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भाग I · स्था. 11.2025 
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सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक कार्यवाही में तेजी लाने और शीर्ष अदालत पर अपीलों के बोझ को कम करने के लिए अतिरिक्त विशेष ट्रायल कोर्ट (Special Trial Courts) स्थापित करने का समर्थन व्यक्त किया है

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चर्चा में क्यों

सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक कार्यवाही में तेजी लाने और शीर्ष अदालत पर अपीलों के बोझ को कम करने के लिए अतिरिक्त विशेष ट्रायल कोर्ट (Special Trial Courts) स्थापित करने का समर्थन व्यक्त किया है।

पृष्ठभूमि

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार को दो सप्ताह के भीतर विशेष अदालत स्थापित करने की प्रगति पर अपडेट देने का निर्देश दिया है। यह कदम 2021 के एक मामले के बाद उठाया गया है, जिसमें ISIS से जुड़े संबंधों के कारण ऑनलाइन कट्टरपंथ (Online Radicalization) के आधार पर आरोपी की जमानत खारिज कर दी गई थी।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • संस्थासुप्रीम कोर्ट: यह सर्वोच्च न्यायालय है जिसने केंद्र और दिल्ली सरकार को स्पेशल ट्रायल कोर्ट (Special Trial Courts) स्थापित करने का निर्देश दिया।
  • तथ्यकोर्ट ने दो सप्ताह के भीतर स्पेशल कोर्ट सेटअप पर प्रोग्रेस अपडेट देने का अनुरोध किया।

मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में न्यायिक लंबित मामलों की प्रणालीगत समस्याओं के समाधान और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने में विशिष्ट परीक्षण न्यायालयों (specialized trial courts) की स्थापना किस प्रकार सहायक हो सकती है, इसका विश्लेषण कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • न्यायिक अड़चन: सुप्रीम कोर्ट के एजेंडे में आपराधिक अपीलों की भारी संख्या से रुकावट
  • संस्थागत समन्वय: केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बुनियादी ढांचे और स्टाफ के तालमेल की ज़रूरत
  • सुरक्षा-न्यायपालिका गठजोड़: तेज़ ट्रायल प्रक्रियाओं और आतंकवाद विरोधी मुकदमों की जटिलताओं के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: न्यायिक लंबित मामले · स्पेशलाइज्ड कोर्ट · त्वरित ट्रायल · सुप्रीम कोर्ट पर बोझ · आतंकवाद विरोधी

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।