एक AI लाइसेंसिंग पहल शुरू कर रही है। ब्रिटिश सरकार तीन रेगुलेटरी विकल्पों (regulatory options) का मूल्यांकन कर रही है: यथास्थिति (status quo), अनिवार्य लाइसेंसिंग, या बिना ऑप्ट-आउट (opt-out) के उपयोग की अनुमति देना।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीकपब्लिशर्स लाइसेंसिंग सर्विसेज (Publishers' Licensing Services): एक नॉन-प्रॉफिट इंडस्ट्री बॉडी जो AI लाइसेंसिंग इनिशिएटिव लॉन्च कर रही है।
तथ्यUK सरकार AI और कॉपीराइट के लिए तीन रेगुलेटरी विकल्पों पर विचार कर रही है।
स्थानलंदन बुक फेयर: 'Don’t Steal This Book' विरोध प्रदर्शन का आयोजन स्थल।
मेन्स के लिए
प्रश्न: डिजिटल अर्थव्यवस्था में जनरेटिव एआई (Generative AI) प्रौद्योगिकियों की प्रगति और बौद्धिक संपदा अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी विवाद: फेयर यूज़ सिद्धांतों और AI मॉडल्स द्वारा कॉपीराइटेड डेटा के कमर्शियल इस्तेमाल के बीच तनाव
रेगुलेटरी आर्बिट्रेज: बिना सहमति के डेटा स्क्रैपिंग के जरिए AI कंपनियों द्वारा लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क को दरकिनार करने के जोखिम
आर्थिक विस्थापन: AI द्वारा संचालित कंटेंट जनरेशन से क्रिएटिव प्रोफेशनल्स की आजीविका खत्म होने का खतरा
मुख्य शब्द: बौद्धिक संपदा · जेनरेटिव AI · कॉपीराइट कानून · डेटा स्क्रैपिंग · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क
चर्चा में क्यों: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (IIA) चार प्रमुख खगोलीय सुविधाओं (astronomical facilities) के निर्माण और अपग्रेडेशन के लिए ₹3,500 करोड़ के प्रोजेक्ट हेतु कैबिनेट की मंजूरी मांग रहा है।
इस परियोजना में नेशनल लार्ज सोलर टेलिस्कोप (NLST), नेशनल लार्ज ऑप्टिकल इन्फ्रारेड टेलिस्कोप (NLOT), लद्दाख के हनले में अपग्रेड किया गया हिमालयन चंद्र टेलिस्कोप (uHCT) और कॉस्मोलॉजी एजुकेशन एंड रिसर्च ट्रेनिंग सेंटर (COSMOS 2) शामिल हैं। इन सुविधाओं के निर्माण के तीन से 13 वर्षों की अवधि में पूरा होने की उम्मीद है।
प्रीलिम्स बिंदु (5)
विज्ञान-तकनीकNLST: सूर्य के लिए भारत की अगली पीढ़ी की विंडो।
विज्ञान-तकनीकNLOT: भारत का पहला सेगमेंटेड मिरर लार्ज अपर्चर ऑप्टिकल इन्फ्रारेड ऑब्जर्वेटरी (segmented mirror large aperture optical infrared observatory)।
स्थानuHCT: यह लद्दाख के हानले में स्थित है।
तथ्यप्रोजेक्ट की लागत: ₹3,500 करोड़।
संस्थाIIA: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अंतरिक्ष विज्ञान और गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण में नेतृत्व की भारत की आकांक्षा के संदर्भ में, स्वदेशी बड़े पैमाने के खगोलीय बुनियादी ढांचे के विकास के महत्व पर चर्चा कीजिए।
तकनीकी संप्रभुता: हाई-रिज़ॉल्यूशन सोलर और इन्फ्रारेड डेटा के लिए अंतरराष्ट्रीय वेधशालाओं पर निर्भरता कम करना
ह्यूमन कैपिटल डेवलपमेंट: एडवांस कॉस्मोलॉजी रिसर्च के लिए स्पेशलाइज्ड वर्कफोर्स तैयार करने में COSMOS 2 की भूमिका
मुख्य शब्द: अंतरिक्ष विज्ञान · खगोलीय इंफ्रास्ट्रक्चर · तकनीकी संप्रभुता · डीप-स्पेस एक्सप्लोरेशन · स्वदेशी रिसर्च
चर्चा में क्यों: उत्तर प्रदेश सरकार ने 'प्रोजेक्ट गंगा' के तहत हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी का विस्तार करने के लिए वनओटीटी इंटरटेनमेंट लिमिटेड (हिंदुजा ग्रुप) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस परियोजना का लक्ष्य दो से तीन वर्षों के भीतर उत्तर प्रदेश के 20 लाख से अधिक घरों तक इंटरनेट की पहुंच प्रदान करना है। इसका उद्देश्य एक लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करना है और न्याय पंचायत स्तर पर 8,000 से 10,000 स्थानीय युवाओं को डिजिटल सेवा प्रदाता के रूप में प्रशिक्षित करने की योजना है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यप्रोजेक्ट Ganga का लक्ष्य उत्तर प्रदेश के 20 लाख से अधिक घरों को इंटरनेट एक्सेस प्रदान करना है।
तथ्ययह प्रोजेक्ट एक लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य रखता है।
तथ्यइस पहल के तहत न्याय पंचायत स्तर पर 8,000 से 10,000 स्थानीय युवाओं को डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर्स के रूप में प्रशिक्षित करने की योजना है।
स्थानयह प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश राज्य में लागू किया जा रहा है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च गति वाले ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी के विस्तार से डिजिटल विभाजन को पाटने और भारत में समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की क्षमता का विश्लेषण कीजिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: ग्रामीण इलाकों में लास्ट-माइल कनेक्टिविटी की कमी को दूर करना ताकि डिजिटल सेवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित हो सके
स्किल डेवलपमेंट: ग्रामीण युवाओं को डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर बनाना ताकि स्थानीय ई-गवर्नेंस और आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा मिल सके
जेंडर इनक्लूसिविटी: डिजिटल साक्षरता और सर्विस प्रोविजन में महिलाओं की भागीदारी को प्राथमिकता देकर जेंडर डिजिटल डिवाइड को दूर करना
मुख्य शब्द: डिजिटल डिवाइड · लास्ट-माइल कनेक्टिविटी · समावेशी विकास · ई-गवर्नेंस · डिजिटल साक्षरता
चर्चा में क्यों: BARC के शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला है कि रिएक्टर के डिजाइन में बदलाव की आवश्यकता और कम प्लूटोनियम उत्पादन के कारण HALEU-Thorium ईंधन भारत के तीन चरणों वाले परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए अनुपयुक्त हो सकता है।
'करेंट साइंस' (Current Science) में प्रकाशित यह अध्ययन संकेत देता है कि HALEU-थोरियम के उपयोग से रिफ्यूलिंग मशीनरी में घिसावट बढ़ सकती है। यह यह भी बताता है कि यह ईंधन प्राकृतिक यूरेनियम की तुलना में कम प्लूटोनियम पैदा करता है, जिससे भारत की परमाणु योजना के दूसरे चरण के लिए आर्थिक चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
विज्ञान-तकनीकHALEU-Thorium: एक न्यूक्लियर फ्यूल टाइप जिसे भारत के तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम (three-stage nuclear energy program) के लिए मूल्यांकन किया जा रहा है।
संस्थाभाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC): वह रिसर्च बॉडी जिसने HALEU-Thorium पर अध्ययन किया।
तथ्यHALEU-Thorium, नेचुरल यूरेनियम की तुलना में कम प्लूटोनियम पैदा करता है, जो न्यूक्लियर प्लान के दूसरे चरण की इकोनॉमिक वायबिलिटी (economic viability) को प्रभावित करता है।
पदNTPC Ltd. और Clean Core Thorium Energy: कंपनियाँ वर्तमान में HALEU-Thorium फ्यूल विकल्प का मूल्यांकन कर रही हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में थोरियम-आधारित ईंधन चक्रों की ओर संक्रमण से जुड़ी तकनीकी और आर्थिक चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
तकनीकी बाधा: रिएक्टर के बड़े डिज़ाइन बदलाव और रिफ्यूलिंग मशीनरी पर बढ़ते दबाव की ज़रूरत
आर्थिक बाधा: नेचुरल यूरेनियम की तुलना में HALEU-थोरियम से कम प्लूटोनियम यील्ड स्टेज-दो की व्यवहार्यता को प्रभावित कर रही है
मुख्य शब्द: तीन चरणों वाला परमाणु कार्यक्रम · थोरियम फ्यूल साइकिल · प्लूटोनियम उत्पादन · न्यूक्लियर रिएक्टर डिज़ाइन · ऊर्जा सुरक्षा
चर्चा में क्यों: SRM इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (SRMIST) और अनबॉन्ड लिमिटेड (Anabond Ltd.) ने सोलर सेल की मजबूती और दक्षता को बढ़ाने के लिए अगली पीढ़ी के सोलर सेल एनकैप्सुलेंट्स (encapsulants) के लिए एक टेक्नोलॉजी-ट्रांसफर समझौता किया है।
