यूपीएससी सिविल सेवा GS3 (अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा) के अर्थव्यवस्था भाग से जुड़ी हर ख़बर, परीक्षा के नज़रिए से: चर्चा में क्यों, पृष्ठभूमि, प्रीलिम्स के तथ्य, अभ्यास प्रश्न और मेन्स प्रश्न। अब तक 2,310 नोट्स, रोज़ अपडेट।
पाठ्यक्रम के विषय: बुनियादी ढांचा (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे) (511) · उद्योग, निवेश एवं MSME (474) · मौद्रिक नीति, RBI एवं बैंकिंग (298) · पूंजी बाज़ार एवं SEBI (298) · विकास, महंगाई एवं वृहद आर्थिक संकेतक (279) · राजकोषीय नीति, बजट एवं कर (GST) (189) · रोज़गार एवं समावेशी विकास (142) · बाहरी क्षेत्र, व्यापार एवं FDI (119)
चर्चा में क्यों: आंध्र प्रदेश राज्य सरकार ने सार्वजनिक सुरक्षा और नगर निगम के राजस्व को बढ़ाने के लिए आउटडोर विज्ञापनों और डिस्प्ले उपकरणों को विनियमित करने हेतु G.O. (Ms.No.253) जारी किया है।
नए नियमों के तहत बड़े डिस्प्ले स्ट्रक्चर (display structures) के लिए स्ट्रक्चरल सर्टिफिकेशन, वार्षिक ऑडिट और लायबिलिटी इंश्योरेंस अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही अस्पतालों, स्कूलों, धार्मिक स्थलों, ट्रैफिक जंक्शनों और हेरिटेज साइट्स के पास विज्ञापन देने पर रोक लगा दी गई है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
अधिनियम / विधेयकडिस्प्ले डिवाइस रेगुलेशन के लिए आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा जारी विशिष्ट आदेश G.O. (Ms.No.253) है।
तथ्यविज्ञापन के लिए नगर निगम की संपत्तियों को सार्वजनिक नीलामी (Public Auction) के माध्यम से लीज पर दिया जाएगा।
स्थानप्रोहिबिटेड ज़ोन (Prohibited zones) में धार्मिक स्थल, अस्पताल, स्कूल, ट्रैफिक जंक्शन और हेरिटेज साइट्स शामिल हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: शहरी प्रदर्शन उपकरणों (urban display devices) के विनियमन के माध्यम से नगरपालिका राजस्व सृजन की आवश्यकता और सार्वजनिक सुरक्षा तथा विरासत स्थलों के संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की संभावनाओं का विश्लेषण कीजिए।
रेवेन्यू मॉडल: नगर निगम की संपत्तियों के लिए मनमाने लीजिंग से पारदर्शी पब्लिक ऑक्शन की ओर बदलाव
सुरक्षा मानक: शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क कम करने के लिए अनिवार्य स्ट्रक्चरल सर्टिफिकेशन और लायबिलिटी इंश्योरेंस
ज़ोनिंग प्रतिबंध: धार्मिक और विरासत स्थलों की पवित्रता बनाम व्यावसायिक हितों के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: नगरपालिका राजस्व · अर्बन गवर्नेंस · सार्वजनिक सुरक्षा · विरासत संरक्षण · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क
चर्चा में क्यों: सिंगरेनी कोलरीज कंपनी लिमिटेड (SCCL) और CSIR-IMMT ने भारत की आत्मनिर्भरता को बढ़ाने के लिए कोयला खनन के कचरे से दुर्लभ मृदा खनिज (Rare Earth Minerals) निकालने के लिए एक समझौता किया है।
SCCL और CSIR-IMMT ने SCCL के कोयला संचालन से उत्पन्न खनन कचरे (mining waste) से मूल्यवान दुर्लभ मृदा खनिजों (rare earth minerals) की खोज और निष्कर्षण के लिए एक समझौता किया है। यह पहल इंस्टीट्यूट ऑफ मिनरल्स एंड मैटेरियल्स टेक्नोलॉजी (IMMT) द्वारा विकसित स्वदेशी तकनीकों का उपयोग करती है।
प्रीलिम्स बिंदु (5)
संस्थाSCCL: सिंगरेनी कोलरीज कंपनी लिमिटेड (Singareni Collieries Company Ltd) एक कोयला खनन कंपनी है।
संस्थाCSIR-IMMT: इंस्टीट्यूट ऑफ मिनरल्स एंड मैटेरियल्स टेक्नोलॉजी (Institute of Minerals and Materials Technology) एक CSIR लैब है।
तथ्ययह प्रोजेक्ट कोयला खनन के वेस्ट (waste) से रेयर अर्थ मिनरल्स (rare earth minerals) निकालने पर केंद्रित है।
पदएन. बलराम SCCL के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं।
पदरमनुज नारायण, CSIR-IMMT के डायरेक्टर हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: खनन अपशिष्ट प्रबंधन में चक्रीय अर्थव्यवस्था (circular economy) दृष्टिकोण भारत की दुर्लभ मृदा खनिजों (rare earth minerals) के उत्पादन में रणनीतिक स्वायत्तता को किस प्रकार सुदृढ़ कर सकता है, इसका विश्लेषण कीजिए।
रिसोर्स सिक्योरिटी: हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग के लिए महत्वपूर्ण मिनरल्स पर आयात निर्भरता कम करना
सर्कुलर इकोनॉमी: औद्योगिक कचरे को हाई-वैल्यू मिनरल फीडस्टॉक में बदलना
तकनीकी संप्रभुता: ग्लोबल सप्लाई चेन की बाधाओं को दूर करने के लिए स्वदेशी CSIR टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल
मुख्य शब्द: सर्कुलर इकोनॉमी · दुर्लभ अर्थ मिनरल्स · रणनीतिक स्वायत्तता · माइनिंग वेस्ट मैनेजमेंट · स्वदेशी तकनीक
चर्चा में क्यों: केरल और तमिलनाडु ने तमिलनाडु के तट से खनिज रेत (mineral sand) निकालने और उसे मूल्यवर्धित उत्पादों (value-added products) में बदलने के लिए एक सहयोग समझौता किया है।
केरल मिनरल्स एंड मेटल्स लिमिटेड (KMML) तमिलनाडु सरकार से भूमि आवंटन और केंद्र सरकार की मंजूरी की मांग कर रहा है। इस पहल में केरल उद्योग विभाग, तमिलनाडु उद्योग विभाग और TAMIN (तमिलनाडु सरकार की एजेंसी) के बीच सहयोग शामिल है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाKMML: केरल स्थित एक कंपनी जो मिनरल सैंड (mineral sand) के निष्कर्षण और प्रोसेसिंग में शामिल है।
संस्थाTAMIN: एक तमिलनाडु सरकार की एजेंसी जो मिनरल सैंड इनिशिएटिव (mineral sand initiative) से जुड़ी है।
तथ्यइस प्रोजेक्ट में वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट प्रोसेसिंग के लिए तमिलनाडु के तट से मिनरल सैंड (mineral sand) निकालना शामिल है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में खनिज संसाधन प्रबंधन और क्षेत्रीय औद्योगिक विकास के लिए मूल्य-वर्धन में अंतर-राज्यीय सहयोग के महत्व पर चर्चा कीजिए।
रेगुलेटरी बाधा: तटीय खनन गतिविधियों के लिए केंद्र सरकार से मंजूरी मिलना जटिल
वैल्यू-चेन इंटीग्रेशन: कच्चे खनिज निष्कर्षण से हाई-वैल्यू इंडस्ट्रियल प्रोसेसिंग की ओर बदलाव
अंतर-राज्य तालमेल: खनिज संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के लिए क्षेत्रीय खूबियों का लाभ उठाना
मुख्य शब्द: अंतर-राज्यीय सहयोग · वैल्यू-ऐडेड प्रोडक्ट्स · खनिज निष्कर्षण · इंडस्ट्रियल सिनर्जी · संसाधन प्रबंधन
चर्चा में क्यों: JSW Group ने अमेरिका स्थित Shield AI के साथ साझेदारी में हैदराबाद में अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स (Unmanned Aerial Systems) बनाने के लिए $90 मिलियन के निवेश की घोषणा की है।
