जन्म-मृत्यु रिकॉर्ड में धोखाधड़ी रोकने के लिए RGI ने कड़े नियम लागू किए
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चर्चा में क्यों
भारत के रजिस्ट्रार जनरल (RGI) द्वारा 'पंजीकरण जन्म और मृत्यु अधिनियम, 2023' के अंतर्गत डिजिटल रूप से तैयार किए गए जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड में धोखाधड़ी वाली प्रविष्टियों को रोकने के लिए कड़े सत्यापन प्रोटोकॉल लागू किए जा रहे हैं।
पृष्ठभूमि
RGI ने जून 2024 में साझा उपयोगकर्ता आईडी और पासवर्ड के कारण समझौता किए गए क्रेडेंशियल्स की पहचान की। 6 जुलाई, 2024 को, RGI ने सभी डिजिटाइज़्ड रिकॉर्ड के लिए मूल रजिस्टरों के विरुद्ध सत्यापन और जिला रजिस्ट्रार की स्वीकृति को अनिवार्य कर दिया। गृह मंत्रालय 2024 के मानसून सत्र में एक संशोधन विधेयक पेश करने की योजना बना रहा है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थाRegistrar General of India (RGI): भारत में जन्म और मृत्यु के पंजीकरण के लिए प्राथमिक रूप से जिम्मेदार प्राधिकरण।
- अधिनियम / विधेयकजन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 2023: Central Civil Registration System पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण को अनिवार्य बनाता है।
- तथ्यसुरक्षा उपायों में अनिवार्य e-signatures, जिला रजिस्ट्रार की स्वीकृति और विरासत रिकॉर्ड (legacy records) का सुरक्षित संरक्षण शामिल है।
- संस्थागृह मंत्रालय: जन्म और मृत्यु पंजीकरण के प्रशासन के लिए जिम्मेदार नोडल मंत्रालय।
मेन्स के लिए
Q. नागरिक पंजीकरण अभिलेखों का डिजिटलीकरण प्रशासनिक पारदर्शिता को किस प्रकार सुदृढ़ करता है और साथ ही डेटा की अखंडता एवं सुरक्षा के लिए किन जोखिमों को उत्पन्न करता है? चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
- Identity theft risk: Vulnerability of shared credentials and OTPs in decentralized state-level registration units.
- Data integrity gap: Difficulty in authenticating digitized records against physical legacy registers without robust audit trails.
- Regulatory friction: Balancing the ease of online registration with the necessity of multi-layered verification protocols.
कीवर्ड: Data Integrity · Digital Governance · Identity Fraud · Civil Registration · Administrative Oversight
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।