SC और ST सीटों के रोटेशन की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
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चर्चा में क्यों
सुप्रीम कोर्ट ने जगदीश सिंह द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें SC और ST आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों (constituencies) के अनिवार्य रोटेशन की मांग की गई थी। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि ऐसे मामले विधायी क्षेत्र (legislative domain) के अंतर्गत आते हैं।
पृष्ठभूमि
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली एक बेंच ने परिसीमन अधिनियम (Delimitation Act), 2002 के खिलाफ दी गई चुनौती पर सुनवाई की। कोर्ट ने यह माना कि अनिवार्य रोटेशन (mandatory rotation) की मांग को न्यायपालिका के बजाय संसद द्वारा संबोधित किया जाना चाहिए।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- तथ्यकोर्ट ने फैसला दिया कि आरक्षित सीटों का रोटेशन (rotation) एक विधायी मामला है, न कि न्यायिक।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के संबंध में न्यायिक पुनरावलोकन और विधायी स्वायत्तता के बीच संवैधानिक संतुलन का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- विधायी सर्वोच्चता: जटिल जनसांख्यिकीय और राजनीतिक पहलुओं से जुड़े नीतिगत फैसले के रूप में परिसीमन
- न्यायिक संयम: सीट आरक्षण और रोटेशन से जुड़ी नीति-निर्माण में कोर्ट की भूमिका की सीमा
मुख्य शब्द: न्यायिक समीक्षा · विधायी क्षेत्र · परिसीमन · संवैधानिकवाद · आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।