JSW ग्रुप, Shield AI के साथ एक दीर्घकालिक लाइसेंसिंग समझौते के तहत V-BAT ड्रोन के उत्पादन के लिए 90 मिलियन डॉलर का निवेश कर रहा है। हैदराबाद स्थित इस सुविधा की वार्षिक क्षमता 300 ड्रोन होगी और इससे 300 से अधिक उच्च-मूल्य वाली नौकरियां पैदा होंगी।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यJSW Group निवेश राशि: $90 मिलियन।
विज्ञान-तकनीकV-BAT ड्रोन: Shield AI के साथ एक लॉन्ग-टर्म लाइसेंसिंग एग्रीमेंट (long-term licensing agreement) के तहत निर्मित।
तथ्यउत्पादन क्षमता: सालाना 300 ड्रोन।
स्थानमैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी का स्थान: हैदराबाद।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अनमैंडेड एरियल सिस्टम्स (UAS) के लिए स्थानीय विनिर्माण केंद्रों की स्थापना किस प्रकार वैश्विक रक्षा प्रौद्योगिकी आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति को सुदृढ़ कर सकती है, चर्चा कीजिए।
सप्लाई चेन इंटीग्रेशन: एंड-टू-एंड लोकल अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स इकोसिस्टम बनाकर आयात पर निर्भरता कम करना
स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी: स्वदेशी उत्पादन क्षमता बनाने के लिए ग्लोबल फर्म्स के साथ लॉन्ग-टर्म लाइसेंसिंग एग्रीमेंट्स का इस्तेमाल
मुख्य शब्द: रक्षा निर्माण · अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स · सप्लाई चेन लोकलाइजेशन · रणनीतिक निवेश · तकनीकी हस्तांतरण
चर्चा में क्यों: रेलवे बोर्ड ने वंदे भारत ट्रेन के कोचों का पहला SS-2 ओवरहॉल (overhaul) करने के लिए तिरुचि में स्थित गोल्डन रॉक रेलवे वर्कशॉप को नामित किया है।
तिरुचि में स्थित गोल्डन रॉक रेलवे वर्कशॉप में 1 दिसंबर, 2025 से एक 16-कोच वाले वंदे भारत रेक का ओवरहॉलिंग कार्य शुरू हो गया है। लगभग 250 तकनीकी कर्मी SS-2 (शॉप शेड्यूल) ओवरहॉल कर रहे हैं, जिसमें बोगियों, पहियों और इलेक्ट्रिकल उपकरणों की जांच शामिल है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यगोल्डन रॉक रेलवे वर्कशॉप (Golden Rock Railway Workshop) भारत के तिरुचि (Tiruchi) में स्थित है।
तथ्यVande Bharat कोच के लिए SS-2 (Shop Schedule) ओवरहॉल प्रक्रिया में 45 दिन लगने की उम्मीद है।
तथ्यनई दिल्ली स्थित रेलवे बोर्ड (Railway Board) वह संस्था है जो वंदे भारत ट्रेन सेट्स के लिए मेंटेनेंस शेड्यूल (maintenance schedules) निर्धारित करने के लिए जिम्मेदार है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में उच्च गति रेल गलियारों की परिचालन दक्षता और सुरक्षा को बढ़ाने में विशिष्ट रखरखाव बुनियादी ढांचे के महत्व पर चर्चा कीजिए।
लॉजिस्टिक बॉटलनेक: हाई-स्पीड कोच मेंटेनेंस के लिए विशेष तकनीकी कर्मियों और भारी मशीनरी की ज़रूरत
ऑपरेशनल रिलायबिलिटी: वंदे भारत फ़्लीट में एक समान सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शॉप शेड्यूल (SS-2) प्रोटोकॉल को स्टैंडर्डाइज़ करना
मुख्य शब्द: इंफ्रास्ट्रक्चर विकास · ऑपरेशनल एफिशिएंसी · मेंटेनेंस प्रोटोकॉल · रेलवे का आधुनिकीकरण
चर्चा में क्यों: वित्त मंत्रालय ने लोकसभा को सूचित किया कि बड़े पैमाने पर बैंक धोखाधड़ी के मामले में नीरव मोदी और विजय मल्ल्या सहित 15 व्यक्तियों को भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (Fugitive Economic Offenders Act - FEOA) के तहत वांछित घोषित किया गया है।
15 भगोड़ों की कुल मूल राशि ₹26,645 करोड़ थी, जिसमें जमा ब्याज की कुल राशि ₹31,437 करोड़ है। जून 2014 से अब तक, PMLA के तहत 120 लोगों को दोषी ठहराया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (5)
तथ्यFugitive Economic Offenders Act (FEOA) के तहत 15 लोगों को वांछित (wanted) घोषित किया गया है।
तथ्य15 भगोड़ों की कुल संचयी मूल राशि (Cumulative principle amount): ₹26,645 करोड़।
तथ्य15 भगोड़ों के लिए कुल संचित ब्याज (Accrued Interest): ₹31,437 करोड़।
तथ्यजून 2014 से अब तक PMLA के तहत 120 लोगों को दोषी ठहराया गया है।
तथ्यप्रवर्तन निदेशालय (ED) ने PMLA के तहत 6,312 मामले दर्ज किए हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भगोड़ा आर्थिक अपराधियों की संपत्तिअधिनियम (Fugitive Economic Offenders Act) और धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) द्वारा बड़े पैमाने पर होने वाले वित्तीय घोटालों को रोकने और फरार अपराधियों से सार्वजनिक धन की वसूली करने में उनकी प्रभावशीलता का विश्लेषण कीजिए।
एसेट रिकवरी में रुकावट: ऑफशोर एसेट्स जब्त करने में मुश्किल और जटिल शेल कंपनी स्ट्रक्चर
कानूनी प्रवर्तन में अंतर: गैर-सहयोगी न्यायक्षेत्रों से हाई-प्रोफाइल आर्थिक अपराधियों को प्रत्यर्पित करने की चुनौतियां
सिस्टमैटिक रिस्क: पब्लिक सेक्टर बैंक लिक्विडिटी पर बड़े पैमाने पर नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स का असर
मुख्य शब्द: नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स · मनी लॉन्ड्रिंग · एसेट रिकवरी · वित्तीय धोखाधड़ी · भगोड़े आर्थिक अपराधी
चर्चा में क्यों: आंध्र प्रदेश के पर्यटन, संस्कृति और सिनेमैटोग्राफी मंत्री कंदुला दुर्गेश ने तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री को बढ़ावा देने और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) में निवेश आकर्षित करने के लिए एक फिल्म पर्यटन नीति की घोषणा की।
इस नीति का उद्देश्य फिल्म उद्योग में 20% हिस्सेदारी सुरक्षित करना है और यह एकीकृत फिल्म सिटी, स्टूडियो और डबिंग यूनिट्स के लिए प्रोत्साहन प्रदान करती है। यह राज्य भर में निवेश के लिए सात प्रमुख एंकर हब और 21 थीमैटिक सर्किट (thematic circuits) की पहचान करती है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यआंध्र प्रदेश का लक्ष्य फिल्म इंडस्ट्री में 20% हिस्सा हासिल करना है।
तथ्ययह पॉलिसी सात प्रमुख एंकर हब्स (anchor hubs) और 21 थीमैटिक सर्किट (thematic circuits) की पहचान करती है।
योजनायह पॉलिसी इंटीग्रेटेड फिल्म सिटीज, स्टूडियो, डबिंग यूनिट्स और री-रिकॉर्डिंग फैसिलिटीज विकसित करने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करती है।
पदकंदुला दुर्गेश आंध्र प्रदेश के पर्यटन, संस्कृति और सिनेमैटोग्राफी मंत्री हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में राज्य-संचालित फिल्म पर्यटन नीतियां क्षेत्रीय आर्थिक विकास और सांस्कृतिक विरासत के संवर्धन में किस प्रकार योगदान दे सकती हैं, चर्चा कीजिए।
इकोनॉमिक मल्टीप्लायर: पोस्ट-प्रोडक्शन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में नौकरियों का सृजन
सांस्कृतिक संरक्षण: हेरिटेज साइट्स की सुरक्षा के साथ कमर्शियल शूटिंग का संतुलन
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: स्टैंडर्डाइज्ड परमिशन और वर्ल्ड-क्लास स्टूडियो फैसिलिटीज की ज़रूरत
