सुप्रीम कोर्ट ने लंबित अपीलों के दौरान वादी की जमा राशि के प्रबंधन को मानकीकृत करने के लिए कानून बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है
चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने लंबित अपीलों के दौरान वादी की जमा राशि के प्रबंधन को मानकीकृत करने के लिए कानून बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है, ताकि ब्याज दरों में विसंगति और फैसले के बाद होने वाले मुकदमों को रोका जा सके।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिंह और आलोक अराधे ने टिप्पणी की कि वर्तमान में नियमों में विसंगति के कारण जमा की गई राशि विभिन्न वित्तीय साधनों (financial instruments) में उलझ जाती है। कोर्ट ने जमा राशि को एक एकीकृत योजना में जोड़ने के लिए यू.एस. कोर्ट रजिस्ट्री इन्वेस्टमेंट सिस्टम (CRIS) मॉडल को एक संभावित ढांचे के रूप में सुझाया।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- संस्थालॉ कमीशन ऑफ इंडिया (Law Commission of India): इस बॉडी को नए कानून के लिए अंतरराष्ट्रीय उदाहरणों (precedents) की जांच करने और मंत्रालयों से परामर्श करने का निर्देश दिया गया है।
- स्थानकोर्ट रजिस्ट्री इन्वेस्टमेंट सिस्टम (CRIS): एक यू.एस. मॉडल जहाँ डिपॉजिट्स को एक यूनिफाइड स्कीम में पूल किया जाता है।
- तथ्यसुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि वर्तमान में असंगत नियम जमा फंड पर अलग-अलग इंटरेस्ट रेट (interest rates) का कारण बनते हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: न्यायालयों में जमा की गई धनराशि के प्रबंधन हेतु एक मानकीकृत कानूनी ढांचे की आवश्यकता, पारदर्शिता सुनिश्चित करने और मुकदमों से जुड़े पक्षों के लिए वित्तीय निष्पक्षता बनाए रखने के संदर्भ में चर्चा कीजिए।