SRMIST के वैज्ञानिकों ने सोलर सेल के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए एक पॉलिमर एनकैप्सुलेंट (polymer encapsulant) विकसित किया है। Anabond Ltd. एक लाइसेंसिंग समझौते के तहत इसके उत्पादन को बड़े पैमाने पर बढ़ाएगा और इसकी व्यावसायिक व्यवहार्यता (commercial viability) का आकलन करेगा। इस समझौते में अग्रिम भुगतान और टर्नओवर से जुड़े रॉयल्टी (turnover-linked royalties) शामिल हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीकइस तकनीक में अगली पीढ़ी के सोलर सेल्स (solar cells) के लिए पॉलीमर एनकैप्सुलेंट्स (polymer encapsulants) का उपयोग किया जाता है।
तथ्यलाइसेंसिंग एग्रीमेंट में एक अपफ्रंट पेमेंट (upfront payment) और वार्षिक टर्नओवर से जुड़े रॉयल्टी अरेंजमेंट (royalty arrangement) शामिल हैं।
संस्थाSRMIST (SRM Institute of Science and Technology) इस encapsulant technology का डेवलपर है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: सौर सेल घटकों में स्वदेशी तकनीकी नवाचार किस प्रकार भारत के ऊर्जा सुरक्षा के लक्ष्य को प्राप्त करने और आयात निर्भरता को कम करने में योगदान दे सकते हैं, इस पर चर्चा कीजिए।
कमर्शियलाइजेशन गैप: सोलर मॉड्यूल के लिए लैब-स्केल पॉलिमर इनोवेशन को इंडस्ट्रियल-स्केल मैन्युफैक्चरिंग में बदलना
सप्लाई चेन रेज़िलिएंस: घरेलू सोलर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मज़बूत करने के लिए इम्पोर्टेड एनकैप्सुलेंट्स पर निर्भरता कम करना
मुख्य शब्द: तकनीकी हस्तांतरण · नवीकरणीय ऊर्जा · सोलर सेल एफिशिएंसी · स्वदेशी इनोवेशन · व्यावसायिक व्यवहार्यता
चर्चा में क्यों: AI कंपनी Anthropic ने US डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस (Department of Defense) के खिलाफ दो मुकदमों (lawsuits) में शिकायत दर्ज कराई है। कंपनी का आरोप है कि उसके 'सप्लाई चेन रिस्क' (supply chain risk) का वर्गीकरण उसके फर्स्ट अमेंडमेंट (First Amendment) अधिकारों का उल्लंघन करता है।
एन्थ्रोपिक (Anthropic) ने अमेरिकी रक्षा विभाग (Department of Defense) के खिलाफ दो मुकदमे दायर किए हैं, जो उसे 'सप्लाई चेन रिस्क' (supply chain risk) के रूप में नामित करने से संबंधित हैं। कंपनी का आरोप है कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा में AI मॉडल के उपयोग पर सरकार की मांगों को मानने से इनकार करने के बदले में लिया गया प्रतिशोध है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीकAnthropic: एक artificial intelligence फर्म जिसने US Department of Defense के खिलाफ मुकदमे दायर किए।
तथ्यअमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस (Department of Defense) ने Anthropic को 'सप्लाई चेन रिस्क' (supply chain risk) घोषित किया है।
पदयह मुकदमा आरोप लगाता है कि ट्रंप प्रशासन संरक्षित भाषण (protected speech) के लिए Anthropic को दंडित कर रहा है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: राष्ट्रीय सुरक्षा के उद्देश्यों के लिए निजी एआई (AI) विकास में सरकारी हस्तक्षेप के संवैधानिक और नैतिक निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
संवैधानिक टकराव: प्राइवेट फर्म्स के लिए फर्स्ट अमेंडमेंट सुरक्षा और नेशनल सिक्योरिटी मैंडेट के बीच संतुलन
रेगुलेटरी फ्रिक्शन: उभरती टेक्नोलॉजी में 'सप्लाई चेन रिस्क' के लिए कानूनी थ्रेशोल्ड का निर्धारण
मुख्य शब्द: पहला संशोधन · राष्ट्रीय सुरक्षा · सप्लाई चेन रिस्क · AI गवर्नेंस · रेगुलेटरी रिटालिएशन
चर्चा में क्यों: NASA ने घोषणा की है कि अंतरिक्ष यात्रियों को Artemis II और SpaceX Crew-12 जैसे आगामी मिशनों पर अपने व्यक्तिगत स्मार्टफोन ले जाने की अनुमति दी जाएगी। यह निर्णय पिछले 50 वर्षों से लागू रहे प्रतिबंध को खत्म करता है।
NASA अंतरिक्ष अभियानों को आधुनिक बनाने के लिए चंद्र मिशनों पर व्यक्तिगत स्मार्टफोन, जिनमें iPhones भी शामिल हैं, की अनुमति दे रहा है। NASA प्रशासक जेरेड इसाकमेन ने इस निर्णय पर जोर दिया है ताकि अंतरिक्ष यात्री अपने परिवार और जनता के साथ पल साझा कर सकें।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीकArtemis II: NASA द्वारा नियोजित एक लूनर फ्लाईबाई (lunar flyby) मिशन।
विज्ञान-तकनीकSpaceX Crew-12: अंतरिक्ष यात्रियों के परिवहन के लिए SpaceX और NASA का एक मिशन।
तथ्यNASA के स्पेस मिशनों पर स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध 50 साल तक रहा।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अंतरिक्ष अन्वेषण में उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स के एकीकरण के माध्यम से मानव मनोवैज्ञानिक कल्याण की आवश्यकता और विकिरण एवं विद्युत चुंबकीय हस्तक्षेप के तकनीकी जोखिमों के बीच संतुलन की प्रक्रिया का विश्लेषण कीजिए।
तकनीकी जोखिम: कंज्यूमर-ग्रेड हार्डवेयर के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेरेंस और रेडिएशन शील्डिंग को मैनेज करना
ह्यूमन फैक्टर: रियल-टाइम कम्युनिकेशन और सोशल कनेक्टिविटी के जरिए अंतरिक्ष यात्रियों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना
डेटा सुरक्षा: ऑर्बिटल एनवायरनमेंट में संभावित साइबर-वल्नरेबिलिटी के खिलाफ पर्सनल डिवाइस की सुरक्षा सुनिश्चित करना
मुख्य शब्द: अंतरिक्ष अन्वेषण · रेडिएशन शील्डिंग · इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेरेंस · स्पेस में ह्यूमन फैक्टर्स · तकनीकी एकीकरण
चर्चा में क्यों: केरल के सामान्य शिक्षा विभाग ने KITE के माध्यम से सरकारी स्कूलों में AI से जुड़े जोखिमों, स्क्रीन टाइम और छात्रों की गोपनीयता (Privacy) से संबंधित चिंताओं को दूर करने के लिए 'साइबर सेफ्टी प्रोटोकॉल 2026' जारी किया है।
यह प्रोटोकॉल AI जोखिम जागरूकता और जिम्मेदार डिजिटल नागरिकता पर केंद्रित 13 मुख्य उद्देश्यों की रूपरेखा तैयार करता है। इन दिशा-निर्देशों को लागू करने के लिए KITE (केरल इंफ्रास्ट्रक्चर एंड टेक्नोलॉजी फॉर एजुकेशन) प्रशिक्षण सत्र और साइबर सुरक्षा क्लीनिक प्रदान करेगा।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाKITE: केरल के जनरल एजुकेशन विभाग की टेक्नोलॉजी विंग जो इस प्रोटोकॉल के लिए जिम्मेदार है।
तथ्यCyber Safety Protocol 2026 में पब्लिक स्कूलों के लिए 13 मुख्य उद्देश्य (core objectives) शामिल हैं।
विज्ञान-तकनीकयह प्रोटोकॉल AI के बढ़ते उपयोग के संदर्भ में छात्र की प्राइवेसी (privacy) और स्क्रीन टाइम मैनेजमेंट (screen time management) को विशेष रूप से संबोधित करता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: प्राथमिक शिक्षा में विद्यार्थियों के डेटा की गोपनीयता और डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग को विनियमित करने हेतु संस्थागत ढाँचों की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।
डेटा सॉवरेन्टी: थर्ड-पार्टी AI मॉडल्स द्वारा छात्रों के पर्सनल डेटा के इस्तेमाल का जोखिम
शिक्षा पद्धति में बदलाव: स्क्रीन टाइम और संज्ञानात्मक विकास और क्रिटिकल थिंकिंग स्किल्स के बीच संतुलन
रेगुलेटरी गैप: AI-आधारित शैक्षिक टूल्स के लिए मानकीकृत राष्ट्रीय गाइडलाइन्स की कमी
मुख्य शब्द: डिजिटल नागरिकता · डेटा प्राइवेसी · AI गवर्नेंस · साइबर सुरक्षा · शिक्षाशास्त्रीय ढांचा
चर्चा में क्यों: NASA ने अपने मानव चंद्र लैंडिंग मिशन की रणनीति में बदलाव की घोषणा की है। बजट और समय-सीमा से जुड़ी चिंताओं को देखते हुए, आर्टेमिस IV (Artemis IV) मिशन को अब 2028 तक के लिए टाल दिया गया है।