मुख्य शब्द: इकोनॉमिक मल्टीप्लायर · सांस्कृतिक पर्यटन · इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट · निवेश प्रोत्साहन · क्षेत्रीय विकास
चर्चा में क्यों: केंद्रीय विद्युत मंत्री श्रीपद नायक ने कहा कि सरकार परमाणु ऊर्जा में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए परमाणु ऊर्जा अधिनियम (Atomic Energy Act) और परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम (Civil Liability for Nuclear Damage Act) में संशोधन पर विचार कर रही है।
सरकार का लक्ष्य 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करना है। स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (Small Modular Reactors - SMRs) और उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों को विकसित करने के लिए ₹20,000 करोड़ के आवंटन के साथ एक समर्पित परमाणु ऊर्जा मिशन शुरू किया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यभारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य: 2047 तक 100 GW।
तथ्यन्यूक्लियर एनर्जी मिशन (Nuclear Energy Mission) के लिए आवंटन: ₹20,000 करोड़।
विज्ञान-तकनीकSMRs: Small Modular Reactors नए न्यूक्लियर एनर्जी मिशन (Nuclear Energy Mission) का मुख्य फोकस हैं।
अधिनियम / विधेयकAtomic Energy Act और Civil Liability for Nuclear Damage Act संशोधन के लिए विचार के तहत प्राथमिक कानून हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के 2047 के परमाणु ऊर्जा क्षमता लक्ष्यों को प्राप्त करने में निजी क्षेत्र की भागीदारी और लघु मॉड्यूल रिएक्टरों (SMRs) के महत्व पर चर्चा कीजिए।
रेगुलेटरी बाधा: परमाणु ऊर्जा अधिनियम के तहत सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल के साथ निजी निवेश प्रोत्साहन को संतुलित करना
तकनीकी बदलाव: विकेंद्रीकृत और स्केलेबल बिजली उत्पादन के लिए बड़े रिएक्टरों से SMRs की ओर बदलाव
लायबिलिटी फ्रेमवर्क: परमाणु क्षति मुआवजे में प्राइवेट लायबिलिटी की जटिलताओं को संबोधित करना
मुख्य शब्द: न्यूक्लियर एनर्जी मिशन · स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स · निजी निवेश · ऊर्जा सुरक्षा · विधायी संशोधन
चर्चा में क्यों: तमिलनाडु सरकार और iVP Semi ने इंजीनियरिंग कॉलेजों में सेमीकंडक्टर टैलेंट नेटवर्क और चिप डिजाइन सुविधाएं स्थापित करने के लिए 'TN 100 Chip Varsity' प्रोजेक्ट शुरू किया है।
इस पहल का उद्देश्य उन्नत सेमीकंडक्टर डिजाइन में प्रतिवर्ष 5,000 छात्रों को प्रशिक्षित करना है। इसका लक्ष्य गाइडेंस तमिलनाडु (Guidance Tamil Nadu) और iVP Semi के बीच साझेदारी के माध्यम से पांच साल की अवधि में 100 नए चिप डिजाइन विकसित करना है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यTN 100 चिप वार्सिटी (Chip Varsity): सेमीकंडक्टर डिजाइन में सालाना 5,000 छात्रों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य।
तथ्यTN 100 चिप वर्सिटी (Chip Varsity): पांच वर्षों में 100 नए चिप डिज़ाइन विकसित करने का लक्ष्य।
संस्थाGuidance तमिलनाडु: सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के लिए iVP Semi के साथ साझेदारी करने वाली राज्य एजेंसी।
स्थानतमिलनाडु: इंजीनियरिंग कॉलेजों में चिप डिजाइन फैसिलिटीज बनाने के लिए पहल शुरू करने वाला राज्य।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में तकनीकी संप्रभुता और औद्योगिक विकास प्राप्त करने के लिए एक सुदृढ़ सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के महत्व की चर्चा कीजिए।
स्किल गैप: VLSI और एडवांस चिप आर्किटेक्चर में विशेषज्ञ टैलेंट की कमी को दूर करना
इंफ्रास्ट्रक्चर की बाधा: शैक्षणिक संस्थानों में हाई-एंड फैब्रिकेशन और डिज़ाइन लैब्स की ज़रूरत
ग्लोबल सप्लाई चेन: इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए महत्वपूर्ण सेमीकंडक्टर कंपोनेंट्स पर आयात निर्भरता कम करना
मुख्य शब्द: सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम · कौशल विकास · तकनीकी संप्रभुता · इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग · पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप
चर्चा में क्यों: HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) नवंबर 2025 में नौ महीने के निचले स्तर पर आ गया, जो बिक्री और उत्पादन की वृद्धि में सुस्ती को दर्शाता है।
HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग PMI अक्टूबर में 59.2 से घटकर नवंबर में 56.6 रह गया। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने उल्लेख किया कि टैरिफ संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए इस वर्ष अमेरिका के साथ एक फ्रेमवर्क ट्रेड डील (framework trade deal) होने की उम्मीद है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यHSBC India Manufacturing PMI नवंबर 2025 में गिरकर 56.6 पर आ गई।
तथ्यPMI ने फरवरी के बाद से ऑपरेटिंग कंडीशंस (operating conditions) में सबसे धीमी सुधार दर्ज किया है।
पदराजेश अग्रवाल भारत के कॉमर्स सेक्रेटरी (Commerce Secretary) हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के विनिर्माण क्षेत्र की सुस्त गति के लिए उत्तरदायी कारकों का विश्लेषण कीजिए और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ करने में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार समझौतों की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
ट्रेड फ्रिक्शन: भारतीय मैन्युफैक्चरिंग एक्सपोर्ट्स की कॉस्ट-कॉम्पिटिटिवनेस पर अंतरराष्ट्रीय टैरिफ का असर
मार्केट में उतार-चढ़ाव: ग्लोबल कंपटीशन और डिमांड में बदलाव के कारण घरेलू प्रोडक्शन ग्रोथ पर असर
चर्चा में क्यों: सरकार लोकसभा में तंबाकू और पान मसाला पर लगने वाले GST कंपनसेशन सेस (GST compensation Cess) को बदलकर, इसे एक्साइज ड्यूटी (excise duty) और एक नए हेल्थ सिक्योरिटी एंड नेशनल सिक्योरिटी सेस (Health Security and National Security Cess) के साथ लागू करने के लिए दो विधेयक पेश कर रही है।
सेंट्रल एक्साइज अमेंडमेंट बिल, 2025 का उद्देश्य GST मुआवजा सेस (Compensation Cess) समाप्त होने के बाद तंबाकू उत्पादों पर टैक्स की दर को बनाए रखना है। हेल्थ सिक्योरिटी एंड नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल, 2025 में विशेष रूप से पान मसाला के निर्माण पर एक नया सेस लगाने का प्रस्ताव दिया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
अधिनियम / विधेयकसेंट्रल एक्साइज अमेंडमेंट बिल, 2025: तंबाकू उत्पादों पर GST कंपनसेशन सेस (compensation Cess) को बदलने के लिए प्रस्तावित।
