भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने फैसला आने से पहले बाहरी प्रभाव (external impressions) बनने से रोकने के लिए सब जुडिस (sub judice) मामलों पर लेख प्रकाशित न करने की सलाह दी है
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चर्चा में क्यों
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने फैसला आने से पहले बाहरी प्रभाव (external impressions) बनने से रोकने के लिए सब जुडिस (sub judice) मामलों पर लेख प्रकाशित न करने की सलाह दी है।
पृष्ठभूमि
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चल रही न्यायिक कार्यवाही पर मीडिया रिपोर्टिंग के रेगुलेशन (regulation) पर चर्चा की। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने तर्क दिया कि हालांकि टिप्पणी सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा है, लेकिन इसे सटीक होना चाहिए और न्यायपालिका के उद्देश्यों पर सवाल उठाने से बचना चाहिए।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- पदसूर्यकांत: भारत के मुख्य न्यायाधीश।
- पदतुषार मेहता: सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया।
- तथ्यSub judice: वे मामले जो वर्तमान में न्यायिक विचार (judicial consideration) के अधीन हैं और जिन पर अभी तक फैसला नहीं हुआ है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में विचाराधीन मामलों (sub judice proceedings) के दौरान प्रेस की स्वतंत्रता और न्यायिक निष्पक्षता बनाए रखने की आवश्यकता के बीच उत्पन्न होने वाले अंतर्विरोधों का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- न्यायिक अखंडता: न्यायिक अधिकारियों और जनता की धारणा पर 'ट्रायल बाय मीडिया' का जोखिम
- संवैधानिक संतुलन: अनुच्छेद 19(1) अभिव्यक्ति की आज़ादी और न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता के बीच संतुलन
- रेगुलेटरी गैप: चल रहे मुकदमे के दौरान मीडिया आचरण के लिए विशिष्ट वैधानिक दिशा-निर्देशों की कमी
मुख्य शब्द: विचाराधीन · न्यायिक निष्पक्षता · प्रेस की आज़ादी · सार्वजनिक विमर्श · कानून का शासन
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।