NASA आर्टेमिस IV (Artemis IV) मिशन को 2028 तक के लिए आगे बढ़ा रहा है। निजी ठेकेदार लूनर आउटपोस्ट (Lunar Outpost) ने इस मिशन में अपना मैप रोवर (Mapp rover) भेजने की योजना बनाई थी, लेकिन एथेना लैंडर (Athena lander) के साथ तकनीकी बाधाओं के कारण इसे चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
विज्ञान-तकनीकआर्टेमिस IV (Artemis IV): NASA का एक मानव चंद्र लैंडिंग मिशन जिसे 2028 के लिए पुनर्निर्धारित (rescheduled) किया गया है।
विज्ञान-तकनीकLunar Outpost: एक प्राइवेट कॉन्ट्रैक्टर जो मून मिशन के लिए रोवर्स और टेक्नोलॉजी विकसित कर रहा है।
तथ्यMapp rover: आर्टेमिस IV (Artemis IV) मिशन के लिए एक लूनर रोवर (lunar rover)।
विज्ञान-तकनीकAthena lander: वह वाहन जो Mapp rover की चंद्र सतह पर तैनाती (deployment) से जुड़ा है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अंतरिक्ष अन्वेषण को आगे बढ़ाने में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के महत्व और जटिल चंद्र मिशनों की समय-सीमा के प्रबंधन में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
बजटीय बाधाएं: महत्वाकांक्षी चंद्र अन्वेषण लक्ष्यों और राजकोषीय सीमाओं व शेड्यूल मैनेजमेंट के बीच संतुलन
कॉन्ट्रैक्टुअल रिस्क: हाई-स्टेक स्पेस मिशन में प्राइवेट कॉन्ट्रैक्टर पर निर्भरता और तकनीकी विफलताओं का प्रबंधन
मुख्य शब्द: पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप · अंतरिक्ष अन्वेषण · लूनर मिशन · बजट की सीमाएं · तकनीकी रुकावटें
चर्चा में क्यों: टेक्सास यूनिवर्सिटी एट ऑस्टिन और टेक्सास A&M यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने कृत्रिम चंद्र मिट्टी (simulated lunar soil) में सफलतापूर्वक चने उगाए हैं। यह उपलब्धि आर्टेमिस (Artemis) प्रोग्राम के लिए खाद्य उत्पादन की एक व्यावहारिक पद्धति का सुझाव देती है।
Scientific Reports में प्रकाशित एक अध्ययन ने यह दर्शाया है कि चने की फसल चंद्रमा की मिट्टी (lunar regolith simulant) और जैविक खाद (organic compost) के मिश्रण में सफलतापूर्वक विकसित हुई। सिम्युलेटेड चंद्र मिट्टी में पोषक तत्वों के अवशोषण में सहायता के लिए अर्बस्कुलर माइकोराइज़ल कवक (arbuscular mycorrhizal fungi) का समावेश अत्यंत महत्वपूर्ण पाया गया।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
विज्ञान-तकनीकLunar regolith simulant: पौधों की वृद्धि का परीक्षण करने के लिए उपयोग की जाने वाली कृत्रिम चंद्रमा की मिट्टी (Simulated moon soil)।
विज्ञान-तकनीकArbuscular mycorrhizal fungi: इस स्टडी में चने (chickpea) के पोषक तत्वों के अधिग्रहण (nutrient acquisition) में सहायता के लिए उपयोग किए जाने वाले फंगी।
तथ्यArtemis प्रोग्राम: NASA का वह प्रोग्राम जिसे लंबी अवधि के लूनर मिशन्स (lunar missions) के संदर्भ में उल्लेखित किया गया है।
विज्ञान-तकनीकनियंत्रित कृषि पद्धतियां (Controlled agricultural practices): चंद्रमा पर पौधों के अस्तित्व के लिए स्थिर स्थितियां प्रदान करने हेतु ग्रीनहाउस (greenhouses) का उपयोग।
मेन्स के लिए
प्रश्न: दीर्घकालिक अंतरिक्ष अभियानों के लिए बाह्य-ग्रहीय कृषि (extraterrestrial agriculture) की स्थापना से जुड़ी तकनीकी और जैविक चुनौतियों तथा मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए इसके महत्व का विश्लेषण कीजिए।
पोषक तत्वों की कमी: रेगोलिथ खनिज की कमी को दूर करने के लिए ऑर्गेनिक कम्पोस्ट और माइकोराइज़ल फंगी की ज़रूरत
वायुमंडलीय बाधाएं: स्थिर तापमान और CO2 लेवल बनाए रखने के लिए प्रेशर वाले ग्रीनहाउस वातावरण की ज़रूरत
लॉजिस्टिकल ट्रेड-ऑफ: इन-सिटु खाद्य उत्पादन के फायदों के मुकाबले ऑर्गेनिक इनपुट्स के वजन को संतुलित करना
चर्चा में क्यों: अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) जाने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभंशु शुक्ला ने सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण (microgravity) में व्यक्तिगत स्वच्छता और जल पुनर्चक्रण प्रणालियों (water reclamation systems) के बारे में जानकारी साझा की।
ISS पर शावर की अनुपलब्धता के कारण अंतरिक्ष यात्री स्नान के लिए कीटाणुनाशक शैम्पू से युक्त वॉशक्लॉथ (washcloth) का उपयोग करते हैं। इस प्रक्रिया में उपयोग किए जाने वाले पानी का प्रबंधन और पुनर्चक्रण (recycling) स्टेशन के वॉटर रिकलेमेशन सिस्टम (water reclamation system) के माध्यम से किया जाता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीकISS: इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (International Space Station), लो अर्थ ऑर्बिट (low Earth orbit) में स्थित एक मॉड्यूलर स्पेस स्टेशन।
तथ्यशुभंशु शुक्ला इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) जाने वाले पहले भारतीय हैं।
विज्ञान-तकनीकISS पर स्वच्छता और लाइफ सपोर्ट (life support) के लिए पानी को रीसायकल करने हेतु वॉटर रिकलेमेशन सिस्टम (water reclamation systems) का उपयोग किया जाता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: संसाधन प्रबंधन और स्वच्छता के संदर्भ में, दीर्घकालिक अंतरिक्ष मिशनों में मानव जीवन को बनाए रखने की तकनीकी और तार्किक चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
रिसोर्स सर्कुलैरिटी: लंबे मिशन के लिए क्लोज्ड-लूप वॉटर रिकलेमेशन सिस्टम की ज़रूरत
बायोमेडिकल बाधाएं: माइक्रो-ग्रेविटी वातावरण में हाइजीन और माइक्रोबियल कंट्रोल का प्रबंधन
चर्चा में क्यों: पिक्सेल (Pixxel) ने एस्केप वेलोसिटी ग्रांट्स (Escape Velocity Grants) के साथ साझेदारी में 'शकुंतला ग्रांट्स' कार्यक्रम शुरू किया है। इसका उद्देश्य जलवायु लचीलेपन (Climate Resilience) और पर्यावरणीय मुद्दों पर शोध करने वाली महिला शोधकर्ताओं को माइक्रो-ग्रांट्स प्रदान करना है।
बेंगलुरु स्थित एक प्लैनेटरी इंटेलिजेंस कंपनी, पिक्सेल (Pixxel), ने इसरो (ISRO) द्वारा मान्यता प्राप्त आधिकारिक स्पेस ट्यूटर, 'सारे तारे ज़मीन पर ट्रस्ट' के साथ साझेदारी की है। इस पहल में सरकारी स्कूलों में लड़कियों के लिए STEM लर्निंग के विस्तार हेतु 'स्पार्क ऑफ क्यूरियोसिटी' कार्यक्रम शामिल है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीकPixxel: एक बेंगलुरु स्थित प्लैनेटरी इंटेलिजेंस (planetary intelligence) कंपनी।
संस्थासाए तारे ज़मीन पर ट्रस्ट: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा मान्यता प्राप्त एक आधिकारिक स्पेस ट्यूटर (Space Tutor)।
तथ्यशकुंतला ग्रांट्स (Shakuntala Grants): एक प्रोग्राम जो क्लाइमेट रेजिलिएंस (climate resilience) और पर्यावरणीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने वाली महिला शोधकर्ताओं को माइक्रो-ग्रांट्स प्रदान करता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अंतरिक्ष और जलवायु अनुसंधान क्षेत्रों में लैंगिक समानता प्राप्त करने के लिए भारत में बालिकाओं के बीच STEM शिक्षा को बढ़ावा देने के महत्व पर चर्चा कीजिए।
जेंडर गैप: हाई-टेक प्लैनेटरी इंटेलिजेंस और क्लाइमेट रिसर्च क्षेत्रों में महिलाओं की कम भागीदारी
संस्थागत तालमेल: सरकारी स्कूलों में STEM शिक्षा की कमी को दूर करने के लिए प्राइवेट-पब्लिक पार्टनरशिप का इस्तेमाल
मुख्य शब्द: STEM शिक्षा · क्लाइमेट रेजिलिएंस · लैंगिक समानता · स्पेस टेक्नोलॉजी · माइक्रो-ग्रांट्स
चर्चा में क्यों: ISRO और ESA ने पृथ्वी अवलोकन (Earth Observation) मिशनों पर सहयोग करने के लिए 4 मार्च को एक संयुक्त समझौता किया। इस समझौते का मुख्य ध्यान वनस्पति जीव विज्ञान (Vegetation Biology) अनुसंधान और सेंसर कैलिब्रेशन (Sensor Calibration) पर केंद्रित है।