अधिनियम / विधेयकHealth Security and National Security Cess Bill, 2025: इसके तहत पान मसाला निर्माण पर सेस (Cess) लगाने का प्रस्ताव है।
तथ्यइन बिलों का उद्देश्य GST compensation Cess के बंद होने के बाद 'sin goods' पर टैक्स इंकिडेंस (tax incidence) को बनाए रखना है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में कर संरचना को जीएसटी क्षतिपूर्ति से हटाकर 'सिन गुड्स' (व्यसनकारी वस्तुओं) पर विशिष्ट उत्पाद शुल्क में परिवर्तित करने के राजकोषीय निहितार्थों और सार्वजनिक स्वास्थ्य उद्देश्यों का विश्लेषण कीजिए।
राजकोषीय तटस्थता: कंपनसेशन सेस के बाद तंबाकू उत्पादों पर टैक्स की निरंतरता सुनिश्चित करना
सार्वजनिक स्वास्थ्य का उद्देश्य: तंबाकू और पान मसाला के इस्तेमाल को कम करने के लिए टारगेटेड लेवी का इस्तेमाल करना
रेगुलेटरी बदलाव: इनडायरेक्ट टैक्स कंपनसेशन मॉडल से डायरेक्ट एक्साइज-आधारित लेवी की ओर बदलाव
मुख्य शब्द: राजकोषीय नीति · सिन टैक्स · GST कंपनसेशन सेस · उत्पाद शुल्क · टैक्स इसिडेंस
चर्चा में क्यों: जम्मू-कश्मीर सरकार ने J&K Shops and Establishments Bill, 2025 को लागू करना शुरू कर दिया है, जो व्यापारिक प्रतिष्ठानों को दिन में 24 घंटे काम करने की अनुमति देता है।
दुकान और प्रतिष्ठान विधेयक, 2025 (J&K Shops and Establishments Bill, 2025) को अक्टूबर में पारित किया गया था। इसका उद्देश्य दुकानों और प्रतिष्ठानों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए रोजगार की स्थितियों को विनियमित करना है। इस कानून में 24 घंटे व्यापार संचालन और श्रमिकों के लिए बेहतर सुरक्षा संबंधी प्रावधान शामिल हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
अधिनियम / विधेयकJ&K Shops and Establishments Bill, 2025: रोजगार की स्थितियों को विनियमित करने के लिए अक्टूबर में पारित।
तथ्यनया कानून जम्मू-कश्मीर में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों (business establishments) को दिन में 24 घंटे काम करने की अनुमति देता है।
पदसुरिंदर चौधरी: जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री जिन्होंने इसके कार्यान्वयन (implementation) की घोषणा की।
मेन्स के लिए
प्रश्न: विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में 24 घंटे व्यापार संचालन जैसे श्रम कानून सुधारों के माध्यम से औद्योगिक विकास और श्रमिक कल्याण के बीच संतुलन स्थापित करने की संभावनाओं का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
लेबर राइट्स: काम के लंबे घंटों और अनिवार्य आराम व सुरक्षा मानकों के बीच संतुलन
आर्थिक उत्प्रेरक: स्थानीय व्यापार और सर्विस सेक्टर में रोज़गार बढ़ाने के लिए 24/7 संचालन की क्षमता
रेगुलेटरी ओवरसाइट: नए बिल के तहत बेहतर श्रमिक सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करना
मुख्य शब्द: लेबर रिफॉर्म्स · रोज़गार की शर्तें · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क · आर्थिक उदारीकरण · श्रमिक कल्याण
चर्चा में क्यों: तेलंगाना सरकार ने महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए सभी 119 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में केवल महिलाओं के लिए समर्पित MSME पार्क स्थापित करने की योजना की घोषणा की है।
इस पहल का उद्देश्य 2047 तक तेलंगाना को 3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में महिलाओं को प्रमुख हितधारकों (Stakeholders) के रूप में समर्थन देना है। यह WE हब (WE Hub) कार्यक्रम से पहली 600 महिलाओं के स्नातक होने के बाद शुरू किया गया है, जिसने उन्हें मेंटरशिप और वास्तविक दुनिया का अनुभव प्रदान किया।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यतेलंगाना में राष्ट्रीय औसत की तुलना में महिला श्रम बल भागीदारी दर (female labor force participation rate) अधिक है।
तथ्यराज्य का लक्ष्य 2047 तक $3 ट्रिलियन की इकोनॉमी (economy) हासिल करना है।
तथ्यसरकार की योजना सभी 119 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में MSME पार्क्स स्थापित करने की है।
तथ्यWE Hub प्रोग्राम ने अपनी पहली बैच की 600 महिलाओं को ग्रेजुएट किया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: यह स्पष्ट कीजिए कि समर्पित बुनियादी ढांचा और लक्षित सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) नीतियां उद्यमिता में लैंगिक अंतराल को पाटने और क्षेत्रीय आर्थिक विकास में योगदान देने में किस प्रकार सहायक हो सकती हैं। चर्चा कीजिए।
इंसेंटिव स्ट्रक्चर: महिलाओं के नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स के लिए एंट्री बैरियर्स कम करने हेतु टारगेटेड MSME पार्क्स
लेबर पार्टिसिपेशन: महिलाओं की उच्च लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन को फॉर्मल इकोनॉमिक प्रोडक्शन में बदलना
इकोनॉमिक स्केलिंग: ग्रासरूट एंटरप्रेन्योरशिप को राज्य स्तर के 3 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी लक्ष्यों के साथ जोड़ना
मुख्य शब्द: महिला उद्यमिता · MSME इंफ्रास्ट्रक्चर · आर्थिक सशक्तिकरण · श्रम बल भागीदारी · समावेशी विकास
चर्चा में क्यों: नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने असम सरकार के 2023-24 के बजट की आलोचना की है। CAG ने बजट में 'अवास्तविक' अनुमानों और बिना किसी आवश्यकता के अत्यधिक पूरक अनुदान (Supplementary Grants) को मंजूरी देने पर सवाल उठाए हैं।
CAG ने ₹30,516.47 करोड़ की अप्रयुक्त धनराशि को अत्यधिक बचत के रूप में पहचाना है। इसने बिना किसी आवश्यकता के स्वीकृत ₹30,210.86 करोड़ की पूरक अनुदान (Supplementary Grants) राशि पर भी आपत्ति जताई है। साथ ही, CAG ने कई स्वायत्त परिषदों (Autonomous Councils) के उपयोग प्रमाण पत्र (Utilisation Certificates - UCs) न होने की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यअसम के लिए 2023-24 के लिए अप्रयुक्त फंड (unutilized funds): ₹30,516.47 करोड़।
तथ्यअसम के लिए बिना आवश्यकता के ₹30,210.86 करोड़ के सप्लीमेंट्री ग्रांट्स (Supplementary Grants) को मंजूरी दी गई।
तथ्ययूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट्स (UCs) जमा न करना बजट जवाबदेही (budgetary accountability) में एक बाधा के रूप में चिह्नित किया गया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: राज्य स्तरीय बजटीय प्रबंधन में राजकोषीय अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने में भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की भूमिका का परीक्षण कीजिए। राज्य सरकारें धन के उपयोग की दक्षता में कैसे सुधार कर सकती हैं?
