NASA ने 2031 में अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) को प्रशांत महासागर में नियंत्रित पुन: प्रवेश (re-entry) कराने की योजना की घोषणा की है
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चर्चा में क्यों
NASA ने 2031 में अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) को प्रशांत महासागर में नियंत्रित पुन: प्रवेश (re-entry) कराने की योजना की घोषणा की है, जिससे गहरे समुद्र में मलबे से संबंधित पर्यावरणीय चिंताएं उत्पन्न हो गई हैं।
पृष्ठभूमि
ISS के मिशन के 2030 के आसपास संपन्न होने का लक्ष्य निर्धारित है, जिसके लिए 2031 में नियंत्रित पुन: प्रवेश (re-entry) की योजना बनाई गई है। NASA का उद्देश्य मानव जीवन के लिए जोखिमों को न्यूनतम करने हेतु अंतरिक्ष स्टेशन के मलबे को दक्षिण प्रशांत महासागर के एक सुदूर क्षेत्र, 'पॉइंट नेमो' की ओर निर्देशित करना है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- स्थानपॉइंट नेमो (Point Nemo): दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित एक क्षेत्र जिसे उपग्रहों के निपटान के लिए 'स्पेसक्राफ्ट सिमेट्री' (spacecraft cemetery) के रूप में जाना जाता है।
- विज्ञान-तकनीकISS: International Space Station, निम्न पृथ्वी कक्षा (low Earth orbit) में स्थित एक मॉड्यूलर अंतरिक्ष स्टेशन है।
- तथ्यNASA ने 2031 में ISS के प्रशांत महासागर में नियंत्रित पुन: प्रवेश (re-entry) की योजना बनाई है।
मेन्स के लिए
Q. अंतरिक्ष मलबे और अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अंतरिक्ष बुनियादी ढांचे के निपटान के पर्यावरणीय और पारिस्थितिक निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- Ecological risk: Potential toxicity and physical damage to deep-sea biodiversity from non-biodegradable space debris.
- Atmospheric impact: Chemical composition of burning space infrastructure and its effect on the upper atmosphere during re-entry.
कीवर्ड: Space Debris · Deep-sea Ecosystems · Controlled Re-entry · Space Sustainability · Point Nemo
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।