सुप्रीम कोर्ट ने 'सेकंड-क्लास पैसेंजर' शब्द पर जताई नाराजगी, दिए 8 लाख रुपये
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चर्चा में क्यों
उच्चतम न्यायालय ने आधिकारिक दस्तावेजों में 'द्वितीय श्रेणी के यात्री' (second-class passenger) शब्द के प्रयोग की आलोचना की है और इसे असंवैधानिक तथा अपमानजनक बताया है, क्योंकि इसका ऐतिहासिक रूप से वर्ग विभाजन से संबंध रहा है।
पृष्ठभूमि
उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 2015 की रेल दुर्घटना में मृत चंद्रकांत ठक्कर की पत्नी को ₹8,00,000 का मुआवजा प्रदान किया। न्यायालय ने यह टिप्पणी की कि रेलवे के दस्तावेजीकरण में प्रयुक्त शब्दावली प्रतिगामी ऐतिहासिक वर्ग विभाजन को प्रतिबिंबित करती है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थाभारत का सर्वोच्च न्यायालय: संविधान के तहत सर्वोच्च न्यायिक निकाय और अपील की अंतिम अदालत।
- तथ्य2015 के ट्रेन दुर्घटना मामले में पीड़ित के परिवार को ₹8,00,000 का मुआवजा प्रदान किया गया।
- पदउच्चतम न्यायालय के पास असंवैधानिक शब्दावली या प्रथाओं को रद्द करने की न्यायिक समीक्षा (judicial review) की शक्ति है।
मेन्स के लिए
Q. प्रतिगामी प्रशासनिक शब्दावली के विरुद्ध नागरिकों की गरिमा की रक्षा करने और सार्वजनिक बुनियादी ढांचा दुर्घटनाओं के पीड़ितों के लिए सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने में न्यायपालिका की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- Constitutional morality: Ensuring administrative language aligns with the principles of equality and dignity under Article 14.
- Liability framework: Balancing the responsibility of public transport providers versus passenger safety protocols in railway accidents.
- Historical baggage: Addressing the persistence of colonial-era class distinctions in modern Indian administrative nomenclature.
कीवर्ड: Constitutional Morality · Judicial Review · Social Justice · Administrative Reform · Equality
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।