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भाग I · स्था. 11.2025 
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बॉम्बे हाई कोर्ट ने मेलघाट क्षेत्र में पीने योग्य जल उपलब्ध कराने में विफल रहने पर महाराष्ट्र सरकार की आलोचना की और यह स्पष्ट किया कि स्वच्छ पेयजल तक पहुंच अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है

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चर्चा में क्यों

बॉम्बे हाई कोर्ट ने मेलघाट क्षेत्र में पीने योग्य जल उपलब्ध कराने में विफल रहने पर महाराष्ट्र सरकार की आलोचना की और यह स्पष्ट किया कि स्वच्छ पेयजल तक पहुंच अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है।

पृष्ठभूमि

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी की कि स्वतंत्रता के 75 वर्ष बाद भी नागरिकों को बुनियादी जल पहुंच के लिए न्यायालयों का दरवाजा खटखटाने के लिए विवश होना पड़ रहा है। न्यायालय ने विशेष रूप से मेलघाट क्षेत्र में जल की कमी को रेखांकित किया और सार्वभौमिक पेयजल पहुंच हेतु एक विस्तृत कार्यान्वयन योजना की मांग की।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • संविधानभारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी देता है, जिसमें स्वच्छ पेयजल का अधिकार भी शामिल है।
  • स्थानमेलघाट क्षेत्र महाराष्ट्र के अमरावती जिले में एक आदिवासी बहुल क्षेत्र है।

मेन्स के लिए

प्रश्न: किस सीमा तक अनुच्छेद 21 की न्यायपालिका द्वारा की गई व्याख्या राज्य को पीने योग्य पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं तक सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए बाध्य करती है? चर्चा कीजिए।

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: एनडीटीवी ↗यह भी: GS2 · संविधान, संशोधन एवं मूल ढांचा

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।