ISRO और ESA के बीच यह समझौता 1978 से चली आ रही साझेदारी की निरंतरता को दर्शाता है। इस नए समझौते के मुख्य फोकस क्षेत्रों में पृथ्वी अवलोकन (Earth Observation) के लिए वनस्पति जीव विज्ञान अनुसंधान और सेंसर कैलिब्रेशन शामिल हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीकISRO और ESA ने Earth Observation मिशन के लिए 4 मार्च, 2026 को एक संयुक्त समझौता (joint agreement) किया।
तथ्यISRO और ESA के बीच सहयोग 1978 से जारी है।
विज्ञान-तकनीकसमझौते के मुख्य फोकस एरिया में वेजिटेशन बायोलॉजी रिसर्च और सेंसर कैलिब्रेशन (sensor calibration) शामिल हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: जलवायु निगरानी और पर्यावरणीय अनुसंधान के लिए पृथ्वी अवलोकन क्षमताओं को बढ़ाने में अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसियों के सहयोग के महत्व पर चर्चा कीजिए।
डेटा सिनर्जी: हाई-रिज़ॉल्यूशन वेजिटेशन मॉनिटरिंग के लिए साझा सैटेलाइट इमेजरी
तकनीकी मानकीकरण: अलग-अलग स्पेस एजेंसियों के बीच सेंसर कैलिब्रेशन प्रोटोकॉल को एक समान बनाना
रिसोर्स ऑप्टिमाइजेशन: व्यक्तिगत एजेंसी लागत कम करने के लिए अर्थ ऑब्जर्वेशन इंफ्रास्ट्रक्चर में संयुक्त निवेश
मुख्य शब्द: पृथ्वी अवलोकन · अंतरिक्ष सहयोग · सेंसर कैलिब्रेशन · वनस्पति विज्ञान · सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग
चर्चा में क्यों: प्रोफेसर प्रोकार दासगुप्ता ने UK की पहली लॉन्ग-डिस्टेंस रोबोटिक सर्जरी की, जिसमें उन्होंने लंदन से रिमोटली ऑपरेट करते हुए जिब्राल्टर में एक मरीज के प्रोस्टेट को निकाला।
लंदन स्थित यूरोलॉजिकल सर्जन प्रोफेसर प्रोकार दासगुप्ता ने 'द लंदन क्लिनिक' से यह प्रक्रिया संपन्न की। यह सर्जरी जिब्राल्टर में स्थित एक 62 वर्षीय कैंसर मरीज पर की गई, जिसकी दूरी 2,400 किलोमीटर थी।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीकइस प्रक्रिया में रोबोटिक उपकरणों का उपयोग किया गया, जिससे 2,400 किलोमीटर की दूरी से रिमोट सर्जरी (Remote Surgery) संभव हो सकी।
पदप्रोफेसर प्रोकार दासगुप्ता लंदन स्थित एक यूरोलॉजिकल सर्जन (urological surgeon) हैं।
तथ्ययह सर्जरी जिब्राल्टर (Gibraltar) में एक 62 वर्षीय कैंसर मरीज पर की गई थी।
मेन्स के लिए
प्रश्न: रोबोटिक सर्जरी और रिमोट हेल्थकेयर तकनीक में हो रही प्रगति किस प्रकार दूरस्थ क्षेत्रों या संघर्ष क्षेत्रों में रोगियों के लिए विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता के अंतराल को कम कर सकती है, चर्चा कीजिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: रियल-टाइम सर्जिकल प्रिसिजन सुनिश्चित करने के लिए हाई-बैंडविड्थ, लो-लेटेंसी 5G/6G नेटवर्क की ज़रूरत
रेगुलेटरी बाधाएं: सीमा पार रिमोट सर्जिकल इंटरवेंशन के लिए कानूनी लायबिलिटी और मेडिकल मालप्रैक्टिस फ्रेमवर्क
एक्विटी ऑफ एक्सेस: विशेषज्ञ देखभाल को विकेंद्रीकृत करने और शहरी टर्शियरी हेल्थकेयर सेंटर्स पर बोझ कम करने की क्षमता
मुख्य शब्द: टेलीमेडिसिन · रोबोटिक सर्जरी · स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच · डिजिटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर · रिमोट सर्जरी
चर्चा में क्यों: INCOIS, HWRF मॉडलिंग तकनीकों का उपयोग करके वर्षा, आंतरिक गंभीर मौसम और तटीय खतरों के पूर्वानुमान को बेहतर बनाने के लिए IOLA कप्ल्ड मेसोस्केल प्रेडिक्शन सिस्टम (IOLA Coupled Mesoscale Prediction System) का परीक्षण कर रहा है।
इंडियन नेशनल सेंटर फॉर ओशन इंफॉर्मेशन सर्विसेज (INCOIS) 'IOLA कप्ल्ड मेसोस्केल प्रेडिक्शन सिस्टम' का परीक्षण कर रहा है। इसमें 'हुरिकेन वेदर रिसर्च एंड फोरकास्ट सिस्टम' (HWRF) मॉडलिंग को शामिल किया गया है और उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाले समुद्री पूर्वानुमान के लिए सैटेलाइट डेटा और 'आर्गो फ्लोट्स' (Argo floats) का उपयोग किया जाता है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाINCOIS: इंडियन नेशनल सेंटर फॉर ओशन इंफॉर्मेशन सर्विसेज।
विज्ञान-तकनीकIOLA Coupled Mesoscale Prediction System: तटीय खतरों के पूर्वानुमान के लिए HWRF मॉडलिंग का उपयोग करता है।
तथ्यArgo floats: हाई-रिज़ॉल्यूशन ओशन मॉडल्स (ocean models) के लिए डेटा प्रदान करने हेतु उपयोग किए जाने वाले ऑफशोर प्लेटफॉर्म।
स्थानयह सिस्टम लक्षद्वीप और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह सहित भारत की तटरेखा (coastline) के विश्लेषण का समर्थन करेगा।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के संवेदनशील तटीय क्षेत्रों में आपदा जोखिम न्यूनीकरण को उन्नत मेसोस्केल भविष्यवाणी प्रणालियों और उपग्रह-आधारित डेटा एकीकरण के माध्यम से किस प्रकार सुदृढ़ किया जा सकता है, इसका विश्लेषण कीजिए।
डेटा इंटीग्रेशन: रियल-टाइम एटमॉस्फेरिक फोर्सिंग के लिए आर्गो फ्लोट्स और सैटेलाइट डेटा के बीच तालमेल
सटीक पूर्वानुमान: तटीय खतरों के लिए क्षेत्रीय से लोकेशन-स्पेसिफिक हाई-रिज़ॉल्यूशन मॉडलिंग की ओर बदलाव
मुख्य शब्द: आपदा जोखिम न्यूनीकरण · मेसोस्केल प्रेडिक्शन · तटीय खतरे का पूर्वानुमान · एटमॉस्फेरिक फ़ोर्सिंग · ओशनिक मॉडलिंग
चर्चा में क्यों: केरल सरकार ने घोषणा की है कि ब्रॉडबैंड पहुंच का विस्तार करने के लिए तिरुवनंतपुरम शहर में केरल फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क (KFON) ने 10,000 कनेक्शन पूरे कर लिए हैं।
KFON राज्य सरकार की एक पहल है जो ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवाएँ प्रदान करती है। तिरुवनंतपुरम में, इसने 6,094 घरेलू कनेक्शन, 867 कम आय वाले परिवारों के कनेक्शन और 2,769 सरकारी संस्थानों के कनेक्शन पूरे कर लिए हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यKFON ने तिरुवनंतपुरम शहर में 10,000 कनेक्शन का आंकड़ा पार कर लिया है।
तथ्यKFON शहर में 6,094 घरेलू कनेक्शन और 867 कम आय वाले परिवारों के कनेक्शन प्रदान करता है।
तथ्यKFON तिरुवनंतपुरम में 2,769 सरकारी संस्थानों को सेवा प्रदान करता है।
तथ्यउपयोगकर्ता 'Ente KFON' मोबाइल एप्लीकेशन या KFON वेबसाइट के माध्यम से कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकते हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: यह विश्लेषण कीजिए कि केएफओएन (KFON) जैसी राज्य-संचालित डिजिटल बुनियादी ढांचा परियोजनाएं किस प्रकार डिजिटल विभाजन को कम करने और ग्रामीण एवं कम आय वाले शहरी क्षेत्रों में समावेशी विकास को सुगम बनाने में सहायक हो सकती हैं। चर्चा कीजिए।
लास्ट-माइल कनेक्टिविटी: डिजिटल सेवाओं तक समान पहुँच सुनिश्चित करने के लिए कम आय वाले घरों में बुनियादी ढांचे की कमियों को दूर करना
पब्लिक-प्राइवेट सिनर्जी: सरकारी संस्थानों और जन कल्याण के लिए किफायती हाई-स्पीड इंटरनेट प्रदान करने हेतु राज्य-नेतृत्व वाले नेटवर्क का लाभ उठाना
मुख्य शब्द: डिजिटल डिवाइड · लास्ट-माइल कनेक्टिविटी · समावेशी विकास · डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर · ई-गवर्नेंस
चर्चा में क्यों: CSIR-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (IICT) ने भारत के नए फाइटोफार्मास्युटिकल (phytopharmaceutical) नियमों पर एक कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस सम्मेलन का उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित दवाओं में बदलना है।
सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) नए फाइटोफार्मास्युटिकल (phytopharmaceutical) नियमों की निगरानी कर रहा है। CSIR स्वास्थ्य सेवा की चुनौतियों से निपटने के लिए फाइटोफार्मास्युटिकल अनुसंधान में मिशन-मोड कार्यक्रमों पर काम कर रहा है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाCDSCO: सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (Central Drugs Standard Control Organization) भारत में फार्मास्यूटिकल्स के लिए राष्ट्रीय नियामक संस्था है।
संस्थाCSIR-IICT: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (Indian Institute of Chemical Technology) एक CSIR लैब है जो केमिकल टेक्नोलॉजी और रिसर्च पर केंद्रित है।
तथ्यफाइटोफार्मास्युटिकल्स (Phytopharmaceuticals): पौधों या पौधों पर आधारित उत्पादों से प्राप्त दवाएं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत की औषधि निर्माण क्षमताओं को बढ़ाने के लिए पारंपरिक औषधीय ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक सत्यापन के साथ एकीकृत करने के महत्व पर चर्चा कीजिए।
रेगुलेटरी फ्रेमवर्क: ग्लोबल मार्केट एक्सेस के लिए फाइटोफार्मास्युटिकल सुरक्षा और प्रभावकारिता प्रोटोकॉल को स्टैंडर्डाइज करना
ज्ञान का संरक्षण: पारंपरिक ज्ञान के कमर्शियलाइजेशन और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी सुरक्षा के बीच संतुलन
R&D इंफ्रास्ट्रक्चर: लैब खोज से इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन तक जाने के लिए मिशन-मोड रिसर्च को बढ़ाना
मुख्य शब्द: फाइटोफार्मास्युटिकल्स · ट्रांसलेशनल रिसर्च · पारंपरिक ज्ञान · ड्रग डिस्कवरी · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क
चर्चा में क्यों: चीन ने परमाणु ऊर्जा की दक्षता बढ़ाने के लिए ग्वांगडोंग प्रांत में दुनिया का पहला मेगावाट-स्तरीय 'एक्सेलेरेटर-ड्रिवन सबक्रिटिकल सिस्टम' (Accelerator-driven subcritical system - ADS) प्रोटोटाइप लॉन्च करने की योजना बनाई है।
ADS सिस्टम को चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज और राज्य के परमाणु उद्यमों द्वारा डिजाइन किया गया है। इसका उद्देश्य पारंपरिक रिएक्टरों की तुलना में यूरेनियम को 100 गुना अधिक कुशलता से जलाना है। अनुमान है कि यह परमाणु कचरे के जीवनकाल को वर्तमान स्तर के एक हजारवें हिस्से से भी कम कर देगा।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
विज्ञान-तकनीकADS: Accelerator-driven subcritical system, जिसे पारंपरिक रिएक्टर्स (reactors) की तुलना में अधिक कुशलता से यूरेनियम जलाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
तथ्यADS की दक्षता: उम्मीद है कि यह पारंपरिक रिएक्टर्स (reactors) की तुलना में 100 गुना अधिक कुशलता से यूरेनियम का उपयोग करेगा।
तथ्यवेस्ट रिडक्शन (Waste reduction): इसका लक्ष्य न्यूक्लियर वेस्ट (nuclear waste) के जीवनकाल को वर्तमान स्तर के एक हजारवें हिस्से से भी कम करने का है।
स्थानगुआंगडोंग प्रांत: मेगावाट-लेवल के प्रोटोटाइप (prototype) के लिए नियोजित स्थान।
मेन्स के लिए
प्रश्न: वैश्विक हरित ऊर्जा संक्रमण के संदर्भ में, परमाणु अपशिष्ट प्रबंधन और ऊर्जा सुरक्षा की दोहरी चुनौतियों को हल करने में त्वरक-चालित उप-क्रांतिक प्रणालियाँ (ADS) किस प्रकार सहायक हो सकती हैं, इसका विश्लेषण कीजिए।
वेस्ट मिटिगेशन: हाई-एफिशिएंसी यूरेनियम बर्निंग के जरिए रेडियोएक्टिव वेस्ट की लाइफस्पैन में भारी कमी
तकनीकी छलांग: बेहतर सुरक्षा के लिए पारंपरिक फिशन से एक्सीलरेटर-ड्रिवन सबक्रिटिकल सिस्टम की ओर बदलाव
भू-राजनीतिक बदलाव: एडवांस्ड न्यूक्लियर रिएक्टर प्रोटोटाइप में चीन का नेतृत्व वैश्विक ऊर्जा डायनेमिक्स को प्रभावित कर रहा है
मुख्य शब्द: न्यूक्लियर वेस्ट मैनेजमेंट · सबक्रिटिकल सिस्टम · ऊर्जा सुरक्षा · ग्रीन एनर्जी ट्रांज़िशन · परमाणु दक्षता
चर्चा में क्यों: भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) ने वेरी लो अर्थ ऑर्बिट (VLEO) ऑपरेशंस के लिए स्वदेशी सैटेलाइट सिस्टम और पेलोड विकसित करने के लिए बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप बेलैट्रिक्स एयरोस्पेस (Bellatrix Aerospace) के साथ एक समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding) पर हस्ताक्षर किए हैं।
BEL और Bellatrix Aerospace ने एक साझेदारी की है, जिसका उद्देश्य BEL की रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स विशेषज्ञता को Bellatrix के प्रोपल्शन (propulsion) और सबसिस्टम नवाचारों के साथ जोड़ना है। यह सहयोग विशेष रूप से VLEO ऑपरेशंस के लिए सैटेलाइट प्लेटफॉर्म के डिजाइन, विकास और निर्माण पर केंद्रित है।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
संस्थाBEL: भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (Bharat Electronics Limited) रक्षा मंत्रालय के अधीन एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (Public Sector Undertaking) है।
तथ्यBellatrix Aerospace बेंगलुरु स्थित एक स्पेस स्टार्टअप है जो प्रोपल्शन (propulsion) और सबसिस्टम्स (subsystems) में विशेषज्ञता रखता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अंतरिक्ष क्षेत्र में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) किस प्रकार स्वदेशी उपग्रह निर्माण और VLEO (अति-निम्न पृथ्वी कक्षा) तकनीक के क्षेत्र में एक वैश्विक केंद्र बनने के भारत के लक्ष्य को गति दे सकती है, इसका विश्लेषण कीजिए।
तकनीकी छलांग: VLEO के लिए डिफेंस-ग्रेड इलेक्ट्रॉनिक्स और प्राइवेट-सेक्टर प्रोपल्शन इनोवेशन का एकीकरण
स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी: स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग और पेलोड डेवलपमेंट के जरिए विदेशी सैटेलाइट प्लेटफॉर्म्स पर निर्भरता कम करना
चर्चा में क्यों: मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन (MAHE) ने भारत के स्वदेशी क्वांटम हार्डवेयर इकोसिस्टम और संप्रभु क्षमताओं (Sovereign Capabilities) को विकसित करने के लिए बेंगलुरु में क्वांटम-हब@MAHE (Q-Hub) लॉन्च किया है।
Q-Hub एक एकीकृत प्लेटफॉर्म है जो डिजाइन-टू-डिप्लॉयमेंट (design-to-deployment), स्टार्टअप इनक्यूबेशन और वर्कफोर्स डेवलपमेंट पर केंद्रित है। इसने टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने और दिसंबर 2026 तक 100 क्वांटम इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने के लिए QuantrolOx, Bluefors, QBLOX, ConScience और C-DAC के साथ साझेदारी की है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
विज्ञान-तकनीकQ-Hub: भारत के क्वांटम हार्डवेयर इकोसिस्टम (ecosystem) को आगे बढ़ाने के लिए MAHE द्वारा लॉन्च किया गया एक प्लेटफॉर्म।
तथ्यQ-Hub का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक 100 क्वांटम इंजीनियर्स को प्रशिक्षित करना है।
संस्थाC-DAC: क्वांटम हार्डवेयर डेवलपमेंट के लिए Q-Hub इनिशिएटिव में पार्टनर्स में से एक।
स्थानबेंगलुरु: Q-Hub की मेजबानी करने वाले MAHE कैंपस का स्थान।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत की तकनीकी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में स्वदेशी क्वांटम हार्डवेयर के विकास के महत्व का विश्लेषण कीजिए।
संप्रभु क्षमता: महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के लिए विदेशी निर्मित क्वांटम कंपोनेंट्स पर निर्भरता कम करना
वर्कफोर्स बॉटलनेक: घरेलू बाजार में स्पेशलाइज्ड क्वांटम इंजीनियर्स की भारी कमी को दूर करना
स्टार्टअप इकोसिस्टम: एकेडमिक रिसर्च और कमर्शियल क्वांटम हार्डवेयर डिप्लॉयमेंट के बीच की दूरी को कम करना