राजकोषीय रिसाव: बजट की मान्यताओं का ज़्यादा अनुमान, जिससे फंड का बड़ा हिस्सा बिना इस्तेमाल के रह गया और 'अत्यधिक बचत' हुई
अकाउंटेबिलिटी गैप: ऑटोनॉमस बॉडीज में यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट्स की कमी से खर्चों की ट्रैकिंग में बाधा
बजट का कुप्रबंधन: बिना ज़रूरत के पूरक अनुदान की मंजूरी वार्षिक बजट की शुचिता को कम करती है
मुख्य शब्द: राजकोषीय अनुशासन · बजट की निगरानी · उपयोगिता प्रमाणपत्र · सार्वजनिक जवाबदेही · राजकोषीय पारदर्शिता
चर्चा में क्यों: इंडियन एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ पॉपुलेशन (IASP) ने अनुमान लगाया है कि गिरती प्रजनन दर (fertility rate) के कारण भारत की जनसंख्या 2080 तक 1.8 से 1.9 बिलियन के बीच स्थिर हो जाएगी।
IASP के महासचिव अनिल चंद्रन ने बताया कि वर्तमान में प्रजनन दर (fertility rate) 2.1 के रिप्लेसमेंट लेवल (replacement level) से नीचे है। इस गिरावट का मुख्य कारण महिलाओं में बढ़ती साक्षरता, गर्भनिरोधक साधनों तक पहुंच और महिलाओं के लिए बढ़ते आर्थिक अवसरों से जुड़ा है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यप्रतिस्थापन स्तर की प्रजनन दर (Replacement level of fertility): 2.1।
तथ्य2080 तक जनसंख्या का अनुमानित स्थिरीकरण (stabilization): 1.8 से 1.9 बिलियन।
स्थानपश्चिम बंगाल और केरल: प्रजनन दर (fertility rates) में महत्वपूर्ण कमी वाले राज्य।
संस्थाIASP: इंडियन एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ पॉपुलेशन।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत की घटती प्रजनन दर और इसके परिणामस्वरूप 2080 तक होने वाले जनसांख्यिकीय परिवर्तन के सामाजिक-आर्थिक निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
डेमोग्राफिक डिविडेंड: युवा आबादी से बुजुर्ग समाज की ओर बदलाव जिसमें जेरियाट्रिक हेल्थकेयर की ज़रूरत है
जेंडर पैरिटी: महिला साक्षरता/आर्थिक भागीदारी और गिरती जन्म दर के बीच संबंध
क्षेत्रीय असमानता: पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों के बीच प्रजनन दर के अलग रुझान
मुख्य शब्द: डेमोग्राफिक ट्रांज़िशन · रिप्लेसमेंट लेवल · प्रजनन दर · महिला साक्षरता · आबादी का स्थिरीकरण
चर्चा में क्यों: भारत सरकार ने चार लेबर कोड्स (Labour Codes) को लागू करने की घोषणा की है, जिससे नियोक्ताओं और ट्रेड यूनियनों के बीच बहस छिड़ गई है। जहाँ नियोक्ता सरलीकरण के पक्ष में हैं, वहीं ट्रेड यूनियन श्रमिकों के अधिकारों में कटौती होने की आशंका जता रहे हैं।
इन चार संहिताओं (Codes) में वेतन संहिता (Code on Wages), औद्योगिक संबंध संहिता (Industrial Relations Code), सामाजिक सुरक्षा संहिता (Code on Social Security) और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियाँ (Occupational Safety, Health and Working Conditions - OSHWC) संहिता शामिल हैं। राज्य सरकारों द्वारा अलग-अलग व्याख्याओं के कारण इनके कार्यान्वयन में देरी हुई है, जिसमें केरल और पश्चिम बंगाल ने इन संहिताओं का विरोध किया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
अधिनियम / विधेयकCode on Wages: कार्यान्वयन के लिए घोषित चार नए labour codes में से एक।
अधिनियम / विधेयकOSHWC Code: Occupational Safety, Health and Working Conditions Code (व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियां कोड)।
तथ्यकेरल और पश्चिम बंगाल वे राज्य हैं जिन्होंने लेबर कोड्स (labour codes) के कार्यान्वयन का विरोध किया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में विभिन्न श्रम कानूनों को चार संहिताओं में एकीकृत करने के औद्योगिक संबंधों और श्रमिक सुरक्षा पर पड़ने वाले निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
संघीय टकराव: लेबर रेगुलेशंस को लेकर केंद्र की विधायी मंशा और राज्य स्तर के विरोध के बीच विवाद
वर्कर्स राइट्स ट्रेड-ऑफ: एम्प्लॉयर कंप्लायंस को आसान बनाने और इनफॉर्मल वर्कर्स के लिए मजबूत सोशल सिक्योरिटी बनाए रखने के बीच तनाव
रेगुलेटरी सरलीकरण: ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस की संभावना बनाम सामूहिक सौदेबाजी के अधिकारों में कमी
मुख्य शब्द: लेबर रिफॉर्म · औद्योगिक संबंध · सामाजिक सुरक्षा · संघवाद · ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस
चर्चा में क्यों: तेलंगाना सरकार पूंजी की लागत कम करने और उद्यमों के लिए फंड तक पहुंच में सुधार करने के लिए एक रोडमैप लागू कर रही है। यह विशेष रूप से उच्च-उत्पादकता वाले, एसेट-लाइट (asset-light) फर्मों और MSMEs के 'मिसिंग मिडिल' (missing middle) वर्ग को लक्षित करता है।
इस रोडमैप में एक सूचना विनिमय प्लेटफॉर्म (Information Exchange Platform), एक इक्विटी गारंटी योजना और एक ब्याज छूट (Interest Subvention) कार्यक्रम शामिल है। तेलंगाना सरकार प्रमुख बैंकों और क्षेत्रीय NBFCs को क्षेत्रीय कमांड सेंटर के रूप में आकर्षित करने के लिए एक 'बैंकिंग ऑप्स 2.0 ज़ोन' (Banking Ops 2.0 Zone) विकसित करने की योजना भी बना रही है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यतेलंगाना की रणनीति 'मिसिंग मिडिल' (missing middle) को टारगेट करती है—जो हाई-प्रोडक्टिविटी और एसेट-लाइट (asset-light) फर्म्स हैं।
योजनाराज्य के रोडमैप में एक इक्विटी गारंटी स्कीम (equity guarantee scheme) और एक इंटरेस्ट सब्वेंशन प्रोग्राम (interest subvention program) शामिल है।
स्थानBanking Ops 2.0 Zone तेलंगाना में एक प्रस्तावित हब है, जिसका उद्देश्य बैंकों और क्षेत्रीय NBFCs को आकर्षित करना है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: पूंजी की लागत को कम करने और 'मिसिंग मिडिल' (मध्यम श्रेणी के उद्यमों की कमी) की समस्या के समाधान से भारतीय राज्यों में औद्योगिक विकास और वित्तीय समावेशन को कैसे बढ़ावा दिया जा सकता है, इसका विश्लेषण कीजिए।
क्रेडिट गैप: उन एसेट-लाइट फर्म्स के लिए फाइनेंसिंग की बाधाओं को दूर करना जिनके पास पारंपरिक कोलैटरल नहीं है
संस्थागत तालमेल: स्थानीय क्रेडिट रिस्पॉन्सिवनेस बढ़ाने के लिए क्षेत्रीय NBFCs और बैंकिंग ऑप्स ज़ोन का लाभ उठाना
राजकोषीय हस्तक्षेप: ब्याज सबवेंशन प्रोग्राम और राज्य स्तर के टिकाऊ राजकोषीय स्वास्थ्य के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: पूंजी की लागत · मिसिंग मिडिल · MSME फाइनेंसिंग · वित्तीय समावेशन · ब्याज छूट · एसेट-लाइट फर्म्स
चर्चा में क्यों: आंध्र प्रदेश कैबिनेट ने अमरावती में एक इंटरनेशनल स्पोर्ट्स सिटी और नए रेलवे स्टेशन सहित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए 16,666 एकड़ भूमि अधिग्रहित करने हेतु लैंड पूलिंग स्कीम (LPS 2.0) को मंजूरी दी है।
LPS 2.0 के अंतर्गत सात गाँवों में से 16,666 एकड़ और उससे सटे सरकारी क्षेत्र की 3,828 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य अमरावती में एक इंटरनेशनल स्पोर्ट्स सिटी (International Sports City), एक नए रेलवे स्टेशन और इनर रिंग रोड (Inner Ring Road) के निर्माण के लिए धन जुटाना है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
