सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक एक्ट को रद्द किया, 190 अफसरों पर पड़ेगा असर
GS2राजव्यवस्था · शासन · अंतर्राष्ट्रीय संबंध· न्यायपालिका एवं ऐतिहासिक फैसले· प्रीलिम्स + मेन्स·
न्यायिक समीक्षा बनाम विधायी ओवरराइड (Legislative Override): प्रशासनिक अखंडता और कानून के शासन (Rule of Law) पर आधारित एक GS2 केस स्टडी।
चर्चा में क्यों
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक सिविल सर्विसेज (वैलिडेशन ऑफ सिलेक्शन एंड अपॉइंटमेंट ऑफ 2011 बैच गजेटेड प्रोबेशनर्स) एक्ट, 2022 को रद्द कर दिया है। इस कानून के जरिए 190 अधिकारियों की नियुक्तियों को वैध (validate) बनाने की कोशिश की गई थी।
पृष्ठभूमि
सुप्रीम कोर्ट ने 2022 के उस अधिनियम को अमान्य कर दिया है, जिससे 2011 बैच के लगभग 190 गजेटेड प्रोबेशनर प्रभावित हो रहे थे। हालांकि कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे, लेकिन एच.डी. देवेगौड़ा और सिद्धारमैया सहित राजनीतिक नेताओं ने पहले इन उम्मीदवारों के चयन का समर्थन किया था।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थाKPSC: कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन (Karnataka Public Service Commission) राज्य में सिविल सेवाओं में भर्ती के लिए जिम्मेदार संस्था है।
- तथ्य2022 का एक्ट विशेष रूप से 2011 बैच के गजेटेड प्रोबेशनर्स (gazetted probationers) के वैलिडेशन को लक्षित करता था।
- तथ्ययह फैसला लगभग 190 अधिकारियों को प्रभावित करता है।
प्रीलिम्स अभ्यास प्रश्न
कर्नाटक राज्य में सिविल सर्विसेज की भर्ती के लिए कौन सी संस्था जिम्मेदार है?
- (a)राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
- (b)कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन
- (c)संघ लोक सेवा आयोग
- (d)राज्य चुनाव आयोग
उत्तर देखें
उत्तर: (b) कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन — यह नोट कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन (Karnataka Public Service Commission) को राज्य में सिविल सेवाओं की भर्ती के लिए जिम्मेदार संस्था के रूप में पहचानता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: सार्वजनिक भर्ती प्रक्रियाओं की अखंडता सुनिश्चित करने में न्यायिक पुनरावलोकन की भूमिका का परीक्षण कीजिए और प्रशासनिक अनियमितताओं को दरकिनार करने के विधायी प्रयासों के निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- न्यायिक निगरानी: यह सुनिश्चित करना कि योग्यता आधारित सार्वजनिक नियुक्तियों के लिए विधायी अधिनियम संवैधानिक मानकों को दरकिनार न करें
- संस्थागत ईमानदारी: राज्य स्तरीय पब्लिक सर्विस कमीशन के भीतर भ्रष्टाचार के आरोपों को दूर करना
- कानूनी अंतिम निर्णय: नियुक्तियों को नियमित करने की कार्यकारी शक्ति और रूल ऑफ लॉ के सिद्धांत के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: न्यायिक समीक्षा · पब्लिक सर्विस कमीशन · कानून का शासन · प्रशासनिक ईमानदारी · विधायी मान्यता
राजव्यवस्था एवं संविधान पर और नोट्स
- केरलम में विशेष गहन पुनरीक्षण की डेडलाइन बढ़ाने से सुप्रीम कोर्ट ने किया इनकार · 30 अक्टूबर 2026
- कोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग से कमाई पर रोक लगाने को सुप्रीम कोर्ट ने कहा · 30 अक्टूबर 2026
- उत्तर प्रदेश में धांधली के आरोप पर भारत निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को दी रिपोर्ट · 30 अक्टूबर 2026
- AI कॉपीराइट और डीपफेक पर संविधान से मिलेगी गाइडेंस, भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत · 30 अक्टूबर 2026
- चुनाव तैयारियों की समीक्षा के लिए 2 नवंबर को मेरठ आएंगे ECI अधिकारी · 30 अक्टूबर 2026
- जजों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन पर रोक, मद्रास हाई कोर्ट का पुलिस को आदेश · 30 अक्टूबर 2026
कोई गलती या कोई कमी?
किसी नोट में गलती दिखे, या तैयारी के लिए कोई टॉपिक, फॉर्मेट या पीडीएफ चाहिए, तो हमें लिखें। हम हर मेल पढ़ते हैं और गलतियाँ जल्दी ठीक करते हैं।
यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।