जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सुप्रीम कोर्ट में नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत अपनी हिरासत को चुनौती दी है
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चर्चा में क्यों
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सुप्रीम कोर्ट में नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत अपनी हिरासत को चुनौती दी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि यह आदेश 'कॉपी-पेस्ट' किया गया है और इसमें स्वतंत्र रूप से विचार करने की कमी है।
पृष्ठभूमि
सोनम वांगचुक को 26 सितंबर, 2025 को लद्दाख को राज्य का दर्जा दिलाने के लिए किए गए विरोध प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया। उनके वकील कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि यह हिरासत संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है और नेशनल सिक्योरिटी एक्ट, 1980 (National Security Act, 1980) के तहत अस्पष्ट आधारों पर आधारित है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- अधिनियम / विधेयकNational Security Act (NSA), 1980: सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यक्तियों को निवारक निरोध (preventive detention) में रखने का प्रावधान प्रदान करता है।
- तथ्यNSA की धारा 5A: यह डिटेंशन (detention) के आधारों के 'सेवेरेबिलिटी' (severability) की अनुमति देती है।
- पदसोनम वांगचुक: क्लाइमेट एक्टिविस्ट और अपनी हिरासत के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता।
मेन्स के लिए
प्रश्न: राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत निवारक निरोध की राज्य की शक्तियों और स्वतंत्रता एवं प्रतिनिधित्व के मौलिक अधिकारों के संरक्षण के बीच संतुलन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- कार्यपालिका की अतिरेक: व्यक्तिगत परिस्थितियों की स्वतंत्र जांच को दरकिनार कर 'कॉपी-पेस्ट' प्रशासनिक आदेशों का जोखिम
- कानूनी अस्पष्टता: सेक्शन 5A के तहत 'सेवेरेबिलिटी' क्लॉज से हर जगह और मनमाने ढंग से हिरासत में लेने की संभावना
- संवैधानिक टकराव: सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और कार्यकर्ताओं के लिए प्रभावी कानूनी प्रतिनिधित्व के अधिकार के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: निवारक निरोध · कानून का शासन · प्रशासनिक मनमानी · संवैधानिक सुरक्षा उपाय · प्रतिनिधित्व का अधिकार
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।