स्थानअमरावती आंध्र प्रदेश की राजधानी है।
तथ्यLPS 2.0 सात गांवों में 16,666 एकड़ जमीन का लक्ष्य रखता है।
तथ्यLPS 2.0 में 3,828 एकड़ की सटी हुई सरकारी जमीन शामिल है।
तथ्यइंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में एक इंटरनेशनल स्पोर्ट्स सिटी और एक इनर रिंग रोड शामिल हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: यह स्पष्ट कीजिए कि भूमि एकत्रीकरण योजनाएं (land pooling schemes) ग्रामीण हितधारकों के लिए न्यायसंगत मुआवजे और भूमि अधिकारों को सुनिश्चित करते हुए बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा विकास को कैसे सुगम बना सकती हैं? चर्चा कीजिए।
मुआवजे में समानता: ग्रामीण-शहरी धन की असमानताको रोकने के लिए किसानों को मार्केट के मुताबिक भुगतान सुनिश्चित करना
भूमि अधिग्रहण का टकराव: बुनियादी ढांचे के तेज़ी से विस्तार और कृषि भूमि अधिकारों के संरक्षण के बीच संतुलन
अर्बन प्लानिंग: आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए इनर रिंग रोड और रेल नेटवर्क के जरिए क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को जोड़ना
मुख्य शब्द: लैंड पूलिंग स्कीम · इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट · ग्रामीण मुआवजा · अर्बन प्लानिंग · आर्थिक विकास
चर्चा में क्यों: तेलंगाना सरकार ने प्रतिस्पर्धी बोली (Competitive Bidding) के माध्यम से 3,000 MW सौर ऊर्जा की खरीद और हैदराबाद के मेट्रो ज़ोन में ओवरहेड बिजली की लाइनों को भूमिगत केबलों (Underground Cables) में स्थानांतरित करने के लिए ₹4,051 करोड़ के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है।
तेलंगाना पावर प्लानिंग एंड कोऑर्डिनेशन कमेटी (TGPPCC) ने रिन्यूएबल परचेज ऑब्लिगेशन (RPO) में कमी की पहचान की है। राज्य सरकार का लक्ष्य 2030 तक अतिरिक्त 12,000 MW क्षमता हासिल करना है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यपाँच वर्षों की अवधि के लिए कॉम्पिटिटिव बिडिंग (competitive bidding) के माध्यम से 3,000 MW सोलर पावर की खरीद को मंजूरी दी गई।
तथ्यहैदराबाद मेट्रो ज़ोन में ओवरहेड पावर लाइन्स को अंडरग्राउंड केबल्स में बदलने के लिए ₹4,051 करोड़ आवंटित किए गए हैं।
तथ्यTGPPCC ने Renewable Purchase Obligation (RPO) में कमी की पहचान की और 2030 तक 12,000 MW क्षमता का लक्ष्य निर्धारित किया।
संस्थाTGPPCC: तेलंगाना पावर प्लानिंग एंड कोऑर्डिनेशन कमेटी (Telangana Power Planning and Coordination Committee)।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में सतत शहरी बुनियादी ढांचा लक्ष्यों की प्राप्ति में भूमिगत बिजली वितरण की ओर संक्रमण और नवीकरणीय ऊर्जा खरीद के विस्तार के महत्व पर चर्चा कीजिए।
ग्रिड स्टेबिलिटी: हाई-डिमांड अर्बन लोड की जरूरतों के साथ इंटरमिटेंट सोलर सप्लाई को बैलेंस करना
अर्बन एस्थेटिक्स बनाम लागत: अंडरग्राउंड केबलिंग का भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर बनाम ओवरहेड लाइन्स का मेंटेनेंस
रेगुलेटरी कंप्लायंस: नेशनल क्लाइमेट टारगेट्स के साथ तालमेल बिठाने के लिए RPO को पूरा करना
चर्चा में क्यों: इंडियन कोस्ट गार्ड और कोयंबटूर डिस्ट्रिक्ट स्मॉल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (CODISSIA) डिफेंस इनोवेशन एंड अटल इंक्यूबेशन सेंटर (CDIIC) ने MSMEs को डिफेंस सप्लाई चेन (रक्षा आपूर्ति श्रृंखला) में शामिल करने के लिए एक MoU पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस समझौता ज्ञापन (MoU) का उद्देश्य भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard - ICG) के जहाजों के लिए घटकों के स्वदेशीकरण (indigenization) की गति को तेज करना है। यह समझौता जहाज निर्माण में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के साथ-साथ कोयंबटूर के MSMEs को रक्षा क्षेत्र में आपूर्ति करने में सहायता देने के लिए CDIIC के संसाधनों का उपयोग करता है।
तथ्ययह पहल Indian Coast Guard (ICG) जहाजों के लिए कंपोनेंट्स के स्वदेशीकरण (indigenization) पर केंद्रित है।
संस्थाCDIIC: Defence Innovation & Atal Incubation Centre.
मेन्स के लिए
प्रश्न: समुद्री सुरक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर भारत' के उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को शामिल करने के महत्व की चर्चा कीजिए।
सप्लाई चेन इंटीग्रेशन: छोटे पैमाने की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और हाई-प्रिसिजन डिफेंस जरूरतों के बीच की दूरी को कम करना
स्वदेशीकरण की बाधा: आयातित कंपोनेंट्स से स्थानीय रूप से डिजाइन किए गए मैरीटाइम इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर बदलाव
इंफ्रास्ट्रक्चर सिनर्जी: MSMEs को डिजिटल और तकनीकी सपोर्ट देने के लिए इनक्यूबेशन सेंटर्स का उपयोग
मुख्य शब्द: स्वदेशीकरण · MSME एकीकरण · समुद्री सुरक्षा · आत्मनिर्भर भारत · रक्षा नवाचार
चर्चा में क्यों: वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जुलाई-सितंबर तिमाही में भारत की 8.2% GDP वृद्धि का श्रेय सरकारी सुधारों को दिया है, जिससे घरेलू विनिर्माण (manufacturing) और व्यापार करने में सुगमता (ease of doing business) को बढ़ावा मिला है।
वर्तमान वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में भारत की GDP 8.2% की दर से बढ़ी। अप्रैल-अक्टूबर की अवधि के दौरान वस्तु निर्यात (Merchandise exports) 254.25 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो कि 0.63% की वृद्धि दर्शाता है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यजुलाई-सितंबर तिमाही के लिए भारत की GDP ग्रोथ रेट 8.2% रही।
तथ्यअप्रैल-अक्टूबर की अवधि के दौरान मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स (Merchandise exports) $254.25 बिलियन तक पहुंच गए।
तथ्यअप्रैल-अक्टूबर की अवधि के दौरान मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स (Merchandise exports) में 0.63% की मामूली वृद्धि देखी गई।
मेन्स के लिए
प्रश्न: वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत के उच्च जीडीपी विकास पथ को बनाए रखने में विनिर्माण क्षेत्र में संरचनात्मक सुधार और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (व्यापार करने में सुगमता) की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
मैन्युफैक्चरिंग सिनर्जी: घरेलू उत्पादन क्षमता को एक्सपोर्ट-लेड ग्रोथ मॉडल्स से जोड़ना
रेगुलेटरी फ्रिक्शन: ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस और कड़े इंडस्ट्रियल कंप्लायंस स्टैंडर्ड्स के बीच संतुलन
बाहरी लचीलापन: विविध मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट बेस के जरिए ग्लोबल सप्लाई चेन की अस्थिरता को कम करना
