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भाग I · स्था. 11.2025 
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मध्य प्रदेश में UCC बिल को मंजूरी, आदिवासी समुदायों को रखा बाहर

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चर्चा में क्यों

मध्य प्रदेश कैबिनेट ने 19 जुलाई, 2026 को एक समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक के प्रारूप को मंजूरी दी, जिसका उद्देश्य व्यक्तिगत कानूनों का मानकीकरण करना है, जबकि अनुसूचित जनजातियों को इससे छूट दी गई है।

पृष्ठभूमि

इस विधेयक का प्रारूप सेवानिवृत्त उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई के नेतृत्व वाली एक समिति द्वारा तैयार किया गया था। यह विवाह पंजीकरण को अनिवार्य बनाता है, बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाता है, और लिव-इन संबंधों के लिए शपथ-पत्र की आवश्यकता निर्धारित करता है, जिसमें विशेष रूप से अनुसूचित जनजातियों और संविधान के भाग XXI के अंतर्गत संरक्षित समुदायों को बाहर रखा गया है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • संविधानभारतीय संविधान का भाग XXI अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन का प्रावधान करता है।
  • अधिनियम / विधेयकमध्य प्रदेश UCC मसौदा विधेयक विवाह पंजीकरण को अनिवार्य बनाता है और बहुविवाह को प्रतिबंधित करता है।
  • तथ्यइस विधेयक को 19 जुलाई, 2026 को मध्य प्रदेश कैबिनेट द्वारा अनुमोदित किया गया था।

मेन्स के लिए

प्रश्न: अनुसूचित जनजातियों को छूट प्रदान करते हुए समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) के कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाली संवैधानिक चुनौतियों और सामाजिक निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗यह भी: GS1 · सामाजिक विविधता, जाति एवं जनजातियांयह भी: GS2 · विधेयक, अधिनियम एवं अध्यादेश

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।