केंद्र ने दिल्ली हाई कोर्ट को सूचित किया है कि औद्योगिक संबंध कोड (Industrial Relations Code)
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चर्चा में क्यों
केंद्र ने दिल्ली हाई कोर्ट को सूचित किया है कि औद्योगिक संबंध कोड (Industrial Relations Code), 2020 के तहत नए ट्रिब्यूनल बनने तक मौजूदा लेबर कोर्ट और इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल लंबित मामलों पर सुनवाई जारी रखेंगे।
पृष्ठभूमि
दिल्ली हाई कोर्ट एक ऐसी याचिका पर सुनवाई कर रहा है जिसमें इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड, 2020 (Industrial Relations Code, 2020) से संबंधित 21 नवंबर, 2025 के एक नोटिफिकेशन को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि लंबित मामलों को अस्तित्वहीन ट्रिब्यूनल (tribunals) में स्थानांतरित करना संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थालेबर कोर्ट (Labor Courts) और इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल्स (Industrial Tribunals): औद्योगिक विवादों और लेबर लॉ के उल्लंघन के निपटारे के लिए जिम्मेदार निकाय।
- तथ्यदिल्ली हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 जनवरी की तारीख तय की।
मेन्स के लिए
प्रश्न: विभिन्न श्रम कानून व्यवस्थाओं के बीच संक्रमण के संवैधानिक और प्रक्रियात्मक निहितार्थों तथा ऐसी संक्रमण अवधि के दौरान न्यायिक निरंतरता सुनिश्चित करने की आवश्यकता का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- न्यायिक निरंतरता: नए ट्रिब्यूनल स्ट्रक्चर में बदलाव के दौरान प्रक्रियात्मक देरी और 'लीगल वैक्यूम' का जोखिम
- संवैधानिक वैधता: यह सुनिश्चित करना कि लंबित मुकदमों का ट्रांसफर तेज़ और निष्पक्ष ट्रायल के अधिकार का उल्लंघन न करे
मुख्य शब्द: न्यायिक बदलाव · इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड · न्यायनिर्णयन · संवैधानिक वैधता · लेबर लॉ रिफॉर्म
शासन पर और नोट्स
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