मुख्य शब्द: GDP ग्रोथ · ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस · मैन्युफैक्चरिंग पर ज़ोर · मर्चेंडाइज निर्यात · संरचनात्मक सुधार
चर्चा में क्यों: तेलंगाना सरकार ने 2030 तक एक 'सेंटर ऑफ डिजाइन एक्सीलेंस' (Centre of Design Excellence) स्थापित करने की योजना की घोषणा की है, ताकि राज्य को भारत की डिजाइन राजधानी के रूप में स्थापित किया जा सके।
सेंटर ऑफ डिज़ाइन एक्सीलेंस (Centre of Design Excellence) को यंग इंडिया स्किल्स यूनिवर्सिटी के भीतर स्थापित किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य अनुसंधान और विकास (R&D) और डिज़ाइन इनोवेशन के माध्यम से विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों को सहायता प्रदान करना है। इसके लिए सार्वजनिक शासन में डिज़ाइन को एकीकृत करने वाले हेलसिंकी के मॉडल का उपयोग किया जाएगा।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानहेलसिंकी: तेलंगाना के डिज़ाइन-आधारित गवर्नेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर अप्रोच के लिए मॉडल सिटी।
तथ्यसेंटर ऑफ डिज़ाइन एक्सीलेंस (Centre of Design Excellence) की स्थापना का लक्ष्य वर्ष: 2030।
संस्थायंग इंडिया स्किल्स यूनिवर्सिटी: प्रस्तावित सेंटर ऑफ डिजाइन एक्सीलेंस (Centre of Design Excellence) के लिए होस्ट संस्थान।
मेन्स के लिए
प्रश्न: विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में विनिर्माण और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में डिजाइन नवाचार (design innovation) को एकीकृत करने से सतत आर्थिक विकास को गति देने और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने की क्षमता का विश्लेषण कीजिए।
स्किल-गैप ब्रिज: यंग इंडिया स्किल्स यूनिवर्सिटी में एकेडमिक रिसर्च को इंडस्ट्रियल डिज़ाइन की ज़रूरतों के साथ जोड़ना
गवर्नेंस-डिजाइन नेक्सस: सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्विस डिलीवरी में डिजाइन सिद्धांतों को जोड़ने के लिए हेलसिंकी मॉडल की नकल
मुख्य शब्द: डिज़ाइन इनोवेशन · सतत विकास · अनुसंधान और विकास · मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर · लोक प्रशासन
चर्चा में क्यों: नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (NSO) की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 की जुलाई-सितंबर तिमाही में भारत की रियल GDP (Real GDP) में 8.2% की वृद्धि हुई, जो पिछले वर्ष की विकास दर से अधिक है।
वित्त वर्ष 2025-26 की जुलाई-सितंबर तिमाही में भारत की रियल GDP (Real GDP) में 8.2% की वृद्धि दर्ज की गई। पिछले वर्ष की समान तिमाही में यह वृद्धि दर 5.6% थी। सितंबर तिमाही के लिए नॉमिनल GDP (Nominal GDP) की वृद्धि दर 8.7% दर्ज की गई।
प्रीलिम्स बिंदु (5)
तथ्यवित्त वर्ष 2025-26 की जुलाई-सितंबर तिमाही के लिए Real GDP ग्रोथ रेट: 8.2%।
तथ्यसितंबर तिमाही के लिए नॉमिनल GDP ग्रोथ रेट: 8.7%।
तथ्यरियल प्राइवेट फाइनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (Real Private Final Consumption Expenditure) की ग्रोथ: 7.9% (पिछले साल के 6.4% से अधिक)।
संस्थानेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (National Statistics Office - NSO) वह संस्था है जो GDP डेटा की रिपोर्टिंग के लिए जिम्मेदार है।
तथ्यManufacturing और Construction सेक्टर ने constant prices पर 7.0% से अधिक की ग्रोथ रेट दर्ज की।
मेन्स के लिए
प्रश्न: वर्तमान वित्त वर्ष में भारत की सुदृढ़ जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि में योगदान देने वाले कारकों का विश्लेषण कीजिए और इस गति को बनाए रखने में द्वितीयक एवं तृतीयक क्षेत्रों की भूमिका का परीक्षण कीजिए।
सेक्टोरल इम्बैलेंस: सर्विस और मैन्युफैक्चरिंग में तेज़ ग्रोथ बनाम ग्रामीण खपत में सुस्ती
कंजम्पशन डायनेमिक्स: एग्रीगेट डिमांड पर बढ़ते प्राइवेट फाइनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर का प्रभाव
डेटा की विश्वसनीयता: सटीक और समय पर मैक्रोइकोनॉमिक इंडिकेटर्स सुनिश्चित करने में NSO की भूमिका
मुख्य शब्द: रियल जीडीपी · नाममात्र जीडीपी · स्थिर कीमतें · निजी अंतिम उपभोग व्यय · क्षेत्रीय विकास
चर्चा में क्यों: तमिलनाडु के उद्योग मंत्री टी.आर.बी. राजा ने घोषणा की है कि नंदांबक्कम में फिनटेक सिटी (FinTech City) का पहला चरण जनवरी 2026 में शुरू होने वाला है।
यह परियोजना एक्सिस कमर्शियल रियल एस्टेट फंड (Axis CRE Fund) और टिशमैन स्पाईयर (Tishman Speyer) के बीच एक सहयोग है। इसमें BFSI सेक्टर के लिए डिज़ाइन किया गया 'द क्यूब' (The Cube) नामक ग्रेड-A ऑफिस स्पेस शामिल है, जिसमें तमिलनाडु सरकार बुनियादी ढांचे (Infrastructure) में ₹85 करोड़ का निवेश कर रही है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
स्थाननंदमबक्कम तमिलनाडु में FinTech City प्रोजेक्ट की लोकेशन है।
तथ्यतमिलनाडु सरकार ने FinTech City में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए ₹85 करोड़ का निवेश किया।
तथ्यFinTech सिटी के पहले चरण का उद्घाटन जनवरी 2026 में होने वाला है।
तथ्यइस प्रोजेक्ट में BFSI सेक्टर के लिए 'द क्यूब' (The Cube) नाम का ग्रेड-A (Grade-A) ऑफिस स्पेस शामिल है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: विशेषीकृत फिनटेक (FinTech) केंद्रों का विकास किस प्रकार वैश्विक बीएफएसआई (BFSI) परिदृश्य में भारत की स्थिति को सुदृढ़ कर सकता है और क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित कर सकता है, चर्चा कीजिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर सिनर्जी: स्पेशलाइज्ड फाइनेंशियल ज़ोन्स में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों को दूर करने के लिए पब्लिक-प्राइवेट कोलैबोरेशन मॉडल
सेक्टोरल क्लस्टरिंग: इनोवेशन को बढ़ावा देने और रेगुलेटरी कंप्लायंस को आसान बनाने के लिए BFSI फर्म्स का एक जगह जमाव
मुख्य शब्द: BFSI सेक्टर · पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप · फिनटेक इंफ्रास्ट्रक्चर · औद्योगिक निवेश · क्षेत्रीय आर्थिक विकास
चर्चा में क्यों: तेलंगाना सरकार ने औपचारिक क्रेडिट तक पहुंच बढ़ाने के लिए प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन और बिजली के बिलों जैसे वैकल्पिक डेटा का उपयोग करके व्यक्तिगत क्रेडिट स्कोर तैयार करने हेतु एक इंफॉर्मेशन ब्यूरो (Information Bureau - TIB) स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है।
प्रस्तावित इंफॉर्मेशन ब्यूरो (TIB) एक सहमति-आधारित डिजिटल सिस्टम होगा। इसका उद्देश्य उन व्यक्तियों के लिए पुनर्भुगतान अनुशासन (repayment discipline) का आकलन करने हेतु सत्यापित प्रशासनिक डेटासेट को एकीकृत करना है, जिनके पास पारंपरिक क्रेडिट इतिहास की कमी है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यTIB के लिए वैकल्पिक डेटा स्रोतों में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन और बिजली के भुगतान (electricity payments) शामिल हैं।
संस्थाInformation Bureau (TIB) तेलंगाना सरकार द्वारा प्रस्तावित एक संस्था है।
