BPCL द्वारा कानूनी चुनौती के दौरान राष्ट्रीय एथेनॉल सम्मिश्रण नीति में व्यवधान को रोकनेके लिए
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चर्चा में क्यों
BPCL द्वारा कानूनी चुनौती के दौरान राष्ट्रीय एथेनॉल सम्मिश्रण नीति में व्यवधान को रोकनेके लिए, उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 2025-26 हेतु एथेनॉल आपूर्ति आवंटन पर यथास्थिति (status quo) बनाए रखने का निर्देश दिया है।
पृष्ठभूमि
उच्चतम न्यायालय ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के एक आदेश के विरुद्ध दायर अपील के संबंध में केंद्र सरकार और 23 डिस्टिलरियों को नोटिस जारी किए हैं। न्यायालय का यह हस्तक्षेप न्यायिक कार्यवाही के दौरान इथेनॉल सम्मिश्रण लक्ष्यों की निरंतरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- तथ्यइथेनॉल सम्मिश्रण लक्ष्य: यथास्थिति विशेष रूप से 2025-26 की आपूर्ति आवंटन अवधि पर लागू होती है।
- संस्थाBPCL: Bharat Petroleum Corporation Limited, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीन एक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है।
- विज्ञान-तकनीकइथेनॉल: गन्ने और टूटे चावल जैसी फसलों से प्राप्त शर्करा के किण्वन (fermentation) द्वारा उत्पादित एक अल्कोहल, जिसका उपयोग जैव ईंधन (biofuel) के रूप में किया जाता है।
मेन्स के लिए
Q. भारत के इथेनॉल सम्मिश्रण लक्ष्यों की प्राप्ति में आने वाली चुनौतियों का परीक्षण कीजिए और जैव ईंधन क्षेत्र में नीतिगत निरंतरता सुनिश्चित करने में न्यायिक हस्तक्षेप की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- Policy consistency: Risk of judicial orders creating regional supply imbalances in the national ethanol blending mandate.
- Regulatory friction: Balancing state-level judicial mandates with central government energy security and decarbonization targets.
कीवर्ड: Biofuel policy · Energy security · Judicial review · Public-private friction · Decarbonization
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर और नोट्स
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।