जम्मू-कश्मीर में DDCs का कार्यकाल खत्म, लोकल संस्थाएं हुईं बंद
GS2राजव्यवस्था · शासन · अंतर्राष्ट्रीय संबंध· Panchayati Raj & urban local bodies· Prelims + Mains·
चर्चा में क्यों
जम्मू और कश्मीर में जिला विकास परिषदों (DDCs) का पांच वर्षीय कार्यकाल 24 फरवरी, 2026 को बिना नए चुनावों के समाप्त हो गया है, जिसने क्षेत्र में विकेंद्रीकृत शासन की प्रभावकारिता पर एक बहस छेड़ दी है।
पृष्ठभूमि
जम्मू और कश्मीर में प्रत्यक्ष स्थानीय लोकतंत्र को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वर्ष 2021 में DDCs की स्थापना की गई थी। इन परिषदों ने 24 फरवरी, 2026 को अपना प्रारंभिक पांच-वर्षीय कार्यकाल पूर्ण कर लिया, जिसके परिणामस्वरूप वर्तमान में यह संस्थागत निष्क्रियता की अवधि में है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थाDistrict Development Councils (DDCs) जम्मू और कश्मीर में जमीनी स्तर पर शासन की सुविधा के लिए डिज़ाइन की गई स्थानीय निकाय हैं।
- तथ्यजम्मू और कश्मीर में DDCs का प्रारंभिक कार्यकाल 2021 में स्थापित किया गया था और यह 24 फरवरी, 2026 को समाप्त होगा।
मेन्स के लिए
Q. जम्मू और कश्मीर जैसे संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र और विकेंद्रीकरण को बढ़ावा देने में जिला विकास परिषदों की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- Institutional vacuum: Lack of periodic elections leads to administrative paralysis and stalled local development projects.
- Democratic decentralization: Balancing the need for local autonomy with the security requirements of a sensitive region.
- Governance accountability: The risk of local bodies becoming symbolic rather than functional without regular electoral mandates.
कीवर्ड: Grassroots democracy · Democratic decentralization · Institutional paralysis · Local governance · Administrative efficacy
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।