तथ्यTIB सिस्टम एक सहमति-आधारित डिजिटल फ्रेमवर्क (consent-based digital framework) पर काम करेगा।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में बैंकिंग सेवाओं से वंचित आबादी के लिए क्रेडिट स्कोरिंग प्रणालियों में वैकल्पिक डेटा (alternative data) के एकीकरण से वित्तीय समावेशन को कैसे बढ़ावा दिया जा सकता है, इस पर चर्चा कीजिए।
डेटा प्राइवेसी जोखिम: व्यक्तिगत सहमति और प्रशासनिक डेटासेट की सुरक्षा के बीच संतुलन
क्रेडिट रिस्क असेसमेंट: रीपेमेंट अनुशासन के लिए यूटिलिटी पेमेंट्स की सटीकता का उपयोग
डिजिटल डिवाइड: ग्रामीण आबादी के लिए ज़रूरी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर सुनिश्चित करना
चर्चा में क्यों: कर्नाटक सरकार ने 'कर्नाटक नॉन-मेजर पोर्ट्स आयरन ओर हैंडलिंग पॉलिसी, 2025' को मंजूरी दी है। इस नीति के तहत, 2010 में लगाए गए प्रतिबंध और 2022 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, 10 नॉन-मेजर पोर्ट्स (non-major ports) से लौह अयस्क (iron ore) के निर्यात को फिर से शुरू किया जाएगा।
यह नीति कारवार, तडाडी और होन्नवर सहित 10 गैर-प्रमुख बंदरगाहों (non-major ports) को कवर करती है। इसमें ₹13 प्रति टन की आवर्ती प्रदूषण शमन, सुरक्षा और पर्यवेक्षण शुल्क (recurring pollution mitigation, safety, and supervision fee) लागू किया गया है। लंबित अदालती मामलों और लोकायुक्त की रिपोर्ट के कारण, इस नीति को पूर्वव्यापी रूप से लागू करने (retrospective implementation) पर रोक लगा दी गई है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
स्थानकर्नाटक के 10 गैर-प्रमुख (non-major) पोर्ट्स में कार्वर, तडाडी, भटकल, मालपे, ओल्ड मंगलौर, बेलेकेरी, होन्नवर, कुंडापुरा, हंगरकट्टा और पदुबिद्री शामिल हैं।
तथ्ययह पॉलिसी प्रति टन ₹13 की आवर्ती प्रदूषण शमन (pollution mitigation), सुरक्षा और पर्यवेक्षण शुल्क (supervision fee) को अनिवार्य करती है।
संस्थाकर्नाटक मैरिटाइम बोर्ड वह संस्था है जिसके तहत नॉन-मेजर पोर्ट्स (non-major ports) के माध्यम से आयरन ओर हैंडलिंग की जाएगी।
अधिनियम / विधेयक2010 का प्रतिबंध मूल रूप से कर्नाटक पोर्ट्स (लैंडिंग एंड शिपिंग फीस) एक्ट, 1961 के तहत लागू किया गया था।
मेन्स के लिए
प्रश्न: खनन क्षेत्र में औद्योगिक निर्यात वृद्धि, पर्यावरणीय सुरक्षा और विनियामक निरीक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
रेगुलेटरी ओवरसाइट: सख्त लाइसेंसिंग और वार्फ़ेज चार्ज के जरिए ऐतिहासिक अवैधताओं और ज़ब्त किए गए खनिज की कमी को दूर करना
पर्यावरणीय जवाबदेही: पर्यावरणीय लागत को शामिल करने के लिए प्रति टन प्रदूषण कम करने का शुल्क लागू करना
कानूनी-प्रशासनिक टकराव: लंबित लोकयुक्त रिपोर्टों के बीच 2010 के प्रतिबंध से 2025 की नीति तक के बदलाव का प्रबंधन
मुख्य शब्द: रेगुलेटरी फ्रेमवर्क · राजस्व सृजन · पर्यावरण सुधार · संसाधन शासन · नीति कार्यान्वयन
चर्चा में क्यों: आयकर विभाग ने उन व्यक्तियों की पहचान की है जिन्होंने अपने 2025-26 के रिटर्न में विदेशी संपत्ति का खुलासा नहीं किया था और उन्हें 31 दिसंबर, 2025 तक संशोधित रिटर्न (Revised Returns) दाखिल करने का निर्देश दिया है।
CBDT, कॉमन रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड्स (CRS) के तहत भागीदार न्यायक्षेत्रों और फॉरेन अकाउंट टैक्स कंप्लायंस एक्ट (FATCA) के तहत संयुक्त राज्य अमेरिका से प्राप्त डेटा का उपयोग करता है। पिछले वर्ष चलाए गए एक समान अभियान के परिणामस्वरूप ₹29,208 करोड़ की विदेशी संपत्ति और ₹,1089.88 करोड़ की विदेशी स्रोत से प्राप्त आय का खुलासा हुआ।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाCBDT: सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (Central Board of Direct Taxes) भारत में डायरेक्ट टैक्स कानूनों के प्रशासन के लिए वैधानिक अथॉरिटी है।
तथ्यCRS (Common Reporting Standard) का उपयोग विदेशी संपत्ति के खुलासे (disclosures) में विसंगतियों की पहचान करने के लिए किया जाता है।
तथ्यFATCA: Foreign Account Tax Compliance Act विदेशी स्रोतों से होने वाली आय की पहचान करने के लिए US द्वारा संचालित एक फ्रेमवर्क है।
तथ्यटैक्सपेयर्स को पेनल्टी से बचने के लिए 31 दिसंबर, 2025 तक रिवाइज्ड रिटर्न्स फाइल करने होंगे।
मेन्स के लिए
प्रश्न: कर निर्धारण में पारदर्शिता हेतु अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के महत्व और भारतीय निवासियों द्वारा विदेशी संपत्तियों के गैर-प्रकटीकरण को रोकने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
सूचना की असमानता: डेटा की सटीकता और समय पर रिपोर्टिंग के लिए थर्ड-पार्टी ज्यूरिसडिक्शन पर निर्भरता
रेगुलेटरी एनफोर्समेंट: टैक्सपेयर प्राइवेसी और व्यापक ऑफशोर एसेट ट्रैकिंग की ज़रूरत के बीच संतुलन
ग्लोबल कंप्लायंस: CRS और FATCA जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ घरेलू टैक्स कानूनों का तालमेल
मुख्य शब्द: टैक्स ट्रांसपेरेंसी · कॉमन रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड्स · विदेशी संपत्ति का खुलासा · राजकोषीय अनुपालन · FATCA
चर्चा में क्यों: भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने व्हाट्सएप (WhatsApp) द्वारा मेटा (Meta) के साथ डेटा साझा करने की प्रथा से संबंधित एक फैसले पर स्पष्टीकरण मांगने के लिए नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) का रुख किया है।
NCLAT ने CCI के उस आदेश को आंशिक रूप से पलट दिया है, जिसमें WhatsApp को विज्ञापन के लिए Meta के साथ डेटा साझा करने से प्रतिबंधित किया गया था। हालांकि, ट्रिब्यूनल ने ₹213 करोड़ के जुर्माने को बरकरार रखा और 2021 में हुई नीतिगत चूक (policy breach) के निष्कर्ष को भी बनाए रखा।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
तथ्यNCLAT ने पॉलिसी के उल्लंघन के लिए WhatsApp पर ₹213 करोड़ का जुर्माना बरकरार रखा।
स्थानNCLAT: नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (National Company Law Appellate Tribunal) कंपनी कानून से जुड़े मामलों के लिए अपीलीय निकाय है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: एकीकृत डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र के युग में बिग-टेक कंपनियों द्वारा डेटा गोपनीयता और प्रतिस्पर्धा-विरोधी प्रथाओं के विनियामक तंत्र में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
रेगुलेटरी अस्पष्टता: नॉन-एडवरटाइजिंग डेटा प्रोसेसिंग के लिए यूजर कंसेंट की शर्तों पर स्पष्टता की कमी
मार्केट डोमिनेंस: पैरेंट एंटिटीज द्वारा क्रॉस-प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन के जरिए डेटा-मोनोपोली के जोखिम
क्षेत्राधिकार का टकराव: कॉम्पिटिशन लॉ और डेटा प्रोटेक्शन फ्रेमवर्क के बीच ओवरलैप
मुख्य शब्द: प्रतिस्पर्धा विरोधी प्रथाएं · डेटा संप्रभुता · डिजिटल मार्केट्स · रेगुलेटरी ओवरसाइट · एकाधिकारवादी व्यवहार