नेपाल ने कालापानी-लिंपियाधुरा-लिपुलेख क्षेत्र से होकर गुजरने वाले कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग का विरोध किया है और इस क्षेत्र को अपनी संप्रभुता वाला क्षेत्र बताया है
चर्चा में क्यों: नेपाल ने कालापानी-लिंपियाधुरा-लिपुलेख क्षेत्र से होकर गुजरने वाले कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग का विरोध किया है और इस क्षेत्र को अपनी संप्रभुता वाला क्षेत्र बताया है।
नेपाल कालपानी-लिंपियाधुरा-लिपुलेख क्षेत्र को अपनी संप्रभु क्षेत्रीय भूमि (sovereign territory) के रूप में दावा करता है। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) का कहना है कि इस मार्ग का उपयोग 1954 से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए किया जाता रहा है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
- स्थानकलपानी-लिंपियाधुरा-लिपुलेख: भारत और नेपाल के बीच विवादित क्षेत्र।
- तथ्य1954: वह वर्ष जिससे भारत यह दावा करता है कि तीर्थयात्रा मार्ग स्थापित हो गया है।
- पदविक्रम मिस्री: भारतीय फॉरेन सेक्रेटरी (Foreign Secretary)।
- पदबलेंद्र शाह: नेपाल के प्रधानमंत्री।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत और नेपाल के बीच अनसुलझे क्षेत्रीय विवादों का द्विपक्षीय संबंधों और जन-संपर्क (people-to-people connectivity) पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।
- संप्रभुता का टकराव: कालापानी-लिंपियाधुरा-लिपुलेख क्षेत्र में ओवरलैपिंग क्षेत्रीय दावे क्षेत्रीय सहयोग में बाधा डाल रहे हैं
- डिप्लोमैटिक प्रोटोकॉल: उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय वार्ताओं पर कड़े राजनयिक प्रोटोकॉल का असर
- ऐतिहासिक बनाम आधुनिक दावे: पुराने तीर्थ मार्ग और समकालीन क्षेत्रीय दावों के बीच टकराव
मुख्य शब्द: संप्रभुता · क्षेत्रीय विवाद · द्विपक्षीय संबंध · डिप्लोमैटिक प्रोटोकॉल · भू-राजनीतिक तनाव