उम्र की पाबंदी खत्म, लखनऊ दंपति को सरोगेसी के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट से राहत
GS2राजव्यवस्था · शासन · अंतर्राष्ट्रीय संबंध· कमजोर वर्ग (SC/ST, अल्पसंख्यक, दिव्यांग, बुजुर्ग, बच्चे)· प्रीलिम्स + मेन्स·
चर्चा में क्यों
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक 50 वर्षीय महिला को संरक्षित भ्रूणों (preserved embryos) का उपयोग करके सरोगेसी (surrogacy) की प्रक्रिया अपनाने की अनुमति प्रदान की है। न्यायालय ने निर्णय दिया कि सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम में निर्धारित कठोर आयु सीमा प्रजनन स्वायत्तता (reproductive autonomy) का उल्लंघन कर सकती है।
पृष्ठभूमि
इस दंपति ने वर्ष 2015 में तीन भ्रूण संरक्षित किए थे, किंतु 2022 में सरोगेसी (रेगुलेशन) एक्ट के कार्यान्वयन के कारण उन्हें बाधाओं का सामना करना पड़ा। लखनऊ में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की पीठ ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को तीन सप्ताह के भीतर आवेदन पर सुनवाई करने का निर्देश दिया।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- अधिनियम / विधेयकSurrogacy (Regulation) Act, 2021: भारत में व्यावसायिक और परोपकारी सरोगेसी (surrogacy) को विनियमित करता है।
- तथ्यइस जोड़े ने 2015 में तीन भ्रूणों (embryos) को संरक्षित किया था।
- स्थानलखनऊ: वह स्थान जहाँ इलाहाबाद उच्च न्यायालय की वह पीठ स्थित है जिसने यह निर्णय दिया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम के माध्यम पर प्रजनन अधिकारों का राज्य द्वारा किया गया विनियमन, प्रजनन स्वायत्तता के मौलिक अधिकार के साथ किस सीमा तक विरोधाभास उत्पन्न करता है? का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
सामाजिक न्याय पर और नोट्स
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