यूपीएससी सिविल सेवा GS3 (अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा) के अर्थव्यवस्था भाग से जुड़ी हर ख़बर, परीक्षा के नज़रिए से: चर्चा में क्यों, पृष्ठभूमि, प्रीलिम्स के तथ्य, अभ्यास प्रश्न और मेन्स प्रश्न। अब तक 2,306 नोट्स, रोज़ अपडेट।
पाठ्यक्रम के विषय: बुनियादी ढांचा (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे) (511) · उद्योग, निवेश एवं MSME (471) · मौद्रिक नीति, RBI एवं बैंकिंग (298) · पूंजी बाज़ार एवं SEBI (298) · विकास, महंगाई एवं वृहद आर्थिक संकेतक (278) · राजकोषीय नीति, बजट एवं कर (GST) (189) · रोज़गार एवं समावेशी विकास (142) · बाहरी क्षेत्र, व्यापार एवं FDI (119)
चर्चा में क्यों: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भारत के वित्तीय प्रदर्शन और आर्थिक रुझानों का विवरण देने के लिए संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश कर रही हैं।
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग द्वारा तैयार किया गया है। यह 31 मार्च, 2025 को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष को कवर करता है। इसके बाद मुख्य आर्थिक सलाहकार वी.ए. अननता नागेश्वरन द्वारा एक प्रेस ब्रीफिंग आयोजित की जाएगी।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाइकोनॉमिक सर्वे (Economic Survey) की तैयारी वित्त मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स (Department of Economic Affairs) द्वारा की जाती है।
पदवी.ए. अनंता नागेश्वरन चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर (Chief Economic Adviser) के रूप में कार्यरत हैं।
तथ्यइकोनॉमिक सर्वे 2025-26 में 31 मार्च, 2025 को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष को कवर किया गया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण के एक उपकरण के रूप में आर्थिक सर्वेक्षण के महत्व और केंद्रीय बजट को आकार देने में इसकी भूमिका पर चर्चा कीजिए।
पॉलिसी सिंक्रोनाइज़ेशन: यूनियन बजट में राजकोषीय लक्ष्यों के साथ इकोनॉमिक सर्वे के मैक्रोइकोनॉमिक प्रोजेक्शन्स को जोड़ना
डेटा-आधारित गवर्नेंस: विकास की संरचनात्मक बाधाओं को दूर करने के लिए डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स के विश्लेषण का उपयोग
पारदर्शिता: आर्थिक रुझान और वित्तीय प्रदर्शन की संसदीय प्रस्तुति के माध्यम से सार्वजनिक जवाबदेही
मुख्य शब्द: सबूतों पर आधारित नीति · मैक्रोइकोनॉमिक इंडिकेटर्स · राजकोषीय प्रदर्शन · पॉलिसी फ्रेमवर्क · आर्थिक नियोजन
चर्चा में क्यों: केरल के वित्त मंत्री के.एन. बालगोपाल ने 2026-27 का राज्य बजट पेश किया, जिसमें सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए महत्वपूर्ण आवंटन और फ्रंटलाइन वर्कर्स (frontline workers) के लिए बढ़े हुए मानदेय (honorariums) को शामिल किया गया है।
वित्त मंत्री के.एन. बालगोपाल ने विधानसभा में वर्ष 2026-27 के लिए केरल राज्य का बजट पेश किया। इसमें सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए ₹14,500 करोड़ का विशेष आवंटन शामिल है। साथ ही, इसमें ASHA और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय (Honorarium) में वृद्धि की गई है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्य₹14,500 करोड़: केरल सरकार द्वारा 2026-27 के बजट में सोशल सिक्योरिटी पेंशन (Social Security Pensions) के लिए आवंटित की गई राशि।
पदके.एन. बालगोपाल: केरल के फाइनेंस मिनिस्टर।
तथ्यASHA और आंगनवाड़ी वर्कर्स: 2026-27 के केरल स्टेट बजट में बढ़े हुए मानदेय (honorarium) के लाभार्थी।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में समावेशी विकास की प्राप्ति और समाज के संवेदनशील वर्गों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए राज्य के बजट में सामाजिक सुरक्षा व्यय के महत्व पर चर्चा कीजिए।
राजकोषीय संघवाद: राजकोषीय घाटा लक्ष्यों के साथ राज्य-स्तरीय सामाजिक कल्याण खर्चों का संतुलन
ह्यूमन कैपिटल इन्वेस्टमेंट: प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा और पोषण वितरण की प्रभावशीलता पर मानदेय वृद्धि का असर
मुख्य शब्द: राजकोषीय नीति · सामाजिक सुरक्षा · समावेशी विकास · मानव पूंजी · सार्वजनिक व्यय
चर्चा में क्यों: मजदूर संघों ने कर्नाटक के वेतन नियमों के ड्राफ्ट (Draft Code on Wages Rules) की आलोचना की है। उनका कहना है कि ये नियम केंद्र के ढांचे की नकल करते हैं और अनौपचारिक श्रमिकों, महिलाओं और घरेलू कामगारों की सुरक्षा करने में विफल रहते हैं।
इन मसौदा नियमों का उद्देश्य न्यूनतम मजदूरी निर्धारित करना और सभी राज्यों में इसका अनुपालन सुनिश्चित करना है। यूनियनों का आरोप है कि इन नियमों में फ्लोर वेज (floor wage) निर्धारण और वार्षिक महंगाई भत्ता (Dearness Allowance) संशोधन के लिए किसी स्पष्ट कार्यप्रणाली (methodology) का अभाव है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यकर्नाटक के ड्राफ्ट Code on Wages Rules केंद्र सरकार के फ्रेमवर्क को दर्शाते हैं।
तथ्यड्राफ्ट कोड के दायरे से अनौपचारिक श्रमिकों (informal workers), महिलाओं और घरेलू श्रमिकों को बाहर रखा गया है।
तथ्यइन नियमों का उद्देश्य न्यूनतम मजदूरी (minimum wages) स्थापित करना और सभी राज्यों में इसका अनुपालन सुनिश्चित करना है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के विकसित होते श्रम परिदृश्य में अनौपचारिक क्षेत्र और घरेलू श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी सुरक्षा का विस्तार करने में आने वाली चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
संरचनात्मक बहिष्कार: घरेलू और इनफॉर्मल वर्कर्स के लिए कवरेज की कमी से दो स्तरों वाला लेबर मार्केट बनता है
पद्धतिगत अस्पष्टता: न्यूनतम वेतन निर्धारण और महंगाई भत्ता संशोधन के स्पष्ट तंत्र का अभाव
एन्फोर्समेंट गैप: ड्राफ्ट नियमों में कमजोर एन्फोर्समेंट मैकेनिज्म के कारण वेतन कम होने की संभावना
मुख्य शब्द: न्यूनतम वेतन · अनौपचारिक अर्थव्यवस्था · लेबर लेजिस्लेशन · मजदूरी की न्यूनतम सीमा · महंगाई भत्ता
चर्चा में क्यों: विंग्स इंडिया 2026 (Wings India 2026) में एयरलाइन प्रमुखों और निर्माताओं ने लागत के दबाव से निपटने और भारत के एविएशन फ्लीट (aviation fleet) के विस्तार में सहायता के लिए सरकार से संरचनात्मक सुधार और नीतिगत पुनर्गठन (policy recalibration) की मांग की।
एयरबस, इंडिगो, एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस और अकासा एयर के प्रतिनिधियों ने इन चर्चाओं में भाग लिया। इस संवाद का मुख्य केंद्र मानव पूंजी विकास (Human Capital Development), वित्तपोषण तंत्र (Financing Mechanisms) और टियर 2 और टियर 3 शहरों में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पर केंद्रित रहा।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यWings India 2026: विमानन उद्योग (aviation industry) के लीडर्स के लिए संरचनात्मक सुधारों (structural reforms) और लागत युक्तिकरण (cost rationalization) पर चर्चा करने के लिए एक प्लेटफॉर्म।
पदसिमरन सिंह तिवाना: स्टार एयर (Star Air) की CEO, जिन्होंने रीजनल कनेक्टिविटी (regional connectivity) की क्षमता पर जोर दिया।
तथ्यमुख्य स्टेकहोल्डर्स (Stakeholders) में शामिल हैं: Airbus (निर्माता), IndiGo, Air India, Air India Express और Akasa Air (कैरियर्स)।
मेन्स के लिए
प्रश्न: क्षेत्रीय संपर्क और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता के चालक के रूप में भारत के विमानन क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए आवश्यक संरचनात्मक और नीतिगत सुधारों का विश्लेषण कीजिए।
कॉस्ट-स्ट्रक्चर की बाधा: भारी ऑपरेशनल खर्च और फाइनेंसिंग की मुश्किलें घरेलू एयरलाइंस के विस्तार को सीमित कर रही हैं
रेगुलेटरी पैरिटी: अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के बीच भारतीय एयरलाइन्स के वैश्विक महत्वाकांक्षाओं को समर्थन देने के लिए लेवल प्लेइंग फील्ड की ज़रूरत
ह्यूमन कैपिटल डेफिसिट: तेज़ी से बढ़ते बेड़े को सपोर्ट देने के लिए कुशल एविएशन कर्मियों की कमी
मुख्य शब्द: संरचनात्मक सुधार · क्षेत्रीय कनेक्टिविटी · लागत का युक्तिकरण · मानव पूंजी विकास · पॉलिसी रीकैलिब्रेशन
चर्चा में क्यों: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के एक अध्ययन में बताया गया है कि वेतन, पेंशन और सब्सिडी पर तेलंगाना के बढ़ते खर्च के कारण राज्य की विकास संबंधी खर्च करने की क्षमता प्रभावित हो रही है।
RBI के अध्ययन के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के लिए तेलंगाना पर वेतन, पारिश्रमिक और सब्सिडी पर होने वाला खर्च ₹63,000 करोड़ से अधिक होने का अनुमान है। बजट अनुमानों में केवल सब्सिडी पर होने वाला खर्च ₹21,347 करोड़ तक पहुंच गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यतेलंगाना में वेतन, सैलरी और सब्सिडी पर अनुमानित खर्च: ₹63,000 करोड़ से अधिक।
तथ्यतेलंगाना के 2024-25 के बजट अनुमानों (Budget Estimates) में सब्सिडी पर खर्च: ₹21,347 करोड़।
संस्थाभारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने राज्य के व्यय पैटर्न (expenditure patterns) पर अध्ययन किया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: पेंशन और सब्सिडी जैसे अनिवार्य व्यय तथा बुनियादी ढांचे और विकास के लिए पूंजीगत निवेश के बीच संतुलन बनाए रखने में राज्य सरकारों के समक्ष आने वाली राजकोषीय चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
फ़िस्कल स्पेस की कमी: वेतन और पेंशन पर होने वाला भारी आवर्ती खर्च बुनियादी ढाँचे के प्रोजेक्ट्स के लिए फंड कम कर रहा है
सब्सिडी की स्थिरता: तत्काल सामाजिक कल्याण की ज़रूरतों और दीर्घकालिक राजकोषीय घाटा लक्ष्यों और ऋण-से-GSDP अनुपात के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: राजकोषीय संघवाद · पूंजीगत व्यय · बार-बार होने वाला खर्च · राजकोषीय घाटा · विकास संबंधी खर्च
चर्चा में क्यों: इकोनॉमिक रिव्यू (Economic Review) की रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार बाधाओं और बायो-सिक्योरिटी (biosecurity) चिंताओं के कारण वित्त वर्ष 2024-25 में केरल के समुद्री उत्पादों के निर्यात में लगातार गिरावट दर्ज की गई है।
केरल के समुद्री उत्पादों के निर्यात की मात्रा 1.96 लाख MT से घटकर 1.79 लाख MT रह गई है। इसके साथ ही, निर्यात का मूल्य ₹7,231.8 करोड़ से घटकर ₹6,941.36 करोड़ हो गया है। इस गिरावट का मुख्य कारण टैरिफ/नॉन-टैरिफ बाधाएं और भारत से जंगली तरीके से पकड़ी गई झींगों (wild-caught shrimps) पर लगाए गए प्रतिबंध हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यकेरल के समुद्री उत्पादों (marine products) के निर्यात की मात्रा: 2024-25 में 1.79 लाख MT।
तथ्यकेरल के समुद्री उत्पादों (marine products) के निर्यात का मूल्य: 2024-25 में ₹6,941.36 करोड़।
तथ्यकेरल के मुख्य निर्यात वाले कमोडिटी: फ्रोजन श्रिम्प और मछली।
तथ्यनिर्यात में गिरावट का कारण: बायोसिक्योरिटी (Biosecurity) संबंधी चिंताएं और जंगली तरीके से पकड़ी गई झींगियों (shrimps) पर प्रतिबंध।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अंतरराष्ट्रीय जैव-सुरक्षा मानकों और गैर-टैरिफ बाधाओं का भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण कीजिए और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए।
रेगुलेटरी फ्रिक्शन: कड़े अंतरराष्ट्रीय बायोसिक्योरिटी मानक भारतीय जंगली झींगे के लिए मार्केट एक्सेस में बाधा पैदा कर रहे हैं
ट्रेड प्रोटेक्शनिज्म: क्षेत्रीय सीफूड एक्सपोर्ट वॉल्यूम पर टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर्स का असर
सप्लाई चेन की कमजोरी: केरल की समुद्री अर्थव्यवस्था के लिए खास एक्सपोर्ट मार्केट्स पर निर्भरता
मुख्य शब्द: गैर-टैरिफ बाधाएं · बायोसिक्योरिटी · व्यापार बाधाएं · निर्यात विविधीकरण · मरीन इकोनॉमी
चर्चा में क्यों: एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने 'विंग्स इंडिया 2026' में भारत में घरेलू विमान लीजिंग और फाइनेंसिंग इकोसिस्टम (ecosystem) स्थापित करने के लिए तत्काल नीतिगत सुधारों की मांग की।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय और एयरबस (Airbus) सहित संबंधित हितधारकों ने विदेशी लीजिंग पर भारत की अत्यधिक निर्भरता पर प्रकाश डाला। पहचाने गए प्रमुख संरचनात्मक मुद्दों में गैर-निवासियों पर रोलिंग टैक्सेशन (rolling taxation), प्रोत्साहन पर सनसेट क्लॉज (sunset clauses) और उच्च कॉर्पोरेट टैक्स दरें शामिल हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
तथ्यकेप टाउन कन्वेंशन (Cape Town Convention) को विमानों के इंडक्शन (induction) और डी-रजिस्ट्रेशन (deregistration) के लिए एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय फ्रेमवर्क के रूप में पहचाना जाता है।
स्थानइंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स (IFSC) को एविएशन फाइनेंसिंग चर्चाओं के लिए प्रमुख स्थानों के रूप में उद्धृत किया गया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में एक घरेलू विमान पट्टा (aircraft leasing) पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने में आने वाली संरचनात्मक और विनियामक बाधाओं तथा भारत के विमानन क्षेत्र के विकास के लिए इसके महत्व का विश्लेषण कीजिए।
टैक्सेशन फ्रिक्शन: गैर-निवासियों पर रोलिंग टैक्सेशन और उच्च कॉर्पोरेट टैक्स रेट्स से विदेशी निवेश में कमी
रेगुलेटरी बॉटलनेक: विमानों के इंडक्शन/डिरजिस्ट्रेशन और केप टाउन कन्वेंशन के प्रभावी कार्यान्वयन की ज़रूरत
ट्रस्ट डेफिसिट: इंसेंटिव्स पर सनसेट क्लॉज और कुशल फाइनेंसिंग कर्मियों की कमी के कारण निवेशकों में हिचकिचाहट
मुख्य शब्द: संरचनात्मक सुधार · एयरक्राफ्ट लीजिंग · पूंजीगत निवेश · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क · केप टाउन कन्वेंशन
चर्चा में क्यों: नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) टोल से जुड़ी भीड़ को कम करने के लिए 117 किलोमीटर लंबे बेंगलुरु-मैसूर एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे (NH-275) पर मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग पायलट प्रोजेक्ट की संभावना तलाश रहा है।
MLFF सिस्टम पारंपरिक टोल बूथों के स्थान पर सैटेलाइट-आधारित GPS तकनीक और हाई-परफॉर्मेंस RFID रीडर्स से लैस ओवरहेड गैन्ट्रीज (overhead gantries) का उपयोग करेगा। इस पायलट प्रोजेक्ट को 117 किलोमीटर लंबे बेंगलुरु-मैसूर एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे (NH-275) पर लागू किया जाएगा।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाNHAI: नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया।
तथ्यMLFF पायलट प्रोजेक्ट की लोकेशन: 117-किमी बेंगलुरु-मैसूर एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे (NH-275)।
विज्ञान-तकनीकMLFF तकनीक के घटक: ओवरहेड गैन्ट्रीज़ (overhead gantries), सैटेलाइट-आधारित GPS और हाई-परफॉरमेंस RFID रीडर्स।
तथ्यMLFF मैकेनिज्म: वाहनों के चलते रहने के दौरान ऑटोमैटिक टोल डिडक्शन (automatic toll deduction)।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के तेजी से विस्तारित होते राजमार्ग नेटवर्क में मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग प्रणाली को अपनाने से लॉजिस्टिक दक्षता और बुनियादी ढांचा प्रबंधन को कैसे सुधारा जा सकता है, इस पर चर्चा कीजिए।
लॉजिस्टिक एफिशिएंसी: फ्रेट टर्नअराउंड समय सुधारने के लिए 'स्टॉप-एंड-गो' देरी में कमी
तकनीकी एकीकरण: अलग-अलग इलाकों में हाई-फ़्रीक्वेंसी RFID और GPS सिंक्रोनाइज़ेशन बनाए रखने की चुनौतियां
राजस्व की चोरी: तकनीकी बाईपास के जोखिम और मजबूत रियल-टाइम ऑडिटिंग फ्रेमवर्क की ज़रूरत
मुख्य शब्द: लॉजिस्टिक कुशलता · इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट · स्मार्ट मोबिलिटी · राजस्व की चोरी · तकनीकी एकीकरण
चर्चा में क्यों: केंद्रीय मंत्री शोभा करंडलाजे ने नए लेबर कोड्स (Labour Codes) पर प्रकाश डाला, जो श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करने और रोजगार के अवसरों के विस्तार के लिए औपनिवेशिक काल के 29 कानूनों को चार कोड्स में समाहित करते हैं।
नए श्रम कोड्स (Labour Codes) ने औपनिवेशिक काल के 29 कानूनों को मिलाकर चार व्यापक कोड्स में एकीकृत किया है। ये 21 नवंबर से प्रभावी हुए हैं और इनमें महिलाओं के लिए समान वेतन, समय पर वेतन भुगतान, तथा गिग (gig) और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए विस्तारित सामाजिक सुरक्षा के प्रावधान शामिल हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यनए Labour Codes में औपनिवेशिक काल के 29 कानूनों को मिलाकर चार व्यापक कोड्स बनाए गए हैं।
तथ्यलेबर कोड्स (Labour Codes) 21 नवंबर से प्रभावी हो गए।
तथ्यइन कोड्स में महिलाओं के लिए समान वेतन और समय पर वेतन भुगतान के प्रावधान शामिल हैं।
तथ्यये कोड्स गिग वर्कर्स (gig workers) और अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर (unorganised sector) तक सोशल सिक्योरिटी कवरेज का विस्तार करते हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: औपनिवेशिक काल के श्रम कानूनों को नए श्रम संहिताओं में समाहित करने के उद्देश्य से औद्योगिक विकास और श्रमिकों के अधिकारों के संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने के प्रयासों का विश्लेषण कीजिए।
इनक्लूजन गैप: अस्थिर गिग इकोनॉमी तक सोशल सिक्योरिटी लाभ पहुँचाने में चुनौतियाँ
रेगुलेटरी बदलाव: खंडित औपनिवेशिक काल के कानूनों से एक एकीकृत इंडस्ट्रियल-फ्रेंडली फ्रेमवर्क की ओर बदलाव
जेंडर पैरिटी: फॉर्मल और इनफॉर्मल सेक्टर में महिलाओं के लिए समान वेतन लागू करने के लिए संस्थागत तंत्र
मुख्य शब्द: लेबर कोड · गिग वर्कर्स · सामाजिक सुरक्षा · अनऑर्गेनाइज्ड सेक्टर · औपनिवेशिक काल के कानून · रोज़गार समावेश
चर्चा में क्यों: कर्नाटक ने गिग वर्कर्स (Gig workers) को सामाजिक सुरक्षा और कानूनी सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक प्लेटफॉर्म-आधारित गिग वर्कर्स वेलफेयर डेवलपमेंट बोर्ड (Gig workers’ welfare development board) की स्थापना की है।
कर्नाटक सरकार ने विशेष रूप से प्लेटफॉर्म-आधारित गिग वर्कर्स (Gig Workers) के लिए एक कल्याण विकास बोर्ड की स्थापना की है। इस पहल का उद्देश्य ऐप-आधारित परिवहन श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा और कानूनी सुरक्षा से संबंधित लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा करना है।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
तथ्यकर्नाटक प्लेटफॉर्म-आधारित गिग वर्कर्स (gig workers) के लिए समर्पित कल्याण विकास बोर्ड स्थापित करने वाला पहला राज्य है।
संस्थाइंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (IFAT) गिग वर्कर्स (gig workers) के लिए एक प्रतिनिधि संस्था है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में गिग श्रमिकों के लिए एक समर्पित सामाजिक सुरक्षा ढांचे की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए, साथ ही प्लेटफॉर्म की लाभप्रदता और श्रमिकों के कल्याण के बीच संतुलन स्थापित करने की चुनौतियों पर प्रकाश डालिए। चर्चा कीजिए।
फंडिंग सस्टेनेबिलिटी: क्या वेलफेयर फीस लंबे समय के सोशल सिक्योरिटी खर्चों को पूरा कर पाएगी, इस पर चिंता
रेगुलेटरी पहचान: गिग वर्कर्स को अनौपचारिक स्थिति से निकालकर कानूनी सुरक्षा के साथ मान्यता प्राप्त इकाई बनाना
प्रतिनिधित्व का अंतर: कल्याण बोर्ड के शासन में श्रमिकों की सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करना
मुख्य शब्द: गिग इकोनॉमी · सामाजिक सुरक्षा · प्लेटफ़ॉर्म वर्कर्स · श्रम अधिकार · वेलफेयर बोर्ड
चर्चा में क्यों: कोइम्बाटोर और तिरुप्पुर नगर निगमों ने अंडरग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम जैसे शहरी बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स के लिए नगर निगम बॉन्ड (Municipal Bonds) के जरिए सफलतापूर्वक फंड जुटाया है।
कोइम्बतोर ने 8.29% कूपन रेट पर ₹150.85 करोड़ जुटाए, जबकि तिरुपुर ने 8.5% पर ₹100 करोड़ जुटाए। इन फंड्स को 10-वर्षीय बॉन्ड के लिए निर्धारित किया गया है, जिनका उपयोग सेमोजी पूंगा (₹208.5 करोड़) और कुरिची-कुनियमुथुर ड्रेनेज प्रोजेक्ट्स (₹591.14 करोड़) सहित विभिन्न परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए किया जाएगा।
प्रीलिम्स बिंदु (5)
तथ्यकोइम्बाटोर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने 8.29% कूपन रेट (coupon rate) पर ₹150.85 करोड़ जुटाए।
तथ्यतिरुपुर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने 8.5% कूपन रेट (coupon rate) पर ₹100 करोड़ जुटाए।
तथ्यचेन्नई ने म्युनिसिपल बॉन्ड्स (Municipal Bonds) के जरिए 7.95% कूपन रेट पर ₹205.59 करोड़ जुटाए।
स्थानइंदौर भारत का पहला Municipal Corporation था जिसने सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट के लिए बॉन्ड्स के जरिए फंड जुटाया।
तथ्यकोइम्बाटोर में कुरिची-कुनियमुथुर अंडरग्राउंड ड्रेनेज प्रोजेक्ट की लागत ₹591.14 करोड़ है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: शहरी बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण में नगर निगम बांडों (म्युनिसिपल बॉन्ड्स) के महत्व और शहरी स्थानीय निकायों के लिए ऋण लागत निर्धारित करने में क्रेडिट रेटिंग की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
राजकोषीय स्वायत्तता: प्रोजेक्ट-स्पेसिफिक बॉन्ड इश्यू के लिए राज्य सरकार की मंजूरी पर निर्भरता
क्रेडिटवर्दीनेस: म्युनिसिपल क्रेडिट रेटिंग और कर्ज चुकाने के लिए कम कूपन रेट के बीच संबंध
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: महत्वपूर्ण शहरी ड्रेनेज और ग्रीन स्पेस प्रोजेक्ट्स के लिए बॉन्ड से मिले फंड का इस्तेमाल
मुख्य शब्द: म्युनिसिपल बॉन्ड · शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर · कूपन रेट · क्रेडिट रेटिंग · ऋण वित्तपोषण · शहरी स्थानीय निकाय
चर्चा में क्यों: उत्तर प्रदेश के राज्य वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में वैश्विक निवेशकों के साथ ₹3 लाख करोड़ के निवेश सौदों पर हस्ताक्षर करने की घोषणा की।
राज्य ने डेटा सेंटर, नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और फार्मास्यूटिकल्स सहित कई क्षेत्रों को कवर करने वाले कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए। सबसे बड़ा सौदा नीदरलैंड्स स्थित AM Green के साथ एक AI-संचालित डेटा ट्रांसफर प्रोजेक्ट के लिए किया गया है, जिसका अनुमानित मूल्य $25 बिलियन है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यWEF दावोस (Davos) में उत्तर प्रदेश द्वारा हस्ताक्षरित कुल निवेश मूल्य: ₹3 लाख करोड़।
स्थानAM Green: नीदरलैंड्स स्थित एक कंपनी।
तथ्यAM Green प्रोजेक्ट की वैल्यू: AI-पावर्ड डेटा ट्रांसफर के लिए $25 बिलियन।
तथ्यनिवेश के प्रमुख क्षेत्र: डेटा सेंटर, रिन्यूएबल एनर्जी (renewable energy), ग्रीन हाइड्रोजन, डिफेंस, टूरिज्म, फूड प्रोसेसिंग, लॉजिस्टिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, फार्मास्यूटिकल्स और हेल्थकेयर मैन्युफैक्चरिंग।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में उच्च-तकनीकी विनिर्माण (high-tech manufacturing) के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को आकर्षित करने में राज्य-आधारित निवेश प्रोत्साहन और बुनियादी ढांचा विकास की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर सिनर्जी: हाई-वैल्यू AI और ग्रीन हाइड्रोजन निवेश को आकर्षित करने के लिए लॉजिस्टिक्स और डेटा सेंटर कनेक्टिविटी को जोड़ना
राज्य-केंद्रित प्रतिस्पर्धा: राष्ट्रीय औद्योगिक नीति और क्षेत्रीय आर्थिक असमानताओं पर राज्य-विशिष्ट निवेश प्रोत्साहन का प्रभाव
मुख्य शब्द: विदेशी प्रत्यक्ष निवेश · औद्योगिक नीति · इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट · ग्रीन हाइड्रोजन · डेटा सेंटर
चर्चा में क्यों: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अनुमान लगाया है कि 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की आबादी में वृद्धि के कारण, तेलंगाना 2036 तक एक 'एजिंग स्टेट' (ageing state) बन जाएगा। इसके साथ ही यह राज्य तमिलनाडु और केरल के साथ इस श्रेणी में शामिल हो जाएगा।
RBI के अध्ययन से पता चलता है कि तेलंगाना में 60 वर्ष से अधिक आयु वाली जनसंख्या का प्रतिशत एक दशक में 10.1% से बढ़कर 12.5% हो गया है। रिपोर्ट यह सुझाव देती है कि मध्यवर्ती राज्यों को राजकोषीय और कार्यबल सुधारों के माध्यम से जनसांख्यिकीय बदलावों के लिए शुरुआती तैयारी के साथ विकास के बीच संतुलन बनाना चाहिए।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यतेलंगाना में 60 वर्ष से अधिक आयु की जनसंख्या एक दशक में 10.1% से बढ़कर 12.5% हो गई।
तथ्यतेलंगाना के 2036 तक तमिलनाडु और केरल के साथ एजिंग स्टेट्स (ageing states) के रूप में शामिल होने का अनुमान है।
संस्थाभारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने डेमोग्राफिक शिफ्ट (demographic shifts) और डिपेंडेंसी रेशियो (dependency ratios) पर अध्ययन किया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारतीय राज्यों पर वृद्ध होती जनसंख्या के राजकोषीय और सामाजिक-आर्थिक निहितार्थों की चर्चा कीजिए और बढ़ते निर्भरता अनुपात के प्रबंधन हेतु नीतिगत उपायों का सुझाव दीजिए।
राजकोषीय दबाव: उच्च निर्भरता अनुपात वाले राज्यों में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा और पेंशन फंड पर बढ़ा दबाव
वर्कफोर्स डायनेमिक्स: उत्पादकता बनाए रखने के लिए संभावित लेबर शॉर्टेज और स्ट्रक्चरल वर्कफोर्स रिफॉर्म्स की ज़रूरत
पॉलिसी में अंतर: 'बुजुर्ग' और 'मध्यम' जनसांख्यिकीय राज्यों के बीच अलग-अलग फिस्कल रणनीतियों की ज़रूरत
मुख्य शब्द: निर्भरता अनुपात · जनसांख्यिकीय बदलाव · राजकोषीय नीति · वर्कफोर्स सुधार · सार्वजनिक संसाधन
चर्चा में क्यों: महाराष्ट्र कैबिनेट इंफ्रास्ट्रक्चर कमेटी ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए मुंबई और नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों को जोड़ने वाली 35 किलोमीटर लंबी मेट्रो परियोजना को मंजूरी दी है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने छह महीने के भीतर भूमि अधिग्रहण और स्वीकृतियों को पूरा करने के निर्देश दिए।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यप्रोजेक्ट की लंबाई: मुंबई और नवी मुंबई एयरपोर्ट्स को जोड़ने वाला 35 किलोमीटर का मार्ग।
तथ्यकुल अनुमानित लागत: ₹22,862 करोड़।
स्थानप्रोजेक्ट लोकेशन: महाराष्ट्र (मुंबई और नवी मुंबई)।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के महानगरीय गलियारों में क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और शहरी भीड़भाड़ को कम करने में एकीकृत बहु-आयामी परिवहन बुनियादी ढांचे की भूमिका की चर्चा कीजिए।
लॉजिस्टिक एफिशिएंसी: व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इंटरनेशनल हब्स के बीच ट्रांजिट समय कम करना
अर्बन प्लानिंग: सतह पर होने वाली रुकावटों को कम करने के लिए अंडरग्राउंड और एलिवेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच संतुलन बनाना
राजकोषीय दबाव: हाई-डेंसिटी कॉरिडोर में भारी पूंजीगत खर्च और भूमि अधिग्रहण की बाधाओं को मैनेज करना
मुख्य शब्द: मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट · शहरी भीड़भाड़ कम करना · क्षेत्रीय कनेक्टिविटी · पूंजीगत व्यय · इंफ्रास्ट्रक्चर विकास
चर्चा में क्यों: केंद्रीय कैबिनेट ने भारत-यूरोपीय संघ (European Union) मुक्त व्यापार समझौते को मंजूरी दे दी है, जो भारत को एक ही ढांचे के तहत सभी 27 EU देशों तक अधिमानित पहुंच (preferential access) प्रदान करता है।
यह समझौता शुक्रवार को अंतिम रूप दिया गया और शनिवार को केंद्रीय कैबिनेट द्वारा अनुमोदित किया गया। उम्मीद है कि इससे द्विपक्षीय व्यापार 2025 तक 190 बिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर जाएगा। इस समझौते के आकार को चीन-ASEAN व्यापार समझौते से भी बड़ा बताया जा रहा है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यभारत-EU FTA से 2025 तक द्विपक्षीय व्यापार के $190 बिलियन से अधिक होने की उम्मीद है।
तथ्ययह समझौता एक सिंगल फ्रेमवर्क के तहत सभी 27 EU देशों को प्रेफरेंशियल एक्सेस (preferential access) प्रदान करता है।
तथ्यइस समझौते में निवेश, सेवाओं और बौद्धिक संपदा अधिकारों (Intellectual Property Rights) के लिए विशिष्ट प्रावधान शामिल हैं।
तथ्ययह डील रिपोर्ट के अनुसार चीन-ASEAN ट्रेड डील के पैमाने (scale) से भी बड़ी है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति और यूरोपीय संघ के साथ इसके व्यापारिक समीकरणों को किस प्रकार पुनर्गठित कर सकता है, इसका विश्लेषण कीजिए।
ट्रेड डाइवर्सिफिकेशन: 27 EU देशों तक मिलने वाली प्रेफरेंशियल एक्सेस का इस्तेमाल कर किसी एक मार्केट पर निर्भरता कम करना
IPR अलाइनमेंट: भारत की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग जरूरतों और यूरोपीय संघ के सख्त इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी मानकों के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: द्विपक्षीय व्यापार · प्राथमिकता आधारित पहुंच · ग्लोबल वैल्यू चेन · बौद्धिक संपदा अधिकार · व्यापार उदारीकरण
चर्चा में क्यों: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया एनर्जी वीक 2026 के दौरान भारत के ऊर्जा क्षेत्र में रिफाइनिंग और LNG इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान केंद्रित करते हुए $500 बिलियन के निवेश के अवसर पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने विशिष्ट ऊर्जा क्षेत्रों में वर्ष 2030 तक 100 बिलियन डॉलर के निवेश का लक्ष्य घोषित किया है। सरकार का लक्ष्य भारत की रिफाइनिंग क्षमता को प्रति वर्ष 260 मिलियन टन से बढ़ाकर 300 MTPA से अधिक करना है, ताकि यह दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनिंग हब बन सके।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यभारत की वर्तमान रिफाइनिंग क्षमता: 260 मिलियन टन प्रति वर्ष।
तथ्यलक्ष्य रिफाइनिंग क्षमता: 300 MTPA से अधिक।
तथ्य2030 तक निवेश का लक्ष्य: $100 बिलियन।
तथ्यकुल निवेश अवसर (Investment Opportunity) को $500 बिलियन बताया गया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत की ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति में एक सुदृढ़ एलएनजी (LNG) मूल्य श्रृंखला और शोधन बुनियादी ढांचे के विकास के महत्व पर चर्चा कीजिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर की बाधा: व्यापक LNG ट्रांसपोर्टेशन और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क की ज़रूरत
ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस: आयात पर निर्भरता कम करने के लिए ग्लोबल रिफाइनिंग हब में बदलाव
इन्वेस्टमेंट क्लाइमेट: इन्वेस्टर-फ्रेंडली नीतियों और घरेलू एनर्जी सिक्योरिटी की ज़रूरतों के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: ऊर्जा सुरक्षा · रिफाइनिंग क्षमता · LNG वैल्यू चेन · पूंजीगत निवेश · औद्योगिक विकास
चर्चा में क्यों: भारत सरकार की पहल और निजी क्षेत्र के निवेश के माध्यम से भारत अब चिप डिजाइन हब से एक पूर्ण स्तर के सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम (Semiconductor Manufacturing Ecosystem) में बदलने का लक्ष्य रख रहा है।
2023 में स्थापित की गई कायनेस सेमीकॉन (Kaynes Semicon) ने गुजरात में भारत का पहला सेमीकंडक्टर प्लांट स्थापित किया है। यह सुविधा ऑटोमोटिव, टेलीकॉम और डिफेंस सेक्टर के लिए चिप्स की असेंबली और टेस्टिंग पर केंद्रित है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यकेन्स (Kaynes) Semicon: गुजरात में सेमीकंडक्टर (Semiconductor) प्लांट स्थापित करने वाली पहली कंपनी (2023)।
पदअमितेश कुमार सिन्हा: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जॉइंट सेक्रेटरी।
तथ्यगुजरात प्लांट का मुख्य फोकस कारों, टेलीकॉम और डिफेंस के लिए चिप्स की असेंबली और टेस्टिंग है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत की तकनीकी संप्रभुता और औद्योगिक विकास के संदर्भ में घरेलू सेमीकंडक्टर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के रणनीतिक महत्व का विश्लेषण कीजिए।
सप्लाई चेन रेज़िलिएंस: रक्षा और टेलीकॉम में महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के लिए वैश्विक आयात पर निर्भरता कम करना
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: असेंबली-टेस्टिंग से जटिल फैब्रिकेशन की ओर बढ़ने के लिए भारी पूंजी निवेश और स्पेशलाइज्ड यूटिलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है
पॉलिसी सिनर्जी: सरकारी इंसेंटिव्स के तहत हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करने के लिए मौजूदा डिज़ाइन एक्सपर्टाइज़ का लाभ उठाना
मुख्य शब्द: सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम · आयात प्रतिस्थापन · तकनीकी संप्रभुता · असेंबली और टेस्टिंग · औद्योगिक नीति
चर्चा में क्यों: तेलंगाना के राज्यपाल जिश्नी देव वर्मा ने राज्य के आर्थिक लक्ष्यों को राष्ट्रीय 'विकसित भारत' पहल के साथ जोड़ने के लिए 'तेलंगाना राइजिंग – विजन 2047' योजना की रूपरेखा प्रस्तुत की।
'तेलंगाना राइजिंग – विजन 2047' योजना का लक्ष्य वर्ष 2047 तक राज्य के लिए तीन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था स्थापित करना है। यह योजना उसी वर्ष तक भारत के 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था हासिल करने के व्यापक लक्ष्य में योगदान देने के लिए तैयार की गई है।
चर्चा में क्यों: खबरों के अनुसार, भारत एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Pact) के हिस्से के रूप में यूरोपीय यूनियन से आने वाली कारों पर आयात शुल्क (Import Tariff) को 110% से घटाकर 40% करने की योजना बना रहा है। इस समझौते के 27 जनवरी, 2026 तक अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है।
प्रस्तावित टैरिफ कटौती का लक्ष्य यूरोपीय संघ (European Union) से आयातित कारों को लक्षित करता है। इस कदम का उद्देश्य भारत के कार बाजार को वोक्सवैगन (Volkswagen), मर्सिडीज-बेंज (Mercedes-Benz) और BMW सहित यूरोपीय ऑटोमेकर्स के लिए खोलना है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यEU से आने वाली कारों पर वर्तमान इंपोर्ट टैरिफ (Import Tariff) 110% है।
तथ्यEU से आने वाली कारों पर प्रस्तावित टैरिफ (Tariff) में कटौती कर इसे 40% करने का प्रस्ताव है।
स्थानयह ट्रेड डील भारत और यूरोपियन यूनियन (European Union) के बीच है।
तथ्यफ्री ट्रेड पैक्ट (Free Trade Pact) के 27 जनवरी, 2026 तक फाइनल होने की उम्मीद है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: 'मेक इन इंडिया' पहल के अंतर्गत ऑटोमोबाइल क्षेत्र में आयात शुल्क के उदारीकरण और घरेलू विनिर्माण के संरक्षण के बीच निहित समझौतों (trade-offs) का विश्लेषण कीजिए।
बाज़ार में प्रतिस्पर्धा: हाई-टेक यूरोपीय आयात से स्थानीय MSMEs और घरेलू ब्रांड्स के लिए कड़ा मुकाबला होने का जोखिम
राजकोषीय प्रभाव: कस्टम ड्यूटी में कटौती से ऑटोमोटिव आयात से होने वाले तत्काल सरकारी राजस्व में कमी
सप्लाई चेन इंटीग्रेशन: टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और ग्लोबल ऑटोमोटिव वैल्यू चेन में गहरे एकीकरण की संभावना
मुख्य शब्द: व्यापार उदारीकरण · टैरिफ स्ट्रक्चर · आयात प्रतिस्थापन · विदेशी प्रत्यक्ष निवेश · बाज़ार पहुंच
चर्चा में क्यों: उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कर्नाटक के टियर 2 और टियर 3 शहरों के लिए ट्रांसपोर्ट ग्रिड और रिंग रोड विकसित करने की योजना की घोषणा की है। इसका उद्देश्य 25 साल के शहरीकरण के अनुमानों को पूरा करना और विदेशी निवेश को आकर्षित करना है।
कर्नाटक सरकार टियर 2 और 3 शहरों के लिए विशेष रूप से रिंग रोड और ट्रांसपोर्ट ग्रिड सहित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की योजना बना रही है। यह योजना विदेशी निवेश को सुगम बनाने के लिए 25 वर्षों के क्षितिज (horizon) पर अनुमानित शहरीकरण वृद्धि को ध्यान में रखती है।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
तथ्यकर्नाटक के टियर 2 और टियर 3 शहरों के लिए ट्रांसपोर्ट ग्रिड प्लानिंग में 25 साल के डेवलपमेंट होराइजन (development horizon) पर विचार किया गया है।
स्थानकर्नाटक विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए इन ट्रांसपोर्ट ग्रिड्स (transport grids) की योजना बना रहा है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: संतुलित क्षेत्रीय आर्थिक विकास और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को आकर्षित करने के लिए टियर-2 और टियर-3 शहरों में सुदृढ़ परिवहन बुनियादी ढांचे के विकास के महत्व का विश्लेषण कीजिए।
इन्वेस्टमेंट कैटलिस्ट: गैर-महानगरीय इंडस्ट्रियल हब्स में विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर एक बुनियादी शर्त
अर्बन प्लानिंग: रिंग रोड और ग्रिड डेवलपमेंट के जरिए लंबे समय (25 साल) के शहरीकरण के दबाव से निपटना
मुख्य शब्द: शहरीकरण · इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट · विदेशी निवेश · क्षेत्रीय संतुलन · ट्रांसपोर्ट ग्रिड्स
चर्चा में क्यों: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने तेलंगाना जैसे राज्यों द्वारा लंबे समय वाले स्टेट गवर्नमेंट सिक्योरिटीज (SGS) के बढ़ते इश्यू (issuance) पर चिंता व्यक्त की है, जिससे यील्ड (yields) में बढ़ोतरी हो रही है।
RBI ने उल्लेख किया है कि बकाया SGSs का 28.2% हिस्सा 20 वर्ष से अधिक की परिपक्वता (maturity) वाला है। पिछले वित्त वर्ष में इन दीर्घकालिक प्रतिभूतियों (long-term securities) को जारी करने में तेलंगाना को एक अग्रणी राज्य के रूप में पहचाना गया।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यकुल बकाया स्टेट गवर्नमेंट सिक्योरिटीज (SGS) का 28.2% हिस्सा 20 साल से अधिक की मैच्योरिटी (Maturity) वाला है।
संस्थाभारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) स्टेट गवर्नमेंट सिक्योरिटीज (State Government Securities) के इश्यू और यील्ड ट्रेंड्स की निगरानी करता है।
तथ्यपिछले वित्त वर्ष में तेलंगाना को लॉन्ग-टर्म SGS जारी करने के लिए शीर्ष राज्यों में से एक के रूप में पहचाना गया था।
मेन्स के लिए
प्रश्न: राज्यों द्वारा दीर्घकालिक ऋण पर बढ़ती निर्भरता के राजकोषीय निहितार्थों और राजकोषीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए गैर-कर राजस्व स्रोतों के विविधीकरण की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।
यील्ड में उतार-चढ़ाव: लंबे कार्यकाल के कारण यील्ड में बढ़ोतरी से राज्यों की उधार लागत पर असर
राजस्व एकाग्रता: GST और सेल्स टैक्स पर अत्यधिक निर्भरता से फ़िस्कल वल्नरेबिलिटी
कर्ज की स्थिरता: प्राइवेट इन्वेस्टमेंट कम होने का जोखिम और लंबे समय तक चलने वाला फ़िस्कल प्रेशर
चर्चा में क्यों: केरल के श्रम मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसरों के विस्तार के लिए कई परियोजनाओं की घोषणा की है। इनमें कौशल प्रशिक्षण के लिए स्टाइपेंड (Stipend) और अंतरराष्ट्रीय वोकेशनल पार्टनरशिप (Vocational Partnerships) शामिल हैं।
केरल सरकार ने 'कनेक्ट टू वर्क' (Connect to Work) योजना की घोषणा की है, जिसके तहत कौशल प्रशिक्षण (skill training) प्राप्त करने वाले छात्रों को ₹1,000 मासिक स्टाइपेंड दिया जाएगा। राज्य सरकार लगभग 500 छात्रों को जर्मनी में 'डुअल वोकेशनल ट्रेनिंग' (dual vocational training) के लिए भेजने और कोट्टारक्करा में एक 'इनोवेशन एंड रिसर्च पार्क' स्थापित करने की योजना बना रही है।
प्रीलिम्स बिंदु (5)
योजना'Connect to Work' स्कीम: केरल में स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम और कॉम्पिटिटिव एग्जामिनेशन में शामिल छात्रों को ₹1,000 का मासिक स्टाइपेंड (stipend) प्रदान करती है।
योजना'Karmachari' प्रोग्राम: नियोक्ताओं के साथ साझेदारी स्थापित करने के लिए केरल सरकार की एक पहल।
तथ्यकेरल सरकार जर्मनी में ड्यूल वोकेशनल ट्रेनिंग (dual vocational training) के लिए लगभग 500 छात्रों को भेजने की योजना बना रही है।
स्थानइनोवेशन एंड रिसर्च पार्क (Innovation and Research Park): इसे केरल के कोट्टारक्कारा में स्थापित किया जाएगा।
विज्ञान-तकनीकफैक्ट्री वर्कर्स द्वारा शिकायत दर्ज करने के लिए एक मल्टीलिंगुअल मोबाइल ऐप लॉन्च किया जाएगा।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारतीय राज्यों में युवाओं की रोजगार क्षमता (employability) को बढ़ाने में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) और अंतर्राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
स्किल-गैप अलाइनमेंट: ड्यूल वोकेशनल ट्रेनिंग के जरिए एकेडमिक करिकुलम और इंडस्ट्रियल रिक्वायरमेंट्स के बीच के अंतर को कम करना
लेबर राइट्स प्रोटेक्शन: डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए फैक्ट्री वर्कर्स के लिए शिकायत निवारण तंत्र को बेहतर बनाना
आर्थिक विकेंद्रीकरण: ग्रामीण जिलों में समर्पित रिसर्च पार्क्स के जरिए क्षेत्रीय इनोवेशन को बढ़ावा देना
मुख्य शब्द: कौशल विकास · व्यावसायिक प्रशिक्षण · पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप · श्रम कल्याण · रोज़गार समावेश
चर्चा में क्यों: राजस्थान के खनन विभाग ने चालू वित्त वर्ष के लिए ₹7,451.63 करोड़ का रिकॉर्ड राजस्व दर्ज किया है। यह उपलब्धि अवैध खनन पर सख्ती करने और जुर्माना वसूलने की रणनीति के कारण संभव हुई है।
राजस्थान खनन विभाग ने पिछले वर्ष की तुलना में राजस्व में 9% की वृद्धि हासिल की है। इस रणनीति के अंतर्गत रॉयल्टी संग्रह की निगरानी, शेष अनुबंधों की नीलामी और वित्त अधिकारियों द्वारा नियमित समीक्षा शामिल है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यराजस्थान माइनिंग डिपार्टमेंट का राजस्व: चालू वित्त वर्ष में ₹7,451.63 करोड़।
तथ्यराजस्व वृद्धि: पिछले वर्ष की तुलना में 9% की वृद्धि।
पदटी. रविकान्त राजस्थान के प्रिंसिपल सेक्रेटरी (Mines) के रूप में कार्यरत हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: राजस्थान जैसे खनिज-संपन्न राज्यों में अवैध खनन गतिविधियों पर अंकुश लगाने और प्रभावी रॉयल्टी संग्रह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपायों की चर्चा कीजिए।
रेगुलेटरी ओवरसाइट: अनधिकृत माइनिंग ऑपरेशंस का पता लगाने और उन पर जुर्माना लगाने के लिए मॉनिटरिंग मैकेनिज्म को मजबूत करना
राजस्व बढ़ाने के लिए बचे हुए कॉन्ट्रैक्ट्स की ऑक्शन प्रोसेस को आसान बनाना
संस्थागत जवाबदेही: नियमित रॉयल्टी ऑडिट रिव्यू में फाइनेंस ऑफिसर्स की भूमिका को बढ़ाना
चर्चा में क्यों: पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC) की रिपोर्ट के अनुसार, बिजली वितरण इकाइयों की 14वीं वार्षिक एकीकृत रेटिंग और रैंकिंग में आंध्र प्रदेश की बिजली वितरण इकाइयों ने 'C' ग्रेड से सुधरकर 'B' ग्रेड हासिल किया है।
यह रैंकिंग केंद्र सरकार के अधीन पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) द्वारा आयोजित की गई थी। संग्रह दक्षता (collection efficiency) में सुधार और AT&C नुकसान में कमी के कारण आंध्र प्रदेश के डिस्कॉम्स (Discoms) ने 'B' ग्रेड हासिल किया।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थापावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC) एक केंद्र सरकार की संस्था है जो पावर सेक्टर की रैंकिंग के लिए जिम्मेदार है।
तथ्य14th Annual Integrated Rating and Ranking में आंध्र प्रदेश के Discoms 'C' ग्रेड से 'B' ग्रेड में आ गए हैं।
तथ्यरैंकिंग के लिए मुख्य प्रदर्शन संकेतक (Key Performance Indicators) में कलेक्शन एफिशिएंसी और AT&C (Aggregate Technical and Commercial) लॉस शामिल हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में राज्य विद्युत वितरण उपक्रमों के वित्तीय स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारकों का विश्लेषण कीजिए और एटीसी (AT&C) नुकसान को कम करने के लिए उपयुक्त उपायों का सुझाव दीजिए।
ऑपरेशनल एफिशिएंसी: स्मार्ट मीटरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड के जरिए AT&C लॉस कम करना
राजकोषीय स्थिरता: यूटिलिटी मेंटेनेंस के लिए समय पर राजस्व सुनिश्चित करने हेतु कलेक्शन एफिशिएंसी में सुधार
रेगुलेटरी फ्रेमवर्क: ग्रामीण विद्युतीकरण में पूंजीगत खर्च की ज़रूरत के साथ टैरिफ स्ट्रक्चर का संतुलन
मुख्य शब्द: AT&C घाटा · बिजली वितरण · राजकोषीय प्रदर्शन · इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट · ऑपरेशनल एफिशिएंसी
चर्चा में क्यों: अमेरिकी निवेशक हैनी गिरगिस ने 'रिवर्स माइग्रेशन' (reverse migration) के एक ट्रेंड पर प्रकाश डाला है, जिसमें टेक प्रोफेशनल्स अमेरिका के सख्त H-1B वीजा नियमों और अधिक फाइलिंग फीस के कारण भारत में बस रहे हैं।
LinkedIn के आंकड़ों के अनुसार, 2025 की तीसरी तिमाही (Q3) में भारत आने वाले टेक प्रोफेशनल्स की संख्या में 40% की वृद्धि देखी गई है। यह रुझान मुख्य रूप से अमेरिका में H-1B वीजा की बढ़ती फाइलिंग फीस और कड़े रेगुलेटरी हर्डल्स (regulatory hurdles) के कारण सामने आया है।
प्रीलिम्स बिंदु (1)
तथ्यLinkedIn डेटा के अनुसार, Q3 2025 में भारत आने वाले टेक प्रोफेशनल्स (tech professionals) की संख्या में 40% की वृद्धि हुई है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: वैश्विक वीज़ा व्यवस्था के कड़े होने और प्रवास के बदलते स्वरूप किस प्रकार भारत के घरेलू प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र के विकास को प्रभावित कर रहे हैं, चर्चा कीजिए।
ह्यूमन कैपिटल शिफ्ट: कुशल इंजीनियरों का रिवर्स माइग्रेशन घरेलू R&D और टेक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रहा है
पॉलिसी-ड्रिवन माइग्रेशन: ग्लोबल टैलेंट मोबिलिटी और भारतीय टेक फर्मों में कैपिटल इनफ्लो पर अमेरिकी वीजा फीस बढ़ोतरी का असर
मुख्य शब्द: रिवर्स माइग्रेशन · मानव पूंजी · वीज़ा पर निर्भरता · टेक इकोसिस्टम · स्किल मोबिलिटी
चर्चा में क्यों: केरल के उद्योग मंत्री ने घोषणा की है कि राज्य ने ₹1.18 लाख करोड़ मूल्य के एक्सप्रेशंस ऑफ इंटरेस्ट (EoIs) प्राप्त किए हैं।
केरल ने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में ₹1.18 लाख करोड़ मूल्य के अभिव्यक्ति के प्रस्ताव (EoIs) हासिल किए। ANSR Global ने तिरुवनंतपुरम और कोच्चि में दो GCC स्थापित करने के लिए एक EoI पर हस्ताक्षर किए। इसके साथ ही Greenco Group, Ramco Infrastructure और ACME Group से अतिरिक्त निवेश प्रस्ताव भी प्राप्त हुए।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यकेरल द्वारा प्राप्त Expressions of Interest (EoIs) का कुल मूल्य: ₹1.18 लाख करोड़।
स्थानकेरल के तिरुवनंतपुरम और कोच्चि में GCCs स्थापित किए जाएंगे।
संस्थाANSR Global: ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) स्थापित करने और संचालित करने में मार्केट लीडर।
स्थानवर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (World Economic Forum - WEF) का स्थान: डावोस, स्विट्जरलैंड।
मेन्स के लिए
प्रश्न: ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) की स्थापना केरल के औद्योगिक विकास और भारत को उच्च-स्तरीय सेवाओं के लिए एक वैश्विक केंद्र बनाने के व्यापक लक्ष्य में किस प्रकार योगदान दे सकती है, इसका विश्लेषण कीजिए।
स्किल-गैप अलाइनमेंट: GCC की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए हाई-एंड टेक में स्पेशल ट्रेनिंग की ज़रूरत
इंफ्रास्ट्रक्चर की तैयारी: कोच्चि और तिरुवनंतपुरम में हाई-स्पीड कनेक्टिविटी और पावर स्टेबिलिटी की ज़रूरत
रोज़गार विविधीकरण: पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग से हाई-वैल्यू सर्विस एक्सपोर्ट की ओर बदलाव
मुख्य शब्द: ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स · विदेशी प्रत्यक्ष निवेश · औद्योगिक नीति · सेवा निर्यात · इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट
चर्चा में क्यों: वित्त मंत्री के.एन. बालगोपाल ने कहा कि केरल 16वें वित्त आयोग से विभाज्य कर पूल (divisible tax pool) में अधिक हिस्सेदारी की मांग कर रहा है, ताकि पिछले आयोग के तहत 1.92% तक हुई गिरावट की भरपाई की जा सके।
16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट नवंबर 2025 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को प्राप्त हुई। पिछले आयोग की गणना के अनुसार, विभाज्य कर पूल (divisible tax pool) में केरल की हिस्सेदारी घटकर 1.92% रह गई।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
तथ्यपिछले वित्त आयोग के तहत विभाज्य कर पूल (divisible tax pool) में केरल की हिस्सेदारी 1.92% थी।
पदके.एन. बालगोपाल केरल के फाइनेंस मिनिस्टर (Finance Minister) हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: विभिन्न क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं की राजकोषीय आवश्यकताओं को संतुलित करते हुए राज्यों के बीच करों के न्यायसंगत क्षैतिज विकेंद्रीकरण की चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
हॉरिजॉन्टल इनइक्विटी: हाई-ग्रोथ और लो-ग्रोथ राज्यों के बीच प्रति व्यक्ति संसाधन आवंटन में असमानता
राजकोषीय संघवाद: राज्यों की विशिष्ट विकास जरूरतों और टैक्स साझा करने के संवैधानिक जनादेश के बीच संतुलन
चर्चा में क्यों: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की रिपोर्ट के अनुसार, 2036 तक केरल की 60 वर्ष से अधिक आयु वाली जनसंख्या 22% से अधिक हो जाएगी, जिसके कारण बुजुर्गों के लिए सहायता प्रणालियों (support systems) की ओर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक हो जाएगा।
RBI की रिपोर्ट केरल को 'एडवांस्ड एजिंग' (advanced ageing) में अग्रणी राज्य के रूप में पहचानती है, जहाँ 2036 तक 22% से अधिक आबादी की उम्र 60 वर्ष से अधिक होगी। रिपोर्ट इस जनसांख्यिकीय बदलाव (demographic shift) के प्रबंधन के लिए स्वास्थ्य सेवा वित्तपोषण सुधारों, निवारक स्वास्थ्य प्रणालियों और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (public-private partnerships) की सिफारिश करती है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यकेरल की 60 वर्ष से अधिक आयु की जनसंख्या के 2036 तक 22% से अधिक होने का अनुमान है।
संस्थाभारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने डेमोग्राफिक एजिंग (demographic ageing) पर रिपोर्ट जारी की।
तथ्यकेरल को भारत में 'एडवांस्ड एजिंग' (advanced ageing) में अग्रणी राज्य के रूप में पहचाना गया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: केरल जैसे भारतीय राज्यों में 'उन्नत वृद्धावस्था' (advanced ageing) के राजकोषीय और नीतिगत निहितार्थों पर चर्चा कीजिए। सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) बढ़ते स्वास्थ्य देखभाल व्यय को कम करने में किस प्रकार सहायक हो सकती है? विश्लेषण कीजिए।
राजकोषीय दबाव: बुजुर्गों की स्वास्थ्य सेवा के लिए सब्सिडी और गैर-मेरिट खर्चों को तर्कसंगत बनाना ज़रूरी
पॉलिसी में बदलाव: रोजगार-केंद्रित मॉडल से मजबूत बुढ़ापा सहायता और निवारक स्वास्थ्य प्रणालियों की ओर बदलाव
PPP क्षमता: बुजुर्गों के लिए हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने हेतु प्राइवेट कैपिटल का इस्तेमाल
मुख्य शब्द: उन्नत एजिंग · जनसांख्यिकीय बदलाव · हेल्थकेयर फाइनेंसिंग · राजकोषीय स्थान · पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप
चर्चा में क्यों: गोवा स्थित ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA) ने वेलनेस और मेडिकल टूरिज्म (Medical Tourism) के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी क्षमता बढ़ाने हेतु अतिरिक्त भूमि की मांग की है।
AIIA का उद्घाटन तीन साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था। मरीजों की बढ़ती संख्या को संभालने और शैक्षणिक कार्यक्रमों के लिए इसे पांच नए ऑपरेशन थिएटर, AI टूल्स और डायग्नोस्टिक सॉफ्टवेयर की मंजूरी मिली है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाAIIA: ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (All India Institute of Ayurveda), गोवा में स्थित है।
तथ्यAIIA के विस्तार में पांच नए ऑपरेशन थिएटर और AI-आधारित डायग्नोस्टिक टूल्स (diagnostic tools) शामिल हैं।
स्थानगोवा: वेलनेस और मेडिकल टूरिज्म हब के रूप में विकसित होने का लक्ष्य।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के चिकित्सा पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने और ग्रामीण-शहरी आर्थिक एकीकरण में आयुर्वेद एवं वेलनेस पर्यटन की क्षमता का विश्लेषण कीजिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर बॉटलनैक: अंतरराष्ट्रीय मरीजों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अतिरिक्त जमीन और स्पेशलाइज्ड सुविधाओं की जरूरत
तकनीकी एकीकरण: पारंपरिक आयुर्वेदिक उपचारों में डायग्नोस्टिक सटीकता के लिए AI टूल्स और सॉफ्टवेयर को अपनाना
मुख्य शब्द: मेडिकल टूरिज्म · होलिस्टिक हेल्थकेयर · आयुर्वेद · इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार · प्रिवेंटिव थेरेपी
चर्चा में क्यों: कर्नाटक सरकार ने राज्य स्तर पर इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड (Industrial Relations Code) को लागू करने के लिए एक ढांचा तैयार करने हेतु 'इंडस्ट्रियल रिलेशंस (कर्नाटक) रूल्स, 2026' का ड्राफ्ट प्रकाशित किया है।
प्रारूप नियम नियोक्ताओं और श्रमिकों के बीच लिखित समझौते की प्रक्रियाओं को परिभाषित करते हैं और स्थापना स्तर पर वर्क्स कमिटी (Works Committees) के लिए प्रावधान प्रदान करते हैं। अंतिम अधिसूचना से पहले हितधारकों के पास आपत्तियां या सुझाव प्रस्तुत करने के लिए 45 दिनों का समय है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
अधिनियम / विधेयकइंडस्ट्रियल रिलेशंस (कर्नाटक) रूल्स, 2026: कर्नाटक में इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड को लागू करने के लिए ड्राफ्ट रूल्स।
तथ्यस्टेकहोल्डर्स के पास ड्राफ्ट रूल्स पर आपत्तियां या सुझाव देने के लिए 45 दिन का समय है।
संस्थावर्क्स कमिटी (Works Committees): प्रस्तावित नियमों के तहत स्थापना स्तर (establishment level) पर गठित निकाय।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में औद्योगिक सद्भाव को बढ़ावा देने और श्रम उत्पादकता में सुधार करने के लिए 'वर्क्स कमिटी' (कार्य समितियों) की स्थापना और औपचारिक लिखित समझौतों के महत्व पर चर्चा कीजिए।
संस्थागत ढांचा: औद्योगिक विवादों को कम करने के लिए लिखित समझौतों की स्पष्ट प्रक्रियाएं तय करना
विकेंद्रीकृत शिकायत निवारण: स्थापना स्तर के संघर्षों को सुलझाने में वर्क्स कमिटी की भूमिका
रेगुलेटरी स्पष्टता: इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड के तहत नियोक्ता के हितों और श्रमिकों के अधिकारों के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड · वर्क्स कमिटी · लिखित समझौते · लेबर हारमनी · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क
चर्चा में क्यों: इनलैंड वाटरवेज़ डेवलपमेंट काउंसिल (IWDC 3.0) ने केरल की इनलैंड वाटरवे (अंतर्देशीय जलमार्ग) परियोजनाओं के लिए ₹1,500 करोड़ से अधिक की राशि को मंजूरी दी है, जिसका उपयोग रिवर क्रूज जेट्टी और नेविगेशन को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री सर्बानंदा सोनोवाल की अध्यक्षता में आयोजित IWDC 3.0 ने केरल के लिए ₹1,500 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनलैंड वाटरवेज़ अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IWAI) अलप्पुझा और कोल्लम सहित 18 भारतीय शहरों में शहरी जल परिवहन के लिए व्यवहार्यता अध्ययन (feasibility study) भी कर रही है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यIWDC 3.0 ने केरल के इनलैंड वाटरवेज़ (Inland Waterways) के लिए ₹1,500 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी दी।
संस्थाIWAI (Inland Waterways Authority of India) शहरी जल परिवहन (urban water transport) के लिए व्यवहार्यता अध्ययन (feasibility studies) कर रहा है।
स्थानअलपुझा और कोल्लम उन 18 शहरों में शामिल हैं जिनका शहरी जल परिवहन (urban water transport) के लिए अध्ययन किया जा रहा है।
पदसरबानंदा सोनवाल बंदरगाह, शिपिंग और जलमार्ग के केंद्रीय मंत्री हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: केरल जैसे तटीय राज्यों में बहु-आयामी कनेक्टिविटी को बढ़ाने और सतत पर्यटन को बढ़ावा देने में अंतर्देशीय जलमार्गों की क्षमता का विश्लेषण कीजिए।
लॉजिस्टिक्स एफिशिएंसी: रोड और रेल ट्रांसपोर्ट के मुकाबले फ्रेट कॉस्ट और ट्रांजिट टाइम में कमी
पर्यटन एकीकरण: हाई-वैल्यू इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए रिवर क्रूज जेट्टी का विकास
अर्बन मोबिलिटी: घनी आबादी वाले तटीय शहरों में ट्रैफिक कम करने के लिए जल परिवहन की क्षमता
चर्चा में क्यों: IEEFA और JMK रिसर्च एंड एनालिटिक्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की ACC-PLI योजना में वीजा संबंधी समस्याओं और स्थानीय विनिर्माण (local manufacturing) संबंधी नियमों के कारण क्षमता को चालू करने में काफी देरी हुई है।
एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (ACC-PLI) योजना की शुरुआत 2021 में ₹18,100 करोड़ ($2.08 बिलियन) के परिव्यय के साथ की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, अब तक केवल 30 GWh क्षमता को समय पर चालू (commissioned) किया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
योजनाACC-PLI: भारत में एडवांस केमिस्ट्री सेल (Advanced Chemistry Cell) बैटरी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए इसे 2021 में लॉन्च किया गया।
तथ्यACC-PLI स्कीम के लिए कुल परिव्यय ₹18,100 करोड़ ($2.08 billion) है।
तथ्यइस योजना के तहत 30 GWh की बैटरी क्षमता को समय पर कमीशन किया गया है।
संस्थाIEEFA: इंस्टीट्यूट फॉर एनर्जी इकोनॉमिक्स एंड फाइनेंशियल एनालिसिस (Institute for Energy Economics and Financial Analysis)।
मेन्स के लिए
प्रश्न: ACC-PLI योजना के अंतर्गत भारत के आत्मनिर्भर घरेलू बैटरी विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र की ओर संक्रमण में आने वाली संरचनात्मक और तार्किक बाधाओं का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
भू-राजनीतिक तनाव: चीनी तकनीकी विशेषज्ञों के लिए वीज़ा प्रतिबंधों से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर प्रभावित
रेगुलेटरी फ्रिक्शन: 'मेक इन इंडिया' लोकलाइजेशन मैंडेट और तत्काल कैपेसिटी स्केलिंग की जरूरतों के बीच संतुलन
सप्लाई चेन की कमजोरी: घरेलू मैन्युफैक्चरिंग प्रोत्साहन के बावजूद आयातित कंपोनेंट्स पर भारी निर्भरता