सुप्रीम कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को उन विसंगतियों की जांच करने का निर्देश दिया है
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चर्चा में क्यों
सुप्रीम कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को उन विसंगतियों की जांच करने का निर्देश दिया है, जहाँ उत्तर प्रदेश में ग्रामीण मतदाताओं की संख्या विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) रिपोर्ट में दिए गए कुल मतदाताओं की संख्या से अधिक पाई गई है।
पृष्ठभूमि
सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया क्योंकि बाराबंकी के एक सांसद ने इस बात पर ध्यान आकर्षित किया था कि उत्तर प्रदेश के SIR डेटा से पता चलता है कि ग्रामीण मतदाताओं की संख्या कुल मतदाता संख्या से अधिक है। कोर्ट ने CPI(M) के अनुरोध के बाद ECI को केरल की ड्राफ्ट मतदाता सूची से बाहर किए गए नामों की सूची प्रकाशित करने का भी आदेश दिया।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- तथ्यविशेष गहन पुनरीक्षण (SIR): मतदाता सूची को अपडेट और सत्यापित करने के लिए ECI और राज्य चुनाव आयोगों द्वारा संचालित एक प्रक्रिया।
- स्थानकेरल: वह राज्य जहाँ ECI को ड्राफ्ट मतदाता सूची (draft electoral roll) से बाहर किए गए नामों को प्रकाशित करने का आदेश दिया गया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने में मतदाता सूची की अखंडता के महत्व पर चर्चा कीजिए। चुनाव आयोग विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित कर सकता है? विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- डेटा इंटीग्रिटी: ग्रामीण-शहरी मतदाता वर्गीकरण में चुनावी धोखाधड़ी या प्रशासनिक त्रुटियों का जोखिम
- पारदर्शिता में कमी: बाहर रखे गए नामों तक सार्वजनिक पहुंच न होना सूचित होने के अधिकार को प्रभावित करता है
- संस्थागत जवाबदेही: विशेष गहन पुनरीक्षण डेटा के लिए स्वतंत्र ऑडिट मैकेनिज्म की ज़रूरत
मुख्य शब्द: चुनावी अखंडता · पारदर्शिता · विशेष गहन पुनरीक्षण में तेलंगाना की मतदाता सूची से लगभग 70 लाख नाम हटे · संवैधानिक जवाबदेही · डेटा में विसंगति
राजव्यवस्था एवं संविधान पर और नोट्स
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।