रिजर्व्ड सीटों पर रोटेशन ज़रूरी नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा वोटर विचारधारा देखते हैं
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चर्चा में क्यों
सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षित सीटों पर रोटेशन (rotation) को अनिवार्य करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि मतदाताओं की वैचारिक पसंद न्यायिक हस्तक्षेप से परे है और इसे विधायिका द्वारा संबोधित किया जाना चाहिए।
पृष्ठभूमि
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने जगदीश सिंह द्वारा दायर एक याचिका को खारिज कर दिया। इस याचिका में 191-कदीपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के आरक्षण को चुनौती दी गई थी।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- पदसूर्यकांत: नवंबर 2026 तक भारत के मुख्य न्यायाधीश।
- स्थान191-कदीपुर: विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र (Assembly Constituency) चुनौती के दायरे में।
- तथ्यकोर्ट ने फैसला दिया कि मतदाता जाति के बजाय विचारधारा के आधार पर उम्मीदवारों को चुनते हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: निर्वाचन में आरक्षण के मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमाओं और जाति-आधारित राजनीतिक गतिशीलता को संबोधित करने में विधायिका की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- जुडिशियल रिज़्रेस्ट्रेन: शक्तियों के पृथक्करण का सिद्धांत जो न्यायपालिका को चुनावी सीटों का वितरण तय करने से रोकता है
- विधायी प्राथमिकता: आरक्षण नीतियां बनाने और उनमें संशोधन करने की जिम्मेदारी संसद/विधानसभाओं की
- लोकतांत्रिक एजेंसी: जनसांख्यिकीय जनादेश के बजाय वैचारिक पसंद के आधार पर मतदाता के अधिकार को मान्यता
मुख्य शब्द: न्यायिक संयम · शक्तियों का पृथक्करण · चुनावी गतिशीलता · विधायी क्षमता · लोकतांत्रिक चुनाव
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।