सुप्रीम कोर्ट पश्चिम बंगाल में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा किए गए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन्स (SIR) 2025 के संचालन को चुनौती देने वाली तृणमूल कांग्रेस के नेताओं की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है
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चर्चा में क्यों
सुप्रीम कोर्ट पश्चिम बंगाल में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा किए गए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन्स (SIR) 2025 के संचालन को चुनौती देने वाली तृणमूल कांग्रेस के नेताओं की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है।
पृष्ठभूमि
निर्वाचन आयोग (ECI) ने तर्क दिया कि SIR 2025 अभ्यास संविधान के अनुच्छेद 324 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21(3) के तहत टिकाऊ है। कोर्ट ने पहले यह फैसला दिया था कि SIR प्रक्रिया के दौरान निर्वाचन आयोग द्वारा किए गए विचलन (deviations) प्राकृतिक न्याय और प्रक्रियात्मक निष्पक्षता के सिद्धांतों के अनुरूप होने चाहिए।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- अधिनियम / विधेयकRepresentation of the People Act, 1950: सेक्शन 21(3) मतदाता सूची (electoral rolls) के संशोधन से संबंधित है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची के संशोधन की प्रक्रिया में प्रक्रियात्मक निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के महत्व का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- संवैधानिक जनादेश: आर्टिकल 324 के तहत ECI की पूर्ण शक्तियों और निष्पक्ष प्रशासनिक कार्रवाई के अधिकार के बीच संतुलन
- प्रक्रियात्मक ईमानदारी: मतदाताओं को मनमाने ढंग से बाहर होने से बचाने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण में पारदर्शिता सुनिश्चित करना
मुख्य शब्द: प्राकृतिक न्याय · प्रक्रियात्मक निष्पक्षता · मतदाता सूची पुनरीक्षण · अनुच्छेद 324 · जनप्रतिनिधित्व अधिनियम
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