सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि त्योहारों के दौरान हवाई किराए में होने वाले अनिश्चित उतार-चढ़ाव 'शोषणकारी' हैं और निजी एयरलाइंस द्वारा की जा रही अनियमित कीमतों को नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप करने की मंशा व्यक्त की
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चर्चा में क्यों
सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि त्योहारों के दौरान हवाई किराए में होने वाले अनिश्चित उतार-चढ़ाव 'शोषणकारी' हैं और निजी एयरलाइंस द्वारा की जा रही अनियमित कीमतों को नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप करने की मंशा व्यक्त की।
पृष्ठभूमि
सुप्रीम कोर्ट ने अनियमित कीमतों और अतिरिक्त शुल्कों (ancillary charges) पर अंकुश लगाने के लिए बाध्यकारी रेगुलेटरी गाइडलाइन्स की मांग करने वाली एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई की। कोर्ट ने विशेष रूप से त्योहारों के सीजन के दौरान दिल्ली-प्रयागराज और जोधपुर रूट पर किराए में हुई अत्यधिक बढ़ोतरी को रेखांकित किया।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थासुप्रीम कोर्ट: भारत की सर्वोच्च न्यायिक संस्था जो बाध्यकारी रेगुलेटरी गाइडलाइन्स (regulatory guidelines) जारी कर सकती है।
- तथ्यकोर्ट ने विशेष रूप से दिल्ली-प्रयागराज और जोधपुर रूट्स को शोषणकारी किराया वृद्धि के उदाहरण के रूप में उद्धृत किया।
- पदजस्टिस मेहता: एयरलाइन प्राइसिंग से संबंधित PIL की सुनवाई करने वाली बेंच की अध्यक्षता की।
मेन्स के लिए
प्रश्न: बाजार के शोषणकारी उतार-चढ़ाव के विरुद्ध उपभोक्ता अधिकारों की रक्षाकरने हेतु निजी क्षेत्र की मूल्य निर्धारण प्रणालियों को विनियमित करने में न्यायपालिका की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- रेगुलेटरी वैक्यूम: घरेलू हवाई यात्रा के लिए वैधानिक प्राइस सीलिंग की कमी से मनमानी कीमतें
- उपभोक्ता संरक्षण: पीक डिमांड के दौरान प्रेडेटरी प्राइसिंग रोकने की ज़रूरत और मार्केट-ड्रिवन प्राइसिंग मॉडल के बीच संतुलन
- जुडिशियल एक्टिविज्म: कमर्शियल प्राइसिंग पॉलिसी में न्यायिक हस्तक्षेप बनाम एग्जीक्यूटिव रेगुलेटरी ओवरसाइट की सीमा
मुख्य शब्द: न्यायिक समीक्षा · उपभोक्ता संरक्षण · बाज़ार विनियमन · कीमतों में उतार-चढ़ाव · जनहित याचिका
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।