भारत में जल्द आएगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर अलग कानून, अश्विनी वैष्णव ने दी जानकारी
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AI के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क (Regulatory framework): डिजिटल गवर्नेंस से संबंधित GS3 विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science & Technology) का एक प्रमुख विषय।
चर्चा में क्यों
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने NDTV वर्ल्ड समिट में संकेत दिया कि भारत जल्द ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) पर एक समर्पित कानून लागू करेगा, ताकि मौजूदा खंडित कानूनों से आगे बढ़ा जा सके।
पृष्ठभूमि
प्रस्तावित AI कानूनी ढांचा (legal framework) एक त्रि-स्तरीय संरचना (three-tier architecture) का उपयोग करेगा, जो सामान्य सिद्धांतों, क्षेत्र-विशिष्ट नियमों और संस्थागत प्रवर्तन पर केंद्रित होगा। इसका उद्देश्य डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 और इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 से परे एक सुसंगत संरचना प्रदान करना है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- अधिनियम / विधेयकइन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट (Information Technology Act), 2000: भारत में IT के लिए मौजूदा प्राथमिक कानून।
- अधिनियम / विधेयकडिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (Digital Personal Data Protection Act), 2023: पर्सनल डेटा को नियंत्रित करने वाला वर्तमान कानून।
- तथ्यप्रस्तावित AI कानून का ढांचा: तीन-स्तरीय संरचना (सामान्य सिद्धांत, सेक्टर-विशिष्ट नियम, संस्थागत प्रवर्तन)।
- पदअश्विनी वैष्णव: केंद्रीय मंत्री जिन्होंने समर्पित AI कानून की ओर बढ़ने की घोषणा की।
प्रीलिम्स अभ्यास प्रश्न
भारत के आगामी समर्पित Artificial Intelligence कानून के लिए प्रस्तावित आर्किटेक्चर क्या है?
- (a)तीन स्तरीय संरचना
- (b)विकेंद्रीकृत निगरानी
- (c)सिंगल-पिलर मॉडल
- (d)दो-स्तरीय ढांचा
उत्तर देखें
उत्तर: (a) तीन स्तरीय संरचना — प्रस्तावित AI लीगल फ्रेमवर्क (legal framework) एक थ्री-टियर आर्किटेक्चर (three-tier architecture) का उपयोग करेगा, जो कॉमन प्रिंसिपल्स (common principles), सेक्टर-स्पेसिफिक रेगुलेशंस (sector-specific regulations) और इंस्टीट्यूशनल एनफोर्समेंट (institutional enforcement) पर केंद्रित होगा।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में नवाचार और नैतिक एवं सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) हेतु एक समर्पित विधायी ढांचे की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
- रेगुलेटरी फ्रैगमेंटेशन: जटिल AI यूज़-केसेस पर IT एक्ट 2000 और DPDP एक्ट 2023 लागू करने की सीमाएं
- संस्थागत प्रवर्तन: एल्गोरिद्मिक जवाबदेही और बायस मिटिगेशन की निगरानी के लिए विशेष निकायों की ज़रूरत
- सेक्टोरल बारीकियां: हेल्थकेयर, फाइनेंस और डिफेंस की खास जरूरतों के साथ यूनिफॉर्म AI प्रिंसिपल्स को संतुलित करना
मुख्य शब्द: रेगुलेटरी फ्रेमवर्क · एल्गोरिद्मिक जवाबदेही · विधायी निगरानी · डिजिटल गवर्नेंस · तकनीकी नैतिकता
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।