चर्चा में क्यों: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) ने स्ट्रोक से प्रभावित मरीजों में मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बहाल करने के लिए न्यूरोमॉर्फिक हार्डवेयर और AI एल्गोरिदम के मेल से 'ब्रेन को-प्रोसेसर' विकसित करने की एक 'मूनशॉट प्रोजेक्ट' (Moonshot Project) शुरू की है।
इस परियोजना को प्रतीक्षा ट्रस्ट (Pratiksha Trust) द्वारा वित्तपोषित किया जाता है, जिसकी स्थापना सेनापति ‘क्रिस’ गोपालकृष्ण और सुधा गोपालकृष्ण द्वारा की गई है। इसका उद्देश्य ऐसे इम्प्लांटेबल (implantable) और नॉन-इनवेसिव (non-invasive) को-प्रोसेसर विकसित करना है, जो मस्तिष्क की गतिविधियों को डिकोड करते हैं और न्यूरल स्टिमुलेशन या न्यूरोफीडबैक के माध्यम से संकेतों को पुन: कोड (re-encode) करते हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
विज्ञान-तकनीकन्यूरोमॉर्फिक हार्डवेयर (Neuromorphic hardware): ऐसा हार्डवेयर जिसे मानव मस्तिष्क की न्यूरल संरचना (neural structure) की नकल करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
विज्ञान-तकनीकक्लोज्ड-लूप डिवाइस (Closed-loop device): एक ऐसा सिस्टम जो ब्रेन एक्टिविटी को डिकोड करता है, AI के जरिए उसे प्रोसेस करता है और सिग्नल्स को वापस ब्रेन में री-एनकोड करता है।
तथ्ययह प्रोजेक्ट विशेष रूप से middle cerebral artery (MCA) स्ट्रोक के बाद क्रोनिक मल्टी-डोमेन डेफिसिट (chronic multi-domain deficits) वाले व्यक्तियों को लक्षित करता है।
पदप्रतीक्षा ट्रस्ट (Pratiksha Trust): यह सेनापति ‘क्रिस’ गोपालकृष्ण और सुधा गोपालकृष्ण द्वारा स्थापित एक ट्रस्ट है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में स्ट्रोक से प्रभावित व्यक्तियों के लिए न्यूरो-पुनर्वास (neuro-rehabilitation) के क्षेत्र में न्यूरोमॉर्फिक कंप्यूटिंग और एआई-संचालित न्यूरल इंटरफेस की क्रांतिकारी क्षमता का विश्लेषण कीजिए।
तकनीकी एकीकरण: रियल-टाइम न्यूरल डिकोडिंग के लिए न्यूरोमॉर्फिक हार्डवेयर और AI एल्गोरिदम के बीच तालमेल
क्लिनिकल एप्लीकेशन: क्लोज्ड-लूप न्यूरोफीडबैक के जरिए MCA स्ट्रोक सर्वाइवर्स में मल्टी-डोमेन डेफिसिट्स को दूर करना
एक्सेसिबिलिटी गैप: स्ट्रोक रिहैबिलिटेशन के लिए हाई-कॉस्ट मूनशॉट R&D और स्केलेबल हेल्थकेयर डिलीवरी के बीच संतुलन
चर्चा में क्यों: लियू चाओ के नेतृत्व वाली एक चीनी रिसर्च टीम ने लेजर लिंक्स (laser links) का उपयोग करके तीन घंटे से अधिक समय तक 1 Gbps डेटा ट्रांसमिशन बनाए रखकर हाई-ऑर्बिट सैटेलाइट कम्युनिकेशन में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
इस प्रयोग ने तीन घंटे से अधिक समय तक 1 Gbps की गति से निरंतर डेटा ट्रांसमिशन (Data Transmission) का प्रदर्शन किया। इस तकनीक का उद्देश्य चंद्रमा या मंगल की कक्षा में स्थित अंतरिक्ष यानों के साथ रियल-टाइम कम्युनिकेशन (Real-time Communication) के लिए वायुमंडलीय अस्थिरता और सिग्नल देरी की बाधाओं को दूर करना है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीकहाई-ऑर्बिट सैटेलाइट कम्युनिकेशन में एटमॉस्फेरिक इंस्टेबिलिटी (atmospheric instability) और सिग्नल डिले की समस्याओं को दूर करने के लिए लेजर लिंक्स (Laser links) का उपयोग किया जाता है।
तथ्यचीनी रिसर्च टीम ने तीन घंटे से अधिक समय तक 1 Gbps की डेटा ट्रांसमिशन स्पीड बनाए रखी।
विज्ञान-तकनीकचंद्रमा या मंगल की कक्षा में चक्कर लगाने वाले स्पेसक्राफ्ट के साथ रियल-टाइम कम्युनिकेशन के लिए लेजर-आधारित कम्युनिकेशन (Laser-based communication) विकसित किया जा रहा है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: लेजर-आधारित उपग्रह संचार प्रौद्योगिकी में हो रही प्रगति किस प्रकार गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण (deep-space exploration) और वैश्विक दूरसंचार बुनियादी ढांचे के दायरे को पुनर्परिभाषित कर सकती है, इसका विश्लेषण कीजिए।
तकनीकी छलांग: इंटरप्लैनेटरी मिशन के लिए हाई-बैंडविड्थ और लो-लेटेंसी डेटा ट्रांसफर के लिए वायुमंडलीय रुकावटों को दूर करना
रणनीतिक प्रभाव: स्पेस-आधारित लेज़र कम्युनिकेशन में चीन की प्रगति ग्लोबल स्पेस-टेक लीडरशिप और ऑर्बिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को प्रभावित कर रही है
चर्चा में क्यों: केरल यूनिवर्सिटी ऑफ फिशरीज एंड ओशन स्टडीज (Kufos) के शोधकर्ता केरल के तट पर स्थित कोरल कॉलोनियों (coral colonies) की उत्तरजीविता दर में सुधार के लिए लैंड-बेस्ड कोरल नर्सरी (land-based coral nurseries) के साथ प्रयोग कर रहे हैं।
अनुसंधान छात्र अरुण अलोयस के नेतृत्व में इस परियोजना के अंतर्गत विझिनजम के समुद्री चट्टानों (reefs) से मूंगे (corals) एकत्र किए जाएंगे और उन्हें नियंत्रित भूमि-आधारित वातावरण में विकसित किया जाएगा। इस पहल को केरल वन विभाग का समर्थन प्राप्त है, जिसका उद्देश्य मूंगों को उनके प्राकृतिक आवास में वापस लाने से पहले उनकी विकास दर को बढ़ाना है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानविझिंजम (Vizhinjam): वह स्थान जहाँ नर्सरी प्रोजेक्ट के लिए कोरल (corals) इकट्ठा करने हेतु अंडरवॉटर*(Self-correction: The prompt asks to translate the specific source text provided in the second part of the prompt, while following the rules. The source text is: "Vizhinjam: Location of underwater reefs where corals are collected for the nursery project.")*
संस्थाकेरल यूनिवर्सिटी ऑफ फिशरीज एंड ओशन स्टडीज (Kufos): वह शैक्षणिक संस्थान जो कोरल नर्सरी रिसर्च (coral nursery research) का संचालन कर रहा है।
तथ्यलैंड-आधारित नर्सरी (Land-based nurseries): री-इंट्रोडक्शन से पहले सर्वाइवल रेट को बेहतर बनाने के लिए नियंत्रित वातावरण में कोरल उगाने की एक विधि।
मेन्स के लिए
प्रश्न: समुद्री जैव विविधता के संरक्षण और कोरल ब्लीचिंग (मूंगा विरंजन) के प्रभावों को कम करने में भूमि-आधारित नर्सरियों जैसी 'एक्स-सिटू' (ex-situ) संरक्षण विधियों के महत्व की चर्चा कीजिए।
इकोलॉजिकल रेज़िलिएंस: बढ़ते समुद्री तापमान और ओशन एसिडिफिकेशन के खिलाफ कोरल सर्वाइवल रेट को बढ़ाना
लॉजिस्टिक बाधाएं: ज़मीनी नर्सरी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाम इन-सिटु रीफ रिस्टोरेशन की लागत में संतुलन
बायोडायवर्सिटी मॉनिटरिंग: कोरल रीइंट्रोडक्शन के लिए स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल और लॉन्ग-टर्म कॉलोनी हेल्थ ट्रैकिंग स्थापित करना
मुख्य शब्द: एक्स-सिटु कंजर्वेशन · समुद्री जैव विविधता · कोरल रेस्टोरेशन · पारिस्थितिक लचीलापन · आवास पुनर्वास
चर्चा में क्यों: केंद्र सरकार ने 11,682 ग्राम पंचायतों में डिजिटल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए संशोधित भारतनेट कार्यक्रम (Amended BharatNet Programme) के तहत छत्तीसगढ़ को ₹3,942 करोड़ की मंजूरी दी है।
छत्तीसगढ़ के लिए यह फंडिंग संशोधित भारतनेट कार्यक्रम (Amended BharatNet Programme) के तहत आवंटित की गई है। इस परियोजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में ई-गवर्नेंस और ऑनलाइन शिक्षा में सुधार के लिए 'रिंग टोपोलॉजी-आधारित' (ring topology-based) नेटवर्क स्थापित करना है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यकेंद्र ने छत्तीसगढ़ में डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए ₹3,942 करोड़ स्वीकृत किए।
तथ्ययह प्रोजेक्ट छत्तीसगढ़ की 11,682 ग्राम पंचायतों को कवर करता है।
विज्ञान-तकनीकनेटवर्क को 'रिंग टोपोलॉजी-आधारित' (ring topology-based) आर्किटेक्चर का उपयोग करके स्थापित किया जाएगा।
