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भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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भाग I · स्था. 11.2025 
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मद्रास हाई कोर्ट का आदेश, प्राइवेट स्कूलों को वेबसाइट और बोर्ड पर फीस दिखानी होगी

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चर्चा में क्यों

मद्रास उच्च न्यायालय ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने और मनमाने शुल्क वृद्धि को रोकनेके लिए तमिलनाडु के निजी स्कूलों को शुल्क संरचना को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने का निर्देश दिया है।

पृष्ठभूमि

8 जुलाई, 2026 को, न्यायमूर्ति एम. धनधानी ने संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत आदेश जारी किया। यह निर्देश 'ऑल इंडिया प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस एसोसिएशन' द्वारा दायर एक रिट याचिका के अनुसरण में जारी किया गया था।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • संविधानअनुच्छेद 226: उच्च न्यायालयों को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन और अन्य उद्देश्यों के लिए रिट जारी करने की शक्ति प्रदान करता है।
  • संस्थामद्रास उच्च न्यायालय: भारत का सबसे पुराना उच्च न्यायालय, जो तमिलनाडु के चेन्नई में स्थित है।
  • तथ्ययह आदेश तमिलनाडु के अधिकार क्षेत्र के भीतर आने वाले सभी निजी स्कूलों पर लागू होता है।

मेन्स के लिए

प्रश्न: शिक्षा में समान पहुंच सुनिश्चित करने और छात्रों के व्यावसायिक शोषण को रोकने के लिए निजी शिक्षण संस्थानों में विनियामक निरीक्षण की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँस्रोत: द हिंदू ↗यह भी: GS2 · न्यायपालिका एवं ऐतिहासिक फैसलेयह भी: GS2 · पारदर्शिता, जवाबदेही एवं RTI

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।