सुप्रीम कोर्ट ने अत्यधिक प्रशासनिक नियमों के खिलाफ फैसला सुनाते हुए झारखंड सरकार के 2009 के एक निर्देश को रद्द कर दिया है
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चर्चा में क्यों
सुप्रीम कोर्ट ने अत्यधिक प्रशासनिक नियमों के खिलाफ फैसला सुनाते हुए झारखंड सरकार के 2009 के एक निर्देश को रद्द कर दिया है। यह निर्देश उन सहकारी समितियों (Cooperative Societies) के लिए अनावश्यक बाधाएं पैदा कर रहा था, जो स्टैम्प-ड्यूटी में छूट चाहती थीं।
पृष्ठभूमि
सुप्रीम कोर्ट ने सरकारों को प्रशासन में सरलता और स्पष्ट प्रक्रियाओं को प्राथमिकता देने की सलाह दी है। कोर्ट ने विशेष रूप से सहकारी समितियों के लिए स्टैम्प-ड्यूटी में छूट के संबंध में झारखंड सरकार के 2009 के एक निर्देश को रद्द कर दिया।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थासुप्रीम कोर्ट के पास उन राज्य सरकार के निर्देशों को रद्द करने की शक्ति है जो अनावश्यक प्रशासनिक बोझ डालते हैं।
- तथ्यसंबंधित झारखंड सरकार का निर्देश 2009 में जारी किया गया था।
- स्थानझारखंड वह राज्य है जहाँ को-ऑपरेटिव सोसाइटीज (Cooperative Societies) पर विशिष्ट निर्देश जारी किए गए थे।
मेन्स के लिए
प्रश्न: एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में अत्यधिक प्रशासनिक नियमन किस प्रकार व्यापार करने की सुगमता और नागरिकों के अधिकारों में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं, इस पर चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
- प्रशासनिक बोझ: ज़रूरत से ज़्यादा रेगुलेशन से प्रक्रियात्मक बाधाएं पैदा होती हैं जो सहकारी विकास और ईज़ ऑफ लिविंग को रोकती हैं
- न्यायिक निगरानी: नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए राज्य के 'अनावश्यक' कार्यों पर रोक लगाने में न्यायपालिका की भूमिका
मुख्य शब्द: ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस · प्रशासनिक सरलीकरण · न्यायिक समीक्षा · रेगुलेटरी बोझ · कोऑपरेटिव सोसाइटीज़
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।