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भाग I · स्था. 11.2025 
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सत्याधीश
भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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रिपोर्ट: हाई स्टार्टअप कॉस्ट और जटिल नियमों से भारत के MSME ग्रोथ पर असर

GS3अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा· Industry, investment & MSMEs· Prelims + Mains·

चर्चा में क्यों

NITI Aayog और FED की एक रिपोर्ट यह रेखांकित करती है कि उच्च स्टार्टअप लागत और जटिल नियामक अनुपालन, चीन और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धियों की तुलना में MSME के विकास में बाधा उत्पन्न करते हैं।

पृष्ठभूमि

नीति आयोग और फाउंडेशन फॉर इकोनॉमिक डेवलपमेंट (FED) की रिपोर्ट नियामक घर्षण (regulatory friction) को MSME के औपचारिकीकरण में एक प्राथमिक बाधा के रूप में पहचानती है। यह विशेष रूप से रेखांकित करती है कि भारत का अनुपालन भार (compliance burden) वियतनाम और चीन की तुलना में अधिक है, जो लघु निर्माताओं की विस्तार करने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता को प्रभावित करता है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • संस्थाNITI Aayog: भारत सरकार का प्रमुख नीतिगत थिंक टैंक।
  • तथ्यMSMEs भारत के विनिर्माण उत्पादन और रोजगार में महत्वपूर्ण योगदानकर्ता हैं।
  • संस्थाFoundation for Economic Development (FED): एक गैर-लाभकारी संगठन जो आर्थिक अनुसंधान और नीति विश्लेषण में संलग्न है।

मेन्स के लिए

Q. नियामक बाधाओं और उच्च प्रवेश लागतों के कारण सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के औपचारिकीकरण में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए और उनकी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने हेतु आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए।

उत्तर के आयाम

  • Compliance burden: High cost of multi-layered approvals creates a barrier to entry for micro-enterprises.
  • Formalization gap: Complexities in business creation processes discourage small-scale units from entering the formal economy.

कीवर्ड: Regulatory friction · MSME formalization · Ease of Doing Business · Economies of scale · Policy intervention

पूरी खबर पढ़ें →स्रोत: NDTV ↗

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।