515 आर्मी बेस वर्कशॉप ने स्वदेशी ड्रोन निर्माण और सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए नॉटिकल विंग्स एयरोस्पेस
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चर्चा में क्यों
515 आर्मी बेस वर्कशॉप ने स्वदेशी ड्रोन निर्माण और सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए नॉटिकल विंग्स एयरोस्पेस, यानेंद्रिया प्राइवेट लिमिटेड और NFSU के साथ MoUs पर हस्ताक्षर किए।
पृष्ठभूमि
515 आर्मी बेस वर्कशॉप, भारतीय सेना की आठ बेस वर्कशॉप्स में से एक है। इसने प्रोपल्शन सिस्टम्स (propulsion systems) के लिए नॉटिकल विंग्स एयरोस्पेस, AI-केंद्रित डीप-टेक के लिए यानेंद्रिय प्राइवेट लिमिटेड और सुरक्षा खतरे के फ्रेमवर्क (security threat frameworks) के लिए नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) के साथ साझेदारी की है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्था515 आर्मी बेस वर्कशॉप: भारतीय सेना के अंतर्गत आने वाली आठ वर्कशॉप्स में से एक।
- विज्ञान-तकनीकनॉटिकल विंग्स एयरोस्पेस (Nautical Wings Aerospace): बेंगलुरु स्थित एक स्टार्टअप जो एडवांस्ड ड्रोन प्रोपल्शन सिस्टम्स (drone propulsion systems) में विशेषज्ञता रखता है।
- विज्ञान-तकनीकयानेंद्रिया प्राइवेट लिमिटेड: AI-केंद्रित deep-tech स्टार्टअप।
- संस्थानेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU): ड्रोन से संबंधित सुरक्षा खतरों के विश्लेषणात्मक फ्रेमवर्क (analytical frameworks) के लिए पार्टनरशिप।
मेन्स के लिए
प्रश्न: रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु स्वदेशी ड्रोन तकनीक के विकास में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) को बढ़ावा देने के महत्व पर चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
- R&D की बाधा: स्टार्टअप इनोवेशन और मिलिट्री-ग्रेड रिलायबिलिटी स्टैंडर्ड्स के बीच की दूरी को कम करना
- सिक्योरिटी-टेक नेक्सस: ड्रोन आधारित बदलते एसिमेट्रिक खतरों से निपटने के लिए फॉरेंसिक फ्रेमवर्क विकसित करना
- सप्लाई चेन रेजिलिएंस: ड्रोन प्रोपल्शन और AI कंपोनेंट्स पर आयात निर्भरता कम करना
मुख्य शब्द: आत्मनिर्भर भारत · पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप · असिमेट्रिक वॉरफेयर · डीप-टेक · स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर और नोट्स
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