पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज बी
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चर्चा में क्यों
पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज बी. सुदर्शन रेड्डी ने स्वायत्त संस्थानों द्वारा संवैधानिक मानदंडों के क्षरण (erosion) पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने विशेष रूप से न्यायिक अतिरेक (judicial overreach) और गवर्नरों के आचरण का हवाला दिया है।
पृष्ठभूमि
न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बी. सुदर्शन रेड्डी ने सुब्रह्मण्य स्वामी मंदिर के दीप प्रज्वलन पर तमिलनाडु हाई कोर्ट के फैसले को न्यायिक अतिरेक (judicial overreach) के एक संभावित मामले के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने राज्यपालों के कदाचार के लिए उन्हें हटाने के तंत्र की कमी और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) के दौरान चुनाव आयोग की शक्तियों के संभावित दुरुपयोग पर भी ध्यान आकर्षित किया।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- पदबी. सुदर्शन रेड्डी: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज।
- तथ्यविशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision): मतदाता सूची (electoral rolls) को अपडेट करने की एक प्रक्रिया।
- संस्थाभारत निर्वाचन आयोग: मतदाता सूची (electoral roll) में संशोधन के लिए जिम्मेदार संस्था।
मेन्स के लिए
प्रश्न: स्वायत्त संस्थानों में जवाबदेही तंत्र के अभाव से उत्पन्न संवैधानिक चुनौतियों और संघीय संरचना में राज्यपाल की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- संस्थागत टकराव: कदाचार के लिए राज्यपालों को हटाने के लिए संवैधानिक तंत्र का अभाव
- जुडिशियल ओवररीच: न्यायिक सक्रियता और स्थापित संवैधानिक मानदंडों के संरक्षण के बीच टकराव
- मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण: सत्ता के दुरुपयोग के जोखिम
मुख्य शब्द: न्यायिक अतिरेक · संवैधानिकता · संघीय टकराव · संस्थागत जवाबदेही · चेक्स एंड बैलेंसेज
राजव्यवस्था एवं संविधान पर और नोट्स
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।