पलार रिवर के 20 सिंचाई टैंकों से हटाया जा रहा है खरपतवार
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चर्चा में क्यों
जल संसाधन विभाग और एक्सनोरा इंटरनेशनल (Exnora International) ने वर्षा जल भंडारण को बढ़ाने के लिए पलार नदी के किनारे स्थित 20 सिंचाई टैंकों से आक्रामक सेमाई करुवेलम (seemai karuvelam) को हटाने के लिए एक प्रोजेक्ट शुरू किया है।
पृष्ठभूमि
कलेक्टर पी.एस. लीला एलेक्स द्वारा शुरू की गई यह परियोजना 200 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है, जिसके लिए प्रति टैंक ₹6 लाख का बजट निर्धारित किया गया है। थोरापाडी सहित छह टैंकों का निर्माण पूरा हो चुका है, और खुदाई किए गए पौधों का उपयोग दक्षिणी जिलों में पेपर और वुड-ब्रिक यूनिट्स के लिए किया जाएगा।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- पर्यावरणपालार नदी के इरिगेशन टैंक (irrigation tanks) में सीमई करुवेलम (Seemai karuvelam) को एक इनवेसिव स्पीशीज (invasive species) के रूप में पहचाना गया है।
- स्थानयह प्रोजेक्ट पलार नदी के किनारे स्थित है और इसमें थोरापाडी टैंक (Thorapadi tank) शामिल है।
- तथ्ययह प्रोजेक्ट 200 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करता है और इसकी लागत ₹6 लाख प्रति इरिगेशन टैंक (irrigation tank) है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: नदी बेसिन सिंचाई प्रणालियों पर आक्रामक प्रजातियों के पारिस्थितिक और जल-वैज्ञानिक प्रभावों का विश्लेषण कीजिए तथा उनके सतत प्रबंधन हेतु रणनीतियों का सुझाव दीजिए।
उत्तर के आयाम
- हाइड्रोलॉजिकल इम्पैक्ट: इनवेसिव बायोमास के कारण सिंचाई टैंकों की पानी रोकने की क्षमता में कमी
- सर्कुलर इकोनॉमी: पेपर और वुड-ब्रिक्स के लिए इनवेसिव स्पीशीज को इंडस्ट्रियल रॉ मटेरियल के रूप में इस्तेमाल करना
मुख्य शब्द: आक्रामक प्रजातियां · जल संसाधन प्रबंधन · पारिस्थितिक बहाली · सर्कुलर इकोनॉमी · रेनवाटर हार्वेस्टिंग
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर और नोट्स
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।