योजनाफंडिंग Amended BharatNet Programme के तहत प्रदान की जाती है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: ग्रामीण भारत में उच्च गति वाले डिजिटल बुनियादी ढांचे का विस्तार शिक्षा और शासन तक पहुंच में शहरी-ग्रामीण अंतर को पाटने में किस प्रकार सहायक हो सकता है, इसका विश्लेषण कीजिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर की बाधा: भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण इलाकों में रिंग टोपोलॉजी नेटवर्क को बनाए रखने की भारी लागत
डिजिटल साक्षरता की कमी: ई-गवर्नेंस सेवाओं का प्रभावी उपयोग के लिए कम्युनिटी-लेवल ट्रेनिंग की ज़रूरत
सेवा वितरण: पंचायत स्तर पर रियल-टाइम शिकायत निवारण और पारदर्शी सब्सिडी वितरण की संभावना
मुख्य शब्द: डिजिटल इंडिया · ई-गवर्नेंस · ग्रामीण कनेक्टिविटी · भारतनेट · डिजिटल डिवाइड
चर्चा में क्यों: असम के उद्यमियों ने मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystems) पर आक्रामक प्रजातियों के प्रभाव से निपटने के लिए 'कुम्भी कागज' (Kumbhi Kagaz) शुरू किया है, जिसके तहत जलकुंभी (water hyacinth) से स्टेशनरी बनाई जाएगी।
इस पहल की शुरुआत 2022 में अनिकेत धर और रूपंकर भट्टाचार्जी द्वारा की गई थी। कंपनी, कुम्भी कागज (Kumbhi Kagaz), मीठे पानी की झीलों के पास रहने वाले समुदायों के लिए वैकल्पिक आजीविका प्रदान करने हेतु जलकुंभी (water hyacinth) का संग्रहण करती है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
पर्यावरणवॉटर हायसिंथ (Water hyacinth) एक इनवेसिव प्लांट स्पीशीज (invasive plant species) है जो असम में फ्रेशवॉटर इकोसिस्टम (freshwater ecosystems) को प्रभावित करती है।
तथ्यकुम्भी कागज़ (Kumbhi Kagaz) ने 2022 में वॉटर हायसिंथ (water hyacinth) की कटाई शुरू की।
स्थानयह पहल भारत के असम में स्थित है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में आक्रामक प्रजातियों (invasive species) को व्यावसायिक उत्पादों में परिवर्तित करना पारिस्थितिक बहाली और ग्रामीण आजीविका सृजन के लिए एक सतत मॉडल के रूप में किस प्रकार कार्य कर सकता है, चर्चा कीजिए।
आर्थिक व्यवहार्यता: मैनुअल हार्वेस्टिंग की लागत और इंडस्ट्रियल-स्केल पेपर प्रोडक्शन के बीच संतुलन
पारिस्थितिक बहाली: आक्रामक जलीय वनस्पतियों के यांत्रिक निष्कासन बनाम जैविक नियंत्रण की प्रभावशीलता
आजीविका विविधीकरण: स्थानीय समुदायों को झील पर निर्भर गतिविधियों से वैल्यू-ऐडेड मैन्युफैक्चरिंग की ओर ले जाना
चर्चा में क्यों: भारत सरकार ने डैसोल्ट एविएशन (Dassault Aviation) से 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने की मंजूरी दी है, जिससे सोर्स कोड एक्सेस (Source code access) के संबंध में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की सीमाओं पर बहस शुरू हो गई है।
यह सौदा डैसोल्ट एविएशन (Dassault Aviation) से 114 राफेल जेट्स के लिए लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये का है। हालांकि फ्रांस ने तकनीक हस्तांतरण (technology transfer) के लिए प्रतिबद्धता जताई है, लेकिन भारत को इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और रडार सिस्टम के महत्वपूर्ण सोर्स कोड (source codes) तक पहुंच प्राप्त करने में कुछ प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्य114 राफेल (Rafale) जेट्स के लिए प्रोक्योरमेंट डील की वैल्यू लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये है।
पदDassault Aviation, Rafale फाइटर जेट का फ्रांसीसी निर्माता है।
विज्ञान-तकनीकसोर्स कोड (Source code) की पाबंदियां सॉफ्टवेयर को कस्टमाइज़ करने और विमान में सेंसर्स को इंटीग्रेट करने की भारत की क्षमता को सीमित करती हैं।
तथ्यटाटा एडवांस्ड सिस्टम्स (Tata Advanced Systems) को विमान में डोमेस्टिक कंटेंट (domestic content) बढ़ाने के लिए पहचाना गया पार्टनर बनाया गया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: 'मेक इन इंडिया' पहल और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौतों के बावजूद, रक्षा खरीद में 'रणनीतिक स्वायत्तता' प्राप्त करने में भारत के समक्ष आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
तकनीकी निर्भरता: इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और रडार सिस्टम के सोर्स कोड तक सीमित पहुंच सॉफ्टवेयर कस्टमाइज़ेशन को रोकती है
प्रोडक्शन बॉटलनेक: सच्ची आत्मनिर्भरता के लिए असेंबली-हैवी प्रोडक्शन से स्वदेशी डिज़ाइन ओनरशिप की ओर बदलाव ज़रूरी है
रणनीतिक विविधीकरण: फ्रांस, रूस, इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप में संतुलन बनाना ज़रूरी
मुख्य शब्द: रणनीतिक स्वायत्तता · तकनीकी हस्तांतरण · सोर्स कोड एक्सेस · मेक इन इंडिया · रक्षा खरीद · स्वदेशी एकीकरण
चर्चा में क्यों: एक अंतरराष्ट्रीय शोध टीम ने असम के एक हाथ से खोदे गए कुएं में छोटी और दृष्टिहीन मछली की एक नई प्रजाति और जीनस, गिटचक नाकाना (Gitchak nakana), की खोज की है।
यह मछली लोच (loach) परिवार से संबंधित है और इसकी मुख्य विशेषता त्वचा में पिगमेंट (pigment) की पूर्ण कमी और एक खोपड़ी की छत (skull roof) है। इसकी खोज जर्मनी, भारत और स्विट्जरलैंड के शोधकर्ताओं सहित एक टीम द्वारा की गई थी।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
पर्यावरणगिचक नकाना (Gitchak nakana): असम में खोजी गई एक नई अंधे और छोटी मछली की प्रजाति।
तथ्ययह मछली लोच (loach) परिवार के भीतर एक नए जीनस (genus) से संबंधित है।
स्थानखोज का स्थान: असम, भारत में एक हाथ से खोदा गया कुआँ।
मेन्स के लिए
प्रश्न: पूर्वोत्तर भारत में भूजल जैव विविधता के महत्व और दुर्लभ जलीय प्रजातियों को अवैध व्यापार से बचाने के लिए आवश्यक उपायों पर चर्चा कीजिए।
बायोडायवर्सिटी का नुकसान: एक्वेरियम ट्रेड के लिए अवैध कलेक्शन से स्थानिक प्रजातियों पर खतरा
रिसर्च गैप: पूर्वोत्तर भारत के अनोखे भूगर्भीय क्षेत्रों में ग्राउंडवाटर इकोसिस्टम की सीमित खोज
मुख्य शब्द: स्थानिक प्रजातियां · भूजल जैव विविधता · जलीय पारिस्थितिकी · संरक्षण जीवविज्ञान
चर्चा में क्यों: नेट्सकोप थ्रेट लैब्स (Netskope Threat Labs) ने एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें बताया गया है कि व्यक्तिगत AI अकाउंट और क्लाउड एप्लिकेशन के उपयोग के कारण हेल्थकेयर सेक्टर में 89% GenAI से संबंधित डेटा पॉलिसी उल्लंघन (Data Policy Violations) होते हैं।
Netskope Threat Labs की रिपोर्ट दर्शाती है कि स्वास्थ्य सेवा संगठनों (healthcare organizations) को मरीजों के संवेदनशील डेटा लीक होने का अत्यधिक जोखिम है। यह रिपोर्ट कार्य-संबंधित कार्यों के लिए व्यक्तिगत GenAI खातों और व्यक्तिगत क्लाउड एप्लिकेशन (Google Drive, Gmail, OneDrive) के उपयोग को प्राथमिक जोखिम कारकों के रूप में पहचानती है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यGenAI के उपयोग से संबंधित सभी डेटा पॉलिसी उल्लंघनों में से 89% हेल्थकेयर सेक्टर में होते हैं।
विज्ञान-तकनीकNetskope Threat Labs ने Google Drive, Gmail और OneDrive जैसे पर्सनल क्लाउड एप्लिकेशंस को वर्क-रिलेटेड टास्क के लिए इस्तेमाल होने वाले टूल्स के रूप में पहचाना है, जो सिक्योरिटी रिस्क पैदा करते हैं।
विज्ञान-तकनीकयह रिपोर्ट GenAI डेटा मूवमेंट पर पूर्ण विजिबिलिटी और कंट्रोल प्रदान करने के लिए कंपनी-अनुमोदित एप्लिकेशंस (company-approved applications) की आवश्यकता पर जोर देती है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में जनरेटिव एआई (Generative AI) के एकीकरण से उत्पन्न होने वाली साइबर सुरक्षा चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए और रोगी के डेटा की गोपनीयता की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए। चर्चा कीजिए।
डेटा संप्रभुता: संस्थागत निगरानी के बिना मरीज की जानकारी का थर्ड-पार्टी जेनएआई सर्वर्स पर जाने का जोखिम
शैडो आईटी: प्रोफेशनल हेल्थकेयर कार्यों के लिए कर्मचारियों द्वारा पर्सनल क्लाउड अकाउंट के इस्तेमाल की निगरानी में चुनौतियां
रेगुलेटरी गैप: हेल्थकेयर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में जेनएआई के इस्तेमाल के लिए स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल की ज़रूरत
मुख्य शब्द: डेटा प्राइवेसी · जेनरेटिव AI · साइबर सिक्योरिटी · शैडो आईटी · डेटा लीकेज · स्वास्थ्य सेवा शासन
चर्चा में क्यों: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मार्च से मई तक संभावित हीटवेव (heatwave) की स्थिति के दौरान स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को कम करने के लिए एक सार्वजनिक एडवाइजरी जारी की है।
IMD की एडवाइजरी मार्च से मई तक की अवधि को कवर करती है। यह अत्यधिक तापमान के दौरान हाइड्रेटेड रहने, हल्के कपड़े पहनने और भारी शारीरिक गतिविधियों से बचने जैसे विशिष्ट व्यवहारिक बदलावों की सिफारिश करती है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाIMD: इंडिया मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट (India Meteorological Department) वह एजेंसी है जो हीटवेव एडवाइजरी जारी करती है।
तथ्यहीटवेव अवधि: मार्च से मई के ग्रीष्म महीनों के दौरान होने की उम्मीद है।
तथ्यहाइड्रेशन सलाह: प्यास न लगने पर भी पानी पिएं और अल्कोहल के सेवन को सीमित करें।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में बढ़ती लू (heatwave) की आवृत्ति के सार्वजनिक स्वास्थ्य निहितार्थों की चर्चा कीजिए और प्रभावी सामुदायिक-स्तरीय हीट एक्शन प्लान (Heat Action Plans) के लिए आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: अर्बन हीट आइलैंड्स में सुलभ कूलिंग सेंटर और छायादार सार्वजनिक स्थानों की कमी
डेटा-आधारित प्रतिक्रिया: संवेदनशील आउटडोर वर्कर्स तक पहुँचने के लिए लोकल हीट-हेल्थ अर्ली वार्निंग सिस्टम की ज़रूरत
मुख्य शब्द: लू(Note: In the context of UPSC and Hindi newspapers, "Heatwave" is commonly referred to as "लू" or "लू की लहर") · सार्वजनिक स्वास्थ्य · अर्ली वार्निंग सिस्टम · क्लाइमेट एडैप्टेशन · शमन
चर्चा में क्यों: ओपनएआई (OpenAI) ने अमेरिकी युद्ध विभाग (DoW) के साथ अपने समझौते में संशोधन किया है। यह कदम तब उठाया गया जब सीईओ सैम ऑल्टमैन ने स्वीकार किया कि यह सौदा 'लापरवाह' था और इसमें घरेलू निगरानी की सीमाओं के संबंध में स्पष्ट संवाद की कमी थी।
सैन्य AI के उपयोग से जुड़ी नैतिक चिंताओं पर उपयोगकर्ताओं और कर्मचारियों की प्रतिक्रिया के बाद, OpenAI ने अमेरिकी युद्ध विभाग (Department of War) के साथ अपने अनुबंध में संशोधन किया है। इसी तरह की चिंताओं के कारण अन्य अमेरिकी सरकारी एजेंसियों ने Anthropic के AI उत्पादों का उपयोग बंद कर दिया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
विज्ञान-तकनीकOpenAI: एक AI कंपनी जिसने सर्विलांस (surveillance) चिंताओं के कारण US Department of War (DoW) के साथ अपने समझौते में संशोधन किया।
विज्ञान-तकनीकएंथ्रोपिक (Anthropic): एक AI कंपनी जिसके प्रोडक्ट्स को एथिकल चिंताओं के कारण कई US सरकारी एजेंसियों द्वारा बंद कर दिया गया था।
पदसैम ऑल्टमैन: OpenAI के CEO जिन्होंने स्वीकार किया कि DoW डील जल्दबाजी में की गई थी और इसमें स्पष्ट कम्युनिकेशन (communication) की कमी थी।
मेन्स के लिए
प्रश्न: सैन्य और घरेलू निगरानी तंत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के एकीकरण के नैतिक निहितार्थों और विनियामक चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
एथिकल फ्रिक्शन: तेज़ AI डिप्लॉयमेंट और घरेलू सर्विलांस के खिलाफ मानवाधिकारों की सुरक्षा के बीच टकराव
पारदर्शिता की कमी: AI की सीमाओं पर स्पष्ट बातचीत न होने से जनता और कर्मचारियों में भारी विरोध
रेगुलेटरी वैक्यूम: रक्षा विभागों को टेक्नोलॉजी देने वाली प्राइवेट AI कंपनियों पर स्टैंडर्डाइज्ड ओवरसाइट की ज़रूरत
मुख्य शब्द: नैतिक AI · घरेलू निगरानी · एल्गोरिद्मिक जवाबदेही · सैन्य तकनीक · पारदर्शिता
चर्चा में क्यों: UIDAI ने UDISE+ एप्लिकेशन के साथ एकीकृत स्कूल-आधारित अभियानों के माध्यम से 7 से 15 वर्ष की आयु के 1.2 करोड़ बच्चों के लिए अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट का कार्य पूरा कर लिया है।
इस पहल को यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (UDISE+) के साथ तकनीकी एकीकरण के बाद लागू किया गया था।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाUIDAI: आधार बायोमेट्रिक अपडेट के लिए जिम्मेदार संस्था।
तथ्यस्कूल अपडेट ड्राइव्स में उपयोग की जाने वाली मशीनों की संख्या: 4,000।
तथ्यअक्टूबर तक बच्चों के लिए Aadhaar बायोमेट्रिक अपडेट मुफ्त (Free of cost) रहेंगे।
संस्थाUDISE+: स्कूल अपडेट इनिशिएटिव (school update initiative) के लिए UIDAI के साथ इंटीग्रेटेड एप्लीकेशन।
मेन्स के लिए
प्रश्न: सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं के समावेशी और कुशल वितरण को सुनिश्चित करने के लिए UDISE+ जैसे शैक्षिक प्रबंधन प्रणालियों के साथ आधार बायोमेट्रिक डेटा को एकीकृत करने के महत्व पर चर्चा कीजिए।
डेटा प्राइवेसी: बच्चों के बायोमेट्रिक डेटा की सुरक्षा और सटीक पहचान सत्यापन की ज़रूरत के बीच संतुलन
डिजिटल डिवाइड: ग्रामीण और दूरदराज के स्कूलों में UDISE+ इंटीग्रेशन के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना
मुख्य शब्द: डिजिटल पहचान · डेटा इंटीग्रेशन · समाज कल्याण वितरण · बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन · ई-गवर्नेंस
चर्चा में क्यों: तेलंगाना के मुख्य सचिव ने घोषणा की है कि जनगणना-2027 (Census-2027) भारत की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें फील्ड डेटा संग्रह के लिए एक समर्पित मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग किया जाएगा।
तेलंगाना सरकार 11 मई से हाउस लिस्टिंग ऑपरेशंस (HLO) शुरू करेगी, जिसके लिए स्व-गणना (self-enumeration) की प्रक्रिया 15 दिन पहले शुरू हो जाएगी। इस पहल के तहत व्यापक भौगोलिक कवरेज सुनिश्चित करने के लिए फील्ड डेटा संग्रह हेतु एक समर्पित मोबाइल ऐप का उपयोग किया जाएगा।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यCensus-2027 को भारत की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना (fully-digital census) के रूप में नामित किया गया है।
तथ्यतेलंगाना में House Listing Operations (HLO) 11 मई से शुरू होने वाले हैं।
तथ्यजनगणना के लिए सेल्फ-एनुमरेशन (Self-enumeration) 15 दिन पहले HLO से शुरू होने के लिए निर्धारित है।
पदके. रामकृष्ण राव तेलंगाना के चीफ सेक्रेटरी हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: विविध डिजिटल साक्षरता स्तर वाले देश में पूर्णतः डिजिटल जनगणना की ओर संक्रमण से जुड़ी चुनौतियों और अवसरों का विश्लेषण कीजिए।
डेटा इंटीग्रिटी: मोबाइल-आधारित कलेक्शन फ्रेमवर्क में अनधिकृत डेटा एक्सेस या हेरफेर के जोखिम
डिजिटल डिवाइड: खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में आबादी के कम प्रतिनिधित्व की संभावना
इंफ्रास्ट्रक्चर की बाधा: दूरदराज के भौगोलिक क्षेत्रों में हाई-स्पीड डेटा सिंक्रोनाइज़ेशन की ज़रूरत
मुख्य शब्द: डिजिटल इंडिया · डेटा प्राइवेसी · डेमोग्राफिक मैपिंग · तकनीकी साक्षरता · ई-गवर्नेंस