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भाग I · स्था. 11.2025 
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कृषि करेंट अफेयर्स — यूपीएससी

यूपीएससी सिविल सेवा GS3 (अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा) के कृषि भाग से जुड़ी हर ख़बर, परीक्षा के नज़रिए से: चर्चा में क्यों, पृष्ठभूमि, प्रीलिम्स के तथ्य, अभ्यास प्रश्न और मेन्स प्रश्न। अब तक 533 नोट्स, रोज़ अपडेट।

पाठ्यक्रम के विषय: फसल पैटर्न एवं सिंचाई (217) · पशुपालन, मत्स्य पालन एवं संबद्ध क्षेत्र (95) · MSP, खरीद, PDS एवं खाद्य सुरक्षा (93) · भूमि सुधार (67) · खाद्य प्रसंस्करण एवं आपूर्ति श्रृंखला (40) · कृषि सब्सिडी एवं सहायता (21)

GS3कृषि › भूमि सुधारप्रीलिम्स

कर्नाटक के स्टैम्प्स एंड रजिस्ट्रेशन विभाग ने भूमि रिकॉर्ड में जालसाजी और बदलाव को रोकने के लिए 'कवेरी 2.0' (Kaveri 2.0) पोर्टल के माध्यम से एक पेपरलेस प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन सिस्टम शुरू किया है

चर्चा में क्यों: कर्नाटक के स्टैम्प्स एंड रजिस्ट्रेशन विभाग ने भूमि रिकॉर्ड में जालसाजी और बदलाव को रोकने के लिए 'कवेरी 2.0' (Kaveri 2.0) पोर्टल के माध्यम से एक पेपरलेस प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन सिस्टम शुरू किया है।

इस प्रणाली को सबसे पहले 30 अप्रैल को चामरजानगर शहर के एक सब-रजिस्ट्रार ऑफिस (sub-registrar's office) में लागू किया गया था। यह सुरक्षा और विश्वसनीयता को बढ़ाने के लिए डिजिटल रिकॉर्ड और आधार-आधारित पंजीकरण का उपयोग करती है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • संस्थाडिपार्टमेंट ऑफ स्टैम्प्स एंड रजिस्ट्रेशन (Department of Stamps and Registration): कर्नाटक में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन और स्टैम्प ड्यूटी के लिए जिम्मेदार राज्य निकाय।
  • तथ्यKaveri 2.0: कर्नाटक में पेपरलेस प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के लिए लॉन्च किया गया एक विशिष्ट पोर्टल।
  • स्थानचामराजनगर: कर्नाटक में पेपरलेस रजिस्ट्रेशन सिस्टम (paperless registration system) लागू करने वाला पहला स्थान।
  • तथ्यआधार-आधारित रजिस्ट्रेशन: नए पेपरलेस सिस्टम में इस्तेमाल होने वाली प्राथमिक ऑथेंटिकेशन (authentication) विधि।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भूमि अभिलेखों के कागजी स्वरूप से डिजिटल स्वरूप में परिवर्तन किस प्रकार भूमि संबंधी धोखाधड़ी को कम करने और ग्रामीण एवं शहरी संपत्ति बाजारों में पारदर्शिता में सुधार करने में सहायक हो सकता है, चर्चा कीजिए।

  • डेटा इंटीग्रिटी: लैंड टाइटल्स में रजिस्ट्रेशन के बाद होने वाले बदलाव और मैनुअल धोखाधड़ी के जोखिम को कम करना
  • डिजिटल डिवाइड: कम डिजिटल साक्षरता या इंटरनेट एक्सेस वाले ग्रामीण भूस्वामियों के लिए पहुंच सुनिश्चित करना
  • ऑथेंटिकेशन सिक्योरिटी: प्रॉपर्टी ट्रांजेक्शन में पहचान की चोरी रोकने के लिए आधार-आधारित वेरिफिकेशन का इस्तेमाल

मुख्य शब्द: डिजिटल इंडिया · पारदर्शिता · भूमि शासन · ई-गवर्नेंस · डेटा इंटीग्रिटी

GS3कृषि › पशुपालन, मत्स्य पालन एवं संबद्ध क्षेत्रप्रीलिम्स + मेन्स

भारत सरकार ने कच्छ में एक आक्रामक खरपतवार (invasive weed) 'प्रोसोपिस जुलिफ्लोरा' (Prosopis juliflora) का उपयोग करके समुद्री ईंधन बनाने के लिए देश का पहला ग्रीन मेथनॉल प्लांट स्थापित करने की योजना की घोषणा की है

चर्चा में क्यों: भारत सरकार ने कच्छ में एक आक्रामक खरपतवार (invasive weed) 'प्रोसोपिस जुलिफ्लोरा' (Prosopis juliflora) का उपयोग करके समुद्री ईंधन बनाने के लिए देश का पहला ग्रीन मेथनॉल प्लांट स्थापित करने की योजना की घोषणा की है।

प्रोसोपिस जुलिफ्लोरा (Prosopis juliflora) नामक पौधे को अंग्रेजों द्वारा 1920 के दशक में और गुजरात वन विभाग द्वारा 1961 में नमक के रेगिस्तानों से निपटने के लिए पेश किया गया था। इसे अब समुद्री जहाजों के लिए ग्रीन मेथनॉल उत्पादन हेतु फीडस्टॉक (feedstock) के रूप में पुन: उपयोग किया जा रहा है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • पर्यावरणप्रोसोपिस जुलिफ्लोरा (Prosopis juliflora): कच्छ में एक इनवेसिव (invasive) प्लांट प्रजाति है जिसे गंडो बवल के नाम से जाना जाता है।
  • तथ्यगुजरात वन विभाग ने बढ़ते हुए नमक के रेगिस्तानों (salt deserts) से निपटने के लिए 1961 में इस प्रजाति को पेश किया था।
  • विज्ञान-तकनीकग्रीन मेथनॉल (Green methanol): समुद्र में चलने वाले जहाजों के लिए इनवेसिव बायोमास (invasive biomass) से विकसित किया जा रहा एक ईंधन स्रोत।
मेन्स के लिए

प्रश्न: आक्रामक प्रजातियों को जैव ईंधन में परिवर्तित करने की प्रक्रिया किस प्रकार पारिस्थितिक क्षरण और भारत के ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों, दोनों को संबोधित कर सकती है? चर्चा कीजिए।

  • इकोलॉजिकल रेस्टोरेशन: सर्कुलर बायो-इकोनॉमी बनाते हुए गंडो बवल के फैलाव को कम करना
  • एनर्जी ट्रांजिशन: ग्रीन मेथनॉल विकल्पों के जरिए समुद्री कार्बन फुटप्रिंट को कम करना
  • पॉलिसी सिनर्जी: इनवेसिव स्पीशीज़ मैनेजमेंट को नेशनल बायोफ्यूल मैंडेट्स के साथ जोड़ना

मुख्य शब्द: आक्रामक प्रजातियां · ग्रीन मेथनॉल · बायोफ्यूल · सर्कुलर इकोनॉमी · पारिस्थितिक बहाली

GS3कृषि › भूमि सुधारमेन्स

तेलंगाना में किसान माधव राव की आत्महत्या ने तेलंगाना भू भारती (रिकॉर्ड ऑफ राइट्स) एक्ट

चर्चा में क्यों: तेलंगाना में किसान माधव राव की आत्महत्या ने तेलंगाना भू भारती (रिकॉर्ड ऑफ राइट्स) एक्ट, 2025 लागू होने के बावजूद 'प्लेन पेपर' (sada bainama) के जरिए होने वाले भूमि लेनदेन की निरंतरता को उजागर किया है।

संगारेड्डी जिले में एक किसान ने अपने परिवार की 8.25 एकड़ जमीन के 'सादा बैनामा' (plain paper transaction) के जरिए अवैध हस्तांतरण के कारण आत्महत्या कर ली। यह घटना तेलंगाना भू भारती (रिकॉर्ड ऑफ राइट्स) एक्ट, 2025 के लागू होने के एक साल बाद हुई, जिसे भूमि अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए बनाया गया था।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • अधिनियम / विधेयकतेलंगाना भू भारती (Record of Rights) एक्ट, 2025।
  • स्थानयह घटना तेलंगाना के संगरेड्डी जिले के कांगटी मंडल के गजुलापाहद गांव में हुई।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में भूमि स्वामित्व के औपचारिककरण में निहित चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए और किसानों के अधिकारों की सुरक्षा हेतु अनौपचारिक 'प्लेन पेपर' (plain paper) लेनदेन पर अंकुश लगाने के लिए उचित उपायों का सुझाव दीजिए।

  • अनौपचारिक अर्थव्यवस्था: आधिकारिक लैंड रजिस्ट्री सिस्टम से बचकर होने वाले 'सादा बैनामा' लेनदेन की व्यापकता
  • संस्थागत अंतर: अनधिकृत निजी भूमि हस्तांतरण रोकने में भू भारती एक्ट की प्रभावहीनता
  • सामाजिक भेद्यता: किसानों में कानूनी साक्षरता की कमी से परिवार के सदस्यों या बिचौलियों द्वारा शोषण

मुख्य शब्द: भूमि स्वामित्व · सादा बैनामा · अधिकारों का रिकॉर्ड · भूमि शासन · किसानों की परेशानी

GS3कृषि › फसल पैटर्न एवं सिंचाईमेन्स

महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल (MWDT) ने ओडिशा और छत्तीसगढ़ को आपसी जल-साझाकरण प्रस्ताव जमा करने के लिए 2 मई, 2026 तक की अंतिम समय-सीमा तय की है

चर्चा में क्यों: महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल (MWDT) ने ओडिशा और छत्तीसगढ़ को आपसी जल-साझाकरण प्रस्ताव जमा करने के लिए 2 मई, 2026 तक की अंतिम समय-सीमा तय की है।

MWDT की अध्यक्षता पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी कर रही हैं। ट्रिब्यूनल ने महानदी नदी के जल बंटवारे के फॉर्मूले के संबंध में दोनों राज्यों की ओर से ठोस प्रस्तावों की कमी पर असंतोष व्यक्त किया।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थामहानदी वॉटर डिस्प्यूट्स ट्रिब्यूनल (MWDT) वह संस्था है जो ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच जल बंटवारे का फैसला करती है।
  • पदजस्टिस बेला एम. त्रिवेदी MWDT की चेयरपर्सन हैं।
  • तथ्यराज्यों द्वारा आपसी समझौते (mutual settlement) के प्रस्ताव जमा करने की समय सीमा 2 मई, 2026 है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में अंतर-राज्यीय नदी जल-साझाकरण की चुनौतियों और ऐसे विवादों के समाधान में विशेष न्यायाधिकरणों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

  • अंतर-राज्यीय तनाव: ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच कृषि और औद्योगिक जल की मांग को लेकर मुकाबला
  • संस्थागत बाधा: राज्य स्तर पर बातचीत में देरी के कारण न्यायिक हस्तक्षेप
  • संसाधनों की कमी: महानी नदी बेसिन में अनियमित बारिश का पानी की उपलब्धता पर असर

मुख्य शब्द: अंतर-राज्यीय जल विवाद · संघवाद · संसाधन आवंटन · न्यायिक हस्तक्षेप · जल सुरक्षा

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घोषणा की है कि राज्य की कैबिनेट ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (Infrastructure projects) में तेजी लाने के लिए कृषि भूमि अधिग्रहण के मुआवजे को बाजार मूल्य से चार गुना तक बढ़ा दिया है

चर्चा में क्यों: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घोषणा की है कि राज्य की कैबिनेट ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (Infrastructure projects) में तेजी लाने के लिए कृषि भूमि अधिग्रहण के मुआवजे को बाजार मूल्य से चार गुना तक बढ़ा दिया है।

मध्य प्रदेश कैबिनेट ने सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की जाने वाली किसानों की भूमि के मुआवजे में चार गुना वृद्धि को मंजूरी दी है। यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू होगा और सिंचाई योजनाएं, सड़कें, पुल, रेलवे लाइनें और बांध जैसी परियोजनाओं पर लागू होगा।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यमध्य प्रदेश कैबिनेट ने भूमि अधिग्रहण मुआवजे को बाजार मूल्य का चार गुना बढ़ा दिया है।
  • तथ्यमुआवजे में वृद्धि सिंचाई योजनाएं, सड़कें, पुल, रेलवे लाइनें और बांध जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर लागू होती है।
  • स्थानयह घोषणा मध्य प्रदेश के भोपाल में की गई थी।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में किसानों के लिए उचित मुआवजा सुनिश्चित करने और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के समयबद्ध निष्पादन के बीच निहित अंतर्विरोधों का विश्लेषण कीजिए।

  • राजकोषीय बोझ: बड़े पैमाने के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की तय बजट जरूरतों के साथ बढ़ते मुआवजे की लागत को संतुलित करना
  • भूमि अधिग्रहण में टकराव: मुआवजे को मार्केट की हकीकत से जोड़कर सार्वजनिक कार्यों में मुकदमेबाजी और देरी कम करना
  • ग्रामीण इक्विटी: ज़मीन हड़पने और शोषण को रोकने के लिए हाशिए पर मौजूद किसानों को बाज़ार से जुड़े पर्याप्त मूल्य सुनिश्चित करना

मुख्य शब्द: भूमि अधिग्रहण · इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट · मुआवज़ा ढांचा · ग्रामीण अर्थव्यवस्था · लोक निर्माण विभाग

GS3कृषि › भूमि सुधारप्रीलिम्स

आंध्र प्रदेश सरकार ने अमरावती कैपिटल सिटी में बुनियादी ढांचे के विकास को गति देने के लिए भूमि अधिग्रहण और लैंड पूलिंग स्कीम (Land Pooling Scheme

चर्चा में क्यों: आंध्र प्रदेश सरकार ने अमरावती कैपिटल सिटी में बुनियादी ढांचे के विकास को गति देने के लिए भूमि अधिग्रहण और लैंड पूलिंग स्कीम (Land Pooling Scheme - LPS) 2.0 के लिए नए नोटिफिकेशन जारी किए हैं।

आंध्र प्रदेश कैपिटल रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (APCRDA) ने हरिश्चंद्र पुरम, व्यकुंठपुरम और पेडापरिमी गांवों में पूलिंग (pooling) के लिए 6,301 एकड़ क्षेत्र की पहचान की है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए LPS के तीसरे चरण की योजना का संकेत दिया है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • स्थानअमरावती आंध्र प्रदेश की राजधानी है।
  • संस्थाAPCRDA: आंध्र प्रदेश कैपिटल रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (Andhra Pradesh Capital Region Development Authority)।
  • तथ्यLPS 2.0 ने गुंटूर और पालनाडु जिलों में पूलिंग (pooling) के लिए 6,301 एकड़ की पहचान की है।
  • योजनाअमरावती में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए Land Pooling Scheme (LPS) का उपयोग किया जाता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में शहरी बुनियादी ढाँचे के विकास में भूमि एकत्रीकरण (लैंड पूलिंग) योजनाओं की भूमिका और बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण से जुड़ी चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।

  • मुआवजे का विवाद: किसानों के लिए उचित मार्केट वैल्यू और बुनियादी ढांचे की समयसीमा के बीच संतुलन
  • प्रशासनिक बाधा: ग्रामीण से शहरी बदलाव में राज्य अधिकारियों और स्थानीय भूस्वामियों के बीच तालमेल की कमी

मुख्य शब्द: लैंड पूलिंग · इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट · अर्बन प्लानिंग · भूमि अधिग्रहण · पूंजी विकास

GS3कृषि › फसल पैटर्न एवं सिंचाईप्रीलिम्स

मैसूर जिले में तापमान 40°सी

चर्चा में क्यों: मैसूर जिले में तापमान 40°सी. के करीब दर्ज होने के कारण, कर्नाटक स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने गर्मी से होने वाली बीमारियों और मौतों को कम करने के लिए 'हीट एक्शन प्लान 2026' जारी किया है।

कर्नाटक के मैसूर जिले में स्थित एच.डी. कोटे में 19 और 20 अप्रैल को तापमान 40°सी. के करीब दर्ज किया गया। कर्नाटक राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केंद्र (Karnataka State Natural Disaster Monitoring Centre) इन हीटवेव की घटनाओं पर नज़र रखता है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • स्थानएच.डी. कोटे और नंजनगुड कर्नाटक के मैसूर जिले में स्थित स्थान हैं।
  • संस्थाकर्नाटक स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (Karnataka State Disaster Management Authority) राजस्व विभाग (Revenue Department) के अंतर्गत काम करती है।
  • योजनाHeat Action Plan 2026 भीड़ प्रबंधन (crowd management), छाया की व्यवस्था और समय पर सूचना देने पर केंद्रित है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत के कृषि प्रधान क्षेत्रों में बढ़ते तापमान के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों को कम करने में स्थानीय 'हीट एक्शन प्लान' (Heat Action Plans) की आवश्यकता का विश्लेषण कीजिए।

  • संस्थागत समन्वय: स्थानीय राजस्व विभाग के आपदा रिस्पॉन्स के साथ मौसम संबंधी डेटा का एकीकरण
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर: सीमित कूलिंग सुविधाओं वाले ग्रामीण इलाकों में हीट से होने वाली बीमारियों से निपटना

मुख्य शब्द: हीट एक्शन प्लान · आपदा प्रबंधन · क्लाइमेट एडैप्टेशन · सार्वजनिक स्वास्थ्य · शमन रणनीति

GS3कृषि › पशुपालन, मत्स्य पालन एवं संबद्ध क्षेत्रप्रीलिम्स + मेन्स

CSIR-IIIM ने ऐसे वैज्ञानिक प्रोटोकॉल विकसित किए हैं जिससे प्रवासी मधुमक्खी कॉलोनियों को कश्मीर में शून्य से नीचे के तापमान में जीवित रहने में मदद मिलेगी

चर्चा में क्यों: CSIR-IIIM ने ऐसे वैज्ञानिक प्रोटोकॉल विकसित किए हैं जिससे प्रवासी मधुमक्खी कॉलोनियों को कश्मीर में शून्य से नीचे के तापमान में जीवित रहने में मदद मिलेगी। इससे मधुमक्खी के छत्तों को भौतिक रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी।

पुलवाड़ा स्थित CSIR-IIIM ने बोनेरा फार्म में शून्य से नीचे के तापमान में 'एपिस मेलिफेरा' (Apis mellifera) की पहली जीवित कॉलोनी का सफल प्रदर्शन किया। इस पहल से मधुमक्खियों की मृत्यु दर में 30% की कमी आई और इसके परिणामस्वरूप कश्मीर का पहला मोनो-फ्लोरल एप्पल हनी (mono-floral apple honey) तैयार किया गया।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • पर्यावरणApis mellifera इस क्षेत्र में शहद उत्पादन के लिए उपयोग की जाने वाली एक प्रवासी मधुमक्खी की प्रजाति है।
  • तथ्यइस हस्तक्षेप से सर्दियों के दौरान हनी बी (honey bee) की मृत्यु दर में 30% की कमी आई।
  • तथ्यकश्मीर में सालाना लगभग 2,000 metric tonnes शहद का उत्पादन होता है, जिसकी कीमत ₹12.5 लाख है।
  • स्थानयह प्रदर्शन जम्मू-कश्मीर के पुलवाड़ा में बोनेरा फार्म में आयोजित किया गया था।
मेन्स के लिए

प्रश्न: मधुमक्खी पालन में वैज्ञानिक हस्तक्षेप किस प्रकार हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु-अनुकूल कृषि को सुदृढ़ कर सकते हैं और उच्च-मूल्य वाले विशिष्ट उत्पादों को बढ़ावा दे सकते हैं, चर्चा कीजिए।

  • क्लाइमेट एडैप्टेशन: स्थानीय वैज्ञानिक प्रोटोकॉल के जरिए प्रवासी प्रजातियों की सर्दियों में होने वाली मौतों को कम करना
  • वैल्यू एडिशन: मार्केट कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ाने के लिए मल्टी-फ्लोरल से मोनो-फ्लोरल शहद की ओर बदलाव
  • आर्थिक मजबूती: लॉजिस्टिक्स लागत और मौसमी मधुमक्खी प्रवास से जुड़े जोखिमों को कम करना

मुख्य शब्द: जलवायु-अनुकूल कृषि · मधुमक्खी पालन · वैज्ञानिक हस्तक्षेप · मोनो-फ्लोरल हनी · जैव विविधता संरक्षण

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तेलंगाना सरकार ने पात्र किसानों की सहायता के लिए 'रैथु भरोसा' (Rythu Bharosa) योजना के तहत वित्तीय सहायता की दूसरी किस्त जारी करने की घोषणा की है

चर्चा में क्यों: तेलंगाना सरकार ने पात्र किसानों की सहायता के लिए 'रैथु भरोसा' (Rythu Bharosa) योजना के तहत वित्तीय सहायता की दूसरी किस्त जारी करने की घोषणा की है।

तेलंगाना सरकार 'रैथु भरोसा' योजना की दूसरी किस्त के रूप में ₹5,653 करोड़ वितरित कर रही है। यह धनराशि सीधे बैंक खाते में हस्तांतरण (Direct Account Transfer) के माध्यम से लगभग 45,11,947 पात्र किसानों को वितरित की जाएगी।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यRythu Bharosa की दूसरी किस्त की राशि: ₹5,653 करोड़।
  • तथ्यतेलंगाना में इस योजना के लिए पात्र किसानों की संख्या: 45,11,947।
  • तथ्यपहली किस्त जारी करने की तारीख: 23 मार्च।
  • तथ्यपहली किस्त की वितरण राशि: लगभग ₹3,590 करोड़।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में कृषि स्थिरता और किसान कल्याण सुनिश्चित करने में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) योजनाओं की भूमिका पर चर्चा कीजिए।

  • राजकोषीय स्थिरता: उच्च-मूल्य वाली सीधी सब्सिडी और लंबी अवधि की राज्य बजट सीमाओं के बीच संतुलन
  • समावेशन दक्षता: लीकेज रोकने के लिए पात्र छोटे और सीमांत किसानों की सटीक पहचान सुनिश्चित करना

मुख्य शब्द: डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर · कृषि सब्सिडी · राजकोषीय संघवाद · किसान कल्याण · ग्रामीण विकास

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सोसाइटी फॉर एलिमिनेशन ऑफ रूरल पॉवर्टी (SERP) और NRLM आंध्र प्रदेश में महिलाओं को घरेलू खाना पकाने से हटकर बाजरा आधारित उद्यम (millet-based enterprises) चलाने के लिए प्रशिक्षित कर रहे हैं

चर्चा में क्यों: सोसाइटी फॉर एलिमिनेशन ऑफ रूरल पॉवर्टी (SERP) और NRLM आंध्र प्रदेश में महिलाओं को घरेलू खाना पकाने से हटकर बाजरा आधारित उद्यम (millet-based enterprises) चलाने के लिए प्रशिक्षित कर रहे हैं।

इस पहल में SERP, NRLM और विशालक्ष्मी इनोवेशन फॉर सस्टेनेबल वैल्यू चेन (VISV) के बीच एक साझेदारी शामिल है। यह प्रशिक्षण पेंडुर्थी स्थित SVR इंडस्ट्रीज में आयोजित किया जाता है, जिसमें मुख्य रूप से मिलेट उत्पादों के लिए रेसिपी, बिजनेस प्लानिंग और मार्केट एक्सेस पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • संस्थाSERP: Society for Elimination of Rural Poverty, आंध्र प्रदेश की एक एजेंसी।
  • संस्थाNRLM: नेशनल रूरल लाइवलीहुड्स मिशन (National Rural Livelihoods Mission), केंद्र सरकार का एक मिशन।
  • तथ्यट्रेनिंग में मोबाइल 'प्लग एंड प्ले' (plug and play) मिलेट कार्ट्स स्थापित करने के लिए सहायता शामिल है।
  • स्थानपेंडुर्ति: आंध्र प्रदेश में प्रशिक्षण कार्यक्रम का स्थान।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में मोटे अनाज आधारित मूल्य श्रृंखलाओं को बढ़ावा देना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका विविधीकरण के लिए किस प्रकार एक उपकरण के रूप में कार्य कर सकता है, चर्चा कीजिए।

  • वैल्यू चेन इंटीग्रेशन: छोटे पैमाने की खेती को मार्केट-रेडी प्रोसेसिंग और रिटेल से जोड़ना
  • आजीविका विविधीकरण: ग्रामीण महिलाओं के लिए निर्वाह खेती से उद्यमिता वेंचर्स की ओर बदलाव
  • मार्केट एक्सेस बैरियर्स: शहरी और ग्रामीण उपभोक्ताओं तक पहुँचने के लिए 'प्लग एंड प्ले' इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत को पूरा करना

मुख्य शब्द: वैल्यू चेन · महिला सशक्तिकरण · आजीविका विविधीकरण · सतत कृषि · उद्यमिता

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तमिलनाडु सरकार ने मछली प्रजनन के मौसम और मत्स्य संसाधनों की सुरक्षा के लिए 15 अप्रैल, 2026 से वार्षिक मछली पकड़ने पर प्रतिबंध (fishing ban) शुरू कर दिया है

चर्चा में क्यों: तमिलनाडु सरकार ने मछली प्रजनन के मौसम और मत्स्य संसाधनों की सुरक्षा के लिए 15 अप्रैल, 2026 से वार्षिक मछली पकड़ने पर प्रतिबंध (fishing ban) शुरू कर दिया है।

यह प्रतिबंध तमिलनाडु मरीन फिशिंग रेगुलेशन एक्ट 1983 (Tamil Nadu Marine Fishing Regulation Act 1983) के तहत अनिवार्य है। इसके तहत 15 अप्रैल से 14 जून तक की अवधि के लिए मशीनीकृत नावों और ट्रॉलरों द्वारा मछली पकड़ने पर रोक लगाई गई है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • अधिनियम / विधेयकतमिलनाडु मरीन फिशिंग रेगुलेशन एक्ट 1983 (Tamil Nadu Marine Fishing Regulation Act 1983): राज्य में मछली पकड़ने की गतिविधियों को नियंत्रित करने वाला कानून।
  • तथ्यमछली पकड़ने पर प्रतिबंध की अवधि: 61 दिन (15 अप्रैल से 14 जून)।
  • स्थानरामनथपुरम जिला: वह स्थान जहाँ डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर सिमरनजीत सिंह कहलोन ने मछली पकड़ने पर प्रतिबंध का आदेश जारी किया।
  • तथ्यप्रतिबंधित गतिविधियाँ: मशीनीकृत नाव और ट्रॉलर फिशिंग (Trawler fishing)।
मेन्स के लिए

प्रश्न: तटीय समुदायों के लिए सतत आजीविका और समुद्री जैव विविधता के संरक्षण में मौसमी मछली पकड़ने पर प्रतिबंधों के पारिस्थितिक और आर्थिक महत्व का विश्लेषण कीजिए।

  • पारिस्थितिक संरक्षण: प्रजनन के पीक सीजन के दौरान स्पॉनिंग ग्राउंड और छोटी मछलियों की आबादी की सुरक्षा
  • आजीविका का संतुलन: कारीगर मछुआरों की तत्काल आर्थिक जरूरतों और समुद्री संसाधनों की दीर्घकालिक स्थिरता के बीच तालमेल

मुख्य शब्द: समुद्री जैव विविधता · सस्टेनेबल फिशरीज · संसाधन प्रबंधन · तटीय आजीविका · पारिस्थितिक संरक्षण

GS3कृषि › फसल पैटर्न एवं सिंचाईप्रीलिम्स

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के नेलांगुर गांव में पीने के पानी की पुरानी किल्लत को दूर करने के लिए जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) के माध्यम से नल से जल का कनेक्शन प्रदान किया गया है

चर्चा में क्यों: छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के नेलांगुर गांव में पीने के पानी की पुरानी किल्लत को दूर करने के लिए जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) के माध्यम से नल से जल का कनेक्शन प्रदान किया गया है।

नेलांगुर गाँव में इस परियोजना के अंतर्गत सोलर पंप सिस्टम और पाइपलाइनें स्थापित की गई हैं, ताकि घरों में सीधा पानी का कनेक्शन प्रदान किया जा सके। यह छत्तीसगढ़ के दूरदराज के क्षेत्रों में बुनियादी बुनियादी ढांचे (infrastructure) को बेहतर बनाने के लिए जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) के प्रयासों का एक हिस्सा है।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • तथ्यनेलांगुर गाँव छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में स्थित है।
  • विज्ञान-तकनीकयह प्रोजेक्ट जल आपूर्ति इंफ्रास्ट्रक्चर को बिजली देने के लिए सोलर पंप सिस्टम का उपयोग करता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: जल जीवन मिशन किस प्रकार ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास और बस्तर जैसे हाशिए पर स्थित क्षेत्रों में विश्वास बहाली के एक साधन के रूप में कार्य करता है, चर्चा कीजिए।

  • लास्ट-माइल कनेक्टिविटी: दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों में भौगोलिक बाधाओं को दूर कर पानी की समान पहुंच सुनिश्चित करना
  • भरोसा बनाने का तरीका: संघर्ष वाले इलाकों में राज्य-नागरिक संबंधों को सुधारने के लिए बुनियादी सेवा वितरण को एक रणनीति के रूप में इस्तेमाल करना

मुख्य शब्द: लास्ट-माइल कनेक्टिविटी · ग्रामीण बुनियादी ढांचा · समान वितरण · जनजातीय विकास · सोलर-पावर्ड सिंचाई

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केंद्र सरकार ने ग्रेट निकोबार द्वीप को एक समुद्री पर्यटन स्थल (Seaside Destination) के रूप में विकसित करने के लिए ₹92,000 करोड़ के मेगा-इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का एक ड्राफ्ट मास्टर प्लान जारी किया है

चर्चा में क्यों: केंद्र सरकार ने ग्रेट निकोबार द्वीप को एक समुद्री पर्यटन स्थल (Seaside Destination) के रूप में विकसित करने के लिए ₹92,000 करोड़ के मेगा-इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का एक ड्राफ्ट मास्टर प्लान जारी किया है।

इस परियोजना का लक्ष्य पर्यटन और आर्थिक विकास के माध्यम से 2055 तक 3.36 लाख से अधिक रोजगार पैदा करना है। विस्थापन और पारिस्थितिक चिंताओं के कारण इसे स्वदेशी समूहों, विशेष रूप से निकोबारी और शोम्पेन (Shompen) समुदायों से विरोध का सामना करना पड़ा है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यप्रोजेक्ट की लागत: ₹92,000 करोड़।
  • तथ्यरोजगार सृजन का लक्ष्य: 2055 तक 3.36 लाख।
  • स्थानग्रेट निकोबार आइलैंड (Great Nicobar Island)।
  • पर्यावरणशामिल स्वदेशी समूह: निकोबारी और शोम्पेन।
मेन्स के लिए

प्रश्न: पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा विकास और स्वदेशी अधिकारों एवं जैव विविधता के संरक्षण के मध्य उत्पन्न होने वाले द्वंद्व का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

  • अधिकारों का टकराव: राज्य के नेतृत्व वाले आर्थिक विकास और आदिवासी समुदायों के भूमि अधिकारों के बीच तनाव
  • इकोलॉजिकल रिस्क: बड़े पैमाने पर 'सीसाइड डेस्टिनेशन' निर्माण से द्वीप की जैव विविधता को होने वाला संभावित अपूरणीय नुकसान
  • गवर्नेंस गैप: प्रोजेक्ट की टाइमलाइन और पब्लिक फीडबैक मैकेनिज्म में स्पष्टता की कमी

मुख्य शब्द: स्वदेशी अधिकार · पारिस्थितिक संरक्षण · इंफ्रास्ट्रक्चर विकास · सस्टेनेबल टूरिज्म · जैव विविधता संरक्षण

GS3कृषि › कृषि सब्सिडी एवं सहायताप्रीलिम्स + मेन्स

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के सचिव ने राज्यों से कृषि क्षेत्र में सोलर पैनल लगाने (farm solarisation) को अपनाने का आग्रह किया है

चर्चा में क्यों: नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के सचिव ने राज्यों से कृषि क्षेत्र में सोलर पैनल लगाने (farm solarisation) को अपनाने का आग्रह किया है, ताकि ₹2.4 लाख करोड़ के कृषि बिजली सब्सिडी के बोझ को कम किया जा सके।

MNRE के सचिव, संतोष कुमार सारंगी ने महाराष्ट्र को एक मॉडल राज्य के रूप में रेखांकित किया है, जिसने विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा और रूफटॉप सिस्टम के माध्यम से क्रॉस-सब्सिडी शुल्क (cross-subsidy charges) को कम किया है। MNRE अब बिजली अधिनियम (Electricity Act) के तहत 'केंद्र सरकार' के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए विस्तारित प्रशासनिक अधिकार की मांग कर रहा है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • संस्थाMNRE: नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of New and Renewable Energy)।
  • तथ्यकृषि बिजली सब्सिडी बिल: ₹2.4 लाख करोड़।
  • स्थानमहाराष्ट्र: सोलरइज़ेशन (Solarisation) के माध्यम से क्रॉस-सब्सिडी चार्ज (Cross-subsidy charges) को कम करने के एक सफल उदाहरण के रूप में उद्धृत।
  • अधिनियम / विधेयकElectricity Act: वह कानून जिसके तहत MNRE विस्तारित प्रशासनिक अधिकार (administrative authority) चाहता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: यह चर्चा कीजिए कि विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा किस प्रकार राज्य के खजाने पर कृषि क्षेत्र में बिजली सब्सिडी के बोझ को कम करने के लिए एक राजकोषीय उपकरण के रूप में कार्य कर सकती है।

  • राजकोषीय स्थिरता: ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की पहुंच सुनिश्चित करते हुए 2.4 लाख करोड़ रुपये के सब्सिडी बोझ को कम करना
  • रेगुलेटरी फ्रेमवर्क: सुव्यवस्थित निगरानी के लिए इलेक्ट्रिसिटी एक्ट के तहत MNRE को 'सेंट्रल गवर्नमेंट' का दर्जा मिलना ज़रूरी

मुख्य शब्द: राजकोषीय संघवाद · विकेंद्रीकृत ऊर्जा · क्रॉस-सब्सिडी · रिन्यूएबल एनर्जी ट्रांज़िशन · सब्सिडी युक्तिकरण

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IRCTC ने हैदराबाद से भारत गौरव टूरिस्ट ट्रेनों के चार नए संस्करण शुरू किए हैं, जो भारत के विभिन्न धार्मिक स्थलों के लिए तीर्थयात्रा पैकेज प्रदान करते हैं

चर्चा में क्यों: IRCTC ने हैदराबाद से भारत गौरव टूरिस्ट ट्रेनों के चार नए संस्करण शुरू किए हैं, जो भारत के विभिन्न धार्मिक स्थलों के लिए तीर्थयात्रा पैकेज प्रदान करते हैं।

ये ट्रेनें सिकंदराबाद से रवाना होती हैं और अयोध्या, काशी, हरिद्वार, ऋषिकेश, तिरुवनमलाई, रामेश्वरम, मदुरै, कन्याकुमारी, तंजावुर, चिदंबरम, पुरी, कोणार्क, बैद्यनाथ धाम, वाराणसी और प्रयागराज जैसे गंतव्यों को कवर करती हैं। बुकिंग IRCTC की वेबसाइट या निर्धारित फोन नंबरों के माध्यम से उपलब्ध है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाIRCTC: इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन।
  • स्थानभारत गौरव ट्रेन्स: तीर्थ यात्रा स्थलों में अयोध्या, काशी, हरिद्वार, ऋषिकेश, तिरुवनमलाई, रामेश्वरम, मदुरै, कन्याकुमारी, तंजावुर, चिदंबरम, पुरी, कोणार्क और बैद्यनाथ धाम शामिल हैं।
  • तथ्यप्रस्थान बिंदु: सिकंदराबाद (हैदराबाद)।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में समर्पित रेल सेवाओं के माध्यम से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने से क्षेत्रीय आर्थिक विकास और सांस्कृतिक संरक्षण में किस प्रकार योगदान दिया जा सकता है, चर्चा कीजिए।

  • इकोनॉमिक मल्टीप्लायर: तीर्थयात्रा सर्किट में स्थानीय कारीगरों और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के लिए रेवेन्यू जनरेशन
  • इंफ्रास्ट्रक्चर का दबाव: पर्यटकों की भारी भीड़ और स्थानीय पारिस्थितिक और शहरी क्षमता के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: धार्मिक पर्यटन · क्षेत्रीय विकास · सांस्कृतिक विरासत · इंफ्रास्ट्रक्चर लॉजिस्टिक्स

GS3कृषि › MSP, खरीद, PDS एवं खाद्य सुरक्षाप्रीलिम्स

औद्योगिक सुरक्षा और स्वास्थ्य निदेशालय (DISH) ने तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान के दिन सभी प्रकार के श्रमिकों के लिए सवैतनिक अवकाश (Paid Holiday) अनिवार्य किया है

चर्चा में क्यों: औद्योगिक सुरक्षा और स्वास्थ्य निदेशालय (DISH) ने तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान के दिन सभी प्रकार के श्रमिकों के लिए सवैतनिक अवकाश (Paid Holiday) अनिवार्य किया है।

औद्योगिक सुरक्षा और स्वास्थ्य निदेशालय (DISH) ने औद्योगिक, वाणिज्यिक और निर्माण प्रतिष्ठानों के लिए निर्देश जारी किए हैं। यह आदेश आकस्मिक श्रमिकों (casual workers), अस्थायी श्रमिकों, दैनिक वेतनभोगियों और शिफ्ट-आधारित श्रमिकों पर लागू होता है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • अधिनियम / विधेयकRepresentation of the People Act, 1951 की Section 135B मतदान के दिनों पर छुट्टियों को अनिवार्य बनाती है।
  • संस्थाDISH (Directorate of Industrial Safety and Health) वह संस्था है जो छुट्टी का निर्देश जारी करती है।
  • तथ्यतमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए 23 अप्रैल को छुट्टी अनिवार्य है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: चुनावों के दौरान औद्योगिक और अनौपचारिक श्रमिकों के लिए अवकाश अनिवार्य करके सार्वभौिक मतदान अधिकारों को सुनिश्चित करने के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • समावेशी जनादेश: औपचारिक छुट्टी की सुविधा न होने वाले दिहाड़ी मजदूरों और शिफ्ट वर्कर्स के लिए मतदान तक पहुंच सुनिश्चित करना
  • रेगुलेटरी ओवरसाइट: ग्रासरूट लेवल पर फेडरल इलेक्टोरल मैंडेट लागू करने में राज्य निदेशालयों की भूमिका

मुख्य शब्द: सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार · जनप्रतिनिधित्व अधिनियम · श्रम कल्याण · चुनावी भागीदारी · सांख्यिकीय अनुपालन

GS3कृषि › पशुपालन, मत्स्य पालन एवं संबद्ध क्षेत्रमेन्स

कर्नाटक के वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्री, ईश्वर खंडरे ने ट्रेकिंग के दौरान लापता होने वाले लोगों की घटनाओं को देखते हुए सुरक्षा के लिए एक मॉडल स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (Standard Operating Procedure

चर्चा में क्यों: कर्नाटक के वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्री, ईश्वर खंडरे ने ट्रेकिंग के दौरान लापता होने वाले लोगों की घटनाओं को देखते हुए सुरक्षा के लिए एक मॉडल स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (Standard Operating Procedure - SOP) तैयार करने का आदेश दिया है।

प्रस्तावित SOP में ट्रैकर्स की निगरानी करने और समूह बीमा (group insurance) प्रदान करने के लिए 'ई-गस्तु' (e-Gastu) और 'एमस्ट्राइप्स' (MStripes) के समान एक ट्रैकिंग ऐप शामिल है। इस योजना में प्रकृति मार्गदर्शकों (nature guides) को वायरलेस कम्युनिकेशन सेट से लैस करना और सुरक्षा समन्वय के लिए जवाबदेही तय करना भी शामिल है।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • पदईश्वर खंडरे: कर्नाटक में वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्री।
  • तथ्यप्रस्तावित SOP में ट्रेकर्स के लिए ग्रुप इंश्योरेंस के प्रावधान शामिल हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में साहसिक पर्यटन के प्रबंधन और पदयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मानकीकृत सुरक्षा प्रोटोकॉल और डिजिटल निगरानी के महत्व की चर्चा कीजिए।

  • अकाउंटेबिलिटी फ्रेमवर्क: इमरजेंसी कोऑर्डिनेशन में नेचर गाइड्स के लिए कानूनी लायबिलिटी तय करना
  • डिजिटल सर्विलांस: ट्रेकर्स की रियल-टाइम GPS ट्रैकिंग और प्राइवेसी व डेटा सिक्योरिटी के बीच संतुलन
  • इंश्योरेंस इंफ्रास्ट्रक्चर: हाई-रिस्क एडवेंचर एक्टिविटी के लिए स्पेशलाइज्ड ग्रुप इंश्योरेंस की कमी को दूर करना

मुख्य शब्द: स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर · एडवेंचर टूरिज्म · सुरक्षा प्रोटोकॉल · डिजिटल मॉनिटरिंग · जवाबदेही

GS3कृषि › भूमि सुधारमेन्स

आंध्र प्रदेश विधानसभा ने अमरावती को राज्य की एकमात्र राजधानी के रूप में कानूनी दर्जा देने के लिए आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक पारित किया

चर्चा में क्यों: आंध्र प्रदेश विधानसभा ने अमरावती को राज्य की एकमात्र राजधानी के रूप में कानूनी दर्जा देने के लिए आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक पारित किया।

संसद में NDA द्वारा इस विधेयक को सर्वसम्मति से समर्थन दिया गया। यह विधेयक 2 जून, 2024 से अमरावती को आंध्र प्रदेश की एकमात्र राजधानी के रूप में नामित करता है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यअमरावती को आंध्र प्रदेश की एकमात्र राजधानी के रूप में नामित किया गया है।
  • स्थानआमरवती आंध्र प्रदेश की राजधानी है।
  • अधिनियम / विधेयककैपिटल प्रोजेक्ट को कानूनी दर्जा देने के लिए आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) बिल पास किया गया था।
मेन्स के लिए

प्रश्न: आंध्र प्रदेश जैसे विकासशील राज्यों में क्षेत्रीय आर्थिक विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देने में नियोजित शहरी बुनियादी ढांचे की भूमिका पर चर्चा कीजिए।

  • आर्थिक इंजन: अमरावती में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट और एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने की क्षमता
  • क्षेत्रीय संतुलन: राज्य भर में तेज़ी से होते शहरी पूंजी विकास के साथ संतुलित क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित करना

मुख्य शब्द: अर्बन प्लानिंग · आर्थिक इंजन · क्षेत्रीय विकास · इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट · विधायी जनादेश

GS3कृषि › भूमि सुधारप्रीलिम्स

तेलंगाना के सिद्दीपेट जिले ने पारदर्शिता बढ़ाने और अवैध रेत व्यापार को रोकने के लिए 'मना इसुका वाहनम' योजना शुरू की है

चर्चा में क्यों: तेलंगाना के सिद्दीपेट जिले ने पारदर्शिता बढ़ाने और अवैध रेत व्यापार को रोकने के लिए 'मना इसुका वाहनम' योजना शुरू की है, जिसके तहत ऑनलाइन रेत बुकिंग की सुविधा दी जाएगी।

यह योजना नागरिकों को एक आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण करने, अनुरोध भेजने और शुल्क का भुगतान करने की अनुमति देती है। ग्राम पंचायत सचिवों और तहसीलदारों द्वारा सत्यापन के बाद ही मंजूरी दी जाती है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • योजना'Mana Isuka Vahanam' तेलंगाना के सिद्दीपेट जिले में शुरू की गई एक सैंड बुकिंग स्कीम (sand booking scheme) है।
  • तथ्यबुकिंग प्रक्रिया में रजिस्ट्रेशन, रिक्वेस्ट सबमिशन, फीस पेमेंट और पंचायत सचिवों एवं तहसीलदार द्वारा वेरिफिकेशन शामिल है।
  • पदपुलिस कमिश्नर रश्मि पेरुमल ने अवैध रेत परिवहन के खिलाफ चेतावनी जारी की।
मेन्स के लिए

प्रश्न: रेत जैसे प्राकृतिक संसाधनों की खरीद प्रक्रिया के डिजिटलीकरण से अवैध खनन को कैसे कम किया जा सकता है और स्थानीय शासन में पारदर्शिता कैसे सुधारी जा सकती है, इस पर चर्चा कीजिए।

  • रेगुलेटरी ओवरसाइट: पंचायत सचिवों और तहसीलदार की वेरिफिकेशन भूमिका को मज़बूत करना
  • पारदर्शिता तंत्र: डायरेक्ट-टू-सिटिजन ऑनलाइन बुकिंग पोर्टल्स के जरिए बिचौलियों के हस्तक्षेप को कम करना
  • एन्फोर्समेंट गैप: अवैध परिवहन की फिजिकल पुलिसिंग के साथ एडमिनिस्ट्रेटिव डिजिटल ट्रैकिंग को संतुलित करना

मुख्य शब्द: पारदर्शिता · डिजिटल गवर्नेंस · संसाधन प्रबंधन · अवैध खनन · सार्वजनिक जवाबदेही

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सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड (Central Ground Water Board) ने एक रिपोर्ट जारी की है

चर्चा में क्यों: सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड (Central Ground Water Board) ने एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें आंध्र प्रदेश में भूजल के बढ़ते दोहन और लवणता (salinity) पर चिंता जताई गई है। यह स्थिति पीने के पानी और कृषि के लिए खतरा पैदा कर रही है।

रिपोर्ट में आंध्र प्रदेश के 12 मंडलों (1.8%) को 'अति-दोहन' (over-exploited), 3 को 'गंभीर' (critical) और 24 को 'अर्ध-गंभीर' (semi-critical) के रूप में चिह्नित किया गया है। वर्तमान में कुल उपलब्ध भूजल संसाधन का 31.51% हिस्सा निकाला जा रहा है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थासेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड (CGWB) जल संसाधन विभाग (Department of Water Resources) के अंतर्गत कार्य करता है।
  • तथ्यरिपोर्ट किए गए क्षेत्रों में वर्तमान में कुल निकाल योग्य भूजल संसाधन (extractable groundwater resource) का 31.51% निकाला जाता है।
  • स्थानआंध्र प्रदेश के मंडलों को निष्कर्षण स्तरों (extraction levels) के आधार पर ओवर-एक्सप्लॉइटेड (over-exploited), क्रिटिकल (critical) और सेमी-क्रिटिकल (semi-critical) श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: कृषि प्रधान राज्यों में भूजल के अत्यधिक दोहन से उत्पन्न चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए और कृषि संबंधी मांग एवं सतत जल प्रबंधन के बीच संतुलन स्थापित करने हेतु उचित उपायों का सुझाव दीजिए। चर्चा कीजिए।

  • खारापन का असर: अत्यधिक निकासी के कारण मिट्टी के स्वास्थ्य और पीने योग्य पानी की गुणवत्ता में गिरावट
  • संसाधनों का असंतुलन: भूजल पर अत्यधिक निर्भरता बनाम सतही जल भंडारण बुनियादी ढांचे की कमी
  • पॉलिसी गैप: ग्राउंडवाटर निकालने की सीमा और रिचार्ज मैकेनिज्म पर लोकल मैंडेट्स की ज़रूरत

मुख्य शब्द: भूजल का अत्यधिक दोहन · लवणता · सतत जल प्रबंधन · सतह जल भंडारण · संसाधनों की कमी

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नमो ड्रोन दीदी योजना (NDDY) के तहत महिलाओं के स्वयं सहायता समूह (SHG) के सदस्यों को ड्रोन पायलट के रूप में प्रशिक्षित करने में कर्नाटक अग्रणी राज्य के रूप में उभरा है

चर्चा में क्यों: नमो ड्रोन दीदी योजना (NDDY) के तहत महिलाओं के स्वयं सहायता समूह (SHG) के सदस्यों को ड्रोन पायलट के रूप में प्रशिक्षित करने में कर्नाटक अग्रणी राज्य के रूप में उभरा है।

नमो ड्रोन दीदी योजना (NDDY) केंद्र सरकार की एक पहल है, जिसका उद्देश्य महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को कृषि के लिए ड्रोन संचालन में प्रशिक्षित कर उन्हें सशक्त बनाना है। कर्नाटक ने 145 सदस्यों को प्रशिक्षित किया है, जबकि उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 16 सदस्य प्रशिक्षित हैं। देश भर में अब तक कुल 1,094 सदस्यों को इस योजना के तहत प्रशिक्षण दिया गया है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • योजनानमो ड्रोन दीदी योजना (Namo Drone Didi Yojana): ड्रोन पायलट के रूप में महिलाओं के SHG सदस्यों को प्रशिक्षित करनेके लिए केंद्र सरकार की एक पहल।
  • तथ्यकर्नाटक: प्रशिक्षित SHG ड्रोन पायलटों की सबसे अधिक संख्या वाला राज्य (145 सदस्य)।
  • तथ्यप्रयागराज, उत्तर प्रदेश: 16 प्रशिक्षित सदस्यों के साथ अग्रणी जिला।
  • तथ्यअप्रैल 2026 तक, पूरे भारत में 1,094 SHG सदस्यों को प्रशिक्षित किया गया।
मेन्स के लिए

प्रश्न: महिला नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से कृषि में ड्रोन तकनीक के एकीकरण से ग्रामीण आजीविका को कैसे सुदृढ़ किया जा सकता है और भारत में सटीक कृषि (प्रिसिजन फार्मिंग) को कैसे बढ़ावा दिया जा सकता है, चर्चा कीजिए।

  • आजीविका विविधीकरण: SHGs को पारंपरिक श्रम से कृषि-इनपुट मैनेजमेंट में हाई-टेक सर्विस प्रोवाइडर के रूप में बदलना
  • प्रिसिजन एग्रीकल्चर: ड्रोन आधारित स्प्रेइंग के जरिए केमिकल रनऑफ कम करना और पेस्टीसाइड का बेहतर इस्तेमाल
  • जेंडर-टेक ब्रिज: ग्रामीण महिलाओं को विशेष तकनीकी ट्रेनिंग देकर डिजिटल डिवाइड को कम करना

मुख्य शब्द: प्रिसिजन फार्मिंग · आजीविका सशक्तिकरण · एग्री-टेक · स्वयं सहायता समूह · डिजिटल इन्क्लूजन

GS3कृषि › MSP, खरीद, PDS एवं खाद्य सुरक्षाप्रीलिम्स + मेन्स

ईरान में चल रहे युद्ध के कारण उर्वरक और गैस की आपूर्ति में बाधा आने से भारत में संभावित खाद्य संकट और फसल की पैदावार में गिरावट को लेकर किसान चिंता जता रहे हैं

चर्चा में क्यों: ईरान में चल रहे युद्ध के कारण उर्वरक और गैस की आपूर्ति में बाधा आने से भारत में संभावित खाद्य संकट और फसल की पैदावार में गिरावट को लेकर किसान चिंता जता रहे हैं।

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उर्वरक उपभोक्ता देश है और आयात के लिए खाड़ी देशों पर काफी हद तक निर्भर है। वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (World Food Programme) का अनुमान है कि यदि संघर्ष जारी रहता है, तो 4.5 करोड़ अतिरिक्त लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा (food insecurity) का सामना कर सकते हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यभारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उर्वरक (fertilizer) उपभोक्ता है।
  • संस्थावर्ल्ड फूड प्रोग्राम (World Food Programme - WFP) का अनुमान है कि संघर्ष के कारण 45 मिलियन लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा (acute food insecurity) का सामना कर सकते हैं।
  • स्थानश्रीलंका ने 2019 में इसी तरह के उर्वरक-प्रेरित संकट (fertilizer-induced crisis) का सामना किया था।
मेन्स के लिए

प्रश्न: वैश्विक भू-राजनीतिक संघर्षों के प्रति भारत के कृषि क्षेत्र की संवेदनशीलता का विश्लेषण कीजिए और उर्वरक आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए।

  • सप्लाई चेन की कमजोरी: ज़रूरी कृषि इनपुट्स के लिए गल्फ आयात पर भारी निर्भरता
  • खाद्य सुरक्षा पर जोखिम: घरेलू बाजारों में फसल की पैदावार घटने और कीमतों में उतार-चढ़ाव की संभावना
  • पॉलिसी ट्रेड-ऑफ: तत्काल उर्वरक सब्सिडी और जैविक/स्थानीय इनपुट्स की ओर लंबे समय के बदलाव के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: खाद्य सुरक्षा · सप्लाई चेन में रुकावट · इनपुट सब्सिडी · भू-राजनीतिक जोखिम · कृषि लचीलापन

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तेलंगाना सरकार ने तेलंगाना भू भारती (Record of Rights in Land) एक्ट 2025 लागू किया है

चर्चा में क्यों: तेलंगाना सरकार ने तेलंगाना भू भारती (Record of Rights in Land) एक्ट 2025 लागू किया है। इसके तहत, तेलंगाना भूमि रिकॉर्ड की पासबुक में लैंड मैप (Land Map) शामिल करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है।

इस अधिनियम के तहत नामांतरण (mutation) और उत्तराधिकार संबंधी लेन-देन के लिए सर्वेक्षण या उप-विभाजन मानचित्र जमा करना अनिवार्य है। यह दोहरा पंजीकरण रोकने और कृषि भूमि के क्रमिक सर्वेक्षण को सुगम बनाने के लिए 'भू-धार' (Bhudhaar) विशिष्ट पहचान संख्या की शुरुआत करता है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • अधिनियम / विधेयकतेलंगाना भू भारती (Record of Rights in Land) एक्ट 2025।
  • तथ्यBhudhaar: जमीन की डबल रजिस्ट्रेशन (double registration) को रोकने के लिए भूमि हेतु यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर्स।
  • स्थानतेलंगाना: भारत का पहला राज्य जिसने लैंड पासबुक में मैप्स (maps) शामिल किए।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण और स्थानिक मानचित्रण (spatial mapping) के एकीकरण से भूमि संबंधी मुकदमों को कम करने और कृषि उत्पादकता में सुधार लाने की क्षमता का विश्लेषण कीजिए।

  • डेटा इंटीग्रिटी: यूनिक भूधर आइडेंटिफायर के जरिए धोखाधड़ित डबल रजिस्ट्रेशन कम करना
  • प्रशासनिक दक्षता: अनिवार्य सब-डिवीजन मैप के जरिए म्यूटेशन और विरासत प्रक्रियाओं को सरल बनाना
  • सर्वे लॉजिस्टिक्स: खंडित कृषि जोतों के इंक्रीमेंटल सर्वे में बाधाओं को दूर करना

मुख्य शब्द: भूमि रिकॉर्ड · म्यूटेशन · स्पेशियल मैपिंग · पारदर्शिता · कृषि सुधार

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सिविल सप्लाइज़ मंत्री नडेंडला मनोहर ने घोषणा की है कि 4 अप्रैल से आंध्र प्रदेश में रबी धान की खरीद का रिकॉर्ड लक्ष्य 23 लाख MT निर्धारित किया गया है

चर्चा में क्यों: सिविल सप्लाइज़ मंत्री नडेंडला मनोहर ने घोषणा की है कि 4 अप्रैल से आंध्र प्रदेश में रबी धान की खरीद का रिकॉर्ड लक्ष्य 23 लाख MT निर्धारित किया गया है।

सरकार का लक्ष्य आंध्र प्रदेश में अब तक की सर्वाधिक 23 लाख मीट्रिक टन (MT) धान की खरीद करना है। इसे सुगम बनाने के लिए, 5.4 करोड़ गननी बैग्स और GPS ट्रैकिंग से लैस 17,200 लॉरियों की तैनाती की जाएगी।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यखरीद लक्ष्य: आंध्र प्रदेश में 23 लाख MT रबी धान।
  • तथ्यलॉजिस्टिक्स: मूवमेंट मॉनिटरिंग के लिए GPS ट्रैकिंग के साथ 17,200 lorries।
  • तथ्यइंफ्रास्ट्रक्चर: खरीद के लिए 5.4 करोड़ गन्यसैक्स (gunnysacks) उपलब्ध।
  • तथ्यपेमेंट की समय-सीमा: प्रोक्योरमेंट (procurement) के 24 घंटों के भीतर।
मेन्स के लिए

प्रश्न: रबी सीजन के दौरान किसानों के लिए मूल्य प्राप्ति सुनिश्चित करने में समय पर खरीद और लॉजिस्टिक बुनियादी ढांचे के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • लॉजिस्टिक बॉटलनेक: कटाई के बाद होने वाले नुकसान को रोकने के लिए रियल-टाइम GPS मॉनिटरिंग और पर्याप्त स्टोरेज सुनिश्चित करना
  • वित्तीय लिक्विडिटी: छोटे और सीमांत किसानों द्वारा संकट में की जाने वाली बिक्री को कम करने पर 24 घंटे के पेमेंट साइकिल का प्रभाव

मुख्य शब्द: कीमत की प्राप्ति · कटाई के बाद होने वाला नुकसान · लॉजिस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर · डिस्ट्रेस सेल · खरीद दक्षता

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राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सिंचाई के लिए दिन में बिजली की योजना को 24 जिलों तक विस्तारित करने की घोषणा की है, जिसमें दौसा और करौली भी शामिल हैं

चर्चा में क्यों: राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सिंचाई के लिए दिन में बिजली की योजना को 24 जिलों तक विस्तारित करने की घोषणा की है, जिसमें दौसा और करौली भी शामिल हैं।

इस पहल का उद्देश्य दौसा में लगभग 52,400 और करौली में 35,300 कृषि उपभोक्ताओं को लाभ पहुँचाना है। जयपुर डिस्कॉम (Discom) बिजली आपूर्ति की निगरानी करेगा, जबकि अजमेर, जोधपुर और सिरोही डिस्कॉम भी इस परियोजना में शामिल होंगे।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • स्थानराजस्थान के दौसा और करौली जिले ऐसे जिले हैं जहाँ दिन के समय सिंचाई के लिए बिजली की आपूर्ति का विस्तार किया जा रहा है।
  • तथ्ययह योजना दौसा में लगभग 52,400 और करौली में 35,300 उपभोक्ताओं को लक्षित करती है।
  • संस्थाजयपुर Discom विस्तारित सिंचाई योजना के लिए बिजली आपूर्ति की निगरानी करने वाली प्राथमिक संस्था है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: राजस्थान जैसे शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में सिंचाई की पद्धतियों को दिन के समय स्थानांतरित करने से कृषि उत्पादकता और किसानों की सुरक्षा में होने वाले सुधारों का विश्लेषण कीजिए।

  • सुरक्षा-उत्पादकता समझौता: पीक-लोड बिजली मांग को मैनेज करते हुए वन्यजीवों से होने वाले रात के सिंचाई जोखिमों को कम करना
  • इंफ्रास्ट्रक्चर की बाधा: हाई-इंटेंसिटी डे-टाइम इरिगेशन लोड को सपोर्ट करने के लिए मजबूत ग्रिड स्टेबिलिटी की ज़रूरत

मुख्य शब्द: कृषि उत्पादकता · सिंचाई प्रबंधन · ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर · रिसोर्स ऑप्टिमाइजेशन

GS3कृषि › भूमि सुधारमेन्स

बिहार और राजस्थान में MGNREGS के श्रमिक नए ग्रामीण रोजगार कानून के लागू होने के दौरान केंद्र सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन के बावजूद काम न मिलने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं

चर्चा में क्यों: बिहार और राजस्थान में MGNREGS के श्रमिक नए ग्रामीण रोजगार कानून के लागू होने के दौरान केंद्र सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन के बावजूद काम न मिलने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं।

बिहार और राजस्थान के श्रमिकों का दावा है कि उन्हें महीनों से काम नहीं मिला है। केंद्र सरकार वर्तमान में एक नई ग्रामीण रोजगार योजना के लिए ढांचा (framework) स्थापित करने हेतु राज्यों के साथ बातचीत कर रही है।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • तथ्यबिहार और राजस्थान के जिलों में विरोध प्रदर्शनों की खबरें मिलीं।
  • संस्थाकेंद्रीय सरकार: नए ग्रामीण रोजगार कानून के लिए फ्रेमवर्क स्थापित करने के लिए जिम्मेदार।
मेन्स के लिए

प्रश्न: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) से एक नए ग्रामीण रोजगार ढांचे की ओर संक्रमण में निहित चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए और ग्रामीण आजीविका एवं गरीबी उन्मूलन पर इसके संभावित प्रभावों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

  • इम्प्लीमेंटेशन गैप: स्पष्ट निर्देशों और फ्रेमवर्क की कमी से ग्रामीण मजदूरों का काम रुका
  • पॉलिसी ट्रांज़िशन में घर्षण: MGNREGA से नए कानून की ओर बदलाव के दौरान काम के असाइनमेंट में अनिश्चितता

मुख्य शब्द: ग्रामीण आजीविका · रोजगार गारंटी · नीति परिवर्तन · कार्यान्वयन में रुकावट · गरीबी उन्मूलन

GS3कृषि › भूमि सुधारमेन्स

टी एसोसिएशन ऑफ इंडिया (TAI) ने असम सरकार से बागान श्रमिकों के भूमि अधिकारों से जुड़ी प्रशासनिक और कानूनी जटिलताओं को स्पष्ट करने और वेतन की गणना में वस्तु के रूप में मिलने वाले लाभों (in-kind benefits) को मान्यता देने का आग्रह किया है

चर्चा में क्यों: टी एसोसिएशन ऑफ इंडिया (TAI) ने असम सरकार से बागान श्रमिकों के भूमि अधिकारों से जुड़ी प्रशासनिक और कानूनी जटिलताओं को स्पष्ट करने और वेतन की गणना में वस्तु के रूप में मिलने वाले लाभों (in-kind benefits) को मान्यता देने का आग्रह किया है।

अध्यक्ष शैलजा मेहता के नेतृत्व में टी एसोसिएशन ऑफ इंडिया (TAI) ने बागान श्रमिकों को भूमि अधिकार प्रदान करने वाले संशोधित कानून पर स्पष्टता मांगी है। इस संस्था ने गिरवी रखी गई भूमि के हस्तांतरण और 'राइट टू फेयर कंपनसेशन एंड ट्रांसपेरेंसी इन लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रिसेटलमेंट एक्ट, 2013' (भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्वस्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013) के तहत मिलने वाले मुआवजे से संबंधित मुद्दों पर प्रकाश डाला है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • संस्थाटी एसोसिएशन ऑफ इंडिया (Tea Association of India - TAI) चाय उद्योग के हितों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था है।
  • अधिनियम / विधेयकराइट टू फेयर कंपनसेशन एंड ट्रांसपेरेंसी इन लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रिसेटलमेंट एक्ट, 2013।
  • योजनाअसम टी इंडस्ट्रीज स्पेशल इंसेंटिव स्कीम (Assam Tea Industries Special Incentive Scheme)।
  • तथ्यTAI ने लेबर कोड में बदलाव के तहत वेतन की गणना में इन-काइंड बेनिफिट्स (in-kind benefits) की मान्यता की मांग की।
मेन्स के लिए

प्रश्न: असम में चाय उद्योग की परिचालन संबंधी आवश्यकताओं और बागान श्रमिकों के भूमि अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने में आने वाली चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

  • कानूनी अस्पष्टता: 2013 लैंड एक्विजिशन एक्ट के तहत गिरवी रखी जमीन को ट्रांसफर करने में जटिलता
  • लेबर वेलफेयर: इन-काइंड बेनिफिट की पहचान और स्टैंडर्डाइज्ड वेज कैलकुलेशन के बीच टकराव
  • राजकोषीय निर्भरता: उद्योगों की व्यवहार्यता के लिए असम टी इंडस्ट्रीज स्पेशल इंसेंटिव स्कीम पर निर्भरता

मुख्य शब्द: भूमि स्वामित्व · श्रम अधिकार · वस्तु के रूप में लाभ · भूमि अधिग्रहण · कृषि संकट

GS3कृषि › MSP, खरीद, PDS एवं खाद्य सुरक्षाप्रीलिम्स + मेन्स

उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण पर संसदीय स्थायी समिति ने किसानों को दिए जाने वाले गन्ने के बकाया भुगतान में 32 गुना की वृद्धि पर चिंता जताई है

चर्चा में क्यों: उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण पर संसदीय स्थायी समिति ने किसानों को दिए जाने वाले गन्ने के बकाया भुगतान में 32 गुना की वृद्धि पर चिंता जताई है, जो 16 फरवरी, 2026 तक ₹16,087 करोड़ तक पहुंच गया है।

संसदीय स्थायी समिति ने नोट किया कि 16 फरवरी, 2026 तक गन्ने की कीमतों का बकाया ₹16,087 करोड़ तक पहुंच गया है। समिति ने भुगतान में देरी के प्राथमिक कारणों के रूप में अतिरिक्त चीनी उत्पादन और कैरीओवर स्टॉक (carryover stock) की पहचान की है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्य16 फरवरी, 2026 तक कुल गन्ना मूल्य बकाया (Sugarcane price arrears): ₹16,087 करोड़।
  • तथ्यपिछले वर्ष की तुलना में बकाया (Arrears) में 32 गुना की वृद्धि हुई।
  • संस्थाउपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण पर संसदीय स्थायी समिति।
  • योजनाप्रस्तावित उपायों में एथेनॉल उत्पादन को प्रोत्साहित करना और चीनी के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price) को संशोधित करना शामिल है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: चीनी उद्योग में उच्च गन्ने बकाया (cane arrears) की समस्या के लिए उत्तरदायी संरचनात्मक मुद्दों की चर्चा कीजिए और इस समस्या के समाधान के रूप में इथेनॉल उत्पादन की व्यवहार्यता का मूल्यांकन कीजिए।

  • बाज़ार में असंतुलन: चीनी का अधिक उत्पादन और भारी स्टॉक शुगर मिलों के लिए लिक्विडिटी की समस्या पैदा कर रहे हैं
  • पॉलिसी इंटरवेंशन: MSP संशोधनों और इथेनॉल में औद्योगिक विविधीकरण को बढ़ावा देने की ज़रूरत के बीच संतुलन
  • किसान संकट: भुगतान में देरी से पैदा हुई वित्तीय अस्थिरता ग्रामीण क्रेडिट साइकिल को प्रभावित कर रही है

मुख्य शब्द: लिक्विडिटी क्रंच · MSP संशोधन · इथेनॉल ब्लेंडिंग · कृषि संकट · सप्लाई-डिमांड असंतुलन

GS3कृषि › MSP, खरीद, PDS एवं खाद्य सुरक्षामेन्स

हरियाणा में पिंक बोलवर्म (Pink Bollworm) के प्रकोप और घटती पैदावार के कारण कपास किसान संकट का सामना कर रहे हैं

चर्चा में क्यों: हरियाणा में पिंक बोलवर्म (Pink Bollworm) के प्रकोप और घटती पैदावार के कारण कपास किसान संकट का सामना कर रहे हैं, जिसके चलते वे चावल और पोल्ट्री जैसे वैकल्पिक फसलों की ओर रुख कर रहे हैं।

हरियाणा में कीटों के प्रकोप और डीजल व उर्वरकों की बढ़ती लागत के कारण कपास की पैदावार में भारी गिरावट आई है। सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) वर्तमान में उत्पादन की इन बढ़ती लागतों की भरपाई करने के लिए अपर्याप्त है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यहरियाणा में कपास की पैदावार में गिरावट के लिए पिंक बोलवर्म (Pink bollworm) को मुख्य कीट के रूप में पहचाना गया है।
  • तथ्यहरियाणा के किसान कपास के विकल्प के रूप में चावल और पोल्ट्री फार्मिंग की ओर रुख कर रहे हैं।
  • तथ्यहरियाणा की सरकारी योजनाएं जल-कुशल फसलों (water-efficient crops) को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखती हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: हरियाणा में कपास की खेती में गिरावट के लिए उत्तरदायी कारकों का विश्लेषण कीजिए और लघु कृषकों के लिए कपास की खेती की स्थिरता सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए। चर्चा कीजिए।

  • इनपुट-कॉस्ट में अंतर: डीजल और उर्वरक की बढ़ती कीमतें मौजूदा न्यूनतम समर्थन मूल्य ढांचे से आगे निकल रही हैं
  • पारिस्थितिक-आर्थिक बदलाव: कपास से पानी की अधिक खपत वाली धान की फसलों की ओर बदलाव जल-दक्षता के लक्ष्यों को कमजोर कर रहा है
  • लेबर मार्केट में रुकावट: मौसमी कपास की खेती में गिरावट से ग्रामीण खेतिहर मजदूरों की आजीविका प्रभावित

मुख्य शब्द: न्यूनतम समर्थन मूल्य · इनपुट लागत · फसल विविधीकरण · कीट प्रबंधन · ग्रामीण आजीविका

GS3कृषि › खाद्य प्रसंस्करण एवं आपूर्ति श्रृंखलाप्रीलिम्स

ICAR-सेंट्रल ट्यूबर क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट (CTCRI) ने कसावा के लिए स्टार्च की मात्रा का सटीक और पारदर्शी अनुमान लगाने हेतु एक इलेक्ट्रॉनिक स्टार्च इंडिकेटर विकसित किया है, ताकि किसानों को उचित मूल्य सुनिश्चित किया जा सके

चर्चा में क्यों: ICAR-सेंट्रल ट्यूबर क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट (CTCRI) ने कसावा के लिए स्टार्च की मात्रा का सटीक और पारदर्शी अनुमान लगाने हेतु एक इलेक्ट्रॉनिक स्टार्च इंडिकेटर विकसित किया है, ताकि किसानों को उचित मूल्य सुनिश्चित किया जा सके।

इलेक्ट्रॉनिक स्टार्च इंडिकेटर (Electronic starch indicator) को तिरुवनंतपुरम स्थित ICAR-CTCRI द्वारा EMCON इंडस्ट्रीज के सहयोग से विकसित किया गया है। यह उपकरण हवा और पानी में वजन मापने की दो-चरणीय प्रक्रिया के माध्यम से स्टार्च की मात्रा का अनुमान लगाता है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाICAR-CTCRI: तिरुवनंतपुरम में स्थित सेंट्रल ट्यूबर क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट (Central Tuber Crops Research Institute)।
  • तथ्ययह डिवाइस हवा और पानी में दो-चरणीय वजन माप प्रक्रिया (two-step weight measurement process) का उपयोग करके कसावा स्टार्च की मात्रा का अनुमान लगाता है।
  • पदEMCON industries: इलेक्ट्रॉनिक स्टार्च इंडिकेटर (electronic starch indicator) के विकास के लिए ICAR-CTCRI के साथ साझेदारी की।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में लघु किसानों के लिए कटाई के पश्चात प्रसंस्करण (post-harvest processing) में तकनीकी हस्तक्षेप किस प्रकार मूल्य प्राप्ति और बाजार विश्वास को बेहतर बना सकते हैं? चर्चा कीजिए।

  • सूचना की कमी: पारदर्शी स्टार्च अनुमान के अभाव से किसानों को कम खरीद कीमतें मिलती हैं
  • वैल्यू चेन इंटीग्रेशन: मैनुअल एस्टिमेशन से इलेक्ट्रॉनिक इंडिकेटर्स पर जाना मानवीय गलती और धोखाधड़ी को कम करता है
  • टेक्नोलॉजी ट्रांसफर: लैब में विकसित स्टार्च इंडिकेटर्स को विकेंद्रीकृत ग्रामीण कलेक्शन सेंटर्स तक ले जाने की चुनौतियां

मुख्य शब्द: कीमत की खोज · कटाई के बाद की तकनीक · वैल्यू चेन में पारदर्शिता · छोटे किसानों का सशक्तिकरण · कृषि नवाचार

GS3कृषि › भूमि सुधारप्रीलिम्स

ओडिशा सरकार ने भीषण गर्मी से श्रमिकों को बचाने के लिए 1 अप्रैल से 15 जून तक सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच बाहर काम करने पर रोक लगाने वाला एक नोटिफिकेशन जारी किया है

चर्चा में क्यों: ओडिशा सरकार ने भीषण गर्मी से श्रमिकों को बचाने के लिए 1 अप्रैल से 15 जून तक सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच बाहर काम करने पर रोक लगाने वाला एक नोटिफिकेशन जारी किया है।

श्रम विभाग और कर्मचारी राज्य बीमा (Employees’ State Insurance) ने सरकारी, गैर-सरकारी, औद्योगिक और निर्माण क्षेत्रों के लिए अधिसूचना जारी की है। यह कदम भुवनेश्वर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा दिए गए हीट प्रेडिक्शन्स (heat predictions) के बाद उठाया गया है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • स्थानमेट्रोलॉजिकल सेंटर, भुवनेश्वर: राज्य के लिए हीट प्रेडिक्शन्स (heat predictions) का स्रोत।
  • तथ्यकार्य प्रतिबंध की अवधि: 1 अप्रैल से 15 जून।
  • तथ्यआउटडोर लेबर (outdoor labor) के लिए प्रतिबंधित समय: सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक।
  • संस्थालेबर और एम्प्लॉइज स्टेट इंश्योरेंस विभाग (Department of Labour and Employees’ State Insurance): नोटिफिकेशन जारी करने के लिए जिम्मेदार निकाय।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में जलवायु-प्रेरित स्वास्थ्य खतरों से प्रवासी और निर्माण श्रमिकों की सुरक्षा हेतु आवश्यक विधायी और प्रशासनिक उपायों पर चर्चा कीजिए।

  • व्यावसायिक सुरक्षा: असंगठित निर्माण क्षेत्र में हीट-स्ट्रेस प्रोटोकॉल की कमी
  • रेगुलेटरी एनफोर्समेंट: गैर-सरकारी और निजी औद्योगिक प्रतिष्ठानों में कंप्लायंस की निगरानी में चुनौतियां

मुख्य शब्द: व्यावसायिक स्वास्थ्य · जलवायु अनुकूलन · श्रम कल्याण · हीट स्ट्रेस · रेगुलेटरी कंप्लायंस

GS3कृषि › MSP, खरीद, PDS एवं खाद्य सुरक्षाप्रीलिम्स

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने तेलंगाना के किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए 'ऋतु भरोसा' फंड की पहली किस्त जारी की

चर्चा में क्यों: मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने तेलंगाना के किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए 'ऋतु भरोसा' फंड की पहली किस्त जारी की।

तेलंगाना सरकार 'रैथु भरोसा' फंड से तीन चरणों में कुल ₹9,000 करोड़ की राशि वितरित कर रही है। इस फंड का उद्देश्य 70 लाख किसानों को सहायता प्रदान करना है और इसमें फसल विविधीकरण (Crop Diversification) तथा ऑयल पाम की खेती के लिए पहल शामिल है।

प्रीलिम्स बिंदु (5)
  • तथ्यRythu Bharosa फंड की पहली किस्त जारी: ₹3,600 करोड़।
  • तथ्यRythu Bharosa फंड का कुल वितरण लक्ष्य: ₹9,000 करोड़।
  • तथ्यलक्ष्य लाभार्थी संख्या: 70 लाख किसान।
  • तथ्यभुगतान के लिए प्रस्तावित समय सीमा: 45 दिन।
  • तथ्यमुख्य फसल फोकस: ऑयल पाम (Oil palm) की खेती और क्रॉप रोटेशन (Crop rotation)।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में कृषि स्थिरता और किसान कल्याण सुनिश्चित करने में राज्य-आधारित वित्तीय सहायता और फसल विविधीकरण की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

  • इनपुट सुरक्षा: यूरिया जैसे ज़रूरी उर्वरकों के लिए ग्लोबल सप्लाई चेन में रुकावट का खतरा
  • विविधीकरण रणनीति: ग्रामीण आजीविका बढ़ाने के लिए मोनोकल्चर से ऑयल पाम की ओर बदलाव
  • राजकोषीय स्थिरता: डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर और लंबी अवधि के इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: फसल विविधीकरण · डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर · कृषि स्थिरता · इनपुट सिक्योरिटी · ग्रामीण आजीविका

छत्तीसगढ़ विधानसभा ने भर्ती और प्रवेश के लिए होने वाली सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ियों को रोकने के लिए 'छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक, 2026' पारित किया है

चर्चा में क्यों: छत्तीसगढ़ विधानसभा ने भर्ती और प्रवेश के लिए होने वाली सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ियों को रोकने के लिए 'छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक, 2026' पारित किया है।

यह विधेयक प्रश्न पत्रों के अनधिकृत कब्जे या प्रकटीकरण, केंद्रों में अवैध प्रवेश और मूल्यांकन रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ को प्रतिबंधित करता है। यह व्यक्तियों और संस्थानों दोनों के लिए कारावास और जुर्माने सहित दंड का प्रावधान करता है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • अधिनियम / विधेयकछत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक, 2026।
  • तथ्ययह कानून भर्ती और प्रवेश से संबंधित सार्वजनिक परीक्षाओं (public examinations) दोनों को लक्षित करता है।
  • तथ्यउल्लंघन के लिए दंड में कारावास और जुर्माना दोनों शामिल हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: सार्वजनिक परीक्षाओं की शुचिता और भर्ती प्रक्रिया में योग्यता आधारित प्रणाली (मेरिटोक्रेसी) सुनिश्चित करने में विधायी उपायों के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • संस्थागत ईमानदारी: उम्मीदवारों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने हेतु प्रश्न पत्रों के लीक होने से रोकना
  • अकाउंटेबिलिटी फ्रेमवर्क: छेड़छाड़ में शामिल निजी संस्थाओं और सार्वजनिक अधिकारियों के लिए स्पष्ट कानूनी दंड तय करना
  • मेरिटोक्रेसी का क्षरण: शासन में जनता के भरोसे पर परीक्षा में गड़बड़ी के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव को संबोधित करना

मुख्य शब्द: योग्यता आधारित प्रणाली · पारदर्शिता · प्रशासनिक ईमानदारी · विधायी निरीक्षण · सार्वजनिक परीक्षा

GS3कृषि › कृषि सब्सिडी एवं सहायताप्रीलिम्स + मेन्स

क्रॉपलाइफ इंडिया (CropLife India) ने चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया युद्ध के कारण ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई चेन (supply chain) में आने वाली बाधाओं से कीटनाशकों और फसल सुरक्षा रसायनों की कीमतों में 20-25% तक की वृद्धि हो सकती है

चर्चा में क्यों: क्रॉपलाइफ इंडिया (CropLife India) ने चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया युद्ध के कारण ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई चेन (supply chain) में आने वाली बाधाओं से कीटनाशकों और फसल सुरक्षा रसायनों की कीमतों में 20-25% तक की वृद्धि हो सकती है।

कीटनाशक निर्माताओं के एक छाता संगठन (umbrella body) 'क्रॉपलाइफ इंडिया' (CropLife India) ने खरीफ सीजन के दौरान संभावित कमी के प्रति चेतावनी दी है। इस संगठन ने आपूर्ति की कमी और नकली उत्पादों के प्रसार को रोकने के लिए स्थानीय उत्पादन क्षमता को बढ़ाने हेतु सरकारी प्रोत्साहन देने का आग्रह किया है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाक्रॉपलाइफ इंडिया (CropLife India): भारत में कीटनाशक निर्माताओं का प्रतिनिधित्व करने वाली एक अंब्रेला बॉडी (umbrella body)।
  • तथ्यकीटनाशकों और फसल सुरक्षा रसायनों (crop protection chemicals) की कीमतों में 20-25% की वृद्धि का अनुमान है।
  • तथ्यप्रभाव की अवधि: खरीफ सीजन के दौरान संभावित कमी।
मेन्स के लिए

प्रश्न: वैश्विक भू-राजनीतिक संघर्षों का भारत की कृषि आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़ने वाले प्रभावों की चर्चा कीजिए और कृषि-रसायनों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए।

  • सप्लाई चेन की कमजोरी: कीटनाशक निर्माण के लिए आयातित कच्चे माल और ईंधन पर भारी निर्भरता
  • मार्केट इंटीग्रिटी रिस्क: सप्लाई की कमी के दौरान नकली एग्रोकेमिकल्स का प्रसार
  • इनपुट लागत की महंगाई: उत्पादन लागत में बढ़ोतरी से छोटे किसानों के मुनाफे पर असर

मुख्य शब्द: सप्लाई चेन में रुकावट · एग्रोकेमिकल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता · इनपुट लागत महंगाई · बाज़ार विनियमन · भू-राजनीतिक जोखिम

GS3कृषि › फसल पैटर्न एवं सिंचाईप्रीलिम्स

गुजरात और केंद्र सरकार ने 2028 तक ग्रामीण पेयजल आपूर्ति प्रणालियों के विस्तार और उन्हें बनाए रखने के लिए 'जल जीवन मिशन 2.0' (Jal Jeevan Mission 2.0) को लागू करने के उद्देश्य से एक MoU (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर किए हैं

चर्चा में क्यों: गुजरात और केंद्र सरकार ने 2028 तक ग्रामीण पेयजल आपूर्ति प्रणालियों के विस्तार और उन्हें बनाए रखने के लिए 'जल जीवन मिशन 2.0' (Jal Jeevan Mission 2.0) को लागू करने के उद्देश्य से एक MoU (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर किए हैं।

यह समझौता गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल के बीच हस्ताक्षरित किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य ग्राम-स्तरीय प्रबंधन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति प्रणालियों को मजबूत करना, नियमित करना और उन्हें टिकाऊ बनाना है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • योजनाजल जीवन मिशन 2.0: ग्रामीण पेयजल आपूर्ति बुनियादी ढांचे (infrastructure) के लिए एक केंद्रीय पहल।
  • तथ्ययह MoU 2028 तक जल आपूर्ति योजनाओं के पूरा होने और उनकी निरंतरता (sustainability) का लक्ष्य रखता है।
  • संस्थापेयजल और स्वच्छता विभाग (Department of Drinking Water and Sanitation): जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) के लिए नोडल विभाग।
मेन्स के लिए

प्रश्न: ग्रामीण भारत में जल जीवन मिशन के उद्देश्यों की प्राप्ति में ग्राम-स्तरीय प्रबंधन और स्थिरता के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • ऑपरेशनल बॉटलनैक: ग्रामीण जल प्रणालियों के इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण से लंबे समय तक रखरखाव की ओर बदलाव
  • गवर्नेंस मॉडल: विकेंद्रीकृत ग्राम-स्तरीय प्रबंधन बनाम केंद्रीकृत मॉनिटरिंग और ट्रांसपेरेंसी प्रोटोकॉल

मुख्य शब्द: विकेंद्रीकृत शासन · ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर · जल सुरक्षा · सतत विकास · पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप

GS3कृषि › MSP, खरीद, PDS एवं खाद्य सुरक्षाप्रीलिम्स

तेलंगाना सरकार ने रबी सीजन के दौरान 90 लाख टन धानखरीदने का लक्ष्य घोषित किया है, ताकि कुल मिलाकर 152 लाख टन से अधिक का लक्ष्य हासिल किया जा सके

चर्चा में क्यों: तेलंगाना सरकार ने रबी सीजन के दौरान 90 लाख टन धानखरीदने का लक्ष्य घोषित किया है, ताकि कुल मिलाकर 152 लाख टन से अधिक का लक्ष्य हासिल किया जा सके।

स्टेट सिविल सप्लाइज़ कॉर्पोरेशन लिमिटेड 8,251 खरीद केंद्र संचालित करेगी। इन केंद्रों को आधुनिक उपकरणों और भंडारण सुविधाओं से लैस किया जाएगा ताकि किसान-अनुकूल संचालन सुनिश्चित किया जा सके और बाजार के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा प्रदान की जा सके।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यतेलंगाना का रबी सीजन धान खरीद लक्ष्य: 90 लाख टन।
  • तथ्यतेलंगाना का कुल धान खरीद लक्ष्य: 152 लाख टन से अधिक।
  • संस्थास्टेट सिविल सप्लाइज़ कॉर्पोरेशन लिमिटेड (State Civil Supplies Corporation Limited): तेलंगाना में धान की खरीद (paddy procurement) के लिए जिम्मेदार संस्था।
  • तथ्यखोले जाने वाले परचेज सेंटर्स (Purchase Centres) की संख्या: 8,251।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में धान उत्पादक किसानों के लिए मूल्य स्थिरता और आय सुरक्षा सुनिश्चित करने में राज्य-आधारित खरीद तंत्र के महत्व की चर्चा कीजिए।

  • मार्केट वोलाटिलिटी: फसल की अधिकता के दौरान कीमतों में गिरावट से बचाव
  • लॉजिस्टिक बाधाएं: आधुनिक स्टोरेज और तेज़ प्रोक्योरमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत
  • राजकोषीय दबाव: उच्च खरीद लक्ष्यों और सरकारी खजाने की सीमाओं के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: कीमतों में स्थिरता · प्रोक्योरमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर · न्यूनतम समर्थन मूल्य · बाज़ार में उतार-चढ़ाव · खाद्य सुरक्षा

GS3कृषि › भूमि सुधारप्रीलिम्स

कर्नाटक विधानसभा ने कर्नाटक नगर पालिका और कुछ कानून (संशोधन) विधेयक पारित किया है

चर्चा में क्यों: कर्नाटक विधानसभा ने कर्नाटक नगर पालिका और कुछ कानून (संशोधन) विधेयक पारित किया है, जिसके तहत होर्डिंग्स लगाने के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य की गई है और अवैध रूप से लगाए गए होर्डिंग्स पर दंड का प्रावधान किया गया है।

यह विधेयक सभी होर्डिंग्स के लिए शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) से पूर्व अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य बनाता है। इसका उद्देश्य खोए हुए राजस्व की वसूली करना और प्लास्टिक बैनर से जुड़ी पर्यावरणीय समस्या का समाधान करना है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • अधिनियम / विधेयककर्नाटक म्युनिसिपैलिटीज एंड सर्टेन लॉ (अमेंडमेंट) बिल।
  • पदब्यरथी सुरेश: कर्नाटक के शहरी विकास मंत्री (Urban Development Minister)।
  • तथ्ययह बिल सभी होर्डिंग्स के लिए अर्बन लोकल बॉडीज (urban local bodies) से पूर्व अनुमति को अनिवार्य बनाता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: तेजी से शहरीकरण की ओर अग्रसर भारतीय शहरों में राजस्व सृजन की आवश्यकता और सौंदर्यपरक एवं पर्यावरणीय नियमों के प्रवर्तन के बीच संतुलन स्थापित करने में शहरी स्थानीय निकायों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

  • रेवेन्यू लीकेज: अनियंत्रित प्राइवेट एडवरटाइजिंग और मॉनिटरिंग की कमी से नगर निगम के फंड का नुकसान
  • पर्यावरण का नुकसान: शहरी इलाकों में नॉन-बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक बैनर का बढ़ता इस्तेमाल
  • रेगुलेटरी ओवरसाइट: अलग-अलग अर्बन लोकल बॉडीज के लिए स्टैंडर्डाइज्ड लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क की ज़रूरत

मुख्य शब्द: राजस्व सृजन · शहरी शासन · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क · पर्यावरण अनुपालन · नगर निगम प्रशासन

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आंध्र प्रदेश फॉरेस्ट डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (APFDC) वन उत्पादों के लिए भारत सरकार का प्रमाण (Pramaan) सर्टिफिकेट प्राप्त करने वाली भारत की पहली एजेंसी बनने जा रही है

चर्चा में क्यों: आंध्र प्रदेश फॉरेस्ट डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (APFDC) वन उत्पादों के लिए भारत सरकार का प्रमाण (Pramaan) सर्टिफिकेट प्राप्त करने वाली भारत की पहली एजेंसी बनने जा रही है।

प्रमाण (Pramaan) प्रमाणन, इंडियन फॉरेस्ट एंड वुड सर्टिफिकेशन स्कीम (IFWCS) के तहत एक स्वैच्छिक बाजार-आधारित पहल है, जिसे 2023 में शुरू किया गया था। यह उत्पादों की वैधता और उनकी ट्रेसिबिलिटी (traceability) सुनिश्चित करने के लिए नीलगिरी (eucalyptus), कॉफी, रबर और इमारती लकड़ी जैसे उत्पादों का पर्यावरणीय, आर्थिक और सामाजिक मानकों के आधार पर मूल्यांकन करता है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • योजनाप्रमाण (Pramaan) सर्टिफिकेशन को 2023 में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा लॉन्च किया गया था।
  • संस्थाइंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट मैनेजमेंट (IIFM), भोपाल, IFWCS स्कीम को संचालित करता है।
  • तथ्यTrees Outside Forests Management Standard में 5 criteria, 22 indicators और 76 verifiers का उपयोग किया जाता है।
  • स्थानAPFDC आंध्र प्रदेश में वन क्षेत्रों के बाहर उगाई गई यूकेलिप्टस (eucalyptus) को प्रमाणित कर रहा है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में 'प्रमाण' जैसी बाजार-आधारित प्रमाणन योजनाओं के माध्यम से सतत कृषि-वानिकी को बढ़ावा देने और वन-निर्भर समुदायों की आजीविका को बेहतर बनाने की क्षमता का विश्लेषण कीजिए।

  • मार्केट लिंकेज: वेरिफाइड ट्रेसेबिलिटी और सस्टेनेबिलिटी स्टैंडर्ड्स के जरिए भारतीय वन उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना
  • आजीविका सुरक्षा: स्थानीय किसानों के लिए कमर्शियल एक्सट्रैक्शन और सोशल सेफ़गार्ड्स के साथ सस्टेनेबल हार्वेस्टिंग प्रैक्टिस का संतुलन

मुख्य शब्द: सतत प्रबंधन · ट्रेसेबिलिटी · एग्रोफॉरेस्ट्री · मार्केट इंसेंटिव्स · सामाजिक सुरक